बीएफए, बीकाम व बीपीए की भी इस सत्र से होगी बसंत कन्या महाविद्यालय में पढ़ाई
Varanasi (dil India live). थीयोसोफिकल सोसाइटी परिसर में वसंत कन्या महाविद्यालय (वी.के.एम.) में शैक्षणिक सत्र 2025-26 से बीएफए समेत तीन नए स्नातक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। यह निर्णय महाविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता की परंपरा को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नए पाठ्यक्रम और सीटें देखिए
• बी.कॉम. (B.Com) — 100 नियमित सीटें एवं 15 भुगतान सीटें, कुल 115 सीट।
• बी.पी.ए. (BPA – वाद्य एवं गायन संगीत) — प्रत्येक में 20 नियमित सीटें एवं 3 भुगतान सीटें, कुल 23 सीटें।
• बी.एफ.ए. (BFA – ललित कला) — 20 नियमित सीटें एवं 3 भुगतान सीटें, कुल 23 सीटें इसमें भी है।
वीकेएम के बारे में यहां जानिए
वसंत कन्या महाविद्यालय, जिसकी स्थापना 10 जुलाई 1954 को हुई थी, शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। महाविद्यालय वर्तमान में 15 विषयों में स्नातक पाठ्यक्रम, 11 विषयों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम तथा अनेक विभागों में पीएच.डी. कार्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित कर रहा है। बी.एच.यू. की अकादमिक परिषद के निर्णयानुसार वसंत कन्या महाविद्यालय को “Privileges of Banaras Hindu University” प्राप्त हैं, जिससे यह संस्था शैक्षणिक गुणवत्ता के उच्च मानकों का पालन करती है।
इन नए पाठ्यक्रमों के प्रारंभ को छात्राओं के लिए एक नवीन अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वे वाणिज्य, संगीत एवं ललित कला के क्षेत्र में दक्षता प्राप्त कर सकेंगी। प्रवेश प्रक्रिया विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी।
प्राचीन कबीर प्रकट स्थल में मना गुरु पूर्णिमा महापर्व
Varanasi (dil India live). उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गुरु पूर्णिमा पर्व धूमधाम व आस्था के साथ मनाया गया। इस दौरान मंदिरों, मठों व विद्या मंदिरों आदि में लोगों ने पहुंच कर गुरुजनों की पूजा की, उनका माल्यार्पण किया।
प्राचीन संत कबीर प्राकट्य जन्म स्थली लहरतारा में धूमधाम से गुरु पूर्णिमा मनाया गया। इस अवसर पर कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने महंत गोविंद दास शास्त्री को अंगवस्त्रम व पुष्प अर्पित कर गुरु पूजा किया। गुरु पूर्णिमा पर्व पर शहर के कई अन्य गणमान्य लोग कबीर प्रकट स्थल पहुंचे और गुरु पर्व मनाया जिसमें लहरतारा के पार्षद संजू सरोज, कैंट मंडल के अध्यक्ष पूर्व मंडल अध्यक्ष पूर्व प्रधान, मंडल मंत्री वेद प्रकाश मिश्रा। इस गुरु पूर्णिमा के अवसर पर राजस्थान, दिल्ली एवं अन्य कई प्रदेश के भक्तगढ़ पधारे उत्तर प्रदेश के आसपास के कई जिलों से गुरु पूजा करने के लिए आश्रम पर पधारे थे।
शाम को भजन संध्या का आयोजन कबीर अकादमी मगहर संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश की संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुआ।इसमें निर्गुण गायक अमित शंकर त्रिवेदी द्वारा कबीर भजनों की प्रस्तुति की गयी । महंत गोविंद दास शास्त्री ने गुरु के महत्व को बताते हुए कहा कि, सब धरती कागज करूं, लेखन सब बन राय। सात समुंदर मसीह करूं, गुरु गुण लिखा न जाए ।।
