ईदुल अजहा के दिन 91 वर्ष की आयु में भोपाल में निधन
dil india live (Bhopal). उर्दू शायरी की दुनिया के महान शायर बशीर बद्र आज हमारे बीच नहीं रहे। 91 वर्ष की आयु में भोपाल में ईदुल अजहा के मुकद्दस दिन उनका निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और डिमेंशिया से जूझ रहे थे। बशीर बद्र साहब ने ग़ज़ल को सिर्फ़ अदब की महफ़िलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आम लोगों के दिलों तक पहुँचा दिया। उनकी शायरी में मोहब्बत, तन्हाई, रिश्ते, दर्द और इंसानी एहसास बेहद सादगी और गहराई से दिखाई देते हैं।
कुछ अमर शेर जो हर दिल की आवाज़ हैं
कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक विरासत रहेगी।
श्रद्धांजलि स्वरूप कुछ पंक्तियाँ
अल्फ़ाज़ के उस फ़नकार को सलाम जिसने दर्द को भी ख़ूबसूरती से लिखा महफ़िलें ख़ामोश होंगी अब शायद पर हर दिल में बशीर बद्र हमेशा रहेंगे ज़िंदा।।
(सुमंगला सुमन)
मुशायरों में, उनको कई बार सुना
आम बोलचाल की भाषा में लिखे बशीर बद्र के शेर ज़िन्दगी की गहरी सच्चाई बयान करते। कई-कई बार लोकसभा में, उनके शेर सुनाई दिये। कम लोगों को पता होगा कि बशीर बद्र ने अटल बिहारी वाजपेयी के लिए लखनऊ में भी चुनाव प्रचार किया था।
Eid ul azha की नमाज के बाद ईदगाहों व मस्जिदों में देश में खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे की गुरुवार को दुआए मांगी गई। नमाज को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील इलाकों में पुलिस फोर्स तैनात की गई । सुरक्षा पर विशेष नजर थी, ड्रोन कैमरों से भी निगरानी हो रही थी। हर गतिविधि पर पैनी नजर पुलिस के आलाधिकारी रखें हुए थे। भारी फोर्स की मौजूदगी में अमन और मिल्लत के माहौल के बीच बकरीद की नमाज़ अदा हुई तो प्रशासन ने राहत की सांस ली। दिल इंडिया लाइव की एक खास रिपोर्ट यहां पढ़ें...
sarfaraz/Rizwan/F. Farouqi
Varanasi (dil India live)। ईद-उल-अजहा (Eid ul azha) यानी बकरीद पर रब की बारगाह में पहले मोमीनीन ने सिजदे में सिर झुकाया, फिर ख़ुदा की राह में विभिन्न छोटे बड़े जानवरों की कुर्बानी पेश की। कुर्बानी के साथ ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बकरीद का तीन दिनी त्योहार गुरुवार को पूरी अकीदत के साथ शुरू हो गया। इस दौरान ईदगाहों और मस्जिदों के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी। पुलिस अधिकारियों ने ईदगाहों का मुआयना किया। बकरीद की नमाज सुबह पौने पौने 6 बजे से 10.30 बजे के बीच जब सकुशल संपन्न हुई तो जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। नमाज अदा करने के बाद बकरा, भेड़, दुंबा आदि जानवरों की कुर्बानी का जो दौर शुरू हुआ वो तीन दिनों तक ऐसे ही जारी रहेगा।
काजी-ए-शहर बनारस मौलाना जमील अहमद ने ईदुल अजहा की लोगों को मुबारकबाद पेश की। इस दौरान उनसे मिलने और मुसाफा करने लोगों का हुजूम उनके दौलतखाने पर उमड़ा हुआ था। इससे पहले ईद-उल-अजहा की नमाज पूरी अकीदत के साथ अदा की गई। मस्जिद हमीदिया शक्कर तालाब में मुफ्ती-ए-बनारस अहले सुन्नत मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारूकी प्यारे मियां, मस्जिद लंगड़े हाफिज नई सड़क में मौलाना जकीउललाह असदुल कादरी, मुगलिया मस्जिद बादशाह बाग में मौलाना हाफिज हसीन अहमद हबीबी, शाही मस्जिद ज्ञानवापी में मौलाना अब्दुल आखिर नोमानी, शाही मस्जिद ढ़ाई कंगूरा में हाफिज नसीम अहमद बशीरी ने नमाज अदा करायी।
