बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

DAV PG College में RSS के शताब्दी वर्ष पर डीएवी में राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन

अपने असल इतिहास को जान ले युवा तो बदल जायेगा भारत- प्रो. जेपी लाल




dil india live (Varanasi). । डीएवी पीजी कॉलेज में आईसीएसएसआर, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित पंच परिवर्तन और भविष्य का भारत विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन मंगलवार को समापन सत्र में अध्यक्षता करते हुए झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. जयप्रकाश लाल ने कहा कि भारत के इतिहास को बार बार दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से बदला गया, हमारे पुराणों पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया, जिसके कारण समाज मे विषमता आयी, आज युवा सिर्फ अपने गौरवशाली इतिहास को जान ले तो भारत को बदलने से कोई रोक नही सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस संगोष्ठी में प्रो.जेपी लाल ने कहा कि संघ के पंच परिवर्तन की सफलता जन जन के सहयोग से ही संभव होगा। 

        मुख्यवक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काशी प्रान्त प्रचारक रमेश कुमार ने कहा की हमारे पतन का मुख्य कारण आंतरिक विभेद ही रहा, भारत का भाग्य तभी बदलेगा जब जन जन सामाजिक समरसता के साथ रहेंगे। विशिष्ट वक्ता इग्नू के पूर्व कुलपति एवं शिक्षाविद डॉ. नागेश्वर राव ने कहा की 2047 में विकसित भारत के केंद्र में गरीब, किसान, महिला और युवा शक्ति है। महाशक्ति बनने के लिए जो समस्याएं है उनका हल संघ के मूल सिद्धांत में निहित है।

       विभिन्न सत्रों में विशिष्ट व्याख्यान में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि अधिकार के लिए तो सभी जागरूक रहते है लेकिन अपने कर्त्तव्य को भूल जाते है, नागरिक कर्तव्य बोध द्वारा ही भविष्य का भारत बनाया जा सकता है। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि पंच परिवर्तन ही भारत को 21 वीं सदी की महाशक्ति बनायेगा। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि समाज मे जागरण लाने की आवश्यकता है, इसमें संघ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।

कॉलेज के प्रबंधक अजीत सिंह यादव ने अतिथियों को रुद्राक्ष की माला, तुलसी का पौधा और प्रभुश्रीराम का स्वरूप प्रदान कर सम्मानित किया। स्वागत प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ. शान्तनु सौरभ ने दिया। रिपोर्ट सह संयोजक डॉ. सिद्धार्थ सिंह ने प्रस्तुत किया। विभिन्न सत्रों का संचालन डॉ. रमेन्द्र सिंह, डॉ. राजेश झा एवं डॉ. दीपक शर्मा ने किया। इस अवसर उप प्राचार्य द्वय प्रो. संगीता जैन, प्रो.राहुल, डॉ. पारुल जैन, डॉ.संजय सिंह सहित समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

 4 सत्रों में 20 विद्वानों ने रखे विचार

संगोष्ठी में दूसरे दिन 3 अलग अलग सत्रों में देशभर के 20 विद्वानों ने विचार रखें, उनमें संपर्क प्रमुख दीनदयाल, गुजरात केंद्रीय विवि के पूर्व कुलपति आर.एस दुबे, आईएफएस अधिकारी रवि कुमार सिंह, प्रो. बंदना झा (जेएनयू), प्रो.निशा सिंह (विद्यापीठ), प्रो. मनीषा मल्होत्रा (बीएचयू), डॉ. राजीव सिंह (हरियाणा केंद्रीय विवि), प्रचारक नितिन, शिवम कुमार सहित दो दर्जन विशेषज्ञों ने विचार रखे। इसके साथ ही तकनीकी सत्र में दूसरे दिन 118 शोधपत्र पढ़े गए। 

