वाराणसी में मीट-मछली व्यवसायियों की रोजगार बंदी से पूरा शहर हुआ प्रभावित
- Mohd Rizwan
dil india live (Varanasi). वाराणसी में नगर निगम द्वारा मीट एवं मछली की दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्तावित निर्णय के विरोध में मंगलवार 22 जुलाई को मीट-मछली व्यवसायियों ने एक दिवसीय रोजगार बंदी की। बंदी का असर पूरे शहर में देखने को मिला।
चौकाघाट, पुराना पुल, रामनगर, लहरतारा, सुंदरपुर, नाथूपुर (DLW), मंडुवाडीह, लल्लापुरा (पितृकुण्डा), शिवपुर, शिवाला, गौरीगंज, बौलिया, नई सड़क (बेनिया), रेवड़ी तालाब, लंका, सोनारपुरा, बेलवारिया, चांदमारी, चितईपुर, अवलेशपुर सहित शहर के लगभग सभी प्रमुख बाजारों और दुकानों में मीट एवं मछली का कारोबार पूरी तरह बंद रहा। दुकानों के शटर तक नहीं उठें।
संविधान का दिया हवाला जताया विरोध
मीट व मछली आदि के व्यवसायियों ने बंदी के दौरान कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19-1 (G) के तहत सभी नागरिकों को स्वतंत्र और ऐच्छिक वैध व्यवसाय करने का मौलिक अधिकार मिला हुआ है। अनुच्छेद 19 (6) के अनुसार सामाजिक-आर्थिक सर्वे के बिना विस्थापन नहीं होना चाहिए। अनुच्छेद 38 और 41 के तहत बिना पर्याप्त सुविधाओं और मुआवजे के विस्थापन गलत है और राज्य का कर्तव्य है कि वह रोजगार के अवसर दे। अनुच्छेद 48 के तहत मांस-मछली के वैध रोजगार को राज्य संरक्षण दे। इसके बावजूद हमें उजाड़ा जा रहा है।मीट, मछली व्यापारियों की मांग
मीट मछली आदि व्यवसायियों ने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था और संवाद के दुकानों को शहर से बाहर भेजने का प्रस्ताव हजारों परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रहार है। मीट मछली व्यवसायियों ने निम्न मांग की:
- नगर निगम अपना निर्णय तत्काल वापस ले
- व्यवसायियों के प्रतिनिधियों से वार्ता कर सर्वसम्मति से समाधान निकाला जाए
- हजारों परिवारों के रोजगार और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम शीघ्र वार्ता शुरू नहीं करता तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।





























