शुक्रवार, 27 मार्च 2026

Varanasi K सृजन सिंह ने किया बेहतरीन खेल कौशल का प्रदर्शन

जूनियर राष्ट्रीय नेटबाल प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश को मिला स्वर्ण पदक

    




dil india live (Varanasi). 38 वीं जूनियर राष्ट्रीय नेटबॉल प्रतियोगिता उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में आयोजित किया गया था जिसमें उत्तर प्रदेश टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उत्तर प्रदेश के बालक टीम मे वाराणसी जनपद के सृजन सिंह ने भी प्रतिभाग किया जिनके अच्छे खेल कौशल के बदौलत उत्तर प्रदेश की टीम ने फाइनल में हरियाणा को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। टीम की इस उपलब्धि पर वाराणसी नेटबाल संघ में खुशी का महौल है और इस उपलब्धि पर वाराणसी नेटबॉल संघ के अध्यक्ष डाॅ. निशांत सिंह, महासचिव रणविजय यादव एवं सभी सदस्यों ने सृजन सिंह को हार्दिक बधाई दी एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

VKM Varanasi की छात्राओं ने जाना ग्रीक कला के वर्गीकरण, उसके विकासक्रम का विस्तृत विवेचन

बताया “पश्चिमी कला में भौतिक सौंदर्य ही ले जाता है आध्यात्मिक सौंदर्य की ओर” 



dil india live (Varanasi). कमच्छा स्थित वसंत कन्या महाविद्यालय में चित्रकला विभाग द्वारा 26 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे “Foundation of Western Art: In Special Reference of Greece and Rome” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसके मुख्य वक्ता डॉ. अवधेश कुमार सिंह, निदेशक, आइफा रहे। इस व्याख्यान में पश्चिमी कला की आधारभूत अवधारणाओं, विशेषतः ग्रीक एवं रोमन कला की परंपराओं के माध्यम से कला और दर्शन के गहन अंतर्संबंधों पर सारगर्भित चर्चा की गई। 

मुख्य वक्ता डॉ. सिंह ने अपने व्याख्यान की शुरुआत पश्चिमी कला के परिचय से की। उन्होंने ग्रीक और रोमन कला की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि पश्चिमी कला में यथार्थवाद के साथ-साथ भौतिकता का भी महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि “पश्चिमी कला में भौतिक सौंदर्य ही आध्यात्मिक सौंदर्य की ओर ले जाता है,” जो कला की गहनता और उसके दार्शनिक पक्ष को स्पष्ट करता है। साथ ही उन्होंने ग्रीक कला के वर्गीकरण से लेकर उसके विकासक्रम तक का विस्तृत विवेचन प्रस्तुत किया। व्याख्यान के दौरान छात्राओं को पश्चिमी कला की संरचना, सौंदर्य-बोध तथा उसके दार्शनिक आधारों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई। 

कला और दर्शन एक-दूसरे के पूरक 
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने शिक्षाविद् एनी बेसेंट के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा के समग्र स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एनी बेसेंट की शिक्षा-व्यवस्था केवल ज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास की पक्षधर थी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कला और दर्शन एक-दूसरे के पूरक हैं- उन्होंने कौटिल्य के भारतीय चिंतन के साथ-साथ प्लेटो और अरस्तू जैसे पाश्चात्य दार्शनिकों केे भी चिंतन का उल्लेख किया।

इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ चित्रकला विभाग की अध्यक्ष डॉ. दीक्षा जायसवाल द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने अतिथियों एवं उपस्थित छात्राओं का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. वर्षा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन एवं समापन भाषण की प्रस्तुति की। इस अवसर पर डॉ. सुनीता दीक्षित, डॉ. नेहा वर्मा, अन्य शिक्षकगण एवं चित्रकला विभाग के बी.ए. तथा बी.एफ. ए. की सभी छात्राएं भी उपस्थित रही।


UP K Varanasi Main आज मनाई जाएगी 'Choti Eid' की खुशियां

ईद के दूसरे रोज़ से मोमिन रखतें हैं '6 रोज़ा' फिर आती है छोटी "ईद" की खुशियां

जुमा होने से खुशियां हुई दोहरी 

हज़रत शाह तैय्यब बनारसी के आस्ताने पर जुटे अकीदतमंद (फाइल फोटो)


