रविवार, 23 अगस्त 2026

Plantation news Varanasi 23 August 2026: Rotary club kashi or Airport authority of India ने मिलकर लगाएं 51 पौधे

पर्यावरण अमूल्य है, इसका संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी-पुनीत गुप्ता 

रोटरी क्लब काशी के प्रयास की हुई सराहना
Plantation news, Varanasi, August 2026


dil india live (Varanasi). वाराणसी में 23 अगस्त को रोटरी क्लब काशी एवं एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परिसर में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पर्यावरण के प्रति अपने योगदान अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एयरपोर्ट निदेशक पुनीत गुप्ता, सीआईएसएफ के सहायक कमांडेंट संजीव सिंह रौतेला, अकासा एयर के राहुल सिंह, मुकुल कुमार भारद्वाज एवं रोटेरियन पीडिजी संजय अग्रवाल के नेतृत्व में 51 पौधे रोपे गए।

Plantation news, Varanasi August 2026


इस अवसर पर मुख्य अतिथि पुनीत गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण अमूल्य है, इसका संरक्षण हम सबकी जिम्मेवारी है, इसके लिए रोटरी क्लब काशी का प्रयास बहुत सराहनीय है। कार्यक्रम में रोटरी क्लब काशी के वरिष्ठ रोटेरियन पीडीजी संजय अग्रवाल, पूनम अग्रवाल, अध्यक्ष राजन जायसवाल, सचिव सुभाष सिंह, संयोजक माजिद खान सहित रोटेरियन आर. एस. जायसवाल, श्याम जी रस्तोगी, आशुतोष चौबे, अजय खरे, डॉ. राजीव दूबे, दीपक गुप्ता, आर. के. गाबा, सुधीर जरीवाला, सुयश पाठक एवं अन्य रोटेरियंस उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सभी रोटेरियंस ने अपने-अपने नाम से एक-एक पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण एवं धरती को हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अध्यक्ष राजन जायसवाल और सचिव सुभाष सिंह ने अतिथियों का  अंगवस्त्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

Kazi-E-Shahar Banaras Maulana Jamil Ahmed qadri ka ऐलान: रवायतों संग निकलेगा ईद मिलाद-उन-नबी का जुलूस

जुलूस में न बजाएं डीजे, दुनिया को दिखाएं इस्लाम अमन पसंद व सादगी भरा मज़हब-शहर काजी

dil india live (Varanasi). 9 रबीउन्नूर शरीफ (1448 हिजरी) 23 August 2026 इतवार को बाद नमाज़ ए ज़ोहर काज़ी-ए-शहर मौलाना जमील अहमद क़ादरी की सदारत में मर्कज़ी दारुल कज़ा अश्फाक नगर में 12 रबीउन्नूर के जुलूस के संबंध में एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी सरपरस्ती हाजी अब्दुल अज़ीम ने फरमाई। बैठक में कसीर तादाद में उलमा ए केराम, अइम्मा ए मसाजिद व मुअज़्ज़िज़ीन शरीक हुए और मुफीद मश्वरों से नवाज़ा। 

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हर साल कि तरह इस साल भी जुलूस ए मुहम्मदी अपनी पुरानी रिवायात के मुताबिक़ सुन्नी जमइय्यतुल उलमा रेवड़ी तालाब बनारस के ज़ेरे एहतेमाम काज़ी-ए-शहर मौलाना जमील अहमद क़ादरी की कयादत में बतारीख़ 26 अगस्त 2026 ईसवी बरोज़ बुध बाद नमाज़ ए फज्र 6.30 पर अज़हरी मैदान रेवड़ी तालाब मैदान से निकलेगा। 

इन रास्तों से गुजरेगा जुलूस 

जुलूस अपने पुराने रास्तों भेलुपूर, गौरीगंज, रवींद्रपूरी, शिवाला, सोनारपुरा, पाण्डेय हवेली, मदनपुरा, गोदौलिया, ज्ञानवापी, चौक, बुलानाला, मैदागिन, कबीरचौरा, पियरी, नई सड़क, गिरजाघर होता हुआ वापस अज़हरी मैदान रेवड़ी तालाब में काज़ी-ए-शहर की दुआ पर खत्म होगा।

