बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

Sarjana में दिखा पर्यावरण संरक्षण और धरती के प्रति संवेदनशीलता

फेस पेंटिंग प्रतियोगिता ने छात्राओं की कलात्मक अभिव्यक्ति को दिया नया आयाम

छात्राओं द्वारा उकेरी गई कृतियों से संवाद करते कला प्रेमी 




dil india live (Varanasi). VKM Varanasi (वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा में 4 फ़रवरी 2026 को मान्यवर मोहे द्वारा प्रायोजित वार्षिक सर्जना 2025-26 युवा सांस्कृतिक महोत्सव के अंतर्गत विविध प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया। प्राचार्या प्रोफ़ेसर रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन तथा प्रबंधक उमा भट्टाचार्य के संरक्षण में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य छात्राओं की सृजनात्मक प्रतिभा भाषिक-कौशल कलात्मक दक्षता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को प्रोत्साहित करना रहा।



महोत्सव का शुभारंभ चित्र वर्णन प्रतियोगिता से हुआ, जिसमें छात्राओं ने दिए गए चित्रों के आधार पर सजीव प्रभावशाली एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। इस कुल 33 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सर्जना कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. आरती कुमारी एवं डॉ. सरोज उपाध्याय थी। कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजक डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव एवं डॉ. सौमिली मंडल ने किया। इसी क्रम में दूसरा कार्यक्रम पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय वसुंधरा रखा गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और धरती के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना था। कुल 28 प्रतिभागियों ने रंगों और रचनात्मकता के माध्यम से पृथ्वी-रक्षा का प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किया। इसके साथ ही वाग्मिता प्रतियोगिता, का आयोजन किया गया जो जल, जंगल, ज़मीन जैसे अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय पर आधारित थी। कुल 47 प्रतिभागियों ने प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर स्पष्ट तार्किक और सशक्त विचार प्रस्तुत किया। यह प्रतियोगिता महोत्सव के सबसे प्रभावशाली कार्यक्रमों में से एक रही। महोत्सव के अंतर्गत फेस पेंटिंग प्रतियोगिता ने भी छात्राओं की कलात्मक अभिव्यक्ति को एक नया आयाम दिया। 


प्रकृति : जीवन आत्मा, विषय पर आधारित इस ऑन-द-स्पॉट प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने प्रकृति के विविध रूपों व संदेशों को चेहरे पर नयनाभिराम कला के रूप में चित्रित किया। प्राकृतिक रंगों, रचनात्मकता और पर्यावरणीय चेतना का सुंदर संगम इस प्रतियोगिता की विशेषता रही। महोत्सव का अंतिम कार्यक्रम हस्तशिल्प प्रतियोगिता रहा, जो सेमिनार हॉल में अपराह्न 4 बजे आयोजित हुई। परंपरा और प्रकृति का संगम, विषय पर आधारित इस प्रतियोगिता में छात्राओं ने मिट्टी, लकड़ी, पत्थर आदि प्राकृतिक माध्यमों से तैयार अपने हस्तनिर्मित कार्यों के माध्यम से मौलिकता और सृजनशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सभी प्रतियोगिताओं में छात्राओं ने अपनी प्रतिभा, कल्पनाशक्ति तथा सृजनात्मक क्षमता का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया, जिससे सर्जना महोत्सव महाविद्यालय के सांस्कृतिक जीवन में एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। 

इन कार्यक्रमों का संचालन व संयोजन डॉ. पूनम वर्मा, डॉ. दीक्षा जायसवाल, डॉ. शशिकेश कुमार गोंड तथा डॉ. आरती चौधरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एवं प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन जिन निर्णायकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से किया, उनमें मालविका, राजलक्ष्मी जायसवाल, डॉ. सुधा चौबे, डॉ. वर्षा सिंह, डॉ. नेहा वर्मा, डॉ. कल्पना द्विवेदी, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. रवि कुमार, सुशील कुमार यादव, अंजू लता सिंह, डॉ. खुशबू मिश्रा, प्रवीरा सिन्हा, प्रो. संगीता देवड़िया, प्रो. गरिमा उपाध्याय तथा डॉ. प्रियंका प्रमुख रूप से सम्मिलित रहीं।