Varanasi (dil India live)। केवल बनारस में ही मनाई जाती है पूरी दुनिया में Choti Eid (छोटी ईद)। बनारस में ईद की खुशियां मनाने के बाद दूसरे दिन से फिर छह नफिल रोज़ा रखा जाता हैं और ईद के सातवें दिन फिर छोटी ईद की खुशियां मनाई जाती है। इस दौरान शहर के औरंगाबाद और मंडुवाडीह में choti Eid का मेला भी लगता है। आज लोगों ने ईद के छठवें दिन नफिल रोज़ा रखा है शाम में अज़ान की सदाओं पर खजूर और पानी से रोज़ा खोला जाएगा इसी के साथ choti Eid की खुशियों का दौर शुरू हो जाएगा। तमाम लोग एक दूसरे से गले मिलकर उन्हें choti Eid की मुबारकबाद देंगे। मौलाना इरशाद रब्बानी ने बताया कि इस बार जुमा होने से छोटी ईद की खुशियां दुगनी हो गई है। क्यों कि जुमा अपने आप में मोमिन की ईद है।

छोटी ईद और हज़रत शाह तैय्यब बनारसी का उर्स

मंडुवाडीह स्थित कुतुबे बनारस हज़रत शाह तैयब बनारसी रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स 'choti Eid' के रूप में मनाया जाता है। उर्स के मौके पर आस्ताना परिसर में दिन भर मेला लगा रहता है। मेले में विभिन्न व्यंजनों का लोग जहां लुत्फ लेते हैं वहीं बच्चे खूब मस्ती करते हैं। choti Eid के मौके पर हजरत शाह तैयब बनारसी के आस्ताने पर हाजिरी देने के लिए देश के कोने-कोने से अकीदतमंदों की जुटान होती है। शाम होते ही आस्ताने पर पैर रखने की भी जगह नहीं बचती। बाबा की मजार पर गुलपोशी व चादरपोशी कर फातेहा पढ़ने वालों का सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। इस दौरान फज्र की नमाज के बाद कुरआनख्वानी के साथ ही उर्स शुरू होता है। वहीं इशा की नमाज के बाद कुल शरीफ में अकीदतमंद शामिल होते हैं। इस मौके पर देश में अमन व खुशहाली के लिए दुआएं मांगी जाती है। वर्षो से चले आ रहे दस्तूर के मुताबिक choti Eid शानों-शौकत के साथ मनाई जाती है। मदरसा दारुल उलूम तैयबिया मोइनिया दरगाह शरीफ मंडुवाडीह के प्रिंसिपल मोहम्मद अब्दुस्सलाम रशीदी ने बताया कि उर्स ईद के सातवें दिन मनाया जाता है। आयोजन को लेकर क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूर दराज से आने वालों में काफी उत्साह रहता है। लोग एक-दूसरे को choti Eid कि मुबारकबाद देते हैं। हर कोई खुशी से लबरेज नजर आता है। 

औरंगाबाद में भी लगता है मेला

choti eid पर औरंगाबाद में भी मेला लगता है। इस मौके पर हज़रत हवा शाह वह हज़रत हिम्मत शाह का अकीदत के साथ उर्स मनाया जाता है। उर्स के दौरान लोगों का हुजूम उमड़ता है। गुस्ल, फातिहा और चादर पोशी का दौर देर रात तक उर्स में चलता है। यहां भी choti Eid कि मुबारकबाद देने और खुशियां मनाने दूर दराज से लोग जुटते हैं।


गुरुवार, 26 मार्च 2026

VKM Varanasi की छात्राओं ने किया एनजीओ विजिट, जानी कार्यप्रणाली

छात्राओं को ‘यूथ कार्यशाला’ के माध्यम से मिला मार्गदर्शन


dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा की लगभग 25 छात्राओं के एक दल ने आज प्रसिद्ध स्वयंसेवी संस्था वेस इंडिया के कार्यालय का शैक्षणिक भ्रमण (NGO Visit) किया और संस्था की कार्यप्रणाली को निकट से समझा। इस दल का नेतृत्व डॉ. प्रियंका एवं प्रो. कल्पना आनंद द्वारा किया गया। 

इस मौके पर वसंत कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के सामुदायिक मेल-जोल छात्राओं के शैक्षणिक एवं व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्षा प्रोफेसर संगीता देवड़िया ने छात्राओं को भविष्य में सामाजिक सेवाओं के लिए अभिप्रेरित किया। कार्यक्रम संयोजन में प्रोफेसर अंशु शुक्ला ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रतिभागी छात्राएं गृह विज्ञान एवं समाजशास्त्र विभाग से थीं।

इस अवसर पर वेस इंडिया द्वारा एक ‘यूथ कार्यशाला’ का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं को उनके जीवन, करियर और सामाजिक दायित्वों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने बाल श्रम, बाल तस्करी, POSH अधिनियम, रोजगार एवं उद्यमिता, करियर निर्माण हेतु व्यावहारिक तैयारियां, पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।

