सोमवार, 14 सितंबर 2026

Ahmedabad news hindi pakhwada 2026:postmaster general krishna kumar yadav बोलें, हिन्दी सिर्फ साहित्य नहीं बल्कि विज्ञान से लेकर नवाचार की भाषा

डाक विभाग में हिंदी पखवाड़े का पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने किया उद्घाटन





Ahmedabad postel department news hindi pakhwada 14 September 2026
  • @dil india live 

Ahmedabad (अहमदाबाद)। हिंदी मात्र एक भाषा नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं जीवन मूल्यों की प्रबल संवाहक है। हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है, ऐसे में इसके विकास के लिए जरुरी है कि हम हिंदी भाषा को व्यवहारिक क्रियाकलापों के साथ-साथ राजकीय कार्य में भी प्राथमिकता दें।

उक्त उद्गार उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने डाक विभाग द्वारा क्षेत्रीय कार्यालय, अहमदाबाद में आयोजित हिंदी पखवाड़ा के शुभारंभ के अवसर पर व्यक्त किए। इससे पूर्व उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्वलित कर 'हिंदी दिवस' एवं 'हिंदी पखवाड़ा' (14-28 सितंबर) का शुभारंभ किया।



पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि अपनी सहजता, मधुरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर हिंदी भाषा ने वैश्विक स्तर पर विशेष प्रतिष्ठा अर्जित की है। एथनोलॉग के अनुसार हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, वहीं विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है।

उन्होंने कहा कि विश्व के 132 देशों में जा बसे भारतीय मूल के लगभग 2 करोड़ लोग हिंदी माध्यम से ही अपना कार्य निष्पादित करते हैं। विदेशों में 150 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ाई जा रही है।

श्री यादव ने कहा कि हिन्दी सिर्फ संवाद व साहित्य ही नहीं बल्कि विज्ञान से लेकर संचार-क्रांति, सूचना-प्रौद्योगिकी और नवाचार की भाषा भी है। भारत सरकार द्वारा विकास कार्यक्रमों और जनसेवाओं के संचालन में हिंदी के प्रयोग को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज स्थिति यह है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में भी हिंदी की आवाज़ गूंजने लगी है।

अंताक्षरी का भी आयोजन

सहायक निदेशक (राजभाषा) अल्पेश शाह ने बताया कि हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत 14 से 28 सितंबर, 2026 तक उत्तर गुजरात परिक्षेत्र में डाककर्मियों के लिए निबंध लेखन, काव्य-पाठ, हिंदी व्याकरण, प्रश्नोत्तरी, अनुवाद, तात्कालिक भाषण और अंताक्षरी का आयोजन किया जाएगा।

इनकी रही खास मौजूदगी 
कार्यक्रम में सहायक निदेशक अल्पेश आर. शाह, वारिस वहोरा, रितुल एन. गांधी, वरिष्ठ लेखाधिकारी पूजा राठोर सहित तमाम अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन गौरी शंकर कुमावत ने किया।

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रविवार, 13 सितंबर 2026

minority news Varanasi Uttar Pradesh September 2026: Nabi ka jashn मनाने जुटे अकीदतमंद, उलेमा की हुई नूरानी तकरीर

प्यारे नबी की 63 साल की जिंदगी दुनिया के लिए मिसाल


  • @dil india live 

Varanasi (वाराणसी)। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ के मुबारक अवसर पर आशीकाने आला हजरत ट्रस्ट हुकुलगंज की ओर से अजीमुश्शान सालाना जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में देश के विभिन्न शहरों से उलेमा व शायरों ने शिरकत की।आलिमों व शायरों ने अपने खेताब से लोगों को फैजयाब किया। उलेमा ने अपनी तकरीर से लोगों को सीरत-ए-मुस्तफा को अपनाने, इस्लामी तालीम लेने और दीने इस्लाम सीखने पर जोर दिया। 