इन बातों पर दें खास तवज्जो 
जुलूस में अदब व एहतराम और शाइस्तगी के साथ दुरूद ए पाक व नात ए पाक पढ़ते हुए चलें। जुलूस में गाड़ियां कम से कम लाएं और तेज़ आवाज़ वाले माइक और डीजे वगैरह का इस्तेमाल हरगिज़ ना करें। हम अपने अमल से सभी को यह बताएं कि इस्लाम अमन पसंद व सादगी भरा मज़हब है। झंडा इस्लामी लें और यह ख्याल करें कि गैर मुल्की न हो। गैर ज़रूरी नारों से परहेज़ करें। झंडे में लोहे, स्टील वगैरह के पाईप का इस्तेमाल ना करें। खाने पीने की चीजें एहतेयात से तक़सीम करें, फेंक कर ना बांटें, हाथों में दें।
Kazi-E-Shahar, Banaras, Maulana Jamil Ahmed qadri

Eid miladunnabi news 23 August 2026: ईद मिलाद-उन-नबी के जश्न को अब यह गए गिनती के दिन

रोशनी से जगमगाएंगी मस्जिदें और घर, सज गया सजावटी सामानों का बाजार


dil india live (Varanasi). ईद मिलाद-उन-नबी के जश्न को अब गिनती के दिन रह गये हैं, पूर्वांचल भर में सजावट का काम शुरू हो गया है। वाराणसी, जौनपुर आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, चंदौली, मिर्ज़ापुर, भदोही, गोरखपुर, श्रावस्ती, सोनभद्र, देवरिया आदि जिले में सजावट का काम शुरू हो गया है। रोशनी से मुस्लिम इलाकों की मस्जिदें नबी की पैदाइश की पूर्व संध्या 11 रबीउल अव्वल को जगमगा उठेंगी। नूर नबी बुक डिपो के रेयाज अहमद नूर बताते हैं कि पूर्वांचल भर में मुम्बई वाया बनारस से ही सजावटी सामान सप्लाई होता है। 

आकर्षित कर रहे स्टाइलिश झंडे, झालर व बैज 

सजावटी सामानों का बाजार वाराणसी में सज गया है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में तैयारियां तेज हो गई हैं। अर्दली बाज़ार, पक्की बाजार, नई सड़क, दालमंडी, बड़ी बाजार, पीली कोठी, लोहता, मदनपुरा, पड़ाव और रामनगर समेत विभिन्न इलाकों में सजावट और धार्मिक सामग्री की दुकानें सज गई हैं। बाजारों में स्टाइलिश झंडे, झालर, बैज और अन्य सजावटी सामान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

ईद मिलाद-उन-नबी को लेकर मस्जिदों में भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मस्जिदों को विद्युत झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जा रहा है। पर्व के अवसर पर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भी आकर्षक विद्युत सजावट की जाएगी जिससे पूरा इलाका रोशनी से जगमगाता नजर आएगा।

ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर दालमंडी क्षेत्र में देर रात तक जुलूस के भ्रमण की तैयारियां भी की जा रही हैं। पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और बाजारों में खरीदारी का सिलसिला शुरू हो गया है। मुश्ताक अहमद ने बताया कि खास बात यह है कि इस बार झंडे, बैज, बिल्ले और सजावट के अन्य सामानों के दामों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। दुकानदारों के मुताबिक, ग्राहकों की सुविधा को देखते हुए सामान सामान्य कीमतों पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। पर्व को लेकर बाजारों में धीरे-धीरे रौनक बढ़ने लगी है। हालांकि दालमंडी चौड़ीकरण के चलते हुए ध्वस्तीकरण से इंतजामिया अंजुमनों के सामने तमाम तरह की चुनौतियां हैं। आसपास की गलियों में मलवा, गंदगी, सीवर जाम आदि के बीच इतना बड़ा पर्व कैसे मनाया जाए। इससे इतर सरफराज अहमद कहते हैं कि नबी का जश्न है वो खुद इंतजाम करना लेंगे। 

शनिवार, 22 अगस्त 2026

BLW Cultural News Varanasi Uttar Pradesh 22 August 2026: बरेका संस्थान ने मनाया सावन महोत्सव, महिलाओं ने उत्साह से मनाया सावन का उल्लास

पिंकी त्रिपाठी बनी 'मिस सावन'

श्रेष्ठ बैलेंस में रंजू यादव तथा म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता रही पूजा कश्यप के नाम

सावन की हरियाली, लोक संस्कृति की मिठास और महिलाओं के उत्साह से सजा सावन महोत्सव, बना यादगार