ऐसे ही बड़ी ईदगाह विद्यापीठ में मौलाना शमीम, मस्जिद रंग ढलवां फाटक शेख़ सलीम में मौलाना जाहिद, मस्जिद उल्फत बीबी अर्दली बाजार में शैखुल हदीस मौलाना इल्यास कादरी, जामा मस्जिद कम्मू खां डिंठोरी महाल में मौलाना शमसुद्दीन, छोटी मस्जिद डिठोरी महाल में हाफिज शाहरूख तो शिया जामा मस्जिद मीर गुलाम अब्बास अर्दली बाजार में मौलाना तौसीफ़ अली व मस्जिद डिप्टी जाफ़र बख़्त, शिवाला में बक़रीद की नमाज़ मौलाना मुहम्मद हुसैन ने अदा कराई।
ऐसे ही मस्जिद जियापुरा लल्लापुरा में मो. मोइनुद्दीन अंसारी, ईदगाह हकीम सलामत अली में मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, मस्जिद टकटकपुर दरगाह में मौलाना अजहरुल कादरी, मस्जिद याकूब शहीद लंका नगवां में हाफिज मोहम्मद ताहिर, चमेली की मस्जिद कच्ची बाग़ में मौलाना रेयाज़ अहमद क़ादिरी, छंगा बाबा की मस्जिद में मौलाना लतीफ अहमद सेराजी, रहीम दमड़ी की मस्जिद मौलाना नसीर अहमद सेराजी, दाल की मस्जिद में मौलाना निहालुद्दीन सेराजी, गुलरोग़न की मस्जिद में मौलाना रिज़वान अहमद ज़ियाई व मीनार वाली मस्जिद, पीली कोठी में मौलाना मक़सूद अहमद क़ादिरी ने नमाज अदा कराकर लोगों को बकरीद की मुबारकबाद दी। मस्जिद नई बस्ती गौरीगंज में हाफिज परवेज़, जामा मस्जिद राजातालाब में मौलाना जुल्फेकार, मस्जिद हज़रत शाह मूसा शाह ककरमत्ता में हाफ़िज़ खालिद कमाल, मस्जिद ईदगाह लाटशाही में हाफिज हबीबुर्रहमान, ईदगाह पुराना पुल में मौलाना शकील ने नमाज अदा कराई।
ऐसे ही मस्जिद रज़ा मदनपुरा, जहांगीर मस्जिद हटिया, डोमन की मस्जिद, मस्जिद बरतले, शिवाला की मस्जिद अब्दुल रहीम खां, नूरी रिजवी मस्जिद नरिया, मस्जिद बुलाकी शहीद अस्सी, मस्जिद हबीबीया, मस्जिद सम्मन खां गौरीगंज, मस्जिद गौसिया नवाबगंज, मस्जिद अस्तबल, मस्जिद कुशता बेगम शिवाला, मस्जिद पिपलानी कटरा, मस्जिद अल कुरैश, ईदगाह मस्जिद दायम खां, बिचलीं मस्जिद कचहरी समेत लोहता, बजरडीहा, रामनगर, जंसा, बड़ागांव, चोलापुर, पुराना पुल आदि में भी ईदुल अजहा की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक दूसरे से गले मिल कर ईद मुबारक कहा।
बकरीद के गोश्त का तीन हिस्सा
बकरीद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह के नाम पर छोटे बड़े जानवरों की कुरबानी देकर कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटते नज़र आए। इसमें उन्होंने एक हिस्सा खुद के खाने के लिए, दूसरा हिस्सा गरीबों के लिए और तीसरा अजीजो के लिए लिए किया। कुर्बानी के बाद गोश्त का तबर्रुक लोगों को तकसीम किया गया। इस दौरान दावतों का भी दौर चला जिसमें दोनों मज़हब के लोगों ने हिस्सा लिया। सभी ने सेवइयों का भी लुत्फ उठाया।
मस्जिदों व ईदगाहों पर दिखा मेले सा नज़ारा
बकरीद की नमाज के दौरान मुहल्लों की जामा मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास मेले सा नज़ारा देखने को मिला। इस दौरान नमाज के बाद बच्चे अपने अजीजों के साथ गुब्बारे, खिलौने व आइसक्रीम खरीदते दिखाई दिए। इस दौरान पूरा माहौल नूरानी नज़र आ रहा था।
बकरीद की क्या है कहानी