Education : शिक्षा चौपाल में अभिभावकों के साथ हुआ सीधा और आत्मीय संवाद

'शिक्षा चौपाल' में गूंजा बच्चों के सपनों और अभिभावकों के विश्वास का स्वर




dil india live (Varanasi). कंपोजिट विद्यालय कोटवां (विकास खंड चिरईगांव) में 'शिक्षा चौपाल' का आगाज़ एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) विज्ञान रश्मि त्रिपाठी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान छात्राओं ने सरस्वती वंदना नृत्य से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस मौके पर कंपोजिट विद्यालय कोटवा के छात्र-छात्राओं ने अनेक मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां से सभी का खूब मंनोरंजन किया।

इस मौके पर कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण वह था जब  अभिभावकों के साथ सीधा और आत्मीय संवाद किया गया। जिसमें उन्होंने खुल कर अपनी भावनाएं व्यक्त की। शुरुआत में अपने काम को छोड़कर आने के कारण चिंतित अभिभावकों का मन तब गदगद हो गया जब उन्होंने नन्हें बच्चों को आत्मविश्वास के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते देखा। बच्चों के सपनों को सुनकर अभिभावक भावुक हो उठे और उन्होंने संकल्प लिया कि वे अब बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजेंगे।


अभिभावकों और बच्चों की बातें सुनने के बाद, एआरपी रश्मि त्रिपाठी ने पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा और विभागीय बिंदुओं पर अपनी बात रखी और साथ ही प्रेरणा दिया कि किस प्रकार अभिभावक और अध्यापक मिलकर एक शानदार विद्यालय बना सकते है और बच्चों के सपने सच कर सकते हैं। विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत कर सकते हैं,संचालन करते हुए वेणु टकसाली ने कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उनका शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित करना है। दीक्षा ऐप, स्मार्ट क्लास और विज्ञान किट के माध्यम से बच्चों में जिज्ञासा पैदा करना है। अभिभावकों द्वारा बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने और शिक्षकों के संपर्क में रहने की प्रतिबद्धता। 


शिक्षा के प्रति समर्पण दिखाने वाले शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया। इसमें प्रवीण तिवारी (कंपोजिट विद्यालय कोटवां), अनुराधा भार्गव (प्राथमिक विद्यालय सराय मोहाना) राजेन्द्र प्रसाद (प्राथमिक विद्यालय नेवादा), विनोद कुमार उपाध्याय (प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर,एहतेशामुल हक (प्राथमिक विद्यालय गोराकला) एवं सम्मानित निपुण  विद्यार्थी में अभिमन्यु (कंपोजिट विद्यालय कोटवां), अनुष्का (प्राथमिक विद्यालय सराय मोहाना), संध्या (प्राथमिक विद्यालय नेवादा), दिव्यांश (प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर), सृष्टि  (प्राथमिक विद्यालय गौराकला), विद्यालय के प्रधानाध्यापक राम सिंह ने अभिभावकों के विद्यालय के प्रति बढ़ते लगाव की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की शिक्षिका वेणु टकसाली ने किया। अंत में ARP रश्मि त्रिपाठी ने सभी अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापन दिया। खण्ड शिक्षा अधिकारी प्रीति सिंह ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कार्यक्रम की सार्थकता की सराहना की। कार्यक्रम में भरी संख्या में अभिभावक मौजूद थे।