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

Shab-E-Baraat: Varanasi Main इबादत में मशगूल रहे लोग, माहौल है नूरानी

बुजुर्गो-अजीजों के दरों पर उमड़े अकीदतमंद, पढ़ी फातेहा मांगी दुआएं 






सरफराज/रिजवान 

Varanasi (dil India live)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शबे बरात पर देर रात तक लोग इबादतों में मशगूल नज़र आएं। रौशनी के बीच इबादतगाह और कब्रिस्तान जहां जायरीन से गुलजार रही, वहीं लोगों का हुजूम फातेहा पढ़ने व दुआएं मगफिरत मांगने के लिए बुजुर्गों के दर पर उमड़ा हुआ नजर आया। यह सिलसिला पूरी रात चलेगा। चले भी क्यों नहीं इबादत और मगफिरत कि रात जो है।

दरअसल इस्लाम में शब-ए-बरात की खास अहमियत है। इस्लामिक कैलेंडर का आठवां महीना शाबान का महीना है। इस महीने की 14 तारीख का दिन गुजार कर जो शब आती है उस 15 वीं शब की रात में शब-ए-बरात (मगफिरत की रात) मनाया जाता है। मंगलवार की रात को देश दुनिया की तरह अपने शहर बनारस में भी शबे बरात पर सारा जहां रौशन नजर आया। शब-ए-बरात इबादत, फजीलत, रहमत और मगफिरत की रात मानी जाती है। इसीलिए तमाम मुस्लिमों ने रात में इबादत शुरू किया और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी, यह सिलसिला पूरी रात चलेगा। मर्द ही नही घरों में ख्वातीन भी शबे बरात पर इबादत करती नज़र आयी। इबादत में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हुए। 








इससे पहले शाम को मगरिब की अजान होने के साथ शब-ए-बरात की इबादत शुरू हो गयी। यह सिलसिला बुधवार को फजर की नमाज तक चलेगा। इस दौरान काफी लोग शाबान का नफिल रोजा भी रखते हैं। जो लोग रोज़ा रहेंगे वो बुधवार को अल सहर सहरी करके रोज़ा रहेंगे और शाम में मगरिब की अज़ान के साथ इफ्तार करके रोज़ा खोलेंगे।


क्या है शब-ए-बरात 

दरअसल शबे बरात से ही रुहानी साल शुरू होता है। इस रात रब फरिश्तों की डय़ूटी लगाता है। लोगों के नामे आमाल लिखे जाते हैं। किसे क्या मिलेगा, किसकी जिंदगी खत्म होगी। किसके लिये साल कैसा होगा, पूरे साल किसकी जिन्दगी में क्या उतार-चढ़ाव आयेगा। साथ ही पुरखों की रूह अपने घरों में लौटती है जिसके चलते लोग घरों को पाक साफ व रौशन रखते हैं। सुबह से शाम तक घरों में ख्वातीन हलवा व शिरनी बनाने में जुटी हुई थी। शाम में वो भी इबादत में मशगूल हो गई। 

दिखा अकीदत का हुजूम

बनारस शहर के प्रमुख कब्रिस्तान टकटकपुर, हुकुलगंज, भवनिया कब्रिस्तान गौरीगंज, बहादर शहीद कब्रिस्तान रविन्द्रपुरी, कबीरनगर कब्रिस्तान (निकट संजय शिक्षा निकेतन), बजरडीहा का सोनबरसा कब्रिस्तान, जक्खा कब्रिस्तान, सोनपटिया कब्रिस्तान, बेनियाबाग स्थित रहीमशाह, दरगाहे फातमान, चौकाघाट, रेवड़ीतालाब, सरैया, जलालीपुरा, राजघाट समेत बड़ी बाजार, पीलीकोठी, पठानी टोला, पिपलानी कटरा, बादशाहबाग, फुलवरिया, लोहता, बड़ागांव, रामनगर, टेंगरा मोड़ आदि इलाक़ों की कब्रिस्तानों और दरगाहों में लोगों का हुजूम फातेहा पढ़ने उमड़ा हुआ था। यहां लोगों ने शमां रौशन किया और फातेहा पढ़कर अज़ीज़ों की बक्शीश के लिए दुआएं मगफिरत मांगी। इसी के साथ शबे बरात के 15 दिनों के बाद मुक़द्दस रमजान का महीना शुरू हो जाएगा और 30 रोज़े मुकम्मल होने पर ईद आएगी।