हमारे जीवन में गुरु की कृपा इतना अधिक महत्व है कि उसको हम पूरे समुद्र के पानी को स्याही बनकर लिखें तो भी गुरु के महत्व को नहीं लिख सकते हैं। इस दौरान पौधारोपण भी किया गया।
Varanasi (dil India live)। विगत सितंबर माह में अमेरिका यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा भारत में सिक्खों को लेकर दिए गए बयान को लेकर अदालत में लंबित निगरानी याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने इस मामले में दोनो पक्षों के तरफ से बहस पूरी होने के बाद आदेश हेतु 21 जुलाई की तिथि नियत की है। कोर्ट में निगरानीकर्ता की ओर से अलख नारायण सिंह और राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव तथा यूपी सरकार की ओर से एडीजीसी विनय सिंह व मनोज गुप्ता ने की।
बता दें कि गत बीते वर्ष के सितम्बर माह में राहुल गांधी ने अमेरिका में भड़काऊ बयान देते हुए कहा था कि भारत में सिक्खों के लिए माहौल अच्छा नहीं है, क्या एक सिक्ख के रूप में पगड़ी बांधने, कड़ा पहनने और गुरुद्वारा जाने की अनुमति मिलेगी। इस बयान को तिलमापुर सारनाथ के नागेश्वर मिश्र ने देश में गृह युद्ध भड़काने की साज़िश करार देते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) की अदालत में वाद दाखिल किया था। जिसके बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत ने इस वाद को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया था। लोअर कोर्ट के आदेश के खिलाफ नागेश्वर मिश्रा ने सत्र न्यायालय में निगरानी याचिका दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से आपत्ति दाखिल कर मुकदमे को निरस्त करने की अदालत से अपील की गई है। जिसके खिलाफ निगरानीकर्ता ने अपनी प्रति आपत्ति दाखिल की है। बुधवार को दोनों पक्षों की ओर से कोर्ट में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा।
इमाम हुसैन समेत कर्बला के शहीदों व असीरो की याद में मस्जिदों में हुआ शहादतनामा, मोमीनीन ने रखा रोज़ा
मरकजी सीरत कमेटी के जलसे को खेताब करते आलिम
सरफराज अहमद/मोहम्मद रिजवान
Varanasi (dil India live)। इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत के गम में शहर कि बल खाती गलियों-मुहल्लों से लेकर सूदूर ग्रामीण इलाकों से तकरीबन 1000 से अधिक ताजियों का जुलूस इतवार को निकला। बोल मोहम्मदी या हुसैन...की सदाओं संग कर्बला में ताजिया का जुलूस पहुंचा। जहां ताज़िए के फूल दफन किए गए, तो दूसरी ओर शहर भर की शिया अंजुमनों ने जंजीर और कमा का मातम किया, जिसे देखकर तमाम लोग कांप उठे। इस दौरान सुन्नी मस्जिदों में कर्बला के शहीदों की याद में शहादतनामा पेश किया गया, और मोमीनीन ने नफल रोज़ा रखा। शाम में अज़ान की सदाओं पर मोमिनीन ने रोज़ा खोला। इस दौरान जहां घरों में कुरानख्वानी और फातिहा हुई वहीं इमामबाड़ों, अजाखानों से नौहाख्वानी और मजलिसों की सदाएं गूंजी।
इससे पहले शहर और ग्रामीण इलाकों से सुबह 11 बजे के बाद से ही नौवीं मुहर्रम पर इमाम चौक पर बैठाए गए ताजियों का जुलूस उठाया जाना शुरू हो गया जो अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुंचा। लल्लापुरा, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, दालमंडी, नई सड़क, रामापुरा, बजरडीहा आदि इलाकों के ताजिये दरगाहे फातमान ले जाकर ठंडे किए गए। उधर बड़ी बाजार, दोषीपुरा, कज्जाकपुरा, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीलीकोठी, पुरानापुल आदि इलाकों के ताजिये सदर इमामबाड़ा लाट सरैया व तेलियानाला घाट में ले जाकर ठंडे किए गए। कुछ ताजिये शिवाला घाट और भवनिया कब्रिस्तान में दफन हुए।शिवपुर, बीएचयू, लंका आदि इलाकों से भी ताजिये कर्बला पहुंचकर ठंडे हुए। दरगाहे फातमान मार्ग पर खासी भीड़ देर रात तक उमड़ी रही। ताजिये के साथ ढोल, ताशा बजाते और युवा लाठी, डंडे आदि के जरिये फन-ए-सिपाहगिरी का करतब दिखाते हुए चल रहे थे।