जब इस मशहूर शायर की आंखों से निकला अश्क का सैलाब

अजमेर का यादगार नातिया मुशायरा और जिगर मुरादाबादी के हालात





dil india live (Varanasi). अजमेर शरीफ़ में एक नातिया मुशायरा था। फेहरिस्त बनाने वालों के सामने यह बड़ी मुश्किल थी कि जिगर मुरादाबादी को इस मुशायरे में कैसे बुलाया जाए। वे खुले रिंद थे और नातिया मुशायरे में उनकी शिरकत आसान नहीं थी। अगर फेहरिस्त में उनका नाम न रखा जाए तो फिर मुशायरा ही क्या रह जाता। आयोजकों के बीच कड़ा मतभेद पैदा हो गया। कुछ उनके हक़ में थे और कुछ खिलाफ़।

दरअसल जिगर का मामला ही शुरू से बहुत विवादास्पद रहा था। बड़े-बड़े शैख़ और आरिफ़-बिल्लाह, उनकी शराबनौशी के बावजूद उनसे मोहब्बत करते थे। उन्हें गुनहगार तो समझते थे, मगर सुधार के योग्य। शरियत के सख़्त पाबंद उलेमा भी उनसे नफ़रत करने के बजाय अफ़सोस करते थे कि हाय, कैसा अच्छा आदमी है, किस बुराई का शिकार हो गया। आम लोगों के लिए वे एक बड़े शायर थे, लेकिन थे शराबी। इन तमाम रियायतों के बावजूद उलेमा और शायद अवाम भी यह इजाज़त नहीं दे सकते थे कि वे नातिया मुशायरे में शरीक हों।

आख़िर बहुत सोच-विचार के बाद मुशायरे के आयोजकों ने फैसला किया कि जिगर को दावत दी जानी चाहिए। यह इतना साहसिक फैसला था कि इससे बड़ा जिगर की इज़्ज़त का कोई इकरार हो ही नहीं सकता था। जब जिगर को बुलाया गया तो वे सिर से पाँव तक काँप उठे।

“मैं गुनहगार, रिंद, सियाहकार, बदनसीब — और नातिया मुशायरा! नहीं साहब, नहीं।”

अब आयोजकों के सामने यह समस्या थी कि जिगर साहब को कैसे तैयार किया जाए। उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे और होंठों से इनकार। नातिया शायर हमीद सिद्दीकी ने उन्हें मनाने की कोशिश की, उनके मुरब्बी नवाब अली हसन ताहिर ने प्रयास किया, लेकिन वे किसी भी हाल में राज़ी नहीं हो रहे थे। आख़िरकार असगर गोंडवी ने हुक्म दिया और जिगर ख़ामोश हो गए।

सिरहाने बोतल रखी थी, उसे कहीं छिपा दिया। दोस्तों से कह दिया कि कोई उनके सामने शराब का नाम तक न ले। दिल पर जैसे कोई ख़ंजर से लकीर-सी खींचता था, वे बे-इख़्तियार शराब की ओर दौड़ते थे, मगर फिर रुक जाते थे। लेकिन मुझे नात लिखनी है। अगर शराब का एक क़तरा भी हलक़ से उतरा, तो किस ज़बान से अपने आका की मदह लिखूँगा। यह मौक़ा मिला है तो मुझे इसे खोना नहीं चाहिए। शायद यह मेरी बख़्शिश की शुरुआत हो। शायद इसी बहाने मेरी इस्लाह हो जाए, शायद अल्लाह को मुझ पर तरस आ जाए! एक दिन गुज़रा, दो दिन गुज़र गए। वे सख़्त अज़ीयत में थे। नात के मज़मून सोचते थे और ग़ज़ल कहने लगते थे। सोचते रहे, लिखते रहे, काटते रहे, लिखे हुए को काट-काट कर थकते रहे। आख़िर एक दिन नात का मतला हो गया।

फिर एक शेर हुआ, फिर तो जैसे बारिश-ए-अनवार हो गई। नात मुकम्मल हुई तो उन्होंने सज्द-ए-शुक्र अदा किया। मुशायरे के लिए इस तरह रवाना हुए जैसे हज को जा रहे हों। जैसे कौनेन की दौलत उनके पास हो। जैसे आज उन्हें शोहरत की सिदरत-उल-मुन्तहा तक पहुँचना हो।

