मंगलवार, 24 मार्च 2026

DAV PG College Main वाराणसी के सांस्कृतिक गलियारे पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

परम्परायें ही हमे जड़ो से जोड़ती है - प्रो.धनजंय सिंह



dil india live (Varanasi).वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को आईसीएसएसआर के सहयोग से आयोजित 'वाराणसी के सांस्कृतिक गलियारे की कला, शिल्प और लोक परंपरा में संरक्षित पवित्र भूमि और विरासत' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता आईसीएसएसआर, नई दिल्ली के सदस्य सचिव प्रो.धनंजय सिंह ने कहा कि हमारी संस्कृति, हमारी परम्परा ही हमें हमारी जड़ो से जोड़ती है, हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को जानना होगा। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एक मॉडल प्रतिमान के रूप में उभर कर सामने आया है, हमारे पास ऐसी अनगिनत स्वरूप है जो हमारे संस्कृति के साथ साथ अर्थतंत्र को भी मजबूती प्रदान करते है। 


 विशिष्ट वक्ता नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि काशी को सिर्फ हेरिटेज शहर कह कर काम नही चलाया जा सकता, प्राचीनता, पुरातनता तो काशी के कण कण में व्याप्त है। काशी गंगा की तरह प्रवाहमान होकर विकसित होने वाला शहर है। आईआईटी बीएचयू की विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. अमिता सिन्हा ने मणिकर्णिका घाट पर आधारित पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया। अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर संजय कुमार ने कहा कि बनारस स्थिर रहने वाला शहर नही है, इतिहास में ना जाने कितनी बार इसका विंध्वस हुआ और उतनी ही बार इसका विकास हुआ। इस शहर को कोई नियंत्रित नही कर सकता, यह स्वयं से संचालित होता है। इसके पूर्व संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण से हुआ। 

स्वागत कॉलेज के का. प्राचार्य प्रो.मिश्रिलाल, विषय स्थापना डॉ. महिमा सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. इंद्रजीत मिश्रा ने दिया। विभिन्न सत्रों में प्रो. आरती निर्मल, डॉ. विनीता चंद्रा, डॉ. जसविंदर कौर, भानुमति मिश्रा आदि विद्वानों ने भी विचार रखे। इस अवसर पर विभाग के डॉ. नजमुल हसन, डॉ. प्रज्ञा अग्रवाल, डॉ. आराधना सिंह, खितेश विराट शर्मा, शुभम कुमार, शीयुक्ता बासनेट, अनुजा रंजन सहित अन्य विभागों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।

