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शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

UP: Varanasi Main Al Madad फाउंडेशन द्वारा पंजाब के बाढ़ पीड़ितों को दी सहायता राशि

गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी को सौंपा 70 हजार की नकद राशि 


Varanasi (dil india live). अल-मदद फाउंडेशन द्वारा पंजाब बाढ़ पीड़ितों के लिए मदद। अल-मदद फाउंडेशन समिति के पदाधिकारी / प्रतिनिधियों ने गुरूबाग, गुरूद्वारे के मुख्य ग्रन्थी भाई रंजीत सिंह को पंजाब में आई बाढ़ के पीड़ितो के लिए 70000/- (सत्तर हजार रूपये) की धनराशि नकद राशि के रूप में सौंपी। धनराशि के लिए गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अल मदद फाउंडेशन का आभार प्रकट किया।

 इंसानियत और एकता का प्रतीक

कल मदद फाउंडेशन की ओर से मुफ्ती-ए-शहर बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि यह योगदान इंसानियत और एकता के प्रतीक के रूप में दिया जा रहा है। इस मौके पर दोनों समुदायों के लोगो ने पंजाब बाढ़ पीड़ितो के लिए मिलकर दुआ और अरदास किया। सभी ने बाढ़ पीड़ितों के प्रति सहानूभूति व्यक्त की। गुरूद्वारे के मुख्य ग्रन्थी भाई रंजीत सिंह ने कहा कि हम इस योगदान के लिए आभारी है। यह दर्शाता है कि जब मुश्किल समय आता है, तो मजहब की दीवारें गिर जाती है और इंसान-इंसान के करीब आ जाता है। मुस्लिम समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि हमारा धर्म हमें इंसान की सेवा करना सिखाता है। पंजाब के लोगों के दुख की घड़ी में हम सब उनके साथ तन मन और धन से खड़े है। इस दौरान गुरुद्वारे के काफी लोग मौजूद थे।


सोमवार, 21 जुलाई 2025

UP: Varanasi K Dargah-e-Fatmaan में उठा 18 बनी हाशिम का ताबूत

इमाम हुसैन के दुलदुल और तुर्बत की जियारत को उमड़े अकीदतमंद, मांगी मन्नतें

Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live). वाराणसी के लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान में शहीदाने कर्बला इमाम हुसैन और उनके घर के 17 लोगों की याद में (18 बनी हाशिम) इतवार को ताबूत उठाया गया। इस मौके पर हज़रत इमाम हुसैन का दुलदुल और उनके भाई हज़रत अब्बास का अलम की भी जियारत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। जायरीन ने ताबूत, अलम व दुलदुल की जियारत कर मन्नतें व मुराद मांगी। जुलूस का आयोजन अंजुमन हैदरी, चौक बनारस ने किया था।

इससे पहले मौलाना अकील हुसैनी ने जुलूस की मजलिस को खिताब करते हुए 18 बनी हाशिम की शहादत की दास्तां सुनाई जिसे सुनकर तमाम लोग जार-जार रो पड़े। इस मौके पर इमाम हुसैन, उनके बहादुर भाई अब्बास, 18 साल के जवान बेटे अली अकबर, 13 साल के भतीजे कासिम और सबसे छोटे बेटे 6 महीने के अली असगर की शहादत पढ़ी गई। इन सभी को इराक के कर्बला शहर में सन् 61 हिजरी में भूखा और प्यासा उस वक्त के सबसे बड़े आतंकवादी यजीद की फौज ने शहीद किया था।

मौलाना अकील हुसैनी ने इमाम हुसैन के बहादुर भाई अब्बास की शहादत पढ़ते हुए कहा कि 'इमाम हुसैन के खेमों (टेंट) में बच्चे तीन दिन के प्यासे थे। पानी के लिए सभी परेशान थे। ऐसे में इमाम हुसैन की चार साल की बच्ची ने अपने चचा अब्बास से नहर ए फोरात से पानी लाने को कहा। 

मौला अब्बास अपने आका और बड़े भाई इमाम हुसैन से इजाजत लेकर अब्बास नहर पर पहुंचे और पानी भरकर वापस निकले तो उन्हें यजीदी फौजों ने घर लिया और पहले उनके दोनों हाथ काट दिए और सिर पर ऐसा वार किया कि वो शहीद हो गए। ये सुनकर वहां मौजूद लोग जारो कतार रोने लगे। बाद मजलिस मौलाना इंतजार आब्दी ने 18 ताबूतों का तारूफ कराया।

60 साल के बुजुर्ग और 6 महीने के मासूम को भी नहीं छोड़ा* लगभग 1400 साल पहले बादशाह यज़ीद ने इमाम हुसैन को उनके 72 साथियों समेत मौत के घाट उतार दिया था। इनमें 60 साल के बुजुर्ग और 6 माह के मासूम अली असगर के भी जान को नहीं बख्शा गया। तीन दिन का भूखा-प्यासा करबला के मैदान में शहीद कर दिया गया था। मौलाना अकील हुसैनी के अनुसार, इन 72 शहीदों में पैगंबर मुहम्मद साहब के खानदान के 18 असहाब थे। ये ताबूत उन्हीं 18 बनी हाशिम की याद में उठाए गए हैं।

जानिए कर्बला में शहीद 18 बनी हाशिम को

1. इमाम हुसैन बिन अली

2. अल-अब्बास बिन अली

3. उथमान बिन अली

 4 जाफर बिन अली

 5 अब्दुल्लाह बिन अली

6. मुहम्मद बिन अली

7. अल-कासिम बिन अल-हसन

8. अब्दुल्ला बिन अल-हसन

9 अबू बक्र बिन अल-हसन

10. अली अल-अकबर बिन अल-हुसैन

11. अली अल-असगर बिन अल-हुसैन

12. औन बिन अब्दुल्लाह बिन जाफर

13. मुहम्मद बिन अब्दुल्लाह बिन जाफर

14. अब्दुर्रहमान बिन अकील

15. जाफर बिन अकील

16. अब्दुल्लाह बिन अकील

17. अबू अब्दुल्ला अमीर बिन मुस्लिम

18. अब्दुल्लाह बिन मुस्लिम