शामे गरीबां की मजलिस
शाम में जुलूस के बाद देर शिया समुदाय की ओर से शाम-ए-गरीबां की मजलिसें हुई। दरगाहे फातमान, दालमंडी, पितरकुंडा, काली महाल, गौरीगंज व शिवाला में मजलिस को उलेमा ने खेताब करते हुए शहीदान-ए-कर्बला का जिक्र किया। उधर नई सड़क स्थित खूजर वाली मस्जिद, रेवड़ी तालाब में मस्जिद नगीना, मस्जिद सुल्तानिया, पठानी टोला में मस्जिद जाहिद शहीद, मस्जिद कंकडीयाबीर कमच्छा, मस्जिद नूरी, गौरीगंज स्थित मस्जिद हबीबिया, मस्जिद नयी बस्ती में जिक्र शोहदा-ए-कर्बला कार्यक्रम हुआ जिसमें उलेमा ने कर्बला के वाक़यात पर रौशनी डाली। इम्तियाज अहमद ने बताया कि यहां तकरीबन चार दशक से यह आयोजन होता आ रहा है। जलसों के बाद मस्जिदों में खिचडे़ का लंगर भी चलाया गया।
नफिल रोजा रखकर पेश की अकीदत-
सुन्नी समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में घरों में फातिहा और दुआख्वानी की। नफिल रोजा रखकर अकीदत पेश की। मगरिब की नमाज के बाद रोजा खोला गया।
जुलूस में जंजीर का मातम
शिया समुदाय ने मजलिस, मातम व जुलूस निकाल कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया। जगह-जगह से अंजुमनों ने अलम, ताबूत दुलदुल का जुलूस उठाया। अजादारों ने कमा, जंजीर से मातम किया। जोहर की नमाज के बाद शहर की सभी अंजुमनों के जुलूस उठने लगे। अंजुमन हैदरी नई सड़क, अंजुमन जौव्वादिया कच्चीसराय, अंजुमन मातमी जौव्वादिया पितरकुडा, अंजुमन गुलजारे अब्बासिया व अंजुमन कासिमिया अब्बासिया ने गौरीगंज व शिवाला से अलम, दुलदुल का जुलूस उठाया। इस दौरान बड़े संग बच्चे भी सीनाजनी, खंजर, कमा से मातम कर रहे थे। खूनी मातम देख जियारतमंदों की आंखें नम हो गईं।
उधर, अर्दली बाजार इमामबाड़े से अंजुमन इमामिया के कमा व जंजीरी मातम देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान काफी भीड़ रही। अर्दली बाजार से दसवीं मोहर्रम पर अलम, ताबूत, दुलदुल का जुलूस यौम-ए अशूरा को उल्फत बीबी हाता स्थित मास्टर जहीर हुसैन के इमामबारगाह से उठा। जुलूस में अंजुमन इमामिया के नेतृत्व में लोग नौहाखानी, मातम और सीनाजनी करते हुए चल रहे थे। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ नदेसर, अंधरापुल, लोहा मंडी,पिशाचमोचन के रास्ते देर शाम फातमान पहुंच कर ठंडा हुआ़। जुलूस में इरशाद हुसैन "शद्दू ", जैन, दिलशाद, ज़ीशान,फिरोज़, जफर अब्बास, दिलकश. मिसम, अयान, शाद, अमान, अलमदार हुसैन, अद्दनान, अरशान आदि ने सहयोग किया। सैय्यद फरमान हैदर ने बताया कि 11 वीं मुहर्रम को लुटे हुए काफिले का जुलूस दालमंडी में हकीम काजिम के इमामबाड़े से सुबह 11 बजे से उठेगा।
दूल्हे का जुलूस हुआ ठंडा