VKM Varanasi में सांस्कृतिक महोत्सव Sarjana के दूसरे दिन जानिए क्या क्या हुए आयोजन

काव्य पाठ, डाक्यूमेन्ट्री, मेंहदी, जिरो वेस्ट संग हुई वाद-विवाद प्रतियोगिता





dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा वाराणसी में 3 फ़रवरी 2026 को मान्यवर मोहे द्वारा प्रायोजित युवा सांस्कृतिक महोत्सव सर्जना 2025-26 के अंतर्गत दूसरे दिन काव्य पाठ डाक्यूमेन्ट्री, मेंहदी, जिरो वेस्ट व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। 

प्रकृति विषय पर आधारित काव्य पाठ प्रतियोगिता ने श्रोताओं को प्रकृति के प्रति संवेदनशील दृष्टि प्रदान की। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन एवं प्रबंधक उमा भट्टाचार्य के संरक्षण में संपन्न हुआ। सर्जना की संयोजक प्रो. आरती कुमारी और डॉ सरोज उपाध्याय और काव्य पाठ की संयोजक डॉ. पूर्णिमा, डॉ. मंजू कुमारी एवं डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निर्णायक गण में अतिथि प्रो. आशा यादव, डॉ. ओ. पी. दूबे, डॉ. शांता चटर्जी एवं डॉ. सुप्रिया सिंह थी। प्रतियोगिता में कुल 55 छात्राओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने हिंदी, अंग्रेज़ी एवं संस्कृत भाषाओं में प्रकृति पर आधारित कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। वाद-विवाद प्रतियोगिता का विषय "डिजिटल विश्व:प्रगति का साधन या मानवीय संबंधों के लिए खतरा” विषय पर प्रतिभागियों ने संतुलित एवं प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने जहां एक ओर तकनीकी विकास के लाभों पर प्रकाश डाला वहीं दूसरी ओर मानवीय संबंधों पर इसके प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त की। इस प्रतियोगिता में कुल 59 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम प्रभारी डॉ. शशिकेश के. गोंड एवं डॉ. आरती चौधरी के मार्गदर्शन में किया गया। प्रतियोगिता का निर्णायक मंडल डॉ. विजय कुमार, डॉ. आशीष कुमार सोनकर एवं प्रो. निहारिका लाल थी। इसने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, आलोचनात्मक चिंतन तथा सार्वजनिक भाषण कौशल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


इसी कड़ी में महाविद्यालय परिसर में आज जीरो वेस्ट-अपशिष्ट अनुप्रयोग विषय पर एक विशेष रचनात्मक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की संयोजक डॉ. दीक्षा जायसवाल और डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव रहीं। इनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण और सृजनशीलता का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और वसुधैव कुटुंबकम की भावना से प्रेरित इस आयोजन ने सभी में कम अपशिष्ट, अधिक सृजन का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित किया। इसी क्रम में मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में छात्राओं ने ऑन-द-स्पॉट मेहंदी डिज़ाइन बनाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. सौमिली मंडल रहीं। प्रतिभागियों ने स्वयं लाए मेहंदी कोन से निर्धारित एक घंटे में सुंदर डिज़ाइन प्रस्तुत किया। निर्णायक मण्डल की भूमिका में प्रो. ममता मिश्रा, डॉ. शशि प्रभा कश्यप एवं डॉ. प्रतिभा यादव थी। 



