बुधवार, 24 जून 2026

Varanasi Main dalmandi ki रंगीले शाह मस्जिद के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने दिया पदभार से इस्तीफा

शाहबुद्दीन अहमद अल्लाह मालिक शाही मस्जिद रंगीले शाह के प्रबंधन समिति के हैं जॉइंट सेक्रेटरी

dil india live (Varanasi). अल्लाह मालिक शाही मस्जिद रंगीले शाह के प्रबंधन समिति के जॉइंट सेक्रेटरी शाहाबुद्दीन अहमद, पुत्र स्वर्गीय ख्वाजा सरफराज अहमद, निवासी सी-4/215 ॥ FB सरायगोवर्धन चेतगंज, वाराणसी ने अपने पदभार से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र को जारी करते हुए उन्होंने कहा है कि अल्लाह मालिक शाही मस्जिद (रंगीले शाह) की प्रबंधन समिति में मैं जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हूँ।

वर्तमान परिस्थितियों एवं व्यक्तिगत कारणों से मैं अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ववत् करने में स्वयं को असमर्थ पा रहा हूँ। इसीलिए मैं अपने पद से स्वेच्छा से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र प्रस्तुत करता हूँ। आपसे निवेदन है कि मेरा त्यागपत्र स्वीकार करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें। उन्होंने इस पत्र की एक प्रति मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO), उत्तर प्रदेश, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ को आवश्यक जानकारी एवं अभिलेख हेतु प्रेषित किया है।


मंगलवार, 23 जून 2026

UP के Varanasi में गेल ने किया नये CNG स्टेशन की शुरुआत

गेल द्वारा संचालित सीएनजी स्टेशनों की बनारस में संख्या पहुंची 46

dil india live (Varanasi). वाराणसी में गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) ने स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देते हुए अपने 46वें सीएनजी (सीएनजी) स्टेशन का शुभारंभ किया। यह नया सीएनजी स्टेशन आशापुर क्षेत्र में स्थापित किया गया है, जिससे आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को किफायती एवं सुलभ ईंधन की सुविधा मिलेगी। इस सीएनजी स्टेशन का उद्घाटन गेल के कार्यकारी निदेशक (सीजीडी) आशु शिंगल द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, गेल शहर में स्वच्छ ऊर्जा के प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है और प्रतिदिन नए घरेलू कनेक्शनों (डीपीएनजी) की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे पीएनजी को अपनाएं, ताकि एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हो सके और वहां के लोगों को इसका लाभ मिल सके।


उद्घाटन समारोह में गेल के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें सुशील कुमार (महाप्रबंधक) प्रवीण सिंह, मुख्य प्रबंधक (स्टील) चंदन कुमार, आनंद मोहन, देबाशीष साहू,जे आकाश, सुमित सागर, विकास कुमार शामिल रहे। इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।

यह उपलब्धि वाराणसी सीजीडी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि अब गेल शहर में कुल 46 सीएनजी स्टेशनों का संचालन कर रहा है। इससे नागरिकों को स्वच्छ ईंधन की आसान उपलब्धता सुनिश्चित होगी और शहर के विभिन्न हिस्सों में सीएनजी नेटवर्क और मजबूत होगा। सीएनजी एक स्वच्छ, सुरक्षित एवं किफायती ईंधन है, जो पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है। इसके उपयोग से वाहनों की कार्यक्षमता बढ़ती है, रखरखाव लागत कम होती है तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। गेल वाराणसी लगातार सीएनजी एवं पीएनजी नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। कंपनी आधुनिक तकनीक, उच्च सुरक्षा मानकों तथा विश्वसनीय आपूर्ति के माध्यम से शहरवासियों को बेहतर ऊर्जा समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही गेल स्थानीय स्तर पर अधोसंरचना विकास एवं रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

गेल का यह प्रयास वाराणसी को स्वच्छ, हरित एवं प्रदूषण-मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Lucknow अग्निकांड के बाद Varanasi में 5 कोचिंग सेंटरों में मिलीं खामियां, भवन सील

अग्निशमन विभाग की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

ऐलान: शिक्षण संस्थाओं में जारी रहेगी आगे भी कार्यवाही 

dil india live (Varanasi). वाराणसी में अग्निशमन विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर कोचिंग सेंटर्स में जांच अभियान चलाया गया। दुर्गाकुंड, मकबूल आलम रोड और बाबतपुर क्षेत्र के कोचिंग संस्थानों की जांच के दौरान फायर सेफ्टी मानकों में गंभीर खामियां मिलने पर पांच कोचिंग सेंटरों के भवन सील कर दिए गए। वहीं कई अन्य संस्थानों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। दरअसल लखनऊ के कोचिंग सेंटर में अग्निकांड में एक दर्जन से ज्यादा स्टूडेंट्स की मौत हो गई इसके बाद प्रदेश भर में शिक्षण संस्थानों में आज से पड़ताल अभियान चलाया जा रहा है।





