बनारस में 7 दिन का शोक, सोमवार को होगा जलसे का आयोजन
दुआख्वानी में ख़्वातीन ने मौत के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
Sarfaraz Ahmad
dil india live (Varanasi). अमेरिकी और इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद बनारस में शिया समुदाय ने जहां विरोध प्रदर्शन किया वहीं दूसरी ओर 7 दिन का शोक भी घोषित किया है। इसके अलावा सोमवार को जलसे का आयोजन किया गया है। शिया जामा मस्जिद के इमाम ने अपना शोक संदेश जारी कर लोगों से इसे पालन करने को कहा है।
अमेरिकी और इजरायली हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के समर्थन में बनारस के शिया समुदाय ने दरगाहे फातमान व शिवपुर समेत विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिस का आयोजन कर खामेनेई के लिए जहां दुआएं मांगी वहीं दरगाहे फातमान व शिवपुर में कैंडल मार्च निकाला गया। इस मौके शांतिपूर्ण ढंग से हुए विरोध प्रदर्शन में ख़्वातीन ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया। आयोजन में अमेरिका और इस्राइल के विरोध में रो-रोकर दुआएं मांगी गई।
7 दिन का शोक घोषित
वाराणसी में शिया जामा मस्जिद दारानगर के इमामे जुमा मौलाना जफर अल हुसैनी ने 7 दिन के शोक का ऐलान किया है। इसके साथ ही लोगों से इसका समर्थन करने के लिए भी कहा गया है। मौलाना जफर अल हुसैनी ने लोगों से अपने प्रतिष्ठान बंद करने, काले कपड़े पहने और घरों पर काले झंडे लगाने का आवाहन किया है। इमामे जुमा की ओर से बताया गया है कि सोमवार को दिन में 11:00 बजे सदर इमामबाड़ा सरैया में एक एहतेजाजी जलसे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बनारस के सारे उलेमा और लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है।
दरअसल, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में खामेनेई की मौत की पुष्टि हुई है, जिसके बाद विश्व भर में शिया समुदाय इसको लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। ईरान के साथ-साथ मुस्लिम व इंसाफ पसंद लोग इसे शहादत का दर्जा दे रहे हैं।
इफ्तार से सामाजिक सद्भाव को मिलता है बढ़ावा : डा. आर के यादव
तेलियाबाग मस्जिद में अमन, मिल्लत और देश की तरक्की की हुई दुआएं
dil india live (Varanasi). मस्जिद से जैसे ही अज़ान की सदाएं बुलंद हुई, अल्लाह हु अकबर अल्लाह... तमाम रोजेदारों ने रमज़ान के दूसरे अशरे का पहला रोज़ा खजूर और पानी से खोला। बक्शी जी छोटी मस्जिद तेलियाबाग में इफ्तार दावत के दौरान एक से एक इफ्तार सजाया गया था जिसका सभी ने लुत्फ उठाया। इस दौरान मस्जिद का माहौल बेहद खुशनुमा नज़र आ रहा था। यहां दानिश अत्तारी ने बताया कि नमाज़ के दौरान अमन, मिल्लत और कौम व देश की तरक्की की दुआएं मांगी गई। इस मौके पर मोहम्मद दानिश,हैदर खां, मोहम्मद शाहनवाज़, एहतेशाम अहमद, मोहम्मद अराफात, आरिफ़ अहमद आदि सैकड़ों रोजेदारों ने इफ्तार दावत का लुत्फ उठाया।
इफ़्तार व मजलिस का आयोजन