शैखुल हदीस मौलाना इल्यास कादरी ने कहा कि बकरीद पैगम्बर हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। एक बार खुदा ने हजरत इब्राहिम का इम्तिहान लेने के लिए ख्वाब में आदेश दिया कि हजरत इब्राहीम अपनी सबसे अजीज चीज़ की कुर्बानी दें। हज़रत इब्राहीम अपनी तमाम अज़ीज़ चीजें कुर्बान करते गये फिर भी उन्हें यही ख़्वाब आता रहा। हजरत इब्राहिम के लिए अब सबसे अजीज उनके बेटे हजरत इस्माईल थे, जिसकी कुर्बानी के लिए वे तैयार हो गए और उन्हे कुर्बानी के लिए ले गये। हज़रत इब्राहीम ने हज़रत इस्माईल को जैसे ही जेबा करने के लिए समंदर के पास लिटाया, छूरी ने हज़रत इस्माईल कि गर्दन पर चलने से इंकार कर दिया। इसके बाद कुर्बानी से पहले रब ने हजरत इस्माईल की जगह ये कहते हुए कुर्बानी के लिए दुम्बा भेज दिया कि वो हज़रत इब्राहिम का इम्तेहान ले रहे थे और इम्तेहान में वो पास हो गये। तभी से कुर्बानी का पर्व मनाया जा रहा है।
70000 का मोबाइल मत लो 17000 से काम चलाओ
मौलाना ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं क्या जरूरत है कुर्बानी की ये पैसा बचा कर क़ौम की भलाई में लगाया जाए? मौलाना ने कहा कि इस्लाम का कानून न कभी बदला है न बदलेगा। बदलना है तो खुद को बदलों 70 हजार का मोबाइल मत लो 17 हजार के मोबाइल से काम चलाओ, जो रकम बचे उसे दीन इसलाम की राह में खर्च करो।
ईद-उल-अजहा कल, नमाज़ के बाद होगी कुर्बानी, देर रात तक होती रही तैयारियां
varanasi (dilindialive)। देश-दुनिया में 28 मई को ईदुल अजहा यानी बकरीद का त्योहार पूरी अकीदत के साथ मनाया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां देर रात तक होती रही। देर रात तक बकरो और सेवईयो की खरीदारी bakhrid के मुक़द्दस पर्व को देखते हुए समाचार लिखे जाने तक हो रही थी। उधर बकरों की खरीद के साथ ही खोवा, सेवई, मेवा, प्याज,अदरक आदि की भी खरीदारी देर रात तक होती है, दरअसल कुर्बानी के साथ ही घरों में लज़ीज सेवईयां भी बनती है। इसकी तैयारियां ख्वातीन देर रात से ही करती हैं।
उधर शहर में बेनियाबाग बकरा मंडी बंद होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी, देर रात तक लोग रेवड़ी तालाब, बड़ी बाजार, सरैया, कोनिया, लल्लापुरा, बजरडीहा आदि इलाकों में जानवरों की खरीदारी फरोख्त के लिए परेशान देखें गये।
दरअसल बकरीद के दिन को कुर्बानी और त्याग के दिन के रूप में याद किया जाता है। इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के मुताबिक, कुर्बानी का त्योहार बकरीद रमजान के दो महीने बाद आता हैं। इस्लाम धर्म में बकरीद तीन दिन होती है, आमतौर पर बक़रीद पर छोटे-बड़े जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इस दिन की एक खासियत यह भी है कि बकरीद पर जहां जानवर को अल्लाह की राह में कुर्बान किया जाता हैं, वहीं दूसरी ओर काबा में ज़ायरीन हज के अरकान मुकम्मल कर रहे होते हैं। जो काबा हज पर गये हैं उन्हें दोहरी खुशी नसीब होती है। एक बक़रीद की दूसरी हज की।
police Commissioner ने किया गश्त
पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल द्वारा आगामी बकरीद के दृष्टिगत किया गया पैदल गश्त कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। उन्होंने बकरीद पर्व के दृष्टिगत गोदौलिया, चौक, दालमण्डी से लंगड़ा हाफिज़ मस्जिद तथा जैतपुरा रोड से बकरिया मंडी तक सघन पैदल गश्त कर सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया गया। पैदल गश्त के दौराननिर्देश दिया कि -