VKM Varanasi Main पन्द्रह दिवसीय छन्दोऽभ्यास कार्यशाला सम्पन्न

संस्कृत मातृमण्डलम्' में दिखा साहित्य संगीत और कला  की त्रिवेणी का अद्भुत संगम



dil india live (Varanasi). वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में  संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृतमातृमण्डलम् के अन्तर्गत आयोजित  पन्द्रह दिवसीय छन्दोऽभ्यास कार्यशाला  (दिनांक 10.03.26-24.03.26) सम्पन्न हुई। समापन समारोह भारतीय जनमानस के  त्रिकालाबाधित पुरोधा पुरुषोत्तम श्रीराम को समर्पित रहा। इस सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम  का शुभारम्भ मङ्गलाचरण के रूप में ‘राम रतन धन पायो’ भजन की अत्यन्त भावपूर्ण एवं नादात्मक प्रस्तुति से हुआ, जिसे प्रो. मीनू पाठक, विभागाध्यक्षा, वाद्य संगीत विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया। उनकी मधुर स्वर लहरियों ने उपस्थित जनसमुदाय को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। तत्पश्चात् स्वागत वक्तव्य डॉ. शान्ता चटर्जी, विभागाध्यक्षा, संस्कृत विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनन्दन करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उसके महत्व पर प्रकाश डाला।इसके पश्चात् शास्त्रीय नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष की छात्रा प्रतिष्ठा द्वारा दी गई, जिसने अपनी अभिव्यक्ति, ताल एवं लय के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम का अगला आकर्षण ‘श्रीराम स्तुति’ रहा, संस्कृतमातृमण्डलम् की अध्यक्षा डॉ. कमला पाण्डेय के निर्देशन में प्रशिक्षित छात्राओं द्वारा सामूहिक रूप से सभी गेय छन्दों में प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में कार्यशाला की संयोजिका डॉ. मञ्जू कुमारी, सहायक आचार्या ने सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए पूरे कार्यक्रम को सुसंगठित एवं प्रभावी ढंग से संचालित किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. तुलसी कुमार जोशी, सहायक आचार्य, वसन्त महिला महाविद्यालय, राजघाट, वाराणसी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में  गुरुमुख से प्राप्त शिक्षा को प्रभावकारी बताते हुए उसकी महत्ता पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विदुषी प्रो. मञ्जु सुन्दरम, पूर्व विभागाध्यक्षा, संगीत विभाग द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए  छन्दों को जीवन में मति, अभिव्यक्ति और गति देकर जीवन को सार्थक बनाने का साधन बताया। कार्यक्रम का संचालन सुधा चौबे तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रियंका पाठक ने किया। कार्यक्रम में सभी शिक्षिकाओं सहित लगभग पचास छात्राओं की उपस्थिति रही ।

History dipartment व 'इतिवृत्त क्लब' द्वारा शोध विधियों' पर दस दिवसीय कार्यशाला का शुरू

व्याख्यान में वीकेएम की छात्राओं ने जाना क्यों जरूरी है इतिहास लेखन



dil india live (Varanasi). वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा , वाराणसी में 23 मार्च से 30 मार्च 2026 तक ' इतिहास विभाग' और 'इतिवृत्त क्लब' के संयुक्त तत्वावधान में ' ऐतिहासिक शोध विधियों' पर दस दिवसीय कार्यशाला का आयोजन ' हिस्टोरिका संस्थान' द्वारा प्रयोजित किया गया।कार्यशाला के उद्घाटन का शुभारम्भ महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव के आशीर्वचनों से हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय की वरिष्ठ सदस्या डॉ शांता चैटर्जी ने इतिहास की किस प्रकार पुनरावृत्ति होनी चाहिए पर विद्वत वक्तव्य देते हुए ऐतिहासिक शोध विधियों पर चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विष्णु शर्मा एवं बसन्त ने इतिहास लेखन क्यों जरूरी है पर विस्तृत व्याख्यान दिया। अतिथियों का स्वागत डॉ शशिकेश कुमार गोंड द्वारा और कार्यशाला विषय की प्रस्तावना प्रोफेसर पूनम पांडेय द्वारा किया गया। 

कार्यशाला में कुल दस व्याख्यानों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें प्रथम दिवस का व्याख्यान डॉ श्वेता सिंह (इतिहास विभाग) द्वारा ऐतिहासिक स्रोतों एवं उसके प्रकृति एवं वर्गीकरण पर व्याख्यान दिया जाएगा। द्वितीय दिवस 24 मार्च 2026 का व्याख्यान प्रोफेसर कल्पना आनंद (समाजशास्त्र विभाग) द्वारा थीसिस राइटिंग और रेफरेंसिंग पर तथा डॉ. प्रिया सिंह (अर्थशास्त्र विभाग) द्वारा 'क्वालिटेटिव एंड क्वांनिटेटिव मेथड ' पर व्याख्यान देंगी। तृतीय दिवस 25 मार्च 2026 का व्याख्यान डॉ सिमरन सेठ (समाजशास्त्र विभाग) द्वारा ' तुलनात्मक, नृजातीय और पर्यावरणीय इतिहास' और डॉ.आरती चौधरी द्वारा (प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति पुरातत्व विभाग)  ' नया पुरातत्व' विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया जाएगा।