11 रमज़ान (1 मार्च) रविवार को वक्फ मस्जिद व कब्रिस्तान खास मौलाना मीर इमाम अली पितरकुंडा में मग़रिब की नमाज़ मौलाना ज़फर हुसैनी क़िब्ला की इमामंत में अदा की गई और इफ्तार का आयोजन हुआ। इफ़्तार के बाद बनारस के पहले मोबल्लिग फिरक़ए जाफरी के मोत्ताहबीर आलम, बनारस के पहले इमामे जुमा, ईमानिया अरबी कालेज के पहले प्रिंसिपल मौलाना जवाद साहब ताबासराह के उस्तादे मोहतरम मौलाना मीर इमदाद अली साहब ताबासराह के ईसाले सवाब की मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस का आग़ाज़ शफ़ाअत हुसैन शोफ़ी की सोज़ख़्वानी से हुआ। मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना सैय्यद मुहम्मद अक़ील हुसैनी ने ईरान में शहीद हुए सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई के जीवन पर प्रकाश डाला और अमेरिका व इस्राएल की इस ज़ुल्म ओ बरबरियत पर सख्त भाषा में मुख़ालेफ़त की। मजलिस के आखिर में कर्बला वालों के मसाएब बयान हुए जिसको सुनते ही हर आंख नम हो गई। अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाख़्वानी के फ़राएज़ अंजाम दिये।
इफ़्तार व मजलिस में मौलाना मेहदी रज़ा, मौलाना इश्तियाक़ अली, मौलाना बाक़र रज़ा बलियावी, सैय्यद अब्बास मुर्तुज़ा शम्सी, इक़बाल हुसैन एडवोकेट, सैय्यद हैदर अब्बास चांद, हैदर मौलाई, अंजुमन हैदरी के जनरल सेक्रेटरी नायाब रज़ा समेत बहुत से मोमिनीन ने शिरकत की। इफ़्तार व मजलिस में आये हुए सभी लोगों का शुक्रिया मौलाना मौसूफ़ के ख़ानवादे कि तरफ़ से कार्यक्रम के संयोजक व मोतवल्ली सैयद मुनाज़िर हुसैन मंजू ने अदा किया गया।
उधर नैशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन शाखा वाराणसी की जानिब से शिवपुर स्थित नीमा भवन समेत ग्यारहवें रोज़े पर कई जगहों पर भव्य इफ्तार दावत का आयोजन रविवार को किया गया। नीमा भवन में भारी संख्या में रोजा रखने वाले चिकित्सकों के साथ-साथ विभिन्न धर्मों और संप्रदायों से जुड़े सम्मानित सामाजिक शख्सियतों ने हिस्सा लिया। इस दौरान सभी ने रोजा रखने वालों के साथ मिलकर अपना रोजा खोला।इफ्तार पार्टी में रोज़ा रखने वालों के लिए तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान तैयार किए गए थे। शाम 6 बजे अज़ान के बाद, सभी ने खजूर खाकर एक साथ सभी मजहबों के लोगों ने रोज़ा इफ्तार किया, जिससे पूरा माहौल गंगा जमुनी तहज़ीब व आपसी भाईचारे की नायाब मिसाल पेश करता दिखाई दिया। इससे पहले पठानी टोला शिया मस्जिद में भी रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने रोज़ा इफ्तार का लुत्फ उठाया और नमाजे मगरिब अदा कर मुल्क और कौम की तरक्की की दुआएं मांगी।
इस अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ मुहम्मद अरशद ने कहा कि इस्लाम धर्म आपसी भाईचारा, समानता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान सिखाता है। अध्यक्ष डॉ. आर के यादव ने कहा कि रमज़ान माह के दौरान इफ्तार का आयोजन करना सबसे बड़ा पुण्य है और ऐसे आयोजन सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में प्रेम और सहिष्णुता का संदेश फैलाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान मगरिब की नमाज के बाद देश में शांति, व्यवस्था