• बकरीद पर्व के दौरान किसी भी स्थिति में सार्वजनिक स्थानों एवं सड़कों पर नमाज अदा न की जाए। अधिक संख्या होने पर विभिन्न पालियों में नमाज सम्पन्न कराते हुए व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। • कुर्बानी केवल घर के अंदर एवं बंद परिसरों में ही कराई जाए। सार्वजनिक स्थानों, खुले क्षेत्रों एवं मार्गों पर कुर्बानी पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी, उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सतत निगरानी रखी जाए। कुर्बानी से संबंधित फोटो अथवा वीडियो सामग्री साझा करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। • कुर्बानी से उत्पन्न अपशिष्ट को निर्धारित स्थल अथवा नगर निगम की गाड़ियों में ही डाला जाए। अपशिष्ट को खुले स्थानों, सड़कों अथवा मार्गों के किनारे किसी भी स्थिति में न फेंका जाए तथा अपने आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। • प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। ऐसे मामलों में तत्काल कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी। • ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, वीडियोग्राफी एवं सतत पुलिस निगरानी के माध्यम से प्रत्येक गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाएगी। • संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों, प्रमुख धार्मिक स्थलों तथा भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी एवं मोबाइल गश्ती दलों की प्रभावी तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस आयुक्त द्वारा धर्मगुरुओं से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों की जानकारी प्राप्त की गई तथा आपसी भाईचारा, सामाजिक सौहार्द एवं शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखते हुए पर्व सम्पन्न कराने की अपील की गई। जनपद में लगभग 700 मस्जिदों एवं करीब 80 ईदगाहों में बकरीद की नमाज अदा की जाएगी। सभी स्थलों पर सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु पर्याप्त पुलिस बल एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। सभी अधिकारी एवं थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमणशील रहकर नियमित गश्त करें तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु पुलिस एवं प्रशासन के मध्य प्रभावी समन्वय बनाए रखें।
bakhrid की कहानी है दिलचस्प
बकरीद पैगम्बर हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। दरअसल खुदा ने हजरत इब्राहिम का इम्तिहान लेने के लिए ख्वाब में हुक्म दिया कि इब्राहिम अपनी सबसे अजीज चीज़ रब के लिए कुर्बानी दें। हजरत इब्राहिम के लिए सबसे अजीज उनके साहबजादे हजरत इस्माइल थे, जिसकी कुर्बानी के लिए वे रब की रज़ा के लिए तैयार हो गए। उन्हे कुर्बानी के लिए ले भी गये मगर ऐन कुर्बानी से पहले रब ने हजरत इस्माईल की जगह ये कहते हुए जेबाह के लिए दुम्बा भेज दिया कि वो हज़रत इब्राहिम का इम्तेहान ले रहे थे और इम्तेहान में वो पास हो गये, तभी से कुर्बानी का पर्व मनाया जाता है।
इस साल 28 मई को पूरे देश में बकरीद का पर्व मनाया जाएगा। ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज का टाइम टेबल जारी हो चुका है। सुबह पौने 6 बजे से लेकर 10.00 बजे तक ईदुल अजहा की नमाज अदा की जाएगी। दुनिया भर के मुसलमान ईद की तरह कुर्बानी पर भी गरीबों का खास ख्याल रखते हैं। कुर्बानी के सामान का तीन हिस्सा बांटकर एक हिस्सा गरीबों को दिया जाता है। दो हिस्सों में एक खुद के लिए और दूसरा हिस्सा दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए रखा जाता है। मुसलमानों का विश्वास है कि पैगंबर हजरत इब्राहिम की कठिन परीक्षा ली गई। अल्लाह ने उनको अपने बेटे पैगम्बर हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने को कहा जिसमें वो पास हो गये।