इस मौके पर यादों के झरोखे विषयक डाक्यूमेन्ट्री प्रतियोगिता में टीमों ने मोबाइल या कैमरा द्वारा 15-20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री तैयार कर प्रस्तुत किया। संयोजक डॉ. सौमिली मंडल और एच. अम्बरीश रहे तथा निर्णायक मण्डल में प्रो. पूनम पाण्डेय, डॉ. शशिकला एवं सिमरन सेठ उपस्थिति थी। छात्राओं ने अपनी रचनात्मक दृष्टि से विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और स्मरणीय विषयों पर प्रभावशाली लघु फ़िल्में प्रस्तुत की। वीडियो प्रस्तुति में तकनीकी कौशल, कहानी कहने की शैली, संपादन और भावनात्मक अभिव्यक्ति का बेहतरीन मेल देखने को मिला।

सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

SEVEN DAY NSS camp का हुआ समापन

NSS के उद्देश्य, कौशल विकास, सशक्तिकरण एवं अनुशासन पर डाला प्रकाश




dil india live (Varanasi). 2 फरवरी 2026, पूर्वाह्न 10:00 बजे, राष्ट्रीय सेवा योजना की चतुर्थ इकाई द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय विशेष शिविर के अंतिम दिन का कार्यक्रम शिवपुर वार्ड संख्या 9 में गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीणा के निर्देशन वसंत कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव के नेतृत्व में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय सेवा योजना की तालियों एवं लक्ष्य गीत के साथ हुआ, जिससे स्वयंसेवकों एवं उपस्थित जनसमूह में उत्साह, अनुशासन एवं सेवा भावना का संचार हुआ। इस अवसर पर सभासद बालराम कन्नौजिया, हेड मास्टर कंपोजिट विद्यालय शिवपुर के श्री पंकज दीक्षित की गरिमामयी उपस्थिति रही।


सांस्कृतिक सत्र के अंतर्गत स्वयंसेवकों द्वारा विविध मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। आयोजन में शालिनी गुप्ता एवं मैत्रेई राय द्वारा काव्यपाठ प्रस्तुत किया गया। अदिति एवं नितिशा ने भजन प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बनाया, वहीं काजल यादव ने भी भजन प्रस्तुत किया। स्वाति श्रीवास्तव एवं कीर्ति सिंह द्वारा प्रस्तुत नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। नैंसी वर्मा ने कविता पाठ किया तथा श्रुति सिंह ने बालिका सशक्तिकरण विषय पर प्रभावशाली कविता प्रस्तुत की। अनुष्का गुप्ता द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत ने श्रोताओं में राष्ट्रप्रेम की



भावना जागृत की।

कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव द्वारा मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात अपने उद्बोधन में उन्होंने स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्य, आपसी सहयोग, कौशल विकास, बालिकाओं के सशक्तिकरण एवं अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है। समापन अवसर पर सभी अतिथियों एवं स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की गई। यह सप्तदिवसीय विशेष शिविर सेवा, संस्कृति एवं संस्कारों का अनुपम उदाहरण बनते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

VKM Varanasi Main सांस्कृतिक महोत्सव सर्जना का हुआ आगाज़

छात्राएं आत्म अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास के पथ पर हों अग्रसर- प्रो. रचना श्रीवास्तव 

सर्जना में पहले दिन “वसुधैव कुटुम्बकम्" थीम पर हुए आयोजन



dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसंत कन्या महाविद्यालय,(VKM) कमच्छा में 2 फरवरी 2026 को वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव सर्जना 2025-26 के पहले दिन “वसुधैव कुटुम्बकम् - थीम पर अनेक आयोजन हुए।

प्रकृति की त्रयी को समर्पित” रही, जिसका प्रायोजन मान्यवर-मोहे द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को आत्म-अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास के पथ पर अग्रसर होने का संदेश दिया तथा सांस्कृतिक समृद्धि में संगीत की सशक्त भूमिका को रेखांकित किया।