  • F. farooqui / Ajeet Singh rajpoot

dil india live (Varanasi). वाराणसी में संस्थान बरेका द्वारा सावन की हरियाली, लोक संस्कृति एवं महिला सहभागिता को समर्पित सावन महोत्सव का आयोजन हर्षोल्लास एवं रंगारंग वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर सावन के पारंपरिक उल्लास एवं उमंग को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन शिवांशी फिटनेस जोन की संचालिका बिंदु सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने विभिन्न मनोरंजक एवं रोचक प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पारंपरिक गीत-संगीत, सावन की उमंग एवं मनोरंजक खेलों ने पूरे कार्यक्रम को उत्साह और उल्लास से भर दिया।




प्रतियोगिताओं में फिटनेस, रूप एवं वस्त्र सज्जा के आधार पर पिंकी त्रिपाठी को ‘मिस सावन’ चुना गया। वहीं श्रेष्ठ बैलेंस प्रतियोगिता में रंजू यादव तथा म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता में पूजा कश्यप ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम में सुनीता, प्रिनु विश्वकर्मा, प्रतिभा, कृष्णा, संजू, रजनी यादव, गायत्री, सीमा, विभा शाही, नीलिमा, रीना, सोनी तिवारी, गायत्री तिवारी एवं सलोनी आदि महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

विजेता एवं श्रेष्ठ प्रतिभागियों को बरेका के जन संपर्क अधिकारी राजेश कुमार एवं रजनी द्वारा पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्त कर प्रतिभागियों के चेहरे पर खुशी एवं उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम को सफल बनाने में एस.के. सिंह ने व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सावन महोत्सव ने न केवल महिलाओं को मनोरंजन एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का अवसर प्रदान किया, बल्कि भारतीय लोक परंपराओं, सावन की संस्कृति एवं आपसी सौहार्द को जीवंत बनाए रखने का संदेश भी दिया।

minority news Varanasi Uttar Pradesh 22 August 2026: दालमंडी से निकला साठे का कदीमी जुलूस

अंजुमन हैदरी चौक के दर्द भरे नौहों पर हुआ जंजीर का मातम 

थम गया ग़म का अय्याम, मनेगी ईदे जेहरा की खुशियां
minority news Varanasi Uttar Pradesh: 22 August 206


dil india live (Varanasi). 22 August 2026 दिन शनिवार को दालमंडी पुरानी अदालत से स्थित शब्बीर और सफदर के इमामबाड़े से साठे का कदीमी जुलूस निकाला गया।
इसी के साथ 2 महीना 8 दिन से चले आ रहे ग़म का अय्याम मुकम्मल हो गया और अब शिया वर्ग ईदे जेहरा की खुशियों में डूबा नज़र आएगा। शब्बीर और सफदर के इमामबाड़े से अंजुमन हैदरी चौक की अगुवाई में निकाला गया यह जुलूस दालमंडी, नई सड़क, फटाक शेख सलीम, काली महाल, पितरकुंडा होता हुआ दरगाहे फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ। पढ़िए दिल इंडिया लाइव की एक रिपोर्ट और तस्वीरें व वीडियो...।





जुलूस में लियाकत अली, शराफत हुसैन नोहेख्वानी करते हुए चल रहे हैं। जुलूस में अलम, ताबूत, दुलदुल और ऊंट पर हजरत इमाम हुसैन की बेटी जनाबे सकीना का कुर्ता, इमाम हुसैन के बेटे अली असगर का झूला, अनेक शहीदों का समान प्रतीक के तौर पर दर्शाया गया था। जुलूस नई सड़क पहुंचा तो वहां जंजीर का मातम हुआ। क्या छोटे क्या बड़े, क्या बूढ़े, सब जंजीर का मातम करते हुए इमाम हुसैन से अपनी अकीदत बयां कर रहे थे।

रास्ते में कई स्थानों पर उलेमा की तकरीर हुई। इस जुलूस में मौलाना इरशाद अब्बास नकवी, मौलाना नदीम असगर ने कर्बला के मसायब बयां किए। जुलूस में या हुसैन की सदाएं बुलंद हो रही थी है और या हुसैन अलविदा कहते हुए लोग चल रहे थे। 