उन्होंने कई दिनों से शराब नहीं पी थी, लेकिन हलक़ सूखा नहीं था। इधर तो यह हाल था, दूसरी तरफ़ मुशायरा-गाह के बाहर और शहर के चौराहों पर एहतिजाजी पोस्टर लग गए थे कि एक शराबी से नात क्यों पढ़वाई जा रही है। लोग भड़के हुए थे।

अंदेशा था कि जिगर साहब को कोई नुक़सान न पहुँच जाए। यह ख़तरा भी था कि लोग स्टेशन पर जमा होकर नारेबाज़ी न करें। इन हालात को देखते हुए आयोजकों ने जिगर की आमद को ख़ुफ़िया रखा था। वे कई दिन पहले अजमेर शरीफ़ पहुँच चुके थे, जबकि लोग समझ रहे थे कि वे मुशायरे वाले दिन आएँगे।

जिगर अपने ख़िलाफ़ होने वाली इन कार्रवाइयों को ख़ुद देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे।

कहां फिर यह मस्ती, कहां ऐसी हस्ती

जिगर की जिगर तक ही मैख़्वारियां हैं

आख़िर मुशायरे की रात आ गई। जिगर को बड़ी सुरक्षा के साथ मुशायरे में पहुंचा दिया गया। मंच से आवाज़ उभरी—

“रईस-उल-मुतग़ज़्ज़िलीन हज़रत जिगर मुरादाबादी!” ……

इस ऐलान के साथ ही एक शोर उठ खड़ा हुआ। जिगर ने बड़े धैर्य के साथ मजमे की ओर देखा… और प्रेम से भरे स्वर में बोले—

“आप लोग मुझे हूट कर रहे हैं, या रसूल पाक की नात को—जिसे पढ़ने की सआदत मुझे मिलने वाली है और जिसे सुनने की सआदत से आप अपने आप को महरूम करना चाहते हैं?”

शोर को जैसे सांप सूंघ गया। बस यही वह विराम था, जब जिगर के टूटे हुए दिल से यह आवाज़ निकली—

एक रिंद है और मद्हत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

हां, कोई नज़र-ए-रहमत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

जो जहां था, ठहर गया। ऐसा लग रहा था जैसे उनकी ज़बान से शेर अदा हो रहा हो और क़बूलियत का परवाना अता किया जा रहा हो।

नात क्या थी—गुनहगार के दिल से निकली हुई आह थी, पनाह की ख़्वाहिश थी, आंसुओं की सबील थी, बख़्शिश का ख़ज़ाना थी। वे ख़ुद रो रहे थे और सबको रुला रहे थे। दिल नरम हो गए, मतभेद मिट गए। रहमत-ए-आलम का क़सीदा था—भला ग़ुस्से की खेती कैसे हरी रह सकती थी!

“यह नात इस शख़्स ने कही नहीं है, इससे कहलवाई गई है।” मुशायरे के बाद हर ज़बान पर यही बात थी। 

जिगर मुरादाबादी की वो नात देखें 

एक रिंद है और मद्हत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

हां, कोई नज़र-ए-रहमत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

नज़र का दामन तंग है, और जल्वों की फ़रावानी

ऐ तलअत-ए-हक़, तलअत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

ऐ ख़ाक़-ए-मदीना, तेरी गलियों के सदक़े

तू ख़ुल्द है, तू जन्नत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इस तरह कि हर सांस इबादत में मशग़ूल हो

देखूं मैं दर-ए-दौलत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इश्क़ के ग़म की एक नंग भी दीदार की मुन्तज़िर है

सदक़े तेरे, ऐ सूरत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

कौनेन का ग़म, याद-ए-ख़ुदा और शफ़ाअत

दौलत है यही, दौलत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

ज़ाहिर में ग़रीब-उल-ग़ुरबा फिर भी

यह आलम-शाहों से बढ़कर है सत्वत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इस उम्मत-ए-आसी से न मुंह फेर, ख़ुदाया