रंगारंग प्रस्तुतियों से गूंजा वीकेएम

सर्जना में रंगा रंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों से वीकेएम गूंज उठा। इस दौरान प्रश्नोत्तरी, संगीत गायन, फोटोग्राफी, पोस्टर-मेकिंग एवं कार्टूनिंग प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन हुआ। गायन प्रतियोगिता में एकल एवं समूह श्रेणियों में कुल 47 प्रतिभागियों ने शास्त्रीय, अर्ध-शास्त्रीय, लोक एवं पाश्चात्य संगीत की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में निर्णायक पल्लवी घोष, प्रो. सीमा वर्मा, डॉ. सुमन सिंह, डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव, डॉ. पूनम वर्मा एवं सौम्यकांति मुखर्जी शामिल थे।


“मेरे कैमरे की दृष्टि से प्रकृति” 

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में छात्राओं ने जहां उत्साहपूर्वक सहभागिता कर अपनी बौद्धिक क्षमता एवं त्वरित निर्णय-शक्ति का परिचय दिया, वहीं “मेरे कैमरे की दृष्टि से प्रकृति” विषय पर आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने प्रकृति के विविध रूपों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रमों ने छात्राओं की सृजनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को प्रभावी रूप से अभिव्यक्त किया। यह प्रतियोगिताएं छात्राओं की रचनात्मक कल्पनाशीलता को उजागर करने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता एवं सौंदर्यबोध को भी सुदृढ़ करती दिखी।अ

Shab-E-Baraat : लो आ गई रब से माफी तलाफी की रात

बुजुर्गो के दर पर होगी हाजिरी 

घरों व इबादतगाहों में कल होगा चिराग़ा






Sarfaraz/Rizwan 

dil india live (Varanasi). शब-ए-बरात मुस्लिमों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्वो में से एक है। शाबान नबी का महीना है और इसके बाद आने वाला रमजान रब का महीना है। मौलाना साकीबुल कादरी कहते हैं कि शाबान की 14 तारीख का दिन बीतने के बाद जो रात आती है वो शबे बरात की अज़ीम रात कहलाती है। इस शब को मग़फित की रात कहा जाता है। इस रात इबादत करने वालों की गुनाह रब माफ़ कर देता है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार, हर साल शाबान महीने की 15 वीं तारीख को शब ए- बरात मनाया जाता है। मौलाना हसीन अहमद हबीबी कहते हैं कि शबे बरात से रुहानी साल का आगाज़ होता है। नामे आमाल लिखे जाते हैं कि पूरे साल किसके साथ क्या होगा। कौन दुनिया में रहेगा, किसकी मौत आएगी वगैरह। यह महीना बहुत ही अज़ीम महीना है।



मौलाना अजहरुल कादरी कहते हैं कि शब-ए-बरात दो शब्दों से मिलकर बना है रात और बरात यानी बरी होने की रात या गुनाहों से माफी की रात। मुसलमान इस खास रात को नमाज अदा करने के साथ अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं। इसके साथ ही पूर्वजों की कब्रों पर जाकर अपने बुजुर्गों के मगफिरत की दुआ करते हैं। बता दें कि इसे एशिया में शबे बरात, अरबी में लैलातुल बारात, इंडोनेशिया और मलेशिया में निस्फ़ स्याबान जैसे नामों से भी जाना जाता है। 

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, शब-ए -बरात शाबान महीने की 14 और 15 वीं तारीख के बीच की रात को मनाया जाता है। ये रात 14 का दिन बीतने के साथ मगरिब की अज़ान के साथ शुरू होती है और 15 शाबान को फजर की अज़ान के साथ समाप्त हो जाती है। इस साल शब-ए-बरात 3 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।

मगफिरत की खास शब 

इस्लाम धर्म में शब-ए-बरात काफी खास मानी जाती है, क्योंकि ये उन रातों में से एक मानी जाती है जब अल्लाह अपने बंदों की हर नेक और जायज़ दुआएं कुबुल करता हैं और उन्हें माफ़ी देता हैं। बता दें कि शब-ए-बरात के अलावा शुक्रवार की रात, ईद-उल-फितर से पहले की रात, ईद-उल-अजहा से पहले की रात, रजब की रात और  शब-ए-कद्र की रात की दुआएं रब कुबुल करता हैं।