परवेज़ कादिर खां की अगुवाई में उठा दूल्हे का कदीमी जुलूस सकुशल संपन्न हो गया। इस दौरान जुलूस 60 ताजिया को सलामी और 72 अलाव पर दौड़ने के बाद शिवाला स्थित इमाम बाड़ा दूल्हा कासिम नाल पहुंच कर ठंडा हुआ। शाम में पुनः पानी वाला दूल्हा निकला जौ आसपास के इलाकों में होकर वापस शिवाला घाट पर पहुंच कर सम्पन्न हुआ। परवेज़ कादिर खां ने अवाम और पुलिस प्रशासन को शुक्रिया कहा।
मेडिकल कैम्प लगाकर खिदमत
जिया क्लब द्वारा 10 मोहर्रम को पितरकुंडा में मोहर्रम पर एक मंच लगाया गया। उस मंच पर अल्पाहार की जहां व्यवस्था किया गया वहीं एक मेडिकल कैंप भी लगाया गया। कैंप में आए हुए सभी ताजियादारो के लिए व रोजा रखे हुए लोगों को रोजा खुलवाया गया। जुलूस में आए हुए लोगों का उपचार कराया गया मेडिकल द्वारा हमारे कैंप पर बनारस दुर्सेघटना सेआई हुई ताजिया जिसमें लगभग 250 से ऊपर ताजिया थी जिसमें बुराक पीतल रंगी की मोती की शीशम की ताजिया इस मंच पर प्रमुख रूप से फजलुर रहमान इरशाद अंसारी रब्बानी अंसारी शमीम अंसारी हाजी काजू जुलूस का संचालन समाजसेवी शकील अहमद जादूगर ने की।
Varanasi (dil India live)। 9 वीं मोहर्रम पर शनिवार की शाम मुस्लिम बहुल इलाके 'या हुसैन या हुसैन' की सदाओं से गूंज उठेंगे। शहीदाने कर्बला की याद में इमाम चौकों पर जहां ताजिया मलीदे और शर्बत की फातेहा के बाद बैठा दी जाएंगी और इमाम हुसैन की शहादत को शिद्दत से याद किया जाएगा। वहीं दूल्हे का विश्व प्रसिद्ध जुलूस शिवाला से निकल कर आग के अंगारों पर दौड़ेगा। इस दौरान शहर भर में गश्ती अलम का जुलूस निकलेगा व इमाम चौकों और इमामबाड़ों में ताज़िए की जियारत को देर रात तक हुजुम उमड़ेगा। सुन्नी वर्ग ने शहर के विभिन्न इलाकों और मस्जिदों में जलसे का आयोजन किया है जहां देर रात तक उलेमा कर्बला की शहादत बयां करेंगे।
दस तारीख के रोज़े की फजीलत
इस दौरान दो दिन का मोमीनीन रोज़ा भी रखते हैं। कुछ लोग 9 वीं मोहर्रम और 10 वीं मोहर्रम को तो कुछ लोग 10 वीं, 11 वीं मोहर्रम को रोज़ा रहते हैं। मौलाना अजहरुल कादरी कहते हैं मोहर्रम की दस तारीख के रोज़े की बहुत फजिलत है। मौलाना कहते हैं कि कर्बला के मैदान में शहादत देकर इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाया है। अब तमाम दुनिया के इंसानों को चाहिए कि इमाम हुसैन के पैगाम को बचाएं। उनके नाना के दीन की हिफाजत करें। बुराई से बचें और नेकी व हमदर्दी के रास्ते पर चलें।
तैयारियां पूरी, तैयार हो गई खूबसूरत ताजिया
आज सुबह ताज़िए को अंतिम रूप दे दिया गया। ताज़िया को कारीगरी के बेहतरीन नमूनों और कलात्मक डिजाइनों से सजाया गया है। इन ताजियों को देखने के लिए आज शाम से भीड़ देर रात तक जमी रहेगी। खासकर लल्लापुरा स्थित रांगे का ताजिया, बाकराबाद के बुर्राक की ताजिया, बजरडीहा स्थित शीशे का ताजिया, उल्फत बीबी के हाते की ज़री की ताजिया, कोयला बाजार स्थित नगीने का ताजिया, मजीद पहलवान कमेटी की फूलों की ताजिया, दालमंडी स्थित पीतल की ताजिया, गौरीगंज की शीशम की ताजिया, चपरखट की ताजिया, शिवाला की कुम्हार की ताजिया, दोषीपुरा की शाबान की ताजिया, बजरडीहा की कागज की ताजिया के अलावा सैकड़ों मन्नती ताजिया आज मंगलवार की शाम इमाम चौक पर बैठा दी जाएगी इसकी तैयारियां पूरी हो गई है।
निकलेगा दूल्हे का ऐतिहासिक जुलूस:-
मुहर्रम की परंपरा का निर्वाह करते हुए शिवाला स्थित इमामबाड़ा दूल्हा कासिम नाल से देर रात दूल्हे का जुलूस सदर परवेज़ कादिर खां की अगुवाई में निकलेगा। इसमें शामिल जनसैलाब 'या हुसैन या हुसैन' कहते हुए पारंपरिक रास्तों पर लगाएं गये अलावा से होकर दस मोहर्रम की सुबह पुनः शिवाला लौटेगा। इस दौरान दूल्हा 72 अलावा व 60 ताजिया को सलामी देकर दहकते अंगारों से होकर वापस शिवाला लौटता है।