नाज़ुक है बहुत ग़ैरत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

कुछ हमको नहीं काम, जिगर, और किसी से

काफ़ी है बस एक निस्बत-ए-सुल्तान-ए-मदीना।।

(सोशल मीडिया से)

BHU और SAI इंस्टिट्यूट के बीच जनहित आधारित नवाचार सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

महिला उद्यमिता व कौशल विकास को मिलेगी गति 

बीएचयू टीम का साईं इंस्टिट्यूट परिसर में भ्रमण



dil india live (Varanasi). बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलपति के मार्गदर्शन से विश्वविद्यालय और समुदाय के बीच समन्वित विकास के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत, बीएचयु के बायोनेस्ट एवं रूरल डेवलपमेंट विभाग की विशेषज्ञ टीम ने आज साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, बसनी, वाराणसी का भ्रमण किया। इस विज़िट का उद्देश्य विश्वविद्यालय की अकादमिक विशेषज्ञता और साईं इंस्टिट्यूट के जमीनी अनुभव को जोड़ते हुए महिला उद्यमिता, कौशल विकास एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन हेतु संयुक्त सहयोग मॉडल विकसित करना है।

टीम ने संस्थान में संचालित विभिन्न कार्यक्रमों का अवलोकन किया, जिनमें महिला उद्यमिता प्रशिक्षण, हर्बल एवं प्राकृतिक उत्पाद निर्माण, फूड प्रोसेसिंग, डिजिटल मार्केटिंग, सूक्ष्म उद्यम प्रबंधन तथा ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं के लिए कौशल विकास पहल शामिल हैं।


ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा तकनीकी मार्गदर्शन

बैठक के दौरान बीएचयु और साईं इंस्टिट्यूट के मध्य एक शैक्षणिक एवं जनहित आधारित एमओयु  एक नॉन-कमर्शियल डेमो एवं लर्निंग आउटलेट की स्थापना, तथा संयुक्त अकादमिक–फील्ड प्रोजेक्ट्स पर विस्तृत चर्चा हुई, जिससे BHU के विद्यार्थियों को फील्ड एक्सपोज़र, इंटर्नशिप एवं रिसर्च के अवसर मिलेंगे, वहीं ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी मार्गदर्शन एवं बाज़ार से जुड़ाव प्राप्त होगा।

साईं इंस्टीट्यूट के निदेशक  अजय कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के नवाचारों को वैज्ञानिक एवं अकादमिक पहचान दिलाना है। BHU जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के साथ यह सहयोग ज्ञान और जमीनी उद्यमिता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा, जिससे महिलाओं की आजीविका और आत्मनिर्भरता दोनों सशक्त होंगी।”


बीएचयु टीम का नेतृत्व कर रहे बायोनेस्ट के मुख्य समन्वयक प्रोफेसर राजेश्वर प्रसाद सिन्हा ने कहा, “यह पहल विश्वविद्यालय की सामाजिक उत्तरदायित्व भावना को मजबूत करती है। विद्यार्थियों को वास्तविक फील्ड एक्सपोज़र, रिसर्च और सामुदायिक नवाचारों के साथ कार्य करने का अवसर मिलेगा। यह विश्वविद्यालय–समुदाय साझेदारी का एक उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।”

 बीएचयु टीम में रूरल डेवलपमेंट के हेड एवं प्रोफ़ेसर अलोक पाण्डेय, बीएचयु के सहायक रजिस्टार हरीश श्रीवास्तव, बायोनेस्ट के मुख्य साइंसफिटिक ऑफिसर डॉ दुर्गेश कुमार सिंह, विश्वनाथ शुक्ला आदि लोग उपस्तिथ रहे. यह पहल “ज्ञान से समाज” की अवधारणा को साकार करते हुए समावेशी विकास एवं महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

DAV PG College में RSS के शताब्दी वर्ष पर डीएवी में राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन

अपने असल इतिहास को जान ले युवा तो बदल जायेगा भारत- प्रो. जेपी लाल




dil india live (Varanasi). । डीएवी पीजी कॉलेज में आईसीएसएसआर, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित पंच परिवर्तन और भविष्य का भारत विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन मंगलवार को समापन सत्र में अध्यक्षता करते हुए झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. जयप्रकाश लाल ने कहा कि भारत के इतिहास को बार बार दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से बदला गया, हमारे पुराणों पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया, जिसके कारण समाज मे विषमता आयी, आज युवा सिर्फ अपने गौरवशाली इतिहास को जान ले तो भारत को बदलने से कोई रोक नही सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस संगोष्ठी में प्रो.जेपी लाल ने कहा कि संघ के पंच परिवर्तन की सफलता जन जन के सहयोग से ही संभव होगा। 

        मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काशी प्रान्त प्रचारक रमेश कुमार ने कहा की हमारे पतन का मुख्य कारण आंतरिक विभेद ही रहा, भारत का भाग्य तभी बदलेगा जब जन जन सामाजिक समरसता के साथ रहेंगे। विशिष्ट वक्ता इग्नू के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद डॉ. नागेश्वर राव ने कहा की 2047 में विकसित भारत के केंद्र में गरीब, किसान, महिला और युवा शक्ति है। महाशक्ति बनने के लिए जो समस्याएं है उनका हल संघ के मूल सिद्धांत में निहित है।

       विभिन्न सत्रों में विशिष्ट व्याख्यान में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि अधिकार के लिए तो सभी जागरूक रहते है लेकिन अपने कर्त्तव्य को भूल जाते है, नागरिक कर्तव्य बोध द्वारा ही भविष्य का भारत बनाया जा सकता है। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि पंच परिवर्तन ही भारत को 21 वीं सदी की महाशक्ति बनायेगा। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि समाज मे जागरण लाने की आवश्यकता है, इसमें संघ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।

कॉलेज के प्रबंधक अजीत सिंह यादव ने अतिथियों को रुद्राक्ष की माला, तुलसी का पौधा और प्रभुश्रीराम का स्वरूप प्रदान कर सम्मानित किया। स्वागत प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ. शान्तनु सौरभ ने दिया। रिपोर्ट सह संयोजक डॉ. सिद्धार्थ सिंह ने प्रस्तुत किया। विभिन्न सत्रों का संचालन डॉ. रमेन्द्र सिंह, डॉ. राजेश झा एवं डॉ. दीपक शर्मा ने किया। इस अवसर उप प्राचार्य द्वय प्रो. संगीता जैन, प्रो.राहुल, डॉ. पारुल जैन, डॉ.संजय सिंह सहित समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 4 सत्रों में 20 विद्वानों ने रखे विचार

संगोष्ठी में दूसरे दिन 3 अलग अलग सत्रों में देशभर के 20 विद्वानों ने विचार रखें, उनमें संपर्क प्रमुख दीनदयाल, गुजरात केंद्रीय विवि के पूर्व कुलपति आर.एस दुबे, आईएफएस अधिकारी रवि कुमार सिंह, प्रो. बंदना झा (जेएनयू), प्रो.निशा सिंह (विद्यापीठ), प्रो. मनीषा मल्होत्रा (बीएचयू), डॉ. राजीव सिंह (हरियाणा केंद्रीय विवि), प्रचारक नितिन, शिवम कुमार सहित दो दर्जन विशेषज्ञों ने विचार रखे। इसके साथ ही तकनीकी सत्र में दूसरे दिन 118 शोधपत्र पढ़े गए। 

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

Shab-E-Baraat: Varanasi Main इबादत में मशगूल रहे लोग, माहौल है नूरानी

बुजुर्गो-अजीजों के दरों पर उमड़े अकीदतमंद, पढ़ी फातेहा मांगी दुआएं 







सरफराज/रिजवान 

Varanasi (dil India live)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शबे बरात पर देर रात तक लोग इबादतों में मशगूल नज़र आएं। रौशनी के बीच इबादतगाह और कब्रिस्तान जहां जायरीन से गुलजार रही, वहीं लोगों का हुजूम फातेहा पढ़ने व दुआएं मगफिरत मांगने के लिए बुजुर्गों के दर पर उमड़ा हुआ नजर आया। यह सिलसिला पूरी रात चलेगा। चले भी क्यों नहीं इबादत और मगफिरत कि रात जो है।