कार्यशाला में प्रमुख विशेषज्ञ के रूप में कैकर टेक्नोलॉजी की सीईओ डॉ० सुनीता सिंघल जालान, पर्यावरणविद एवं समाजसेवी सीए जमुना शुक्ला, बेंगलुरु से टैलेंट एक्विजिशन लीड सुश्री सोनल वर्मा तथा सामाजिक कार्यकर्ता एवं कम्युनिटी लीडर श्री संतोष पांडेय उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के आरंभ में वेस इंडिया के निदेशक एवं समाजसेवी डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव ने संस्था (एनजीओ) गठन के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए महिला सशक्तिकरण एवं सुरक्षा से संबंधित विभिन्न कानूनों एवं हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी प्रदान की। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका ने इस विजिट के उद्देश्यों को स्पष्ट किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कल्पना आनंद ने दिया।

ISSRA Varanasi का Hajj ट्रेनिंग शिडयूल हुआ जारी, 29 से हज का पहला कैंप

कैंप में उलेमा देंगे काशी से काबा तक की हज की मुकम्मल ट्रेनिंग 




dil india live (Varanasi). इण्डियन सोसाइटी फॉर सोशल रिव्योलूशन एण्ड एक्शन (ISSRA) वाराणसी यूपी ने अपने हज ट्रेनिंग का शिडयूल जारी कर दिया है। हज जायरीन के लिए "स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प, 2026" का आगाज़ एहतेमाम किया 29 मार्च बरोज इतवार को इसरा मुख्यालय, उल्फत बीबी कंपाउंड अर्दली बाजार में होगा। इसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां ने यह जानकारी साझा की। 

जानिए कब-कब होगी ट्रेनिंग 

पहला कैंप इतवार 29 मार्च, दूसरा इतवार  05 अप्रैल , तीसरा इतवार 12 अप्रैल , चौथा इतवार 19 अप्रैल व पांचवां इतवार 26 अप्रैल को हज जायरीन एवं आवाम के लिए हज ट्रेनिंग कैम्प सक्रिय रहेगा। कैंप का वक्त सुबह 10.00 बजे से दोपहर 01.00 बजे तक रखा गया है।

ट्रेनिंग के बाद ज़ोहर की नमाज़ 

कैंप के बाद ज़ोहर की नमाज़ मस्जिद उल्फत बीबी में अदा की जाएगी। ट्रेनिंग के दौरान ओलमा द्वारा बतायी गयी कुछ बातें अगर किसी को समझ नहीं आती, या उससे छूट गई तो उसे नमाज के बाद पूरा किया जा सकेगा। इस हज ट्रेनिंग कैम्प में शहर के मायनाज ओलमा की मौजूदगी में हज जायरीनों को हज व उमरह के अरकान एवं मसले-मसाएल की मुकम्मल जानकारी दी जायेंगी। 

जानिए क्या क्या मिलेगी जानकारी 

हज व उमरह के अरकान, हज के प्रकार, हज की नियत, नमाज़े नफिल का तरीका, एहराम क्या है?, और एहराम बांधने का तरीका, मीकात, तवाफ, सई, हलक या तकसीर, रमल, मीना, मुजदलफा में कयाम, कुर्बानी, तवाफे जियारत, तवाफे रूखसत वगैरह के बारे में तफसीली जानकारी दी जाएगी। मदीना मुन्नवरा में हाजिरी व जियारत का तरीका, मज़ारे अकदस सल्ललाहो अलैहे वस्सलम के आदाब, मदीने पाक की मुकद्दस जियारतगाहों के बारे में बताया जायेगा। इसलिए ट्रेनिंग कैम्प में शिरकत करके हज के बारे में मुकम्मल जानकारी हासिल करें। खुसूसी तौर से औरतों के लिए हज ट्रेनिंग का भी इंतजाम पर्दे के एहतेमाम के साथ लेडीज हज ट्रेनर के जरिये करवाया जाता है और उनसे भी अपील है कि इस हज ट्रेनिंग कैम्प में शिरकत करके हज की मुकम्मल जानकारी हासिल करें।

प्रख्यात उस्ताद शायर Ahmad Hanifi का हुआ सम्मान

मुसीबत में मदद को जब कोई लड़की बुलाती है, मुझे महसूस होता है मेरी बेटी बुलाती है



dil india live (Varanasi).देश के मशहूर उस्ताद शायर अहमद हनीफी का शिक्षाविद फहीम अहमद (नेशनल इंटर कॉलेज पेलीकोठी के पूर्व प्रिंसिपल) के काजी सादुल्लाहपुरा स्थित आवास पर स्वागत और अभिनन्दन किया गया। इस मौके पर उन्हें यादगार तोहफे देकर सम्मानित किया गया।