आंसुओं का नज़राना सुन उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की याद हुई ताज़ा
Sarfaraz Ahmad
Varanasi (dil India live). चाहमाहमा स्थित ख्वाजा नब्बू के इमामबाड़े से कदीम आठवीं मोहर्रम का तुर्बत व अलम का जुलूस अपनी पुरानी परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम संयोजक सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के ज़ेरे एहतमाम उठा। जुलूस उठने से पूर्व मजलिस को खिताब करते हुए अब्बास मूर्तज़ा शम्सी ने मौला अब्बास की शहादत बयान किया।
जुलूस उठने पर लियाकत अली खां व उनके साथियों ने सवारी शुरू की- "जब हाथ कलम हो गए सक्काए हरम के, और अर्शे बरी हिल गया गिरने से अलम के" जुलूस चाहमामा होते हुए दालमंडी स्थित हकीम साहब के अज़ाख़ाने पर पहुँचा जहां से अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाख्वानी शुरू करी - "अब्बास क्या तराई में सोते हो चैन से" जिसमें शराफत हुसैन, लियाकत अली खां, साहब ज़ैदी, शफाअत हुसैन शोफी, मज़ाहिर हुसैन, राजा व शानू ने नौहाख्वानी की। जुलूस दालमंडी, खजुर वाली मस्जिद, नई सड़क, फाटक शेख सलीम, काली महल, पितरकुंड, मुस्लिम स्कुल होते हुए लल्लापूरा स्थित फ़ातमान के लिए देर रात रवाना हुआl
पूरे रास्ते उस्ताद फतेह अली खां व उनके साथियों ने शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश किया। फ़ातमान से जुलूस पुनः वापस मुस्लिम स्कुल, लाहंगपूरा , रांगे की ताज़िया, औरंगाबाद, नई सड़क कपड़ा मंडी,कोदई चौकी, सर्राफा बाजार, टेढ़ी नीम, बांस फाटक, कोतवालपूरा, कुंजीगरटोला, चौक,दालमंडी,चाहमामा होते हुए इमामबाङे में समाप्त होगा।
दादा की परंपरा को पौत्र ने रखा कायम
दादा भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश करने की परम्परा को पौत्र आफाक हैदर ने कायम रखते हुए शहीदों की याद में शहनाई पर मातमी धुन पेश किया। हर साल मोहर्रम पर चांद की 8 तारीख को रात्रि 2:00 बजे भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान इसी दरगाहे फातमान में अपने जीवन में चांदी की शहनाई से आंसुओं का नजराना पेश करते थे। वो कर्बला के शहीदों के लिए मातमी धुन बजाते थे आज उनकी परंपरा उनके पोते अफाक हैदर दादा की परंपरा को कायम रखते हुए शहीदों की याद में शहनाई पर मातमी धुन पेश किया। इस दौरान,अब्बास क्या तरही में सोते हो अकबर का लाशा नहीं उठ सकेगा हुसैन से..., डूबता जाता है कहीं दिल ऐसा तो नहीं, दस्त गुरबत में नबी का कुनबा तो नहीं...पेश किया । इस दौरान जाकिर हुसैन, नाजिम हुसैन, अददार हुसैन व शकील अहमद जादूगर हमें काफी लोग मौजूद थे।
अर्दली बाजार से निकला दुलदुल व अलम
सैय्यद जियारत हुसैन के अंर्दली बाजार तार गली स्थित इमामबारगाह से 8 वीं मोहर्रम दुलदुल अंलम, ताबूत का जुलूस शुक्रवार को निकला। संयोजक इरशाद हुसैन "शद्दू" के अनुसार जुलूस अपने कदीमी (पुराने) रास्ते से होकर उल्फत बीबी हाता स्थित स्व.मास्टर जहीर साहब के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। जुलूस में अंजुमन इमामिया नौहा व मातम करती चल रही थी। जुलूस में इरशाद हुसैन सद्दू, जफर अब्बास, दिलशाद, जीशान, फिरोज, अयान, अमान, शाद, अरसान, दिलकश, मीसम आदि मौजूद थे।