जुलूस में इनकी रही खास मौजूदगी 

प्रमुख रूप से असकरी रज़ा सईद, नायाब रज़ा, शाहिद, काजिम रज़ा, नायाब हुसैन,सैयद फिरोज़ हुसैन, हैदर मेहंदी, मुर्तुजा शम्सी, नदीम हुसैन, कमाल रजा, यूशा अब्बास, हसन मेहंदी, अफरोज अख्तर, शब्बीर हुसैन, शकील अहमद जादूगर आदि मौजूद थे।


mini documentary में है ancient Kashi से modern Kashi 2026 तक की civilizational journey

साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट की परिकल्पना “काशी : प्राचीन से आधुनिक तक”

यहां जानिए प्राचीन काशी 2014 में क्या था और आधुनिक काशी 2026 की विरासत, परिवर्तन और वैश्विक पहचान की यात्रा

mini documentary August 2026 Varanasi Uttar Pradesh

dil india live (Varanasi). वाराणसी, बनारस और काशी केवल एक नगर नहीं है। यह भारत की हजारों वर्षों की सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान, आध्यात्मिकता, कला, शिल्प और जीवन-दर्शन की निरंतर धारा है। समय बदला, युग बदले, परिस्थितियां बदलीं, लेकिन काशी की आत्मा और उसकी सांस्कृतिक पहचान आज भी उसी निरंतरता के साथ जीवंत है।

इसी अविरल सभ्यतागत यात्रा को प्राचीन काशी से आधुनिक काशी 2026 तक एक समग्र दृश्य-कथा के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (SIRD), वाराणसी द्वारा एक लघु डॉक्यूमेंट्री तैयार करने की पहल की जा रही है।

डॉक्यूमेंट्री का प्रस्तावित शीर्षक “काशी : प्राचीन से आधुनिक तक” सोचा गया है। प्राचीन काशी 2014, आधुनिक काशी 2026 है।

विरासत • परिवर्तन • विकास • वैश्विक पहचान

इस डॉक्यूमेंट्री में काशी की यात्रा को तीन प्रमुख चरणों में प्रस्तुत करने की परिकल्पना की गई है जो अग्रलिखित है 

प्राचीन काशी

ऋग्वेद से 2014 तक — विरासत, संस्कृति, ज्ञान एवं शिल्प की निरंतर यात्रा। इस खंड में काशी की प्राचीन सभ्यता, आध्यात्मिक एवं ज्ञान परंपरा, गंगा और घाटों, साहित्य, संगीत, कला, हस्तशिल्प एवं शिल्प परंपराओं तथा काशी की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को समेटने का प्रयास किया जाएगा।

2014 एक निर्णायक मोड़ (एक नए अध्याय की शुरुआत)

डॉक्यूमेंट्री में वर्ष 2014 को काशी की समकालीन यात्रा के एक महत्वपूर्ण संक्रमण बिंदु के रूप में प्रस्तुत करने की परिकल्पना है। इसके माध्यम से यह देखने का प्रयास होगा कि किस प्रकार काशी की प्राचीन विरासत और पहचान को साथ लेकर विकास, आधुनिक अवसंरचना, कनेक्टिविटी, पर्यटन एवं नागरिक सुविधाओं की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई।

आधुनिक काशी 2026 (विरासत • विकास • पर्यटन • जीआई एवं बौद्धिक संपदा • नवाचार • महिला उद्यमिता • स्थानीय से वैश्विक)

साईं के सुप्रिमो अजय कुमार सिंह ने देश के प्रमुख न्यूज़ पोर्टल दिल इंडिया लाइव से खास बातचीत में यह जानकारी साझा की वो कहते हैं कि आधुनिक काशी के इस चरण में विरासत संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था, भौगोलिक संकेतक (जीआई), बौद्धिक संपदा अधिकार, नवाचार, स्थानीय उत्पादों, महिला उद्यमिता, युवाओं और कारीगरों की उभरती संभावनाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।

विशेष रूप से काशी के बनारसी वस्त्र एवं ब्रोकेड, गुलाबी मीनाकारी, लकड़ी एवं धातु शिल्प तथा अन्य विशिष्ट स्थानीय उत्पादों की यात्रा को इस दृष्टिकोण से देखा जाएगा कि किस प्रकार स्थानीय प्रतिभा, परंपरागत ज्ञान और उत्पाद आधुनिक बाजार तथा वैश्विक पहचान से जुड़ सकते हैं।