ईदुल अजहा की नमाज का वक्त
मस्जिद याकूब शहीद नगवां 7.00 बजे मस्जिद रज़ा मदनपुरा 6.45 बजे मुगलिया शाही जामा मस्जिद बादशाह 6.45 बजे मस्जिद जहांगीर हटिया मदनपुरा 6.30 बजे, शाही जामा मस्जिद ज्ञानवापी 7.30 बजे, आलमगीर मस्जिद धरहरा 7.00 बजे, मस्जिद सुग्गा गड्ही (मौलाना शाह) कोयला बाजार 6.45 बजे, जामा मस्जिद, नदेसर 7.00 बजे।
नाट्य के माध्यम से गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश
F.Farooqui babu/ Ajeet Singh rajpoot
dil india live (Varanasi). रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में महाप्रबंधक आशुतोष पंत के नेतृत्व में 15 मई 2026 से 5 जून 2026 तक “विश्व पर्यावरण दिवस-2026” अभियान चलाया जा रहा है। उत्साह एवं जनभागीदारी के साथ मनाया जा रहे अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, ऊर्जा संरक्षण, जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास के प्रति समाज में व्यापक जागरूकता उत्पन्न करना है।
इसी क्रम में 26 मई को बरेका स्थित जलालीपट्टी मार्केट में “हम सबकी जिम्मेदारी” विषय पर एक प्रभावशाली एवं जन-जागरूकता से परिपूर्ण नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। बरेका नाट्य दल द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने अपनी जीवंत अभिनय शैली, प्रभावशाली संवादों एवं सामाजिक संदेशों के माध्यम से उपस्थित नागरिकों एवं कर्मचारियों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
नाटक के माध्यम से कलाकारों ने पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देते हुए जल एवं ऊर्जा बचाने, अधिकाधिक वृक्षारोपण करने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा स्वच्छ एवं हरित वातावरण बनाए रखने के लिए लोगों को प्रेरित किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए पर्यावरण सुरक्षा के संदेश को सराहा।
कार्यक्रम में मुख्य संरक्षा अधिकारी जितेंद्र अग्रवाल, उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर/पीओएच राजेश कुमार, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
नुक्कड़ नाटक का निर्देशन सुधाकर मनी द्वारा किया गया। नाटक में आलोक कुमार सिंह, नीरज कुमार सिंह, सुशील कुमार त्रिपाठी, मुकेश कुमार दुबे, अविनाश कुमार सिंह, शरद कुमार श्रीवास्तव, बहादुर प्रसाद एवं अमिताभ प्रथम कुमार ने अपनी प्रभावशाली एवं आकर्षक प्रस्तुति से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं हरित भविष्य के निर्माण हेतु सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।
दो साल से लोगों की खिदमत कर रही है परवाज़ वेलफेयर सोसायटी
dil india live (Varanasi). परवाज़ वेलफेयर सोसायटी की ओर से लगातार तकरीबन दो साल से सामाजिक कार्य को निःशुल्क किया जा रहा है। परवाज़ वेलफेयर सोसायटी के प्रमुख मौलाना हसीन अहमद हबीबी बताते हैं कि सोसायटी की ओर से लोगों का फैमिली कार्ड, आयुष्मान कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, वक्फ रजिस्ट्रेशन समेत तमाम काम निःशुल्क किया जा रहा है।
इसके साथ ही एसआईआर और अब जनगणना के लिए अलग-अलग मुहल्लों में कैंप लगाकर लोगों की मदद की जा रही है। इसी क्रम में 26 मई को मदनपुरा में हटिया मस्जिद के सामने हाजी जलालुद्दीन के पास कैंप लगाकर जन गणना के लिए जागरुकता अभियान चलाया जाएगा साथ ही अन्य जरूरी कार्य भी संपादित होंगे। उन्होंने लोगों से अपील किया है कि ज्यादा से ज्यादा लोग कैंप का लाभ उठाएं।
