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शनिवार, 12 जुलाई 2025

UP: Varanasi Main Isra करेगी Kaba से हज करके लौटे हाजियों का खैरमकदम

 हाजियों को पहनाया जाएगा अरबी रुमाल



मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil india live). मुकद्दस हज का सफर पूरा कर करके काबा से काशी लौटे हाजियों का जोरदार खैरमकदम इतवार को किया जाएगा। कार्यक्रम की अगुवाई इसरा वाराणसी के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खान करेंगे। इस बार यह आयोजन खजूरी सिथत एक लान में होने जा रहा है। इस दौरान इसरा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्षता मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी करेंगे। डाक्टर हाजी फारुख खां ने बताया कि काबा से हज कर करके लौटे 16 जिलों के हाजी साहेबान का अरबी रुमाल पहना कर खैरमकदम किया जाएगा। आयोजन का संचालन मौलाना हसीन अहमद हबीबी करेंगे। अहमद आज़मी, अजफर बनारसी जलालुद्दीन आदि नातों का गुलदस्ता पेश करेंगे। मौलाना अब्दुल हादी खां, मौलाना डा. निजामुद्दीन, हसीन अहमद हबीबी, मौलाना शफीक अहमद आदि की तकदीर होगी।

इंडियन सोसाइटी फार सोशल रीवोल्यूशन एंड एक्शन (इसरा) की ओर से आयोजित होने वाले कार्यक्रम में लोगों का स्वागत शाहरुख खान करेंगे।

रविवार, 30 मार्च 2025

Kaba में मनाई जा रही है आज Eid, Kashi में आज चांद रात

Eid की खुशियों की आहट से महक उठा बाजार 


Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। काबा में कल चांद देखा गया आज इतवार को वहां ईद का जश्न मनाया जा रहा है। वही काशी में आज चांद रात है। अगर चांद का दीदार हो जाता है तो सोमवार को यहां ईद मनाई जाएगी। ईद की आहट से ही बाजार बूम कर रहा है। ईद की खरीदारी अब अंतिम चरण में है। बाजार में सेवई की खुशबू बिखर रही है तो वहीं कुर्ता-पायजामा लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्गों में कुर्ता-पायजामा की खरीदारी ज्यादा है। इसके साथ ही इत्र, कपड़े, जूते-चप्पल और टोपी, सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें देर रात तक गुलजार रह रही हैं।


शाम ढलने के बाद मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में चहल-पहल बढ़ जा रही है। ईद के ग्लोबल पर्व पर पिछली बार की तुलना में 20 फीसदी अधिक महंगाई भी बाजार में छाई है। इसके बावजूद रोजेदारों में उत्साह है। भदऊ चुंगी स्थित सेवईं मंडी में अधिकतर कारोबारियों का माल खत्म हो चुका है। सेवईं की बिक्री अभी बनी हुई है। गर्मी को देखते हुए दिन में कम और शाम के बाद ज्यादा खरीदारी हो रही है। दालमंडी, बेनिया, नई सड़क, मदनपुरा, बजरडीहा, सरैया, अर्दली बाजार, पीलीकोठी, कज्जाकपुरा क्षेत्रों में सेवई, ड्राई फ्रूट्स समेत अन्य सामानों की खरीदारी अपने शबाब पर है। गोला दीनानाथ, विशेश्वरगंज, खोजवां, पांडेयपुर आदि क्षेत्रों में किराना माल की खपत बढ़ी है।

हाजी नासिर जमाल ने बताया कि खुशियां बांटने वाले इस पर्व पर लोगों की कुर्ता-पायजामा पहली पसंद होती है। तमाम आकर्षक और डिजाइनदार कुर्ते-पायजामे बाजार में हैं। टेलर के यहां दिन रात काम चल रहा है। नया ऑर्डर अब कोई नहीं ले रहा है। दालमंडी के सामाजिक कार्यकर्ता शकील अहमद जादूगर ने बताया कि गर्मी के कारण रात तक दुकानें खुल रही हैं और अधिकतर खरीदारी शाम में इफ्तारी के बाद शुरू हो रही है। दूर दराज के लोग दिन में और स्थानीय वाशिंदे रात में खरीदारी कर रहे हैं। हंकार टोला के सरफराज ने बताया कि खजूर, सेवई, ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी 80 फीसदी तक हो चुकी है। मार्केट में ईरानी और अफगानी नकाब की बिक्री हो रही है।


बाजार में सेवइईयों की वैराइटी पर अगर नज़र डालें तो बेनिया के दुकानदार नूर मोहम्मद ने बताया कि बनारसी सेवई की कीमत 300 से 400 रुपये किलो, हैदराबाद की सेवई 300-350, कतर की सेवई 650 रुपये किलो बिक रही है। वहीं, लोकल बनारस की 100 से 250 रुपये किलो तक की सेवईं की बिक्री ज्यादा हैं। पूर्वांचल के कोने कोने और बिहार तक से लोग यहां खरीदारी को उमड़ रहे हैं।

शनिवार, 29 मार्च 2025

Hafiz Saifi ने Quran किया मुकम्मल तो ईनाम में मिला खाने kaba का सफर

मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में 27 दिन की तरावीह पूरी 


Varanasi (dil India live). मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में ऐतिहासिक वक्त था जब हाफिज साहब ने तरावीह में एक कुरान मुकम्मल करायी तो मस्जिद कमेटी ने उन्हें इनाम में खाने काबा के सफर (हज-ए-उमराह) का अज़ीम तोहफा भेंट किया। हाफ़िज़ मोहम्मद सैफी कादरी ईद के बाद 6 अप्रैल को उमराह पर रवाना होंगे। उन्होंने कहा कि बहुत खुशी का सबब है कि कमेटी ने मुझे ये अज़ीम तोहफा दिया है। मैं काबा मुल्क में अमन, मिल्लत और सभी की तरक्की की दुआएं करुंगा।

दरअसल मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में 27 दिन की तरावीह आज मुकम्मल हुई। मस्जिद के मुक्तदी ने मिलकार जनाब हाफिज वा कारी मोहम्मद सैफी कादरी को तोहफा में उमराह का पाकेज दिया।

इसमें मोहम्मद अफ़ज़ल, हमजा इलाही, फुरकान इलाही, इरफान इलाही, फैज रजा ने मिलकर तोहफा तारवीह में उमरा का इनाम दिया है। इससे पहले जैसे ही तरावीह मुकम्मल हुई तमाम लोगों ने हाफ़िज़ सैफी साहब को फूल और मालाओं से लाद दिया। उनसे मुसाफा करने, गले मिलने की होड़ सी लग गई। इस दौरान मौजूद लोगों में तबर्रुक तकसीम किया गया।