और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना भी की गई। आए हुए रोजेदारों का स्वागत सचिव डॉ विनय कुमार पांडेय ने एवं धन्यवाद कोषाध्यक्ष डॉ. सलिलेश मालवीय ने किया। इस नूरानी मौके पर डा. आर के यादव, डा. विनय कुमार पांडेय, डा. सलिलेश मालवीय, डा. मुहम्मद अरशद, डा. एम अजहर, डा. फैसल रहमान, डा. नसीम अख्तर, डा. शहरयार सईद, डा. एहतेशामुल हक़, डा. सगीर अशरफ, डा. मुबीन, डा. गुलज़ार, डा. मुहम्मद बेलाल, डा. इकबाल, डा. बी एन रॉकी, डा. एस आर सिंह, डा. जे पी गुप्ता, डा. प्रेम चंद्र गुप्ता, डा. अशफाकुल्लाह, डा.रौशन अली, डा. सलीम इत्यादि शामिल थे।
बदनसीब है वो लोग जो सेहतमंद होकर भी माहे मुबारक में रोज़ा नहीं रहते
dil india live (Varanasi)। फरमाने रसूल (स.) है कि रमजान अल्लाह का महीना है और उसका बदला भी रब ही देंगा। यही वजह है कि रमजान का रोज़ा बंदा केवल रब की रज़ा के लिए ही रखता है। रोज़ा वो इबादत है जो दिखाई नहीं देती बल्कि उसका पता या तो रब जानता है या फिर रोज़ा रखने वाला।
रमजान में जब एक मोमिन रोज़ा रखने की नियत करता है तो वो खुद ब खुद गुनाहों से बचता दिखायी देता हैं। उसे दूसरों की तकलीफ़ का पता भूखे प्यासे रहकर रोज़ा रखने पर कहीं ज्यादा होता है। रमजान को अन्य महीनों पर फजीलत हासिल है। हजरत अबू हुरैरा (रजि.) फ़रमाते हैं कि रसूल अकरम (स.) ने इरशाद फरमाया, कि माहे रमजान में पांच चीजें विशेष तौर पर दी गयी है, जो पिछली उम्मतों को नहीं मिली थी। पहला रोजेदार के मुंह की महक अल्लाह को मुश्क से ज्यादा पसंद है। दूसरे रोजेदार के लिए समुद्र की मछलियां भी दुआ करती हैं और इफ्तार के समय तक दुआ में व्यस्त रहती हैं। तीसरे जन्नत हर दिन उनके लिए रोजेदारों के लिए सजायी जाती है। अल्लाह फरमाता है कि मेरे नेक बंदे दुनिया की तकलीफें अपने ऊपर से फेंक कर तेरी तरफ आवें। चौथे इस माह में शैतान कैद कर दिये जाते हैं और पांचवें रमजान की आखिरी रात में रोजेदारों के लिए मगफिरत की जाती है।
सहाबा ने अर्ज किया कि शबे मगफिरत शबे कद्र है। फरमाया- नहीं, ये दस्तूर है कि मजदूर का काम खत्म होने के वक्त मजदूरी दी जाती है। हजरत इबादा (रजि) कहते हैं कि एक बार अल्लाह के रसूल (स.) ने रमजान उल मुबारक के करीब इरशाद फरमाया कि रमजान का महीना आ गया है, जो बड़ी बरकतवाला है। हक तआला इसमें तुम्हारी तरफ मुतव्ज्जो होते हैं और अपनी रहमते खास नाजिल फरमाते हैं। गलतियों को माफ फरमाते हैं। दुआ को कबूल करते हैं। बदनसीब है वो लोग जो इस माह में भी अल्लाह की रहमत से महरूम रहे, रोज़ा नहीं रखा, तरावीह नहीं पढ़ी, इबादत में रातों को जागे नहीं।
या अल्लाह तू अपने हबीब के सदके में हम सब मुसलमानों को रमज़ान की राह दिखा, बुरे लोगों और बुरे कामों से बचा। रमज़ान की रहमतों से मालामाल कर दे... आमीन।
तालीम की लौ से जलाये हुये चराग़ अपने ही सामने रौशन होता देखता रहा
dil india live (Varanasi). ऐसा भी होता है…“मेरी आंखें भर आईं”…जब एक उस्ताद अपनी ही तालीम की लौ से जलाये हुये चराग़ अपने सामने रौशन होता हुआ देखता है, तो उसके दिल में कैसा समंदर उठता होगा? सोचिये!