गाज़ी मियां का लगा मेला, उमड़ा दोनों वर्ग का हुजूम
सुल्तान क्लब ने लगाया चिकित्सा शिविर
Varanasi (dil India live)। बड़ी बाजार स्थित हज़रत सैयद सालार मसूद (गाजी मियां) की दरगाह पर शनिवार को शुरू हुआ मेला इतवार अपने शबाब पर पहुंच गया।मेले में लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। इस दौरान सुल्तान क्लब के मेम्बर्स लोगों की खिदमत में जुटे दिखाई दिए। लोगों का हुजूम देर रात तक अस्थाई दुकानों पर खरीदारी करने जुटा हुआ था।
उधर देर रात सनाउल्लाह के मकान से बारात निकली जो विभिन्न रास्तों से होकर सलारपुर बड़ी बाजार पहुंची। दरगाह में बारात आते ही लोगों ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। शादी की रस्म शुरू हुई थी कि किसी बात को लेकर औरतों से बारतियों की बहस हो गई तभी पास में रखा हुआ मटका टूट गया और बात बढ़ गई। लोगों ने बीच बचाव किया, समझाया मगर बाराती नहीं माने तेज हवाएं चलने लगी, शादी टूट गई, बारात वापस लौट गयी।
बारात में हिंदू और मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली।
इस मौके पर लगे मेले में पूर्वांचल भर से हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। सदर हाजी सेराजुददीन व गद्दीनशीं हाजी एजाजुद्दीन हाशमी कमेटी के लोगों के साथ व्यवस्था संभाले हुए थे। हाजी एजाजुद्दीन हाशमी ने बताया कि मेले की मान्यता है कि जिस किसी भी जायरीन की मुराद पूरी होती है, वो इस मेले में आकर चादर, मलीदा वगैरह चढ़ाते हैं। मेले में पूरे पूर्वांचल भर से लोग आते हैं। समाचार लिखे जाने तक गाजी मियां के दर पर दोनों मज़हब का जमावड़ा था।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण बढाने के उद्देश्य के निकली भारत विज्ञान यात्रा
विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों का किया गया प्रस्तुतिकरण
dil india live (Varanasi). गोरखपुर से वाराणसी पहुंची भारत विज्ञान यात्रा के सदस्यों का भंदहा कला स्थित आशा ट्रस्ट परिसर में पहुचने पर भव्य स्वाग्य किया गया । इस यात्रा में गोरखपुर के विभिन इंटर कालेजों के विज्ञान विषय के प्राध्यापक शामिल हैं जिनका उद्देश्य बच्चो को विज्ञान के छोटे प्रयोगों को आसानी से समझाना है। इस अवसर पर अभिनंदन करते हुए आशा ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशक्ति को विकसित करने की बहुत आवश्यकता है ऐसे में इस तरह के जागरूकता अभियानों का महत्व है।
यात्रा के संयोजक एस टी अली ने बताया कि 'भारत विज्ञान यात्रा' एक प्रमुख शैक्षणिक व प्रेरणादायक अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छात्रों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के प्रति जागरूक करना है, ताकि 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में युवा प्रतिभाओं का योगदान सुनिश्चित किया जा सके।
यात्रा दल में शामिल सदस्यों द्वारा विज्ञान विशेषकर रसायन के विभिन्न प्रयोगों का प्रस्तुतिकरण करके उसके महत्व को विस्तार से समझाया गया।
इनकी रही खास मौजूदगी यात्रा दल में आयुष शर्मा, सत्यम यादव, दिवाकर, खुश्बुद्दीन भी शामिल रहे, कार्यक्रम संयोजन में सौरभ चन्द्र, अवनीश पाण्डेय, अमित कुमार, दीन दयाल सिंह, प्रदीप सिंह, वैभव पाण्डेय, सनी, ब्रजेश कुमार, रमेश प्रसाद आदि की प्रमुख भूमिका रही।