चतुर्थ दिवस दिनांक 26 मार्च 2026 को डॉ.आरती कुमारी (ए.आई .एच .सी विभाग) द्वारा ' पुरातत्व और भौतिक संस्कृति ' और डॉ.विपिन सोलंकी (भूगोल विभाग) द्वारा ' जनसांख्यिकी, स्थानिक तकनीकें और संगणनात्मक' विषय पर व्याख्यान दिया गया। पंचम दिवस डॉ आनंद कुमार त्रिपाठी (इतिहास विभाग)विषय' इतिहास: पद्धतिगत बहसें और परिप्रेक्ष्य' पर अपनी व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। डॉ. कल्पना सिंह ( इतिहास विभाग ) द्वारा ' ऐतिहासिक स्रोतों और साक्ष्यों की व्याख्या' प्रस्तुत की जाएगी।अन्तिम व्याख्यान डॉ.विनीता सिंह (शिक्षा शास्त्र संकाय विभाग) ' सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में साहित्यिक चोरी को समझना: अवधारणाएँ, कारण और परिणाम' विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया जाएगा। इसी क्रम में ' शहीद दिवस' मनाते हुए 23 मार्च को देश के शहीद वीरों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में डॉ. मालविका डॉ.अनुजा त्रिपाठी एवं रणनीति राय सहित समस्त शिक्षकगण एवं इतिवृत्त क्लब मेंबर मानविका, मनीषा, ऐंदवी, प्राची श्रद्धा एवं सुगंधा, श्रुति, अनुक्ता एवं अमीषा के साथ समस्त छात्राएं उपस्थित रहीं।

jan kalyan parishad: eid मिलन में हुई दुआएं, दुनिया में भारत एक मिसाल कायम करें... आमीन

काव्य पाठ संग हर्षोल्लास से मना ईद मिलन समारोह



 F. farouqi Babu 

dil india live (Varanasi). जन कल्याण परिषद् उत्तर प्रदेश के तत्वावधन में ईद मिलन , कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन अन्नपूर्णा सभागार राम कटोरा में  किया गया , जिसकी अध्यक्षता संस्था के प्रदेश अध्यक्ष गंगा सहाय पाण्डेय ने व मुख्य अतिथि ई० शमशुल आरफीन जी रहे। सहायक पुलिस आयुक्त यातायात सोमवीर सिंह तिरोही ने अभिनन्दन के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यातायात नियंत्रण में नागरिकों का सहयोग अपेक्षित है।






      इस अवसर पर शहर के जाने- मानें कवि शायर उपस्थित होकर सभी ने एक दूसरे का मुंह मीठा करा कर व गले मिलकर दूसरे को ईद की बधाई दी। अध्यक्षता कर रहे गंगा सहाय पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि ईद प्रेम व मिलाप का पावन पर्व है , प्रेम किसी सभी धर्मों का अंग है जो सभी को आपस में जोड़ कर रखता है जिससे देश में अमन चैन रहता है और देश का गौरव बढ़ाता ।

   मुख्य अतिथि ई. शमशुल आरफीन ने कहा ईद हो या होली दोनों ही बड़ा पावन पर्व है इसमें हम सब आपस में गले मिल कर भाईचारे का पैगाम दुनिया की फलक पर देते हैं, मैं ख़ुदा से यही कहता हूं हम सब का प्यार इसी तरह बढ़ता रहे और दुनिया में भारत एक मिसाल कायम करें सभी को ईद की बहुत बहुत बधाई ।

   इस अवसर पर निम्नलिखित रचनाकारों ने काव्य पाठ किया सर्व श्री देवेन्द्र पाण्डेय, जमाल बनारसी, जितेन्द्र श्रीवास्तव टोपी,  बुद्धदेव तिवारी , प्रदीप कुमार, गणेश  सिंह प्रहरी, भुलक्कड़ बनारसी, जितेन्द्र श्रीवास्तव टोपी, बनारसी, सुबोध कुमार, आनन्द कृष्ण मासूम ने काव्य पाठ कर खूब वाहवाही बटोरी व एडवोकेट महफूज़ आलम मुन्ना, डा. अंजनी कुमार मिश्रा, जमाल अहमद अंसारी, जमाल ख़ान, सतीश कसेरा, डा. मोईन अहमद अंसारी, डा. नईम कादरी, डा. अंजनी कुमार मिश्रा आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

