शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

BLW Varanasi के अभिमन्यु राय को मिली महत्वपूर्ण उपलब्धि

उत्तर प्रदेश सब-जूनियर वॉलीबॉल टीम के प्रशिक्षक नियुक्त




F. Farouqi (Babu)

dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के भंडार विभाग में कार्यालय अधीक्षक के पद पर कार्यरत अभिमन्यु राय को खेल जगत में महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन द्वारा उन्हें प्रदेशीय सब-जूनियर वॉलीबॉल टीम के प्रशिक्षक/कोच के रूप में चयनित किया गया है।

यह चयन आगामी 44 वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय वॉलीबॉल चैम्पियनशिप के दृष्टिगत किया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश की टीम भाग ले रही है। अभिमन्यु राय अपने अनुभव, तकनीकी दक्षता एवं अनुशासनप्रिय प्रशिक्षण शैली के माध्यम से खिलाड़ियों को उत्कृष्ट मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

उल्लेखनीय है कि अभिमन्यु राय लंबे समय से वॉलीबॉल खेल से जुड़े हुए हैं तथा खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास हेतु निरंतर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उनका यह चयन न केवल उनके व्यक्तिगत खेल योगदान का सम्मान है, बल्कि बरेका के लिए भी गर्व का विषय है कि अभिमन्यु राय प्रदेश स्तर पर खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में योगदान देंगे। इस अवसर पर बरेका के अधिकारी एवं खेलप्रेमी रेलकर्मियों ने  अभिमन्यु राय को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

DAV PG College Main नक्षत्र महोत्सव का हुआ आयोजन

सांस्कृतिक महोत्सव 'नक्षत्र के पांचवें दिन छात्रों ने दिखाई वाकपटुता



dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज के अंग्रेजी विभाग के स्टूडेंट्स फोरम लौरियेट्स के अंतर्गत चल रहे दस दिवसीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव 'नक्षत्र 2026' में पांचवें दिन शुक्रवार को विविध आयोजन हुए। रेजोनेंस के अंतर्गत संभाषण में छात्रों ने अपनी वाकपटुता से सबको अचंभित कर दिया, अगले सत्र में छात्रों ने नई नई कहानी सुनाई। वहीं पहले दिन मंथन ( साहित्यिक क्विज) एवं दूसरे दिन कुरुक्षेत्र (टर्नकोट वाद विवाद प्रतियोगिता) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आस्था सिंह, अवनीत शुक्ला, शताब्दी दास, गार्गी मुदगल, स्निग्धा सिंह, प्रकृति प्रिया, हर्ष राज राठौड़ सहित 2 दर्जन से ज्यादा विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। उन्होंने धर्म,कला- संस्कृति, विकास, राजनीति एवं सामाजिक न्याय पर खुलकर विचार रखे। नक्षत्र महोत्सव का शुभारंभ प्रबंधक अजीत कुमार सिंह यादव एवं कार्यवाहक प्राचार्य प्रो.मिश्रीलाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अध्यक्षता कॉलेज की उप प्राचार्य एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता जैन ने किया। 


निर्णायक मण्डल में बसन्त कन्या महाविद्यालय की डॉ. सुप्रिया सिंह एवं डॉ. पूर्णिमा सिंह, बसन्ता कॉलेज राजघाट की डॉ. सुनीता आर्य, डीएवी पीजी कॉलेज की डॉ. वन्दना बालचंदनानी, डॉ. नजमुल हसन आदि शामिल रहे। संयोजन फोरम के अध्यक्ष छात्र हर्ष चतुर्वेदी ने किया।

VKM Varanasi में वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव Sarjana में हुआ धमाल

विभिन्न प्रतियोगिताओं में छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा 

बही सुरों की सरिता तो नृत्य नाट्य प्रस्तुतियों ने जीता सभी का दिल 





dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी में 6 फ़रवरी 2026 को वार्षिक युवा सांस्कृतिक महोत्सव ‘सर्जना 2025–26’ के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं का भव्य एवं सफल आयोजन प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव व प्रबंधक उमा भट्टाचार्य के संरक्षण में संपन्न हुआ। महोत्सव के अंतर्गत रंगोली, वादन, क्विज़, फैशन डिज़ाइनिंग एवं नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन प्रातः 10:00 बजे से किया गया।