अग्निशमन विभाग की टीम ने दुर्गाकुंड क्षेत्र स्थित जेआरएस, एल-वन, एलेन कोचिंग सेंटर के अलावा मकबूल आलम रोड पर संचालित आकाश कोचिंग, माइक्रोटेक कोचिंग और जेबीकेबी कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया। इसके साथ ही पिंडरा फायर स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत शिव प्रभा भवन शगुनहा, इसरो सेल स्टडी सेंटर और इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एजुकेशन, बाबतपुर की भी जांच की। इस दौरान कुछ में उपकरण तो मिले, लेकिन व्यवस्था अधूरी ही थी। निरीक्षण के दौरान माइक्रोटेक कोचिंग सेंटर में लगा स्मोक डिटेक्टर क्रियाशील स्थिति में नहीं मिला। वहीं जेबीकेबी कोचिंग सेंटर में केवल अग्निशमन यंत्र लगा हुआ पाया गया, जबकि अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजाम मौजूद नहीं थे। 



फायर अधिकारियों ने बताया कि कई संस्थानों में अग्निशमन यंत्र और अन्य सुरक्षा उपकरण तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। कुछ जगहों पर जिम्मेदार कर्मचारी निरीक्षण के समय अनुपस्थित मिले। ऐलेन कोचिंग सेंटर में भी खामियां मिलने पर भवन को सील कर दिया गया। अग्निशमन विभाग की टीम ने समाचार लिखे जाने तक विभिन्न कोचिंग संस्थानों में जांच अभियान जारी रखा। अधिकारियों ने भवनों में आपातकालीन निकास, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र, सुरक्षा संकेतक और कर्मचारियों की तैयारी की स्थिति का भी मूल्यांकन किया।

6 muharram को मातमी धुन संग निकला dalmandi से 40 घंटे चलने वाला कदीमी जुलूस

सैकड़ों साल कदीमी दुलदुल के जुलूस में शामिल हुए ऊंट पर बैठे मासूम



Varanasi (dil India live). 6 muharram (छठवीं मोहर्रम) को विश्व प्रसिद्द तकरीबन 40 घंटे तक चलने वाला चार सौ साल से ज्यादा कदीमी दुलदुल का जुलूस कच्ची सराय (दालमंडी) इमामबाड़े से उठाया गया। इस जुलूस में कई मशहूर बैंड भी मौजूद थे, जो मातमी धुन बजाते हुए चल रहे थे। जुलूस कच्चीसराय से उठकर विभिन्न रास्तों से होते हुए लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान पहुंचा। इसके बाद वापस चौक होता हुआ मुकीमगंज, प्रह्लादघाट, कोयला बाजार, चौहट्टा होते हुए लाट सरैया के लिए रवाना हुआ। वहां से 8 मोहर्रम की सुबह वापस आकर कच्ची सराय के इमामबाड़े में ही समाप्त होगा। यह जुलूस लगातार 6 से 8 मोहर्रम तक चलता रहता है। जुलूस में शामिल ऊंट पर मासूम अजादार सवार थे। दुलदुल की जियारत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था 

शकील अहमद जादूगर ने कहा कि मोहर्रम का यह जुलूस महज़ जुलूस ही नहीं बल्कि उस दौर का इतिहास भी अपने भीतर समेटे हुए है जब इन्हीं जुलूसों में छुपकर आजादी के दीवाने एक मुहल्ले से दूसरे मोहल्ले पहुंच जाते थे और अंग्रेज अपना हाथ मलते रहते थे। आठ थाना क्षेत्रों में यह जुलूस आज भी तकरीबन चालीस घंटा चक्रमण करता है। 

छठवीं मोहर्रम के इस विश्व प्रसिद जुलूस में मशहूर बैंड का दस्ता मातमी धुन बजाते हुए चल रहा था। जुलूस नयी सड़क, शेख सलीम फाटक, काली महल, पितरकुण्डा, लल्लापुरा होता हुआ दरगाह-ए-फातमान पहुंचा जहां कुछ देर रूकने के बाद पुनः जुलूस चेतगंज, पियरी, कवीरचौरा, नवाब की ड्योढ़ी औसानगंज, दोषीपुरा, दारानगर, सदर इमामबाड़ा, लाट सरैया, पठानी टोला, हनुमान फाटक, चौहट्टा लाल खां, मुकिमगंज, गायघाट, पक्का महाल, चौक और दालमण्डी होते हुए 40 घंटे तक चल कर वापस कच्चीसराय पहुंचकर समाप्त होगा। 




