बुधवार, 4 मार्च 2026

Nanhe Tasneem Fatma के हौसले को सभी कर रहे हैं सलाम

मुफ्ती अब्दुल हन्नान मिस्बाही की छोटी बेटी ने रखा रोज़ा 





dil india live (Varanasi). मशहूर आलिमे दीन मदरसा मजीदिया के उस्ताद मुफ्ती अब्दुल हन्नान मिस्बाही की दूसरी बेटी तसनीम फातिमा की बुधवार को रोज़ा कुशाई की गई। मुफ्ती अब्दुल हन्नान (Mufti Abdul Hannan) ने बताया कि उनकी बेटी तसनीम फातिमा ने सहरी करके रोज़ा रखा तो लोगों ने सोचा मजाक कर रही है रहेगी नहीं मगर जब दोपहर ज़ोहर की नमाज का वक्त हो गया और उसने कुछ खाया पिया नहीं तो घर में किसी ने उसे मना नहीं किया बल्कि उसकी रोज़ा कुशाई की तैयारी शुरू की गई। तसनीम घर में सबसे छोटी है इसलिए सभी ने उसकी खूब हौसला अफजाई की। शाम में जब मस्जिद से अज़ान की सदाएं बुलंद हुई तो तसनीम फातेमा ने अपनी जिंदगी का पहला रोजा अपनी पसंद की इफ्तार से पूरा किया। घर और आसपास के लोगों ने इस बच्ची को लंबी उम्र की दुआएं दी।

Ramadan ka Paigham 14 : ज्यादा से ज्यादा करें इबादत इससे पहले रमज़ान चला जाए

मुकद्दस रमज़ान की रूहानी चमक से फिर दुनिया हुई रोशन




Varanasi (dil India live). मुकद्दस रमज़ान की "रूहानी चमक" से दुनिया फिर रोशन हो चुकी है, और फिज़ा में घुलती अजान और दुआओं में उठते हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे कि मिसाल पेश कर रहे हैं। दरअसल रमज़ान बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का जहां मौका देता है। वहीं मुक़द्दस रमज़ान बुरे कामों से रोकता है और नेकी की राह दिखाता है। इस पाक और दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने का रास्ता दिखाने वाला माहे रमजान में अल्लाह के नेक बंदे इस फिक्र में रहते हैं की ज्यादा से ज्यादा इबादत कर ली जाए कहीं रमज़ान चला न जाए।
भूख-प्यास समेत तमाम जिस्मानी जरुरतों तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी आदि बुराइयों से रमज़ान मुबारक रोकने का काम करता है। माहे रमजान में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम जरुरतों को रोकता है। बदले में अल्लाह अपने इबादतगुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है। इसके बावजूद भी बहुत से लोग इस माहे मुबारक की खूबियों से अब भी दूर हैं। उनसे यही कहना है कि जल्दी करें कहीं रमजान की दौलत से महरूम न रह जाएं।
इस्लाम की पांच बुनियादों में रोज़ा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जहां जिक्र किया है, वहीं कुरान भी इसी पाक महीने में रब ने दुनिया में उतारा। रमजान इंसान के अंदर जिस्म और रूह है। आम दिनों में उसका पूरा ख्याल खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है। रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते है।
अमूमन 30 दिनों के माहे रमजान को 10-10 दिन केे तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा ‘रहमत’ का है। जो मुकम्मल हो चुका है। इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा ‘मगफिरत’ का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है। जबकि तीसरा अशरा 'जहन्नुम से आजादी' का है। इस आखिरी अशरे में रब रोज़ा रखने वाले को जहन्नुम से आजाद कर देता है।
महीने भर के रोज़े रखना, रात में तरावीह की पढना, क़ुरान की तिलावत करना, एतेकाफ़ में बैठना, अल्लाह से दुआ मांगना, ज़कात देना, अल्लाह का शुक्र अदा करने जैसी बंदा खूब नेकी करता है। इसीलिये इस माह को नेकियों और इबादतों का महीना भी कहते है। तरावीह की नमाज़ में महीना भर कुरान पढना। जिससे क़ुरान पढना न आने वालों को भी क़ुरान सुनने का सबाब मिलता है। यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का भी है। इसलिए रमज़ान में जकात, खैरात और खूब फितरे से उनकी भरपूर मदद की जाती है। ऐ पाक परवरदिगार हमें रोज़ा रखने की तौफीक दे। ताकि हमारी दुआओं में असर पैदा हो सके और खुदा के फैज़ से हमारी ईद हो जाये..आमीन। 

     हाफ़िज़ मोहम्मद ताहिर 

(इमामे जुमा, जामा मस्जिद याकूब शहीद, नगवां वाराणसी)

