गुरुवार, 5 मार्च 2026

UP के Deva Shariff Barabanki में देखिए दरगाह में खेली होली

हज़रत हाजी वारिस अली के दर पर फिर दिखा "एकता का रंग"




Mohd Rizwan 

dil india live (Barabanki). बाराबंकी के देवा स्थित हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर हिन्दू-मुस्लिम समुदाय ने एक साथ मिलकर होली खेल कर सौहार्द और एकता का रंग पेश किया। यहां केवल रंग ही नहीं होली खेलने के लिए यहां बाकायदा वारसी होली कमेटी बनाई गई है। इस्लाम धर्म में रंग खेलना सख्त मना है मगर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष शहजादे आलम वारसी इस रंग को सौहार्द और देश की एकता का रंग बता रहे हैं। कहा कि यह मजार हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल है।

वो कहते हैं कि बाराबंकी सदैव ‘जो रब है, वही राम’ का संदेश देने वाले सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की सरजमीं है। दरअसल बाराबंकी के देवा स्थित दरगाह परिसर में हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एकता की मिसाल पेश करते हुए जमकर होली खेली। उत्तर प्रदेश में जहां कई स्थानों पर होली पर पिछले साल जुमे की नमाज के मद्देनजर मस्जिदों और कुछ दरगाहों को तिरपाल से ढका गया था, वहीं देवा स्थित हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर ऐसा कुछ भी न पहले हुआ न इस बार। सूफी संत की दरगाह के परिसर में वारसी होली कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाया और होली की बधाई दी।

कमेटी के अध्यक्ष बताया कि हिन्दू और मुस्लिम हुरियारों ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए एक-दूसरे को रंग लगाया और होली की मुबारकबाद दी। इस दौरान ‘या वारिस’ की सदाएं भी फिजा में गूंजती रहीं। उन्होंने बताया कि दरगाह परिसर के पास स्थित ‘कौमी एकता गेट’ से नाचते और गाते-बजाते लोगों का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस हर साल की तरह देवा कस्बे से होता हुआ दरगाह पर पहुंचा। इस बार भी जुलूस में हर धर्म के लोग शामिल हुए।

दरअसल यह मजार इस बात की मिसाल है कि रंगों का कोई मजहब नहीं होता। यही वजह है कि हर साल की तरह ही इस बार भी यहां सभी धर्मों के लोगों ने गुलाल व गुलाब की पंखुड़ियों से एक साथ होली खेली और आपसी भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश की। सूफी संत हाजी वारिस अली शाह ने ‘जो रब है वही राम’ का संदेश दिया था। शायद इसीलिए यह स्थान हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश देता आ रहा है। इस मजार पर मुस्लिम समुदाय से कहीं ज्यादा संख्या में हिन्दू समुदाय के लोग आकर मन्नत मानते हैं और चादर चढ़ाते दिखाई देते हैं।


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