  कार्यक्रम का सफल संचालन कवि सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध ने व धन्यवाद ज्ञापन संस्था के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. अंजनी कुमार मिश्रा ने किया ।

सोमवार, 23 मार्च 2026

VKM Varanasi Main छह दिवसीय लिंग-संवेदनशीलता अनुसंधान कार्यक्रम का पांचवां दिन

किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति उसके जेंडर से नहीं  बल्कि जाति, वर्ग, धर्म व लैंगिकता भी महत्वपूर्ण-प्रो. पद्मिनी


dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ एवं युवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में संचालित छह दिवसीय लिंग-संवेदनशीलता अनुसंधान कार्यक्रम के अंतर्गत पांचवे दिन, सोमवार को दो सत्रों में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के पहले सत्र का विषय "मीडिया और लैंगिक संवेदनशीलता" एवं दूसरे सत्र का विषय "भारतीय संदर्भ में अंतर्संबंधता की समझ: जाति, वर्ग, धर्म एवं लैंगिकता" का आयोजन किया गया। कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने शुभकामनाएं दी। प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में अशोक कुमार पाण्डे (सहायक निर्देशक, आकाशवाणी) उपस्थित थे। 



मुख्य वक्ता का स्वागत अनुराधा बापुली द्वारा किया गया। इन्होंने मीडिया के विभिन्न माध्यमों में लैंगिक संवेदनशीलता के महत्व पर चर्चा की। सत्र के दौरान वक्ता ने मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि मीडिया समाज का दर्पण है, इसलिए समाचारों की रिपोर्टिंग और विज्ञापनों में 'जेंडर न्यूट्रलिटी' (लैंगिक निष्पक्षता) का होना अनिवार्य है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से छात्राओं को यह समझाया कि किस प्रकार जिम्मेदार पत्रकारिता समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. पद्मिनी रवींद्रनाथ (अर्थशास्त्र विभाग, महिला महाविद्यालय बीएचयू) ने अपने व्याख्यान में भारतीय समाज की विविधताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसी भी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति केवल उसके जेंडर से निर्धारित नहीं होती, बल्कि उसकी जाति, वर्ग, धर्म एवं लैंगिकता भी उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्राओं को सामाजिक भेदभाव के प्रति सजग रहने तथा समानता और सम्मान की भावना को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

दोनों सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रभावशाली रहे। छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की तथा प्रश्न-उत्तर सत्र में अपनी जिज्ञासाएं भी व्यक्त कीं। कार्यशाला का सफलतापूर्वक संयोजन डॉ अनुराधा बापुली तथा संचालन अनन्या पाण्डे ( स्नातक प्रथम वर्ष) द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यशाला के आयोजन समिति के सदस्य जिनमें डॉ. मालविका, डॉ. प्रियंका, डाॅ. पूर्णिमा सिंह, डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव, डॉ. प्रतिमा सिंह आदि उपस्थित रहे।

रविवार, 22 मार्च 2026

Eid Mubarak 2-eid के बाद शुरू हुआ असल इम्तिहान

जरा गौर कीजिए क्या रमज़ान हमें बदल पाया?

इस्लाम में इबादत का मकसद केवल रस्म नहीं, बल्कि बेहतर इंसान बनाना



dil india live (Varanasi). रमज़ान के मुकम्मल होने और ईद-उल-फितर की नमाज़ के साथ एक पाक महीने का समापन हो जाता है। मस्जिदों और ईदगाहों में तकबीर की गूंज, गले मिलने की रिवायत और खुशियों का माहौल...ये सब मिलकर एक रूहानी सुकून देते हैं। लेकिन इस खुशी के पीछे एक गहरी सच्चाई छिपी है: असली इम्तिहान अब शुरू होता है। रमज़ान तो एक ट्रेनिंग था, एक अभ्यास था, अब देखना यह है कि इस प्रशिक्षण का असर हमारे जीवन में कितना स्थायी हुआ।