रंगोली प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम इंचार्ज के रूप में डॉ. मंजू कुमारी एवं डॉ. सौमिली मंडल तथा संयोजक डॉ. वर्षा कुमारी, डॉ. आरती चौधरी, डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव, डॉ. दीक्षा जायसवाल एवं प्रोफेसर पूनम पांडेय ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रतिभागियों ने आकर्षक एवं सृजनात्मक रंगोलियों के माध्यम से अपनी कला का परिचय दिया।


वादन प्रतियोगिता का आयोजन सेमिनार कक्ष में किया गया, जिसमें कुल चार प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रत्येक प्रतिभागी को प्रस्तुति हेतु पांच मिनट का समय दिया गया। प्रतिभागियों ने शास्त्रीय, सुगम एवं पश्चिमी संगीत की श्रेणियों में राग बहार, राग यमन एवं राग शिवरंजनी की मनोहारी प्रस्तुति दी। सितार एवं बांसुरी की मधुर ध्वनि ने वातावरण को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव एवं डॉ. पूनम वर्मा रहीं। निर्णायक मंडल में डॉ. मंजू कुमारी, प्रोफेसर मीनू पाठक एवं प्रोफेसर पूनम वर्मा उपस्थित रहीं।








क्विज़ प्रतियोगिता के अंतिम चरण का आयोजन ‘वसुधैव कुटुंबकम- प्रकृति की त्रयी को श्रद्धांजलि’ विषय पर किया गया। पूर्व चरण से चयनित 12 विद्यार्थियों में से 9 विद्यार्थियों ने अंतिम चरण में भाग लिया, जिन्हें जुपिटर, अर्थ एवं मार्स नामक तीन समूहों में विभाजित किया गया। प्रतियोगिता में रैपिड फायर, बज़र, ऑडियो, विज़ुअल एवं फाइनल राउंड सहित कुल पांच चरण आयोजित किए गए। निर्णायक मंडल में डॉ. विजय कुमार, डॉ. पूर्णिमा एवं डॉ. शशिकेश कुमार गोंड की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रतिभागियों ने उत्साह, एकाग्रता एवं तर्कशक्ति का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

फैशन डिज़ाइनिंग प्रतियोगिता में कुल छह छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की इंचार्ज डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव एवं डॉ. स्वीटा सिंह रहीं। निर्णायक मंडल में डॉ. संगीता, गरिमा उपाध्याय एवं डॉ. प्रियंका सम्मिलित रहीं। प्रतिभागियों ने अपने नवाचारी एवं आकर्षक डिज़ाइनों के माध्यम से रचनात्मकता और सौंदर्य-बोध का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

इसी क्रम में नृत्य प्रतियोगिता का भी भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की कलात्मक अभिव्यक्ति, लय-ताल एवं मंच कौशल को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम की इन-चार्ज डॉ. पूनम वर्मा एवं डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव रहीं, जिन्होंने आयोजन को सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराया। निर्णायक मंडल में मिस नीतिका वर्मा, डॉ. सरोज उपाध्याय और प्रतियोगिता में 50 से अधिक छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने शास्त्रीय, लोक एवं आधुनिक नृत्य शैलियों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। संपूर्ण कार्यक्रम उत्साहपूर्ण, सफल एवं सराहनीय रहा।

इस प्रकार ‘सर्जना 2025–26’ के अंतर्गत आयोजित सभी प्रतियोगिताएं अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक रहीं। इन कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धात्मक भावना एवं बौद्धिक विकास को भी प्रोत्साहित किया। महाविद्यालय परिवार ने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

VKM Varanasi के Sarjana में दिखीं छात्राओं की सृजनात्मक प्रतिभा

विविध प्रतियोगिताओं के चौथे दिन भव्य आयोजनों से गूंजा वीकेएम




dil india live (Varanasi). Varanasi के VKM (वसंत कन्या महाविद्यालय) कमच्छा के वार्षिक सांस्कृतिक एवं अकादमिक महोत्सव सर्जना के चौथे दिन 5 फरवरी 2026 को मान्यवर मोहे में विविध प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन  किया गया। प्राचार्य प्रोफ़ेसर रचना श्रीवास्तव तथा उमा भट्टाचार्य के संरक्षण में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य छात्राओं की सृजनात्मक प्रतिभा, भाषिक कौशल, कलात्मक दक्षता और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करना था।