सामाजिक संस्था " सुल्तान क्लब " के अध्यक्ष डॉ. एहतेशामुल हक ने इन अशआर से उनका स्वागत किया कि, खुश आमदीद वह आया है हमारी चौखट पर, बहार जिस के क़दम का तवाफ करती है। आगे कहा कि ऐसा ही एक नाम जो बनारस की धरती पर बहुत तेजी से उभरा है और साहित्य के आसमान में छा गया है, वो नाम है अहमद हनीफी का। अहमद हनीफी साहब एक  उस्ताद शायर हैं जिनके बहुत सारे शागिर्द मौजूद हैं, वो अपनी कविताओं के जरिए लोगों का ध्यान खींचते हैं। उन्होंने कविता के ज़रिए देश, मातृभूमि और समाज को भी सुधारने का प्रयास किया है। आपका नाम भारत के मशहूर शायर कवियों में लिया जाता है। कविता पाठ व मुशायरों में आपको बड़े प्यार से सुना जाता है। आपकी कविताएँ लोगों की ज़बान पर गुनगुनाती रहती हैं। इस मौके पर, पेश हैं आपकी कुछ कविताएँ।

1. मुसीबत में मदद को जब कोई लड़की बुलाती है, मुझे महसूस होता है मेरी बेटी बुलाती है।

 हमारे गांव में अब भी रवादारी यह कायम है, चचा कह कर हमें कैलाश की बेटी बुलाती है।

2. शोहरत को मेरी देखकर मेरे ही दोस्त अब, फैला रहे हैं राह में पत्थर मेरे खिलाफ।

 सच बोलने की बच्चों को तालीम कैसे दूं , सच बोलने से जब हुआ घर-भर मेरे खिलाफ।

    इस मौके पर सुल्तान क्लब के अध्यक्ष डॉ. एहतेशामुल हक, जनरल सेक्रेटरी एच. हसन नन्हे, शमीम रियाज, फैयाजुद्दीन, इरफानुल हक, आफताब आलम वगैरह मौजूद थे।

बुधवार, 25 मार्च 2026

DAV PG College Main दो दिवसीय ICSSR प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

काशी के शिल्पियों ने बनाई दुनिया भर में काशी की पहचान - प्रो. अवधेश प्रधान




dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में आईसीएसएसआर द्वारा प्रायोजित 'वाराणसी के सांस्कृतिक गलियारे की कला, शिल्प और लोक परंपरा में संरक्षित पवित्र भूमि और विरासत' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन बुधवार को समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा काशी के शिल्पी भी काशी की पहचान रहे है, यहां मिट्टी और लकड़ी के बने खिलौने एवं गत्ते के बने मुखौटे जो बनारस की पहचान रहे, उन्हें आज दुनियाभर में विशिष्ट उत्पाद के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि काशी ने शास्त्रीय संगीत के साथ साथ उप शास्त्रीय और लोक संगीत को भी अपनाया। 

विशिष्ट अतिथि बीएचयू के म्यूज़ियोलॉजी विभाग की प्रो. उषा रानी तिवारी ने कहा कि काशी ही एक शहर है जहाँ के विरासत भी जीवंत है, जहाँ परंपराएँ दैनिक जीवन और अनुष्ठानों के माध्यम से निरंतर जीवित रहती हैं। सात वार, नौ त्योहार की उक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वाराणसी में वर्ष भर में लगभग 365 दिनों में 513 त्योहार मनाए जाते हैं, जो इसकी अद्वितीय सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता सिंह ने काशी को विविध दृष्टिकोण से देखने और ऐसे शैक्षणिक संवादों की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसके अलावा विभिन्न सत्रों में दिल्ली विश्वविद्यालय के वरुण गुलाटी ने कहा कि काशी में ज्ञान को अर्जित नही किया जाता है ज्ञान को जिया जाता है। प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा, प्रो. अनूप मिश्रा, प्रो. समीर कुमार पाठक ने भी विचार रखे। 

     संयोजक डॉ. महिमा सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, संचालन श्रीयुक्ता बासनेट एवं धन्यवाद डॉ. इंद्रजीत मिश्रा ने दिया। इस मौके पर विभाग की डॉ. बन्दना बालचंदनानी, डॉ. नजमुल हसन, डॉ. प्रज्ञा अग्रवाल, डॉ. आराधना सिंह, खितेश विराट शर्मा, शुभम कुमार, अनुजा रंजन आदि शामिल रही।