रमज़ान के 30 दिनों में इंसान खुद को एक अनुशासन में बांध लेता है। वह न सिर्फ भूख-प्यास से सब्र करना सीखता है, बल्कि अपनी नजर, जुबान और दिल को भी काबू में रखने की कोशिश करता है। पांच वक्त की नमाज़ की पाबंदी, कुरआन की तिलावत, गुनाहों से दूरी और जरूरतमंदों की मदद—ये सब उस महीने की पहचान बन जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सब केवल एक महीने के लिए था? अगर ईद के बाद हम फिर से उसी लापरवाही, गुस्से, झूठ और बेईमानी की तरफ लौट जाते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि हमने रमज़ान को केवल निभाया, समझा नहीं।



ईद के बाद की जिंदगी दरअसल हमारे ईमान की असली परीक्षा होती है। अब कोई रोजे की मजबूरी नहीं, कोई समय की सख्ती नहीं बल्कि अब हर अच्छा काम हमारी अपनी नीयत और इरादे पर निर्भर करता है। यही वह समय है जब यह तय होता है कि हमने सब्र को अपनी आदत बनाया या केवल एक महीने का अभ्यास समझकर छोड़ दिया। क्या हम अपनी नमाज़ों को वैसे ही कायम रखेंगे? क्या हमारी जुबान झूठ और गाली से बची रहेगी? क्या हमारी नजरें वैसी ही पाक रहेंगी जैसी रमज़ान में थीं?

यह भी समझना जरूरी है कि इस्लाम में इबादत का मकसद केवल रस्म निभाना नहीं, बल्कि इंसान को बेहतर बनाना है। अगर रमज़ान के बाद भी हमारे व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आता, तो यह आत्ममंथन का विषय है। हमें खुद से पूछना चाहिए कि क्या हमने केवल भूख-प्यास सही या अपने अंदर के अहंकार, लालच और बुराइयों को भी काबू किया?

असल सुधार वहीं है जो स्थायी हो। अगर हम रमज़ान की सीखी हुई बातों को अगले 11 महीनों में भी जारी रखें—चाहे वह नमाज़ की पाबंदी हो, सच्चाई हो, या दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार तो यही इस महीने की असली कामयाबी होगी। वरना, हर साल रमज़ान आएगा और चला जाएगा, लेकिन हम वहीं के वहीं रह जाएंगे।

ईद केवल खुशी का दिन नहीं, बल्कि एक याद दिलाने वाला दिन भी है कि हमने एक महीने तक जो सीखा, उसे अब अपनी पूरी जिंदगी में उतारना है। क्योंकि अल्लाह के यहां असली मायने उसी के हैं, जो लगातार रहे, न कि जो केवल एक महीने तक सीमित हो।

हेसामुद्दीन अंसारी 

(लेखक पत्रकार व विचारक हैं)


UP K Varanasi Main फिट हैं तो हिट दौड़ में काजल रही प्रथम

विभिन्न खेलों में सैकड़ों बालिकाओं ने दिखाई प्रतिभा 





dil india live (Varanasi) वाराणसी में फिट हैं तो हिट है कार्यक्रम रविवार को शानदार माहौल में सम्पन्न हुआ। इसमें रग्बी, फुटबाल, हॉकी, जूडो, एथलेटिक्स और  हैंडबॉल की सैकड़ों बालिकाओं ने रविवार को पांच किलोमीटर की वॉक रेस में हिस्सा लिया। 

लालपुर स्टेडियम से परमानंदपुर मिनी स्टेडियम तक यह दौड़ आयोजित की गई। इसमें काजल प्रथम, सुनीता द्वितीय और कोमल तृतीय स्थान पर रही। कार्यक्रम की संयोजक डॉ आशा सिंह ने बताया इस दौड़ के माध्यम से लोगों को स्वस्थ के प्रति जागरूक किया गया। लोगो को बताया गया कि प्रतिदिन कम से कम एक घंटा अपने स्वस्थ के लिए अवश्य दे। क्यों कि दौड़, मार्निंग वॉक और योग आदि से बीमारी दूर रहती है।