बरसों से मैं रमज़ान में तरावीह (विशेष नमाज़)पढ़ता आया हूं। लेकिन कभी उसका ज़िक्र सोशल मीडिया पर करना मुनासिब नहीं था। नमाज़ पढ़ने का दिखावा करना यूं भी अच्छा नहीं। लेकिन आज मैं अपने जज़्बात रोक नहीं पाया।
न जाने कितने बच्चे “मदर हलीमा सेंट्रल स्कूल” जेरेगूलर की चौखट से निकल कर डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफ़ेसर, सी.ए., और कामयाब बिज़नेसमैन बने…,मगर आज जो हुआ, वह कुछ और ही था…इस बार हुस्न-ए-इत्तेफ़ाक़ देखिए-मदर हलीमा का ही एक तालिब-ए-इल्म, मेरे स्कूल का old student ‘शाहबाज’, हमारा इमामे तरावीह (तरावीह की नमाज़ पढ़ाने वाला) बन कर आगे खड़ा था…और मैं… उसका टीचर … उसके पीछे मुक़्तदी (नमाज़ी) बन कर। उसकी आवाज़ में क़ुरआन की तिलावत थी, और मेरी आंखों में रब की रहमत का मंज़र। मैने सोचा यह वही बच्चा है, जिसे कभी मैंने स्कूली सबक़ पढ़ाया था…आज उसकी आवाज़ पर मैं अल्लाह के आगे सिजदा कर रहा हूं। शायद इसे ही “मसावात” कहते हैं…जहां बड़े-छोटे का फ़र्क मिट जाता है, जहां ओहदे, उम्र और हैसियत सब पीछे रह जाते हैं, और आगे रह जाता है तो सिर्फ़ इल्म का नूर।
आज मुझे दिली खुशी हुई-मेरे स्टूडेंट्स की फ़ेहरिस्त में हाफ़िज़-ए-क़ुरआन का नाम भी शामिल हो गया। ये मेरे लिए लम्हे फ़ख़रिया ( moment of proud ) था। मेरे पढ़ाएं हुए बच्चों में कोई क़ुरआन का हाफ़िज़ बन कर मुझे नमाज़ पढ़ाएं। यही इस्लाम की ख़ूबसूरती है। जहां छोटा-बड़ा, गोरा -काला, उस्ताद- शागिर्द, अमीर-ग़रीब, अदना-आला, सब बराबर नज़र आते हैं।
अल्लाह से दुआ है इन बच्चों का हमेशा सर बलन्द रखना, मेरी ख़्वाहिश है कि मेरी ज़िंदगी में ऐसे ख़ूबसूरत मवाक़े ( अवसर ) अक्सर आयें…।
नोमान हसन खां (निदेशक मदर हलीमा सेंट्रल स्कूल ज़ेरेगूलर वाराणसी)
समारोह में बरेका के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव को कर्मियों ने किया साझा
F. Farouqi Babu
dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के प्रशासन भवन स्थित कीर्ति कक्ष में आज 28 फरवरी 2026 को आयोजित सेवानिवृत्ति समारोह में बरेका परिवार ने अपने सात कर्मचारियों को ससम्मान भावभीनी विदाई दी। समारोह में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं परिजनों की गरिमामयी उपस्थिति में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के दीर्घकालीन योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके उज्ज्वल, स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की मंगलकामना की गई।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों में टी.जी.टी. धीरेन्द्र कुमार सिंह, मुख्य कर्मचारी एवं कल्याण निरीक्षक कैलाश नाथ, वरिष्ठ तकनीशियन (क्रेन चालक) राजेश बहादुर, वरिष्ठ तकनीशियन (फिटर) जय कृष्णा ठाकुर, वरिष्ठ तकनीशियन (इलेक्ट्रिकल) अबिनाश कुमार मल्ल, तकनीशियन (ड्राइवर एम एंड पी) शिव सेवक राम तथा तकनीशियन (क्रेन चालक) शशि प्रसाद मिश्रा शामिल रहे। इस अवसर पर सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए बरेका के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त किया।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों से शिष्टाचार भेंट के दौरान प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी लालजी चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि “आप सभी कर्मचारी बरेका परिवार की अमूल्य धरोहर हैं। अपनी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन एवं समर्पण से आपने न केवल बरेका बल्कि भारतीय रेल की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आपकी सेवाएँ एवं कार्य के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।”