मंगलवार, 3 मार्च 2026

Ramadan ka Paigham 13 : मस्जिदें नमाज़ियों से भरी है समझिए माहे रमज़ान है

जिसके आते ही फिज़ा में नूर छा जाता है वो है "माहे रमज़ान"

 




Varanasi (dil India live). हिजरी कलैंडर का 9 वां महीना रमज़ान, ये वो महीना है जिसके आते ही फिज़ा में नूर छा जाता है। चोर चोरी से दूर होता है, बेहया अपनी बेहयाई से रिश्ता तोड़ लेता है, मस्जिदें नमाज़ियों से भर जाती हैं। लोगों के दिलों दिमाग में बस एक ही बात रहती है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा इबादत की जाये। फर्ज़ नमाज़ों के साथ ही नफ्ल और तहज्जुद पर भी लोगों का ज़ोर रहता है, अमीर गरीबों का हक़ अदा करते हैं, पास वाले अपने पड़ोसियों का, कोई भूखा न रहे, कोई नंगा न रहे, इस महीने में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है। पता ये चला कि हक़ की जिन्दगी जीने की रमज़ान हमे जहां तौफीक देता है। वहीं गरीबो, मिसकीनों, लाचारों, बेवा, और बेसहरा वगैरह की ईद कैसे हो, कैसे उन्हें उनका हक़ और अधिकार मिले यह रमज़ान ने पूरी दुनिया को दिखा दिया, सिखा दिया। यही वजह है कि रमज़ान का आखिरी अशरा आते आते हर साहिबे निसाब अपनी आमदनी की बचत का ढ़ाई फीसदी जक़ात निकालता है। और दो किलों 45 ग्राम वो गेंहू जो वो खाता है उसका फितरा।

सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले हर हाल में मोमिनीन अदा कर देता है ताकि उसका रोज़ा रब की बारगाह में कुबुल हो जाये, अगर नहीं दिया तो तब तक उसका रोज़ा ज़मीन और आसमान के दरमियान लटका रहेगा जब तक सदका-ए-फित्र अदा नहीं कर देता। रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीक़े से तो गुज़ारता ही हैतो एक महीना माहे रमज़ान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। परवरदिगारे आलम इरशाद फरमाते है कि माहे रमज़ान कितना अज़ीम बरकतों और रहमतो का महीना है इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि इस पाक महीने में कुरान नाज़िल हुआ। इस महीने में बंदा दुनिया की तमाम ख्वाहिशात को मिटा कर अपने रब के लिए पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर रोज़ा रखता है। नमाज़े अदा करता है। के अलावा तहज्जुद, चाश्त, नफ्ल अदा करता है इस महीने में वो मज़हबी टैक्स ज़कात और फितरा देकर गरीबों-मिसकीनों की ईद कराता है।अल्लाह ने हदीस में फरमया है कि सिवाए रोज़े के कि रोज़ा मेरे लिये है इसकी जज़ा मैं खुद दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। यह महीना नेकी का महीना है इस महीने से इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे ..आमीन।

हाजी इम्तियाज खान 

(सामाजिक कार्यकर्ता व साड़ी व्यवसायी, गौरीगंज वाराणसी)


रमज़ान मुबारक में नन्हे मुन्ने बच्चे भी रब की रज़ा के लिए कुछ इस तरह रहते हैं तैयार।।

UP K Varanasi Main पेंशनर साथियों ने की बजड़े पर अनोखी सभा

पंजाब नेशनल बैंक पेंशनर एसोसिएशन की आम सभा में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा




F. Farouqi Babu 

dil india live (Varanasi). 3 मार्च को ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक पेंशनर एसोसिएशन के बैनर तले एक भव्य  आम सभा का आयोजन वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर बजड़े में अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत संगठन के पदाधिकारी नरेंद्र पांडे एवं जी.पी. श्रीवास्तव ने सभी पेंशनर साथियों का गुलाब के फूल भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। स्वागत के इस स्नेहिल भाव ने पूरे कार्यक्रम को पारिवारिक वातावरण प्रदान किया।

इस अवसर पर विशेष हर्ष का वातावरण तब बना जब वरिष्ठ सदस्य श्री कामेश्वर राय का जन्मदिवस सामूहिक रूप से मनाया गया। उन्हें उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया तथा सभी की उपस्थिति में केक काटकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं। 

सभा के दौरान विगत माह दिवंगत हुए एक साथी सदस्य को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह क्षण अत्यंत भावुक एवं संवेदनशील रहा, जिसने संगठन की एकजुटता और पारस्परिक आत्मीयता को प्रदर्शित किया।