आठवीं पर घर-घर हाजिरी कि नज़र
आठ मोहर्रम 1447 हिजरी को देश दुनिया के साथ शहर बनारस में भी हुसैनी लश्कर के अलमदार बहुत सारी दुनिया में वफ़ा की पहचान हजरत अब्बास की याद में मजलिस का आयोजन हुआ। शहर में सैकड़ों मजलिस आयोजित की गई।काली महल और माताकुंड में मजलिस को खिताब करते हुए शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने कहा इमाम हसन के भाई मौला अली के बेटे और लश्कर हुसैनी के अलमदार जिनकी वफा का जिक्र आज तक सारी दुनिया में होता है और उनके नाम के साथी जुड़ गया है अब्बास बा वफा उनकी याद में शहर भर में मजलिस हुई और घर-घर हाजिरी की नज़र भी दिलाई गई। लोगों ने एक नारा खास है अब्बास है अब्बास है। और नौहा मातम के जरिए लोगों ने खिराज अकीदत पेश किया। शहर के अर्दली बाजार, पठानी टोला, रामनगर, शिवाला, गौरीगंज, दालमंडी आदि में कई सारे जुलूस उठाए गए। जिसमें शहर के 28 अंजुमन ने अपने-अपने तरीके से नौहा मातम किया व शहनाई पर भी इमाम हुसैन के गम के नौहे सुन कर खिराज अकीकत पेश की गई। कुछ जुलूस दरगाह फातमान और सदर इमामबाड़ा पहुंचे वहीं कुछ जुलूस हसन बाग टेंगरा मोड़। कुछ जुलूस कुमहार के इमामबाड़े और कुछ जुलूस शिवाले घाट जाकर ठंडे हुए। बताया कि 5 जुलाई को शहर भर में इमाम चौक पर ताजिया रख दिया जाएगा कई जगह मजलिस होगी कई जगह गस्ती आलम उठाया जाएगा देश दुनिया के साथ हमारे शहर बनारस में भी या हुसैन की सदा गूंजती रहेगी।
मोहर्रम के जूलूसों की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के दृष्टिगत किया फुट पेट्रोलिंग
Sarfaraz Ahmad
Varanasi (dil India live). कानून-व्यवस्था एवं मुख्यालय, कमिश्नरेट वाराणसी शिवहरी मीना, द्वारा कमिश्नरेट वाराणसी में मोहर्रम पर निकलने वालो जूलूसों की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के दृष्टिगत चौकाघाट से नाटी इमली, बड़ीबाजार, दोषीपुरा मैदान, नक्खीघाट होते हुए लाट सरैया तक एवं आस पास के संवेदनशील स्थानों पर एएसचेक टीम, डाग स्क्वाड एवं पुलिस बल के साथ पैदल गश्त करते हुए चेकिंग/निरीक्षण किया गया। उक्त निरीक्षण के दौरान यातायात व्यवस्था की अनुपालन न करने वाले एवं अतिक्रमण करने वाले के विरूद्ध कठोरता से विधिक कार्यवाही किए जाने एवं माहर्रम को शान्तिपूर्ण वातावरण में सकुशल सम्पन्न कराये जाने के लिए संबंधित को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया गया। इस दौरान ताजियादारों, इमामबाड़ों के अगुआ से संवाद किया गया। उक्त निरीक्षण के दौरान गौरव वंशवाल, पुलिस उपायुक्त, काशी-जोन, सरवणन टी. अपर पुलिस उपायुक्त, काशी-जोन, डा. ईशान सोनी, सहायक पुलिस आयुक्त, चेतगंज, सतानन्द पाण्डेय, सहायक पुलिस आयुक्त, अभिसुचना एवं सम्बन्धित थाना प्रभारी एवं चौकी प्रभारी उपस्थित थे।
बजरडीहा में फ्लैग मार्च
मोहर्रम और मोहर्रम पर निकलने वाले तमाम जुलूस को शांति पूर्वक सम्पन्न कराने के लिए डीसीपी क्राइम द्वारा बजरडीहा में फ्लैग मार्च किया गया। इस दौरान सीआरपीएफ के अधिकारी व जवान भी फ्लैग मार्च में शामिल थे। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से संपर्क व संवाद किया।
रोज़ेदार की इफ्तार के वक्त मांगी गई दुआएं कभी वापस नहीं होती