दरअसल इस्लाम में शब-ए-बरात की खास अहमियत है। इस्लामिक कैलेंडर का आठवां महीना शाबान का महीना है। इस महीने की 14 तारीख का दिन गुजार कर जो शब आती है उस 15 वीं शब की रात में शब-ए-बरात (मगफिरत की रात) मनाया जाता है। मंगलवार की रात को देश दुनिया की तरह अपने शहर बनारस में भी शबे बरात पर सारा जहां रौशन नजर आया। शब-ए-बरात इबादत, फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात मानी जाती है। इसीलिए तमाम मुस्लिमों ने रात में इबादत शुरू किया और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी, यह सिलसिला पूरी रात चलेगा। मर्द ही नही घरों में ख्वातीन भी शबे बरात पर इबादत करती नज़र आयी। इबादत में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हुए। 









इससे पहले शाम को मगरिब की अजान होने के साथ शब-ए-बरात की इबादत शुरू हो गयी। यह सिलसिला बुधवार को फजर की नमाज तक चलेगा। इस दौरान काफी लोग शाबान का नफिल रोजा भी रखते हैं। जो लोग रोज़ा रहेंगे वो बुधवार को अल सहर सहरी करके रोज़ा रहेंगे और शाम में मगरिब की अज़ान के साथ इफ्तार करके रोज़ा खोलेंगे।


क्या है शब-ए-बरात 

दरअसल शबे बरात से ही रुहानी साल शुरू होता है। इस रात रब फरिश्तों की डय़ूटी लगाता है। लोगों के नामे आमाल लिखे जाते हैं। किसे क्या मिलेगा, किसकी जिंदगी खत्म होगी। किसके लिये साल कैसा होगा, पूरे साल किसकी जिन्दगी में क्या उतार-चढ़ाव आयेगा। साथ ही पुरखों की रूह अपने घरों में लौटती है जिसके चलते लोग घरों को पाक साफ व रौशन रखते हैं। सुबह से शाम तक घरों में ख्वातीन हलवा व शिरनी बनाने में जुटी हुई थी। शाम में वो भी इबादत में मशगूल हो गई। 

दिखा अकीदत का हुजूम

बनारस शहर के प्रमुख कब्रिस्तान टकटकपुर, हुकुलगंज, भवनिया कब्रिस्तान गौरीगंज, बहादर शहीद कब्रिस्तान रविन्द्रपुरी, कबीरनगर कब्रिस्तान (निकट संजय शिक्षा निकेतन), बजरडीहा का सोनबरसा कब्रिस्तान, जक्खा कब्रिस्तान, सोनपटिया कब्रिस्तान, बेनियाबाग स्थित रहीमशाह, दरगाहे फातमान, चौकाघाट, रेवड़ीतालाब, सरैया, जलालीपुरा, राजघाट समेत बड़ी बाजार, पीलीकोठी, पठानी टोला, पिपलानी कटरा, बादशाहबाग, फुलवरिया, लोहता, बड़ागांव, रामनगर, टेंगरा मोड़ आदि इलाक़ों की कब्रिस्तानों और दरगाहों में लोगों का हुजूम फातेहा पढ़ने उमड़ा हुआ था। यहां लोगों ने शमां रौशन किया और फातेहा पढ़कर अज़ीज़ों की बक्शीश के लिए दुआएं मगफिरत मांगी। इसी के साथ शबे बरात के 15 दिनों के बाद मुक़द्दस रमजान का महीना शुरू हो जाएगा और 30 रोज़े मुकम्मल होने पर ईद आएगी।

VKM Varanasi में सांस्कृतिक महोत्सव Sarjana के दूसरे दिन जानिए क्या क्या हुए आयोजन