कार्यक्रम में पेंशन बढ़ोतरी, ग्रेच्युटी भुगतान की अद्यतन स्थिति, तथा हेल्थ इंश्योरेंस से संबंधित समस्याओं एवं संभावनाओं पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा की गई। सदस्यों ने अपने विचार खुलकर रखे तथा संगठन की मजबूती एवं पेंशनरों के हितों की रक्षा के लिए भविष्य की रणनीति पर भी विमर्श किया। यह विचार-विमर्श अत्यंत उपयोगी एवं सकारात्मक रहा।

बजड़े पर चाय, नाश्ता एवं शुद्ध पेयजल की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई थी। गंगा की निर्मल धारा के मध्य सौम्य वातावरण में बैठकर साथियों ने आपसी संवाद, पुरानी स्मृतियों और सेवा काल के अनुभवों को साझा किया। पुराने मित्र वर्षों बाद मिलकर अत्यंत प्रसन्न दिखाई दिए। हंसी-ठिठोली, आत्मीय बातचीत और अपनत्व की भावना ने पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया।





कार्यक्रम के अंत में पूर्व प्रबंधक एस.पी. सिंह द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी उपस्थित साथियों, पदाधिकारियों एवं आयोजन में सहयोग देने वाले सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कुल मिलाकर लगभग 60 पेंशनर साथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही और सभी ने एक स्वर में कार्यक्रम की सराहना की।

लौटते समय सदस्यों ने नमो घाट एवं विश्वविख्यात दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती का दिव्य दृश्य देखा और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। इस मौके पर यह निर्णय लिया गया कि आगामी बैठक जुलाई माह में और भी व्यापक स्तर पर आयोजित की जाएगी, जिसमें अधिक से अधिक पेंशनर साथियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस सफल आयोजन ने संगठन की एकता, सक्रियता एवं पारस्परिक स्नेह को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य किया।

सोमवार, 2 मार्च 2026

Ramadan ka Paigham 12 : दुरुद पढ़ने वाले आसानी से होंगे जन्नत में दाखिल

रमज़ान में इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद करता है मजबूत




dil india live (Varanasi)। रमज़ान की अज़मतों का क्या कहना, अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने तमाम रहमतों और बरकतों को इस मुकद्दस महीने में नाज़िल फरमाया। माहे रमज़ान नफ्स पर नियंत्रण का महीना है। ऐसे तो हर दिन-हर रात दुरुद शरीफ पढ़ने का बेहद सवाब है मगर नबी-ए-करीम (स.) ने फरमाया है कि जो इंसान कसरत से इस पाक महीने रमज़ान में दुरुद शरीफ पढ़ेगा उसे बारोजे कयामत पुलसिरात पर से आसानी से जन्नत में दाखिल कर दिया जायेगा। इसलिए इस महीने में दुरुद कसरत से पढ़ने वालों की तादाद बढ़ जाती है।

 पैगम्बरे इस्लाम नबी-ए-करीम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.) फरमाते हैं कि जिसने रमज़ान का रोज़ा रखा और उसकी हुदूद को पहचाना और जिन गुनाहों से बचना चाहिये, उससे वो बचता रहा तो उसकी वो गुनाह जो उसने पहले की है रमज़ान का रोज़ा उसका कफ़्फ़ारा हो जायेगा। अल्लाह हदीस में फरमाता है कि सिवाए रोज़े के कि रोज़ा मेरे लिये है इसकी जज़ा मैं खुद दूंगा। अल्लाह का मज़ीद इरशाद है, बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। जब रोज़ा का दिन हो तो बेहूदा बातों से दूर रहें और बुराईयों से बचे। रोज़ा चूंकि अल्लाह के लिए है तो रोज़ा रखकर बंदा अल्लाह को ही पा लेता है। तो फिर जानबुझ कर कोई बंदा क्यों अपना नुकसान करेगा। 

इस महीने की 21, 23, 25, 27 व 29 तारीख शबे कद्र कहलाती है जो हज़ार महीनों की इबादत से भी बेहतर है। इन रातों में तमाम मुस्लिम खूब इबादत करते हैं। मोमिन 20 तरीख से ईद का चांद होने तक एतेकाफ पर बैठता है। इस महीने में इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवरदिगार तू नबी-ए-करीम के सदके में हम सबको बक्श दे और रोज़ेदारों को ईद की खुशियों के साथ नेक इंसान बनने की तौफीक दे..आमीन।

मौलाना हसीन अहमद हबीबी  

(सदर काजी -ए-शहर बनारस)