केवल विकास नहीं, परिवर्तन की पूरी कहानी

इस डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य काशी को केवल एक धार्मिक अथवा पर्यटन स्थल के रूप में प्रस्तुत करना नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य काशी को भारत की जीवंत सभ्यतागत विरासत, ज्ञान परंपरा, संस्कृति, कला-शिल्प, नवाचार, उद्यमिता और आधुनिक विकास के संगम के रूप में सामने लाना है।

यह कथा केवल यह बताने का प्रयास नहीं करेगी कि काशी में क्या बदला, बल्कि यह भी दिखाने का प्रयास करेगी कि काशी ने अपनी हजारों वर्षों पुरानी आत्मा और पहचान को सुरक्षित रखते हुए समय के साथ स्वयं को किस प्रकार नए रूप में विकसित किया है।

इस यात्रा का मूल भाव होगा

विरासत, संस्कृति, ज्ञान, विकास, पर्यटन, नवाचार, स्थानीय प्रतिभा, वैश्विक पहचान

प्रामाणिकता पर विशेष जोर

डॉक्यूमेंट्री के निर्माण के दौरान काशी से संबंधित प्रामाणिक ऐतिहासिक संदर्भों, पुराने दस्तावेजों एवं छायाचित्रों, कला एवं शिल्प परंपराओं, जीआई उत्पादों, स्थानीय प्रतिभाओं, महिला उद्यमियों तथा काशी से जुड़े कम-ज्ञात लेकिन महत्वपूर्ण तथ्यों को संकलित करने का प्रयास किया जाएगा।

इसका उद्देश्य डॉक्यूमेंट्री को केवल आकर्षक दृश्य प्रस्तुति तक सीमित न रखते हुए उसे तथ्यपरक, शोधपरक, विश्वसनीय और दीर्घकाल तक संदर्भित किए जा सकने योग्य दस्तावेज के रूप में विकसित करना है।

साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट के निदेशक अजय कुमार सिंह के अनुसार, यह संस्थान के सीमित संसाधनों से किया जा रहा एक विनम्र प्रयास है, जिसका उद्देश्य काशी की उस व्यापक कहानी को सामने लाना है जिसमें अतीत की विरासत, वर्तमान का परिवर्तन और भविष्य की संभावनाएँ एक साथ दिखाई दें।

उन्होंने कहा कि “काशी को समझना केवल उसके अतीत को जानना नहीं है; काशी को समझना उस निरंतर यात्रा को समझना है, जिसमें हजारों वर्षों की विरासत आज भी वर्तमान को दिशा दे रही है और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण कर रही है।”

“काशी : प्राचीन से आधुनिक तक” इसी निरंतर यात्रा को एक ऐसी दृश्य-कथा के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है, जो काशी को स्थानीय से राष्ट्रीय और राष्ट्रीय से वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखने का अवसर प्रदान करे।

साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट (SIRD), वाराणसी द्वारा तैयार की जा रही यह डॉक्यूमेंट्री वर्तमान में अनुसंधान, सामग्री संकलन एवं रचनात्मक तैयारी के चरण में है।

Cultural News Varanasi Uttar Pradesh 21 August 2026: Bharat Ratna Ustad Bismillah Khan की 20 वीं बरसी पर दरगाहे फातमान में गूंजी शहनाई

दुआख्‍वानी में चाहने वालों ने अकीदत से हाथ उठाकर मांगी मगफिरत की दुआएं
Cultural News Varanasi Uttar Pradesh, 21 August 2026 को Bharat Ratna
दरगाहे फातमान में दुआ ख्वानी में जुटे लोग 


dil india live (Varanasi). शाहनाई के शहंशाह, भारत रत्‍न उत्‍साद बिस्मिल्लाह खान (Bharat Ratna Ustad Bismillah Khan) की 20 वीं बरसी (पुण्यतिथि) दरगाहे फातमान स्थित उस्ताद की कब्र पर अकीदत और एहतराम के साथ मनाई गई। इस मौके पर किसी ने फूल चढ़ाए तो परिजनों ने पाक कुरान की तेलावत की। यहां हुई दुआख्‍वानी में उनके चाहने वालों ने अकीदत से हाथ उठाकर मगफिरत की दुआएं मांगी। कौन थे भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान क्या हुआ आयोजन दिल इंडिया लाइव पर पढ़िए पूरी खबर, देखिए वीडियो और तस्वीरें...