ऐसे मनाते हैं शब-ए-बरात

मुस्लिम इस दिन मगरिब की नमाज के बाद से पूरी रात इबादत करते हैं, नफिल नमाज अदा करने के साथ ही कुरान की तेलावत करते हैं और अल्लाह से अपनी गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं। इसके साथ ही कल सहर सहरी करके शब-ए-बरात पर नफिल रोज़ा रखा जाता है। यही नहीं इस रात को लोग कब्रिस्तान जाते हैं और इंतकाल फरमा चुके अपने अजीजों और बुजुर्गो की कब्र पर फातेहा के साथ ही मगफिरत की दुआएं मांगते हैं।

RSS के शताब्दी वर्ष पर DAV में 2 दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

वर्षगांठ नहीं, आत्मावलोकन करता है आरएसएस-जे. नंद कुमार




dil india live (Varanasi). राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ही एक ऐसा संगठन है जो अपनी वर्षगांठ नही मनाता बल्कि आत्मावलोकन करता है की जो लक्ष्य निर्धारित था, वह प्राप्त हुआ कि नहीं। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित पंच परिवर्तन एवं भविष्य का भारत विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन समारोह में सोमवार को प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय समन्वयक जे. नन्द कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। ICSSR नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित संगोष्ठी में नन्द कुमार ने कहा कि यह शताब्दी सिर्फ एक संगठन का सौ वर्ष नही है बल्कि यह भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। यह नवोत्थान का क्षण है, यह प्रतिमान परिवर्तन का क्षण है। 


हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नही

जे. नन्द कुमार ने यह भी कहा की भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नही है, यह पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है और आगे भी हिन्दू राष्ट्र ही रहेगा। 

           अध्यक्षता करते हुए साउथ एशिया विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रो.के.के. अग्रवाल ने कहा कि पंच परिवर्तन सिर्फ एक शब्द नही है बल्कि संघ के सिद्धांतों को समेकित करने का मूलमंत्र है। यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो संघ के विचारों को आत्मसात करना ही होगा। पंच परिवर्तन का सिद्धांत नया नही है, बस इसे ठीक ढंग से बताया नही गया। यह हमारी सोच को संकुचित नही बल्कि वैश्विक बनाता है। विशिष्ट वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय समिति के सदस्य रामाशीष जी ने कहा कि कुंठित मन, संकुचित हृदय और बंधा हुआ हाथ राष्ट्र का निर्माण नही कर सकते ।भारतीय युवा राम से प्रेरणा लेकर समभाव वाले बने। अतिथियों ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया। इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्रबंधक अजीत सिंह यादव ने स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्प गुच्छ प्रदान कर किया। स्वागत भाषण डॉ. पारुल जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यवाहक प्राचार्य प्रो.मिश्रीलाल ने दिया। संयोजन डॉ. शान्तनु सौरभ एवं सह संयोजन डॉ. सिद्धार्थ सिंह एवं संचालन डॉ. रमेन्द्र सिंह ने किया। उप प्राचार्य द्वय प्रो.संगीता जैन एवं प्रो. राहुल भी उपस्थित रहे।

24 से अधिक विद्वानों ने रखे विचार

संगोष्ठी में पहले दिन विभिन्न सत्रों में 24 से अधिक विद्वानों ने विचार रखें। इनमें पूर्व कुलपति प्रो.अजय कुमार सिंह, प्रो.एचके सिंह, प्रो.टीपी सिंह, पूर्व कुलपति प्रो.राजाराम यादव, प्रो. एसके दुबे, प्रो.पीएन सिंह, अजय कुमार, डॉ. अनिल सिंह, प्रो. जयशंकर पाण्डेय सहित अन्य वक्ता शामिल रहे। इसके अलावा पहले दिन 8 सत्रों में 100 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किये गए। देश के सभी राज्यो से शोधपत्र प्रस्तुत हुए।