Varanasi (dil India live)। रमज़ान का चांद होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं। यह भी रमज़ान की खासियत है कि इसमें नबी-ए-करीम (स.) के बड़े नवासे जन्नत के सरदार, शेरे खुदा मौला अली व Hazrat फातेमा के साहबज़ादे इमाम हसन की पैदाइश 15 रमज़ान सन् 3 हिजरी को मदीना मुनव्वरा में हुई थी। यही वजह है कि 15 Ramzan mubarak को हम जन्नत के सरदार का जश्न मनाते हैं।
ऐसे ही मुकद्दस रमज़ान की 21 तारीख को ही मुश्किलकुशा हजरत मौला अली की मस्जिदें कुफा में शहादत हुई थी। हज़रत अली काबा में पैदा हुए और मस्जिद में शहीद हुए। मुश्किलकुशा हजरत अली फरमाते हैं कि जब रोज़ेदार इफ्तार के वक्त दुआ करता है तो वो ज़रुर कुबुल होती है और रोज़ा जिस्म की ज़कात है। परवरदिगार फरमाता है कि माहे रमज़ान कितना बरकतों और रहमतो का महीना है इसका अंदाजा बंदा इसी से लगा ले कि इस महीने में हमने दुनिया की सबसे मुकद्दस किताब कुरान मजीद नाज़िल फरमाया है।
छठवें इमाम ज़ाफर सादिक ने फरमाया कि जिन चीज़ों से रोज़ा टूटता है उसमें झूठ, गीबत, चुगलखोरी, दो मोमिन के बीच लड़ाई कराना, किसी के लिए गलत नज़र रखना, झूठी कसम खाना शामिल है। रोज़ा तकवे का सबब और अल्लाह की नज़दीकी हासिल करने का ज़रिया है। रोज़ा जहन्नुम से बचाने की ढाल है और जन्नत में दाखिले का ज़रिया है। ऐ अल्लाह तू हम सबको सही राह दिखा। परवरदिगार हम सबको रमज़ान के रोज़े रखने की तौफीक दे और रोज़े की कामयाबी पर सभी को ईद की खुशियां दे...आमीन
मस्जिदों में शुरू हुई तरावीह, कल से रखा जाएगा रोज़ा
बाजार हुए गुलजार, मुस्लिम बाहुल इलाकों में लौटी रौनक
मोहम्मद रिजवान
Varanasi (dil India live)। जिस घड़ी का इंतजार था वो इबादत की घड़ी आखिर आ ही गई। शनिवार की शाम सवा 6 बजे मुस्लिमों ने घरों की छतों, मस्जिदों, मदरसों और मैदानों से चांद का दीदार का रमज़ान का वेलकम किया। पटाखे फोड़े गए और खुशियों का इजहार किया गया। लोगों ने एक दूसरे को रमज़ान की मुबारकबाद दी। रात में तरावीह की ख़ास नमाज अदा की गई। माह ए रमजान का चांद देखने के साथ ही रविवार को पहला रोजा रखा जाएगा। मुस्लिम पूरे दिन नीरा जल उपवास रखकर इबादत करेंगे। इस बार रोजा तकरीबन सवा 13 घंटे से अधिक का है। शहर की सैकड़ों मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की गई। लोगों ने दुआ के लिए हाथ उठाए और सजदे में अपने सर झुकाएं। दूसरी ओर शिया समुदाय ने अपने शहर की 32 मस्जिदों में इमामबारगाह में दरगाहों में मजलिस और दुआख्वानी के साथ रमजान उल मुबारक का इस्तकबाल किया। बाजार गुलजार हो गये, मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में रौनक लौट आयी। इस दौरान लोगों ने सेहरी और इफ्तार के लिए देर रात तक खरीदारी की। मुस्लिम बहुल इलाको में देर रात तक चहल पहल देखी गई। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने बताया कि रमजान एक ऐसा महीना है जिसमें हर मुसलमान अपने रब की ज्यादा से ज्यादा इबादत करता है। गरीबों और यतीमो की भरसक मदद करता है। मस्जिदें रोज़ादारो से छलकती रहती है। खुशगवार मौसम में रोज़े का आगाज हो रहा है। इस बार रोजा तकरीबन 13.15 घंटे का होगा। आनेवाले दिनों में गर्मी बढ़ेगी तो इबादत का जज्बा भी बुलंदियों पर होगा। ये वो पाक महीना है जिसमें पवित्र कुरान भी नाजिल हुई। इस माह की 15 तारीख को इमाम हसन की विलादत की खुशी जहां मनाई जाएगी वहीं 21 रमजान को मौला अली की शहादत का ग़म भी शिया वर्ग ताज़ा करेंगे।