जुलूस में मुख्य रूप से मिर्जा जफर हसन (एडवोकेट), सगीर हसन, हैदर मौलाई, साजिद हुसैन, इमरान जैदी, सैयद आफाक हैदर, रेहान हसन, जरगम हैदर, शारिक हुसैन, कैफी आजमी, हैदर अब्बास, सैयद सकलैन हैदर, शकील अहमद जादूगर आदि शामिल थे। 



शेख सलीम फाटक में बाल का मातम आज 

सातवीं मोहर्रम पर मंगलवार को बारह बजे दिन में शेख सलीम फाटक स्थित रिजवी हाउस पर महिलाएं बाल का मातम करेगी। मजलिस का आगाज मोहतरमा नुजहत फरमान खिताबत करेगीं। इस दौरान नौहाख्वानी मातम अंजुमन हैदरी निस्वां करेगी।




बड़ी व छोटी मेहंदी का कदीमी जुलूस 
चौहट्टा लाल खां इलाके से मोहर्रम के सातवें रोज़ छोटी मेहंदी व बड़ी मेहंदी के दो कदीमी जुलूस निकाले जाते है। इसमें बड़ी मेहंदी का जुलूस सदर इमामबाड़ा जाकर देर रात सम्पन्न होता है।

कल उठेगा अलम व तुर्बत का जुलूस

अलम व तुर्बत का जुलूस ख्वाजा नब्बू के चाहमामा स्थित इमामबाड़ा से कार्यक्रम संयोजक मुनाजिर हुसैन मंजू के संयोजन में आठवीं मोहर्रम को रात 8:30 बजे उठेगा। जुलूस उठने पर सवारी पढ़ी जाएगी। जुलूस दालमंडी पहुचने पर अंजुमन हैदरी चौक नौहा ख्वानी व मातम शुरू करेगी। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होकर फातमान पहुंचेगा और पुनः वापस अपने कदीमी रास्तों से होते हुए चहमामा स्थित इमामबाडे  मे आकर सम्पन्न होगा। जुलूस में पूरे रास्ते उस्ताद फतेह अली खां व साथी शहनाई पर मातमी धुन पेश करेंगे। 

अर्दली बाज़ार में 8 वीं मोहर्रम को उठेगा दुलदुल 

वरुणापार के अर्दली बाजार में सैय्यद जियारत हुसैन के तारगली स्थित इमामबारगाह से 8 वीं मोहर्रम को दुलदुल, अंलम, ताबूत रात्रि 10 बजे उठेगा। जुलूस अपने कदीमी (पुराने) रास्ते से होकर उल्फत बीबी हाता स्थित स्व.मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। जुलूस में अंजुमन इमामिया नौहा व मातम करेंगी। यह जानकारी इरशाद हुसैन "शद्दू" ने दी है।

सोमवार, 22 जून 2026

journalist Salim सुहरवर्दी के जनाज़े में उमड़ा हुजूम

सलीम सुहरवर्दी को कंधा देने उमड़ा हुजूम

फरदू शहीद कब्रिस्तान में हुए सुपुर्द-ए-खाक 



dil india live (Varanasi). काशी पत्रकार संघ के सदस्य व वरिष्ठ पत्रकार, उस्ताद शायर सलीम सुहरवर्दी को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए सोमवार को लोगों का हुजूम उमड़ा। उनके जनाजे की नमाज़ छित्तनपुरा में मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ के इमाम मौलाना जकीउल्लाह कादरी ने अदा कराई। इस मौके पर उन्हें आखिरी कंधा देने की लोगों में होड़ देखी गई। सलीम सुहरवर्दी को ओंकारेश्वर में फरदू शहीद कब्रिस्तान में मगरिब की नमाज़ के बाद सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके जनाजे में रेयाज अहमद नूर, आमीर चौधरी, अब्दुल हकीम, अशफाक सिद्दीकी, जर्नालिस्ट अमन, मौलाना वलीउल्ला आरिफ, हाफ़िज़ इमामुद्दीन, वसीम हाशमी आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।

गौरतलब हो कि आज सोमवार को जर्नालिस्ट सलीम सुहरवर्दी का इंतकाल हो गया था। वो तकरीबन 85 साल के थे। वो अपने पीछे एक लड़का, तीन बेटियों व पत्नी समेत पूरा भरा परिवार छोड़ कर अलविदा कह गये, ह्रदय गति रुकने से शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल कबीरचौरा में उन्होंने आज अंतिम सांस ली। 

