23 वीं श्री हनुमान ध्वजा यात्रा में गूंजा 'जय श्री राम'
7 राज्यों के भक्तों ने उठाई बजरंग ध्वजा, 5 किमी लंबी रही यात्रा
Santosh Nagvanshi
dil india live (Varanasi). काशी के दक्षिणी छोर पर आज अंजनी लाल के जन्मोत्सव का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। श्री हनुमत् सेवा समिति, नेवादा द्वारा आयोजित 23 वीं श्री हनुमान ध्वज यात्रा ने आज भक्ति और भव्यता के सारे कीर्तिमान तोड़ दिए। भिखारीपुर तिराहे से शुरू होकर श्री संकट मोचन दरबार तक निकली इस 5.25 किलोमीटर लंबी यात्रा में पूर्वांचल सहित देश के 7 राज्यों के भक्तों ने शिरकत की।
सुबह सूर्य की पहली किरण के साथ ही भिखारीपुर तिराहे पर 60 फीट लम्बे वाहन पर 'राम दरबार' रथ और पालकी पर विराजे हनुमान का 11 ब्राह्मणों द्वारा षोड़शोपचार पूजन व आरती की गई। इसके पश्चात, 100 से ज्यादा डमरूओं की गड़गड़ाहट और ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच यात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा का मुख्य आकर्षण 1100 भक्तों के हाथों में लहराती गदा और हजारों की संख्या में केसरिया ध्वजाएँ रहीं, जिससे पूरा आसमान हनुमत् रंग में रंग गया। इस मौके पर यात्रा में विभिन्न कार्यालयों द्वारा मनमोहक झाँकियाँ प्रस्तुत की गईं। नेवादा कार्यालय: शिव-पार्वती और अघोरी दल की जीवंत प्रस्तुति। कोनिया कार्यालय: नारी शक्ति का परिचय देते हुए 'नारी वाहिनी' द्वारा दंड-तलवार का प्रदर्शन। बजरडीहां कार्यालय: मध्य प्रदेश का मशहूर 'तहलका धमाल बैंड'। जानकीनगर कार्यालय: संकट मोचन दरबार के गर्भगृह की सुंदर प्रतिकृति।
भीषण धूप के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। रास्ते भर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए थे, जहाँ फल, जूस, छाछ, लस्सी और फलाहार की व्यवस्था थी। समिति की ओर से 501 किलो लड्डू का प्रसाद भक्तों में वितरित किया गया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा।
यात्रा का शुभारंभ सुबह भिखारीपुर तिराहे पर हुआ, जहाँ सूर्य की पहली किरण के साथ 11 ब्राह्मणों ने 60 फीट लम्बे वाहन पर राम दरबार रथ और पालकी में विराजे हनुमान का पूजन किया। 200 से अधिक डमरूओं की थाप और ढोल-नगाड़ों की गर्जना ने भक्तों में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। नेवादा स्थित मुख्य कार्यालय पर अतिथियों द्वारा आरती के पश्चात यात्रा संकट मोचन दरबार की ओर बढ़ी।
यात्रा के मुख्य आकर्षण: श्रद्धा और शौर्य
गदाधारी हनुमान भक्त: यात्रा में 1100 भक्त हाथों में बजरंगबली की पहचान 'गदा' लेकर चल रहे थे, जो साहस और शक्ति का प्रतीक नजर आया।
नारी शक्ति का प्रदर्शन
कोनिया कार्यालय की 'नारी वाहिनी' ने तलवार और दंड प्रदर्शन कर अपनी शक्ति का लोहा मनवाया। नेवादा से अघोरी दल, जानकीनगर से गर्भगृह प्रतिकृति और बजरडीहां से मध्य प्रदेश का 'तहलका धमाल बैंड' राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
सेवा : 200 स्टॉल और 501 किलो लड्डू
5.25 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर भक्तों के लिए जन-जन का सहयोग दिखा। 200 से ज्यादा स्टॉलों पर जूस, लस्सी, छाछ, फल और मेवों बांटा जा रहा था। समिति द्वारा 501 किलोग्राम शुद्ध लड्डू का महाप्रसाद भक्तों में वितरित किया गया। कड़ी धूप के बावजूद हज़ारों महिलाएं और युवतियाँ नंगे पाँव हाथों में ध्वज और पूजन की थाली लिए अटूट श्रद्धा के साथ बढ़ती रहीं।
इस वर्ष की यात्रा में एक बड़ा सामाजिक संदेश भी दिया गया। यात्रा से पूर्व सभी भक्तों ने काशी के अंतर्ग्रही क्षेत्र को मांस-मदिरा मुक्त बनाने की शपथ ली। "अभियान पवित्र काशी" की विशेष झांकी ने सबका ध्यान खींचा, जो नगर की सात्विकता बनाए रखने का संदेश दे रही थी।



