जलसे में मुफ्ती-ए-बनारस अहले सुन्नत मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारूकी प्यारे मियां, मुफ्ती मोहम्मद फजले काजी, काजी शमीम अहमद कादरी, रईस लतीफी, मौलाना शफी अहमद कादरी, जावेद अहमद रजवी, मुहम्मद शाहिद रजवी, जमीर रजवी, गुलाम अजीज जालानी समेत कई उलेमा-ए-कराम व शायरों ने अपने जज्बात का इजहार किया। उलेमा ने कहा कि नबी का रास्ता ही हम सबको सही राह दिखा सकता है। इस दौरान उलेमा ने कहा कि नबी की 63 साल की जाहिरी जिंदगी दुनिया के लिए मिसाल है। नबूवत के ऐलान से पहले की उनकी जिंदगी और नबूवत के ऐलान के बाद की जिंदगी और शबे मेराज पर बारीकी से रौशनी डाली।

आयोजकों की ओर से कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया गया। महिलाओं की सहभागिता के लिए पर्दे का भी माकूल इंतजाम किया गया था। जलसे के दौरान क्षेत्र में धार्मिक एवं आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला।

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minority news Varanasi September 2026: Nabi ki zindagi Or Aman के रास्ते पर चलने की Ulema ने की वकालत

...सभी अंबिया का उनको मैं इमाम लिख रहा हूं

इश्क़-ए-रसूल ﷺ में सजाई गई नातिया महफ़िल

minority news Varanasi 12 September 2026



  • @dil india live 

Varanasi (वाराणसी)। मोहब्बत-ए-रसूल-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम वह जज़्बा है जिसकी कैफ़ियत को अल्फ़ाज़ में बयान करना मुमकिन नहीं। इसी इश्क़-ए-मुस्तफ़ा ﷺ से सरशार होकर नदेसर, बनारस में सीरत कमेटी और मानू रकत फ़ाउंडेशन के ज़ेरे-एहतिमाम एक यादगार नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम अब्दुल्लाह बिन ग़फ़्फ़ार, हाजी जलालुद्दीन रूमी, मंज़ूर क़ासिम, मुहम्मद अली, सादिक़ अमीन तथा उनके अहल-ए-ख़ाना की ख़ुसूसी कोशिशों से मुनअक़िद हुआ। शहर के मारूफ़ समाजी व सियासी रहनुमा इस्तिक़बाल क़ुरैशी की सरपरस्ती ने कार्यक्रम को मज़ीद वक़ार बख़्शा।
minority news Varanasi12 September 2026 Uttar Pradesh India



इस महफ़िल की सबसे अहम ख़ुसूसियत यह रही कि आज के दौर में जब नातिया प्रोग्रामों में अक्सर नातख़्वानी का रंग शायरी पर ग़ालिब रहता है, नदेसर के इस मुशायरे में शायर और शायरी को उसका हक़ीक़ी मक़ाम दिया गया। यहां शायरी अस्ल थी और तरन्नुम उसकी ख़िदमतगार।
मुशायरे की सदारत मारूफ़ इल्मी व दीनी शख़्सियत ग़ुलाम मोहिउद्दीन सिद्दीक़ी ने फ़रमाई, जबकि डॉक्टर अज़हर सईद ने निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दिए। इससे पहले मौलाना शफ़ी आलम ने सीरत-ए-तय्यिबा और इश्क़-ए-रसूल ﷺ पर ईमान-अफ़रोज़ ख़िताब फ़रमाया। उन्होंने नबी की पैदाइश, उनकी जिंदगी और अमन के बताए रास्ते पर चलने की वकालत की।

नातिया कलाम गुनगुनाते रहे लोग
मशहूर शायर अहमद आज़मी ने सुनाया- “जो मक़ाम है नबी का वह मक़ाम लिख रहा हूं, सभी अंबिया का उनको मैं इमाम लिख रहा हूं।” सुनकर मजमा सुबहान अल्लाह, नारे तकबीर अल्लाह हो अकबर...की सदाएं बुलंद कर उठा।
ज़मज़म रामनगरी ने अपने अंदाज में कलाम पेश किया- “तमाम लोग जिसे काइनात कहते हैं / हम उसको हुस्न-ए-नबी की ज़कात कहते हैं।” लोगों को बेहद पसंद आई।
इसके अलावा आलम बनारसी, निज़ाम बनारसी, शारिक़ फूलपुरी, अरसलान फूलपुरी, ओवैस चंदौलवी, अब्दुर्रहमान नूरी और अबू शहमा मुग़लसराय की नात भी खूब पसंद की गई।