उनके इंतकाल की खबर जैसे ही मीडिया जगत में फैली हर तरफ अफसोस की लहर देखी गई। तकरीबन 6 दशक से भी ज्यादा समय तक उन्होंने आजाद, हिंदोस्तां, आवाजें मुल्क, क़ौमी मोर्चा समेत विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में पत्रकारिता की। काशी पत्रकार संघ के वो वरिष्ठ सदस्यों में थे। हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी पर उनकी अच्छी पकड़ थी। हाल ही में उनका मोहर्रम पर एक इंटरव्यू गांडीव डिजिटल में जारी हुआ था। 

हरदिल अज़ीज़ सलीम सुहरवर्दी की लेखनी लोगों के लिए मिसाल थी। उनके परिवार से जुड़े आमीर ने बताया कि फरदू शहीद कब्रिस्तान में मगरिब बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके इंतकाल से विभिन्न नातिया तंजीमो में मायूसी देखी गई। रेयाज अहमद नूर ने भरे गले से बताया कि गंगा जमुनी तहज़ीब लिए मशहूर नज़ीर बनारसी के वो खास शागिर्द थे। यही वजह है कि उनकी उर्दू अदब में अच्छी पकड़ थी। दर्जनों तंजीम नबी की पैदाइश पर सलीम सुहरवर्दी के लिखे अशरार पढ़ा करती थीं। सादगी और ईमानदारी की पत्रकारिता करने की वजह से वो सदैव सादा जीवन उच्च विचार के रास्ते पर चलते रहे। उनका जाना पत्रकारिता और उर्दू अदब की बड़ी क्षति मानी जा रही है। सन्मार्ग के पूर्व संपादक डाक्टर आनंद बहादुर सिंह के खास मित्रों में सलीम सुहरवर्दी भी थे। 

Varanasi K वरिष्ठ पत्रकार Salim सुहरवर्दी का इंतकाल

हरदिल अज़ीज़ थे सलीम सुहरवर्दी, छोड़ गए भरा पूरा परिवार 

नज़ीर बनारसी के थे खास शागिर्द, नबी की शान में अंजुमनों के लिए लिखते थे कलाम 



dil india live (Varanasi). काशी पत्रकार संघ के सदस्य व वरिष्ठ पत्रकार, उस्ताद शायर सलीम सुहरवर्दी का आज सोमवार को इंतकाल हो गया। वो तकरीबन 85 साल के थे। वो अपने पीछे एक लड़का, तीन बेटियों व पत्नी समेत पूरा भरा परिवार छोड़ गए हैं। कर अलविदा कह गये, ह्रदय गति रुकने से शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल कबीरचौरा में उन्होंने आज अंतिम सांस ली। 

उनके इंतकाल की खबर जैसे ही मीडिया जगत में फैली हर तरफ अफसोस की लहर देखी गई। तकरीबन 6 दशक से भी ज्यादा समय तक उन्होंने आजाद, हिंदोस्तां, आवाजें मुल्क, क़ौमी मोर्चा समेत विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में पत्रकारिता की। काशी पत्रकार संघ के वो वरिष्ठ सदस्यों में थे। हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी पर उनकी अच्छी पकड़ थी। हाल ही में उनका मोहर्रम पर एक इंटरव्यू गांडीव डिजिटल में जारी हुआ था। 

हरदिल अज़ीज़ सलीम सुहरवर्दी की लेखनी लोगों के लिए मिसाल थी। उनके परिवार से जुड़े आमीर ने बताया कि फरदू शहीद कब्रिस्तान में मगरिब बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके इंतकाल से विभिन्न नातिया तंजीमो में मायूसी देखी गई। रेयाज अहमद नूर ने भरे गले से बताया कि गंगा जमुनी तहज़ीब लिए मशहूर नज़ीर बनारसी के वो खास शागिर्द थे। यही वजह है कि उनकी उर्दू अदब में अच्छी पकड़ थी। दर्जनों तंजीम नबी की पैदाइश पर सलीम सुहरवर्दी के लिखे अशरार पढ़ा करती थीं। सादगी और ईमानदारी की पत्रकारिता करने की वजह से वो सदैव सादा जीवन उच्च विचार के रास्ते पर चलते रहे। उनका जाना पत्रकारिता और उर्दू अदब की बड़ी क्षति मानी जा रही है। सन्मार्ग के पूर्व संपादक डाक्टर आनंद बहादुर सिंह के खास मित्रों में सलीम सुहरवर्दी भी थे। 