UP k Varanasi Main सदर इमामबाड़े में एहतेजाजी जलसे की नहीं मिली परमिशन

शिया जामा मस्जिद के इमाम ने कहा सोग का माहौल बनाए रखें 

सच्चा हुसैनी वह है जो हक़ और इंसाफ की राह में कुर्बानी को तैयार रहे: हसन मेहंदी





Sarfaraz/Rizwan 

dil india live (Varanasi). उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आज दोपहर सदर इमामबाड़े में होने वाला एहतेजाजी जलसे को परमिशन नहीं मिली जिसके चलते आयोजन रद्द कर दिया गया है। यह जानकारी शिया जामा मस्जिद दारानगर के इमामे जुमा बनारस मौलाना मोहम्मद जफररुल हुसैनी ने देते हुए कहा कि मुहल्ले की मस्जिदों, इमामबाड़ों में सोग का माहौल बनाए रहें। मजलिसों का एहतमाम करें। इस ऐलान का पर्चा भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसके चलते सदर इमामबाड़े पहुंचने की बजाय लोगों ने अपने अपने एरिया की मस्जिदों में मजलिस और दुआ ख्वानी की।



महानगर कांग्रेस कमेटी के महासचिव हसन मेहंदी कब्बन ने सोग बैठक में कहा कि सच्चा हुसैनी वह है जो हक़ और इंसाफ की राह में कुर्बानी देने को तैयार रहे। रहबर-ए- मोअज़्ज़म आयतुल्लाह खामेनई के शहादत पर गहरा दुख का इज़हार करते हुए हसन मेंहदी कब्बन ने कहा कि कर्बला ने दुनिया को यह सिखाया की हालात चाहे जैसे भी हो सच का साथ न छोड़े। अपने स्वार्थ के लिए सिद्धांतों से समझौता न करे, दीन, इंसानियत की हिफाज़त के लिए खड़े हो। कर्बला का पैगाम कोई कहानी नहीं है, बल्कि हर दौर के लिए ज़िंदा सबक है। जब भी दुनिया में जुल्म बढ़ेगा, हुसैनी किरदार की ज़रूरत महसूस होगी।


कब्बन ने कहा कि आज के दौर में कुछ शख्सियत ऐसी है जिनकी जिंदगी में हमें वहीं जुर्रत और इस्तीकामत दिखाई देती है। रहबर मोअज़्ज़म आयतुल्लाह ख़ामेंनई को उनके मानने वाले इसी हुसैनी उसूलों पर क़ायम शख्सियत के रूप में देखते है।उनकी जिंदगी का पैगाम यह रहा कि दुश्मन के दबाव, पाबंदियों, साजिशों के बावजूद अपने मकसद और उसूलों से पीछे न हटों। कब्बन ने कहा कि आज ज़रूरत इस बात की है कि हम अपने अन्दर  हुसैनी जज़्बा पैदा करे। हम मुसलमानों की खिदमत में अपनी गहरी सहानुभूति और दर्द का इज़हार करते हैं ।


रविवार, 1 मार्च 2026

Khamenei की death पर बनारस में Shia community का दरगाहे फातमान व शिवपुर में विरोध प्रदर्शन

बनारस में 7 दिन का शोक, सोमवार को होगा जलसे का आयोजन

दुआख्वानी में ख़्वातीन ने मौत के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

 



Sarfaraz Ahmad 

dil india live (Varanasi). अमेरिकी और इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद बनारस में शिया समुदाय ने जहां विरोध प्रदर्शन किया वहीं दूसरी ओर 7 दिन का शोक भी घोषित किया है। इसके अलावा सोमवार को जलसे का आयोजन किया गया है। शिया जामा मस्जिद के इमाम ने अपना शोक संदेश जारी कर लोगों से इसे पालन करने को कहा है।

अमेरिकी और इजरायली हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के समर्थन में बनारस के शिया समुदाय ने दरगाहे फातमान व शिवपुर समेत विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिस का आयोजन कर खामेनेई के लिए जहां दुआएं मांगी वहीं दरगाहे फातमान व शिवपुर में कैंडल मार्च निकाला गया। इस मौके शांतिपूर्ण ढंग से हुए विरोध प्रदर्शन में ख़्वातीन ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया। आयोजन में अमेरिका और इस्राइल के विरोध में रो-रोकर दुआएं मांगी गई।





7 दिन का शोक घोषित

वाराणसी में शिया जामा मस्जिद दारानगर के इमामे जुमा मौलाना जफर अल हुसैनी ने 7 दिन के शोक का ऐलान किया है। इसके साथ ही लोगों से इसका समर्थन करने के लिए भी कहा गया है। मौलाना जफर अल हुसैनी ने लोगों से अपने प्रतिष्ठान बंद करने, काले कपड़े पहने और घरों पर काले झंडे लगाने का आवाहन किया है। इमामे जुमा की ओर से बताया गया है कि सोमवार को दिन में 11:00 बजे सदर इमामबाड़ा सरैया में एक एहतेजाजी जलसे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बनारस के सारे उलेमा और लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है।

दरअसल, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई है, जिसके बाद विश्व भर में शिया समुदाय इसको लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। ईरान के साथ-साथ मुस्लिम व इंसाफ पसंद लोग इसे शहादत का दर्जा दे रहे हैं।