इनकी रही खास मौजूदगी 

महफ़िल में इस्तिक़बाल क़ुरैशी, मुहम्मद सैयद नदीम, हाजी इश्तियाक़, डॉक्टर एम. जे. अकबर, सुल्तान क्लब के अध्यक्ष डॉक्टर एहतेशामुल हक़, शमीम रियाज़, एडवोकेट आक़िब, सैफ़ी ख़ान सहित बड़ी तादाद में मुअज़्ज़िज़ीन मौजूद रहे।

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प्रबंधक दिल इंडिया लाइव वाराणसी। 

Education News VKM kamacha Varanasi 12 September 2026: भारतीय ज्ञान परंपरा पर विमर्श राजधर्म ही लोककल्याण का आधार

शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा व वंचित वर्गों का संरक्षण ही कल्याणकारी राज्य के दायित्व




  • @dil india live 

Varanasi (वाराणसी)। वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों को केंद्र में रखते हुए एक विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब के तत्वावधान में हुआ।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रामाशीष सिंह ने ‘परंपरा’ के अर्थ एवं उसके व्यापक स्वरूप पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि परंपरा केवल अतीत से प्राप्त मान्यताओं का संग्रह नहीं है, बल्कि वह निरंतर प्रवाहमान ज्ञान, अनुभव और जीवन-मूल्यों की ऐसी प्रक्रिया है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती है।


आधुनिक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा

प्रो. टी. पी. सिंह ने कहा कि आधुनिक राज्य का स्वरूप केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य का दायित्व नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कल्याण को सुनिश्चित करना भी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और वंचित वर्गों के संरक्षण को उन्होंने कल्याणकारी राज्य के प्रमुख दायित्व बताया।

राजधर्म और लोककल्याण - प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने भारतीय ज्ञान परंपरा में राजधर्म, अर्थशास्त्र और नीतिशास्त्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय राजनीतिक चिंतन में शासन को कभी केवल अधिकार के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उसे उत्तरदायित्व और कर्तव्य से जोड़ा गया।

उन्होंने कहा कि कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राज्य की प्रशासनिक, आर्थिक, सुरक्षा एवं कल्याणकारी भूमिकाओं का व्यावहारिक विवेचन मिलता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय”, न्याय, कर्तव्य और लोकमंगल जैसे मूल्य आज भी सुशासन को अधिक मानवीय बना सकते हैं।

कार्यक्रम के आयोजक राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार सोनकर ने विषय की प्रस्तावना रखी। इस अवसर पर डॉ. सरोज उपाध्याय, डॉ. अनु सिंह तथा डॉ. गौतम गोस्वामी सहित छात्राएं उपस्थित रहीं।

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शनिवार, 12 सितंबर 2026

Education News DAV PG College Varanasi 12 September 2026: अर्थशास्त्र सबसे ज्यादा अप टू डेट रहने वाला विषय - प्रो. एन.के. मिश्रा

हर बदलते दशक के साथ विकास की परिभाषा और आयाम बदलते रहे-प्रो. एन.के. मिश्रा


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Varanasi (वाराणसी)। डीएवी पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा शनिवार को 'डिकोडिंग डेवलपमेंट' विषय पर एक दिवसीय दीक्षारम्भ एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय  अर्थशास्त्र विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. एन.के. मिश्रा ने छात्रों को अर्थशास्त्र की महत्ता से रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि "अर्थशास्त्र सबसे ज्यादा अप टू डेट रहने वाला विषय है।"

प्रो. मिश्रा ने कहा कि अर्थशास्त्र में 50 के दशक में विकास शब्द आया लेकिन हर बदलते दशक के साथ विकास की परिभाषा और आयाम बदलते रहे। अर्थशास्त्र ही है जो हमें समय के साथ बदलना सिखाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की दूसरे देशों से तुलना ठीक नहीं है, इसका सबसे प्रमुख कारण पारिस्थितिकी अन्तर है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं कि जीडीपी बढ़ने से अर्थव्यवस्था भी बढ़ रही हो। अर्थशास्त्र ही ऐसा विषय है जो ग्रोथ इंजन को आगे बढ़ाने में सहयोग करता है।


अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने कहा कि अर्थशास्त्र ही व्यक्ति के सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन का मूल आधार है, जब भी अर्थ का प्रवाह बाधित होगा तो विकास निश्चित रूप से बाधित होगा।

महाविद्यालय के मंत्री/प्रबन्धक अजीत कुमार सिंह यादव ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शुभकामना दी। कार्यक्रम का संचालन विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप मिश्रा ने किया, स्वागत डॉ. आहूति सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शालिनी सिंह ने किया।

इस अवसर पर डॉ. मयंक कुमार सिंह, डॉ. सिद्धार्थ सिंह, मृत्युंजय प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में नवप्रवेशी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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Kavita Kalam: Allama Iqbal की वैचारिक परंपरा के Shayar थे Suleman Aasif

शायरी में दिखती है दार्शनिक चिंतन, मानवीय भावनाएं व सामाजिक सांस्कृतिक चेतना 

cultural News Varanasi Uttar Pradesh 12 September 2026
मशहूर शायर मरहूम सुलेमान आसिफ 


  • @dil india live 

डॉ. बख्तियार नवाज़

(Varanasi). वाराणसी। विश्वप्रसिद्ध शायर और विद्वान सुलेमान आसिफ जैसी शख़्सियत पर क़लम उठाना इस ख़ाकसार के बस की बात नहीं। लेकिन मजबूरी यह है कि सुलेमान आसिफ अपने जीवनकाल में मुझ जैसे अदना शायर को हमेशा अपनी दुआओं, मोहब्बत और हौसला-अफ़ज़ाई के घेरे में रखते थे।

मदर हलीमा सेंटर स्कूल के ख़ूबसूरत और विशाल हॉल में जब भी साहित्यिक बैठकें या मुशायरे आयोजित हुआ करते थे, तो सुलेमान आसिफ न केवल इस ख़ाकसार को आमंत्रित करते थे, बल्कि फ़ोन के माध्यम से शामिल होने के लिए बाक़ायदा आदेश भी दिया करते थे। आसिफ साहब का यह प्यार, ख़ुलूस और मोहब्बत हमेशा मेरे दिल की यादों में सुरक्षित रहेगी।

उनके इस दुनिया से विदा होने के बाद उनके आज्ञाकारी पुत्र नुमान हसन ख़ाँ, इमरान हसन ख़ाँ और इरफ़ान हसन ख़ाँ ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए हर साहित्यिक कार्यक्रम में उन्हें याद करने की परंपरा को कायम रखा है।


साहित्यिक दृष्टिकोण और शायरी

सुलेमान आसिफ की शायरी उनकी उच्च विचारधारा, गहरी दृष्टि और व्यापक अध्ययन की दर्पण थी। उनके अशआर में केवल शब्दों की सुंदरता ही नहीं, बल्कि एक विशेष वैचारिक गहराई भी महसूस होती थी।

उनकी शायरी में दार्शनिक चिंतन, मानवीय भावनाएँ, सामाजिक समस्याएँ, सांस्कृतिक चेतना और जीवन के विभिन्न रंग स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उनकी रचनाओं में अल्लामा इक़बाल की वैचारिक परंपरा की झलक भी महसूस होती है। इसी संदर्भ में साहित्यिक हलकों में उन्हें ‘सानी-ए-इक़बालियात’ के रूप में भी याद किया जाता था।

व्यक्तित्व और गंगा-जमुनी तहज़ीब

सुलेमान आसिफ को गंगा-जमुनी तहज़ीब का सूत्रधार कहना अनुचित न होगा। उनकी सोच में भारत की साझा सांस्कृतिक परंपराएं, आपसी प्रेम, भाईचारा, सहिष्णुता और मानवता के तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देते थे। वे साहित्य को केवल मनोरंजन या अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं मानते थे, बल्कि उसे समाज को जोड़ने और इंसान को इंसान के करीब लाने का एक प्रभावी साधन समझते थे।


पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के साथ सुलेमान आसिफ 

मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना बातिन व मैत्री भवन के पूर्व निदेशक फादर चंद्रकांत के साथ सुलेमान आसिफ 


साहित्यिक विरासत

सुलेमान आसिफ साहब 14 पुस्तकों के रचनाकार हैं, जबकि कुछ और पुस्तकें प्रकाशन की तैयारी में थीं। उनका यह साहित्यिक भंडार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण विरासत है। अंत में यही कहूंगा कि सुलेमान आसिफ एक नाम नहीं, एक युग थे; केवल एक शायर नहीं, बल्कि एक चिंतनशील व्यक्तित्व थे; और केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि प्रेम, साहित्य और सांस्कृतिक सहिष्णुता की एक ख़ूबसूरत परंपरा थे।


(मशहूर शायर मरहूम सुलेमान आसिफ की 22 सितंबर को यौमे पैदाइश है। यह लेख डॉ. बख्तियार नवाज द्वारा लिखित श्रद्धांजलि है, जिसे Mother Halima Center School परिवार की साहित्यिक परंपरा को समर्पित किया गया है।)

Varanasi Education News September 2026: अब जरुरतमंद Students पहाड़ी गेट DLW में ले सकेंगे फ्री कोचिंग

इं.के.जे.एस प्रेरणा फ्री कोचिंग में गरीब और जरूरतमंद छात्रों को मिलेगी निःशुल्क शिक्षा

free Education News Varanasi September 12 2026



@dil india live 

Varanasi (वाराणसी)। पहाड़ी गेट डी.एल.डब्लू, वाराणसी में इं.के.जे.एस प्रेरणा फ्री कोचिंग इंस्टिट्यूट का शुभारंभ एक सामाजिक-शैक्षणिक पहल के रूप में किया गया। यह केवल एक कोचिंग सेंटर नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का निःशुल्क अवसर देने वाली पहल है।

फ्री कोचिंग खोलने के प्रमुख कारण

  • गरीब एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना।
  • महंगी कोचिंग के कारण प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का अवसरों से वंचित रह जाना।
  • ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराना।
  • विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE, NEET, SSC आदि) के लिए तैयार करना।
  • आर्थिक स्थिति के बजाय प्रतिभा और मेहनत को सफलता का आधार बनाना।
  • नियमित टेस्ट, अध्ययन सामग्री, डाउट क्लियरिंग एवं करियर मार्गदर्शन देना।
  • समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना और “शिक्षित युवा–सशक्त समाज” की दिशा में कार्य करना।

संस्थान के मुख्य उद्देश्य

संस्थान का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान करना है, जो प्रतिभावान और मेहनती हैं, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण महंगी कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर सकते।

यह संस्था हमारे प्रेरणा स्रोत इंजीनियर श्रद्धेय कमला कांत जी (मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग, बिहार सरकार) के आशीर्वाद से, संस्था के संस्थापक व प्रदेश प्रभारी श्री आदित्य राज सिंहश्री आनंद गुप्ता (प्रदेश अध्यक्ष) समस्त कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत व अडिग संकल्प से प्रारंभ हुई है।

शुभारंभ कार्यक्रम

10 सितंबर 2026 को आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. गीता कुमारी (पूर्व लोकसभा प्रत्याशी राबर्ट्सगंज), पूजा यादव (पूर्व विधानसभा प्रत्याशी 390 कैंट वाराणसी), एड. सारिका दुबे (संस्थापक/अध्यक्ष - खुशी की उड़ान संस्था) उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कंचन सिंह (प्रदेश अध्यक्ष इं.के.जे.एस. सांस्कृतिक प्रकोष्ठ उ.प्र.) ने की।

📍 पता: पहाड़ी गेट, DLW, वाराणसी
🎯 सुविधा: निःशुल्क शिक्षा, टेस्ट सीरीज, स्टडी मटेरियल, करियर काउंसलिंग
💡 थीम: शिक्षित युवा - सशक्त समाज
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