रविवार, 21 जून 2026

5 Muharram के जुलूस में Ustad Bismillah Khan के परिजनों ने शहनाई पर पेश की मातमी धुन

गोविंदपुरा से निकला अलम का कदीमी जुलूस, दर्द भरे नौहों पर हुआ मातम

भारत रत्न उस्ताद मरहूम बिस्मिल्लाह खान पेश करते थे जुलूस में आंसुओं का नज़राना 


dil india live (Varanasi). वाराणसी में 21 जून को माहे मोहर्रम की पांचवीं तारीखें को अज़ादारी का सिलसिला और तेज़ हो गया है। रविवार को शहर का शिया बहुल क्षेत्र इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों के ग़म में डूबा रहा। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि जैसे-जैसे दिन गुज़र रहे हैं, अज़ादारों का जोश और मजलिसों व जुलूसों की तादाद बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में पांचवे दिन शहर के विभिन्न ऐतिहासिक और पारंपरिक रास्तों से कई कदीमी जुलूस पूरी अक़ीदत और एहतराम के साथ उठाए गए।


इसमें मुख्य और ऐतिहासिक कदीमी जुलूस गोविंदपुरा स्थित 'वक्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली' से अंजुमन हैदरी के ज़ेरे-इंतज़ाम पूरी अक़ीदत के साथ उठाया गया। जुलूस के पारंपरिक इतिहास के अनुसार, यहां मुजफ्फरपुर के मशहूर मरहूम वज्जन ख़ान के परिवार के सदस्यों (बेटों) ने बेहद पुरदर्द अंदाज़ में पारंपरिक मर्सिया (सवारी) पढी, इसके बाद, कदीमी परंपरा को निभाते हुए भारत रत्न मरहूम उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान के परिजनों ने शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश करते हुए दिल को झकझोर देने वाली मातमी धुन बजाई। भारत रत्न उस्ताद मरहूम बिस्मिल्लाह खान जब हयात में थे तो इसी जुलूस में आंसुओं का नज़राना पेश किया करते थे। उनकी शहनाई से निकलने वाली मातमी धुन पर तमाम लोगों की आंखें नम हो जाती थी। उस्ताद तो नहीं है पर उनकी यादें और रवायतों को परिजन जिंदा रखें हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक जुलूस अपने शबाब पर था।

पांचवीं मोहर्रम को दूसरा प्रमुख जुलूस अर्दली बाज़ार स्थित हाजी अबुल हसन के निवास से निकाला गया। यहां कर्बला के सबसे छोटे 6 महीने के मासूम शहीद शहजादे, हज़रत अली असगर का झूले का जुलूस निकाला गया। इस भावुक कर देने वाले जुलूस में अंजुमन इमामिया के नौजवानों और अज़ादारों ने नौहाख़्वानी की और मातम कर मासूम अज़ादार को खिराजे-अक़ीदत पेश किया।

ऐसे ही तीसरा जुलूस रामनगर क्षेत्र से निकाला गया। यह ऐतिहासिक 'मन्नत का जुलूस' है, जिसे महाराजा बनारस द्वारा स्थापित किया गया था। गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश करते हुए इस जुलूस में शिया समुदाय के साथ-साथ अहले-सुन्नत (सुन्नी समुदाय) के हज़रात और अन्य लोग भी पूरी अक़ीदत व श्रद्धा के साथ शामिल होते हैं और ताज़िया उठाते हैं। 

6 मोहर्रम को निकलेगा 40 घंटे चलने वाला प्रसिद्ध जुलूस 

हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि सोमवार को 6 मोहर्रम पर 40 घंटे का ऐतिहासिक दुलदुल जुलूस (दालमंडी) स्थित इमामबाड़े से निकलेगा। विश्व प्रसिद्ध 40 घंटे तक लगातार चलने वाला दुलदुल का जुलूस पूरी शान-ओ-शौकत और ग़मगीन माहौल में उठेगा। इस जुलूस का इतिहास बेहद पुराना है, जिसमें हाथी, घोड़े, ऊँट और कई नामी बैंड शामिल रहते हैं, जो पूरे रास्ते मातमी धुन बजाते हैं। यह जुलूस कच्ची सराय से उठकर लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान जाएगा। वहां से वापस आकर चौक, मुकीमगंज, प्रह्लादघाट, कोयला बाज़ार और चौहट्टा होते हुए लाट सरैया पहुंचेगा। यह कदीमी जुलूस लगातार दो दिनों तक चलते हुए 8 वीं मोहर्रम (24 जून) की सुबह वापस कच्ची सराय के इमामबाड़े में आकर संपन्न होगा।