इससे पूर्व कीर्ति कक्ष में आयोजित समारोह में उप मुख्य कार्मिक अधिकारी, मुख्यालय समीर पॉल ने सभी सेवानिवृत्तजनों के स्वस्थ, सुखद एवं शांतिपूर्ण जीवन की कामना करते हुए कार्यक्रम को औपचारिक रूप से सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह के रूप में आयोजित किए जाने की घोषणा की। उप मुख्य कार्मिक अधिकारी, मुख्यालय समीर पाल ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप फोल्डर प्रदान कर आत्मीय शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया तथा उनके उत्कृष्ट योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ एवं सुखद जीवन की कामना की। समारोह में मुख्य कर्मचारी कल्याण निरीक्षक विजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी, सहकर्मी एवं परिजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्मिक विभाग के कल्याण अनुभाग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का भावपूर्ण संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन सहायक कार्मिक अधिकारी पीयूष मिंज द्वारा किया गया।
रमज़ान का पहला अशरा "रहमत" का मुकम्मल, मगफिरत का अशरा शुरू
dil india live (Varanasi). मुक़द्दस रमज़ान का पहला अशरा "रहमत" का शनिवार को मुकम्मल हो गया। रहमत का अशरा पूरा होते ही रमज़ान का दूसरा मगफिरत का अशरा शुरू हो गया। पहले अशरे में रब बंदों पर रहमतें नाजिल फ़रमाता है। तो दूसरे अशरे में अल्लाह अपने नेक बंदों की गुनाहों को माफ कर देता है। तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नम से आजादी का 21 रमज़ान से शुरू होगा। आखिरी अशरे में अल्लाह अपने नेक बंदों को जहन्नुम से आजाद कर देता है।
जो लोग रमज़ान के तीनों अशरे में कामयाबी से रोज़ा रखते हैं रब उन्हें जन्नत में आला मुकाम देता है। रोजेदारों के लिए जन्नत सजाया जाता है। जन्नत का एक खास दरवाजा बाबे रययान है उलेमा फ़रमाते हैं कि उस दरवाजे से केवल रोजेदारों को जन्नत में दाखिल किया जाएगा।
मुस्लिम रोजों के साथ ही साथ ईसाई रोज़ा जिसे चालीसा या यहां उपवास काल कहा जाता है अपने रफ्तार पर है। शनिवार को महा उपवास काल के भी दस रोज़े पूरे कर लिए गए। सेंट मैरीज महागिरजा, तेलियाबाग सीएनआई चर्च, लाल गिरजाघर, सेंट पॉल चर्च, सिगरा, सेंट थॉमस चर्च गौदोलिया, राम कटोरा चर्च, ईसीआई चर्च सुंदरपुर आदि से जुड़े मसीही समुदाय ने अपना दसवां उपवास पूरा किया। इस दौरान प्रार्थना सभा और मसीही गीत गाए गयें।
dil india live (Varanasi)। मुकद्दस रमज़ान का महीना हिन्दू-मुस्लिम एकता और सौहार्द की मिसाल है। रमजान के रोज़े के बहाने एक दस्तरखान पर दोनों कौम के लोग एक-दूसरे के जहां नज़दीक आते हैं, वहीं मुस्लिम कल्चर और तहज़ीब में वो टोपी, कुर्ता पहन कर इस तरह से घुल मिल जाते हैं कि उनमें यह पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि कौन मुस्लिम है या कौन हिन्दू। यही नहीं बहुत से ऐसे हिन्दू हैं जो रोज़ा रखते हैं, बहुत से ऐसे गैर मुस्लिम है जो रोज़ा रखने के साथ ही साथ मुस्लिम भाईयों को रोज़ा इफ्तार की दावत देते हैं। ये सिलसिला रमज़ान के बाद बंद नहीं होता बल्कि ये पूरे साल किसी न किसी रूप में हिंदुस्तान में जारी रहता है, चाहे वो ईद हो बकरीद हो, क्रिसमस, गुरु पर्व, दशहरा, दीपावली व होली आदि पर्व। इन त्योहारों को तमाम मजहबों के लोग एक साथ मनाते हैं। पता ये चला कि हक़ की जिन्दगी जीने की रमज़ान हमें तौफीक देता है। आखिर क्या वजह है कि रमज़ान में ही इतनी इबादत की जाती है? दरअसल इस महीने को अल्लाह ने अपना महीना करार दिया है, रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीक़े से तो गुज़ारता ही हैतो एक महीना माहे रमज़ान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। यही वजह है कि एतेकाफ से लेकर तमाम इबादतों में सोने को भी रब ने इबादत में शामिल किया है।
ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सब मुसलमानों को रोज़ा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे और हम सबकी हर नेक तमन्ना व जायज़ ख्वाहिशात को पूरा कर दे..आमीन।