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करते उस्ताद बिस्मिल्लाह खान व अन्य फाइल फोटो 

गौरतलब हो कि 21 अगस्त 2006 में भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का इंतकाल हुआ तो ऐसा लगा बनारस पर कोई बड़ी आफ़त आ गई हो। उस्ताद के सेक्रेटरी रहे एस जावेद कहते हैं कि देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजे जाने के बाद भी उस्ताद को सादगी पसंद थी पूरी दुनिया घूमी पर कभी किसी बात का उन्होंने घमंड नहीं किया। बनारस की गलियों में रिक्शे पर बैठकर घूमना और बनारसी पान का लुत्फ लेना उनकी जिंदगी का हिस्सा था। जब मोहर्रम में शहनाई से आंसुओं का नज़राना पेश करते तो जिसे शहनाई और धुन की कोई समझ भी नहीं है वो भी रो पड़ता था।

21 अगस्त 2006 को शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की सासें भले ही थम गई, लेकिन उनकी शहनाई की गूंज और बनारसी मिजाज के उनके किस्से रहती दुनिया तक याद किए जाएंगे। भारत रत्न एन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पुत्र आफाक हैदर, रिजवान हैदर ने शहनाई बजाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। वहीं बिलाल अली ने दुक्कड़ बजाकर दादा की परंपरा को निभाया।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा शुक्रवार को दरगाह फातमान में सुबह 11 बजे से दुआ ख्वानी (प्रार्थना सभा) और श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत हुई तो उस्ताद की कब्र और मकबरे पर दुआख्वानी, कुरानख्वानी के साथ गुलपोशी कर काशीवासियों ने उन्हें याद किया। उनके पौत्र आफाक हैदर ने शहनाई की तान से दादा की याद ताजा की। उस्ताद की चौथी पीढ़ी में उनके प्रपौत्र मोहम्मद अली ने भी शहनाई बजाकर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को खिराजे अकीदत पेश किया।


21 को पैदा और 21को ही हुए जुदा 

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान 21 मार्च को पैदा और 21 अगस्त को ही हम सबसे जुदा हुए। 21 मार्च 1916 को बिहार के डुमरांव में जन्मे बिस्मिल्लाह खां का असली नाम कमरुद्दीन था। बचपन में जब उनके दादा रसूल बख्श खां ने उन्हें पहली बार देखा तो उनके मुंह से सहसा निकल पड़ा था बिस्मिल्लाह। यहीं नाम आगे चलकर शहनाई का पर्यायवाची बन गया। जब उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का कहीं जिक्र होता है तो शहनाई की तस्वीर सभी के ज़ेहन में उतर आती है शहनाई का नाम लेने पर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का चेहरा सामने आ जाता है। 

15 अगस्त 1947 को जब भारत ने आजादी की पहली भोर देखी तब लाल किले की प्राचीर से आज़ाद भारत का स्वागत उस्ताद की शहनाई की गूंज से हुआ था। उन्होंने राग काफी बजाकर देश की आजादी का खैरमकदम किया था।

नन्ही उम्र में आ गए गंगा किनारे

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान नन्ही सी उम्र में गंगा किनारे बसे बनारस आ गये और यहां से पूरी दुनिया में छा गये। उनके परिवार के नजदीकी शकील अहमद जादूगर बताते हैं कि छह वर्ष की उम्र में वे बनारस आ गए और अपने मामा अली बख्श 'विलायत (अल्लन बिलातू) के साथ शहनाई सीखने लगे। उनके मामू जान विश्वनाथ मंदिर में शहनाई बजाया करते थे और यहीं से नन्हें बिस्मिल्लाह के भीतर संगीत और साधना का अनूठा मेल अंकुरित होता दिखा। उनकी शहनाई से निकलने वाला हर सुर लोगों के दिलों को छूने लगा और देखते ही देखते उनका नाम दुनिया के कोने-कोने पर जा पहुंचा।

अंत तक नहीं छोड़ी गंगा और काशी 

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का काशी से अटूट रिश्ता रहा। उस्ताद जब हयात में थे तो कहते थे कि दुनिया में कहीं भी चले जाएं, लेकिन उन्हें जो सुकून गंगा किनारे बालाजी घाट और काशी विश्वनाथ के द्वार पर मिलता है वो कहीं और नहीं मिलता। अमेरिका ने जब वहां की नागरिकता देने और अमेरिका में बसने का प्रस्ताव दिया तो उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने सवाल किया था कि क्या अमेरिका में गंगा व बालाजी मंदिर है और उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।