काव्य पाठ, डाक्यूमेन्ट्री, मेंहदी, जिरो वेस्ट संग हुई वाद-विवाद प्रतियोगिता





dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा वाराणसी में 3 फ़रवरी 2026 को मान्यवर मोहे द्वारा प्रायोजित युवा सांस्कृतिक महोत्सव सर्जना 2025-26 के अंतर्गत दूसरे दिन काव्य पाठ डाक्यूमेन्ट्री, मेंहदी, जिरो वेस्ट व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। 

प्रकृति विषय पर आधारित काव्य पाठ प्रतियोगिता ने श्रोताओं को प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टि प्रदान की। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन एवं प्रबंधक उमा भट्टाचार्य के संरक्षण में संपन्न हुआ। सर्जना की संयोजक प्रो. आरती कुमारी और डॉ सरोज उपाध्याय और काव्य पाठ की संयोजक डॉ. पूर्णिमा, डॉ. मंजू कुमारी एवं डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निर्णायक गण में अतिथि प्रो. आशा यादव, डॉ. ओ. पी. दूबे, डॉ. शांता चटर्जी एवं डॉ. सुप्रिया सिंह थी। प्रतियोगिता में कुल 55 छात्राओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने हिंदी, अंग्रेज़ी एवं संस्कृत भाषाओं में प्रकृति पर आधारित कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय "डिजिटल विश्व:प्रगति का साधन या मानवीय संबंधों के लिए खतरा” विषय पर प्रतिभागियों ने संतुलित एवं प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने जहां एक ओर तकनीकी विकास के लाभों पर प्रकाश डाला वहीं दूसरी ओर मानवीय संबंधों पर इसके प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त की। इस प्रतियोगिता में कुल 59 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम प्रभारी डॉ. शशिकेश के. गोंड एवं डॉ. आरती चौधरी के मार्गदर्शन में किया गया। प्रतियोगिता का निर्णायक मंडल डॉ. विजय कुमार, डॉ. आशीष कुमार सोनकर एवं प्रो. निहारिका लाल थी। इसने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, आलोचनात्मक चिंतन तथा सार्वजनिक भाषण कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


इसी कड़ी में महाविद्यालय परिसर में आज जीरो वेस्ट-अपशिष्ट अनुप्रयोग विषय पर एक विशेष रचनात्मक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की संयोजक डॉ. दीक्षा जायसवाल और डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव रहीं। इनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण और सृजनशीलता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और वसुधैव कुटुंबकम की भावना से प्रेरित इस आयोजन ने सभी में कम अपशिष्ट, अधिक सृजन का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित किया। इसी क्रम में मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में छात्राओं ने ऑन-द-स्पॉट मेहंदी डिज़ाइन बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. सौमिली मंडल रहीं। प्रतिभागियों ने स्वयं लाए मेहंदी कोन से निर्धारित एक घंटे में सुंदर डिज़ाइन प्रस्तुत किया। निर्णायक मण्डल की भूमिका में प्रो. ममता मिश्रा, डॉ. शशि प्रभा कश्यप एवं डॉ. प्रतिभा यादव थी। 



इस मौके पर यादों के झरोखे विषयक डाक्यूमेन्ट्री प्रतियोगिता में टीमों ने मोबाइल या कैमरा द्वारा 15-20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री तैयार कर प्रस्तुत किया। संयोजक डॉ. सौमिली मंडल और एच. अम्बरीश रहे तथा निर्णायक मण्डल में प्रो. पूनम पाण्डेय, डॉ. शशिकला एवं सिमरन सेठ उपस्थिति थी। छात्राओं ने अपनी रचनात्मक दृष्टि से विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और स्मरणीय विषयों पर प्रभावशाली लघु फ़िल्में प्रस्तुत की। वीडियो प्रस्तुति में तकनीकी कौशल, कहानी कहने की शैली, संपादन और भावनात्मक अभिव्यक्ति का बेहतरीन मेल देखने को मिला।