डॉ. आरती कुमारी, डॉ. सरोज उपाध्याय के संयोजन में हुई प्रतियोगिताओं में टर्नकोट, बिजनेस प्लानिंग, मिमिक्री (अनुकरण), स्किट (एकांकी), लघु नाटक हुआ। इन आयोजनों में छात्राओं ने अपनी अभिनय कौशल को दिखाते हुए मोनो एक्ट, स्टैंड अप कॉमेडी, कोलाज के प्रदर्शन से अपने अनुभवों को साझा किया जिसमें चित्रकला, कोलाज में कल्पना शक्ति का प्रयोग करते हुए छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम संयोजकों में डॉ. पूर्णिमा, डॉ. शशिकेश कुमार गोंड, डॉ. मंजू कुमारी, डॉ. आरती चौधरी, डॉ. दीक्षा जायसवाल, डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव, डॉ. पूनम वर्मा कार्यक्रम के संयोजक थीं और निर्णायक मंडल डॉ. आशीष कुमार सोनकर] डॉ. विजय कुमार डॉ. सपना भूषण डॉ. आराधना सिंह, सौम्यकांति मुखर्जी, प्रोफ़ेसर इंदू उपाध्याय, डॉ. शांता चटर्जी, प्रोफेसर निहारिका लाल, डॉ. शशि प्रभा कश्यप, डॉ. यशस्वी, डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव, डॉ. सुप्रिया सिंह, डॉ. वर्षा सिंह, डॉक्टर शशिकला, डॉ. सुशील, डॉ. पूजा भारती सर्जना कार्यक्रम के निर्णायक मंडल के सदस्य रहे।



बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

Sarjana में दिखा पर्यावरण संरक्षण और धरती के प्रति संवेदनशीलता

फेस पेंटिंग प्रतियोगिता ने छात्राओं की कलात्मक अभिव्यक्ति को दिया नया आयाम

छात्राओं द्वारा उकेरी गई कृतियों से संवाद करते कला प्रेमी 




dil india live (Varanasi). VKM Varanasi (वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा में 4 फ़रवरी 2026 को मान्यवर मोहे द्वारा प्रायोजित वार्षिक सर्जना 2025-26 युवा सांस्कृतिक महोत्सव के अंतर्गत विविध प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया। प्राचार्या प्रोफ़ेसर रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन तथा प्रबंधक उमा भट्टाचार्य के संरक्षण में आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य छात्राओं की सृजनात्मक प्रतिभा भाषिक-कौशल कलात्मक दक्षता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को प्रोत्साहित करना रहा।



महोत्सव का शुभारंभ चित्र वर्णन प्रतियोगिता से हुआ, जिसमें छात्राओं ने दिए गए चित्रों के आधार पर सजीव प्रभावशाली एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। इस कुल 33 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सर्जना कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. आरती कुमारी एवं डॉ. सरोज उपाध्याय थी। कार्यक्रम का सफल संचालन संयोजक डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव एवं डॉ. सौमिली मंडल ने किया। इसी क्रम में दूसरा कार्यक्रम पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसका विषय वसुंधरा रखा गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और धरती के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना था। कुल 28 प्रतिभागियों ने रंगों और रचनात्मकता के माध्यम से पृथ्वी-रक्षा का प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किया। इसके साथ ही वाग्मिता प्रतियोगिता, का आयोजन किया गया जो जल, जंगल, ज़मीन जैसे अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय पर आधारित थी। कुल 47 प्रतिभागियों ने प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास जैसे मुद्दों पर स्पष्ट तार्किक और सशक्त विचार प्रस्तुत किया। यह प्रतियोगिता महोत्सव के सबसे प्रभावशाली कार्यक्रमों में से एक रही। महोत्सव के अंतर्गत फेस पेंटिंग प्रतियोगिता ने भी छात्राओं की कलात्मक अभिव्यक्ति को एक नया आयाम दिया। 


प्रकृति : जीवन आत्मा, विषय पर आधारित इस ऑन-द-स्पॉट प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने प्रकृति के विविध रूपों व संदेशों को चेहरे पर नयनाभिराम कला के रूप में चित्रित किया। प्राकृतिक रंगों, रचनात्मकता और पर्यावरणीय चेतना का सुंदर संगम इस प्रतियोगिता की विशेषता रही। महोत्सव का अंतिम कार्यक्रम हस्तशिल्प प्रतियोगिता रहा, जो सेमिनार हॉल में अपराह्न 4 बजे आयोजित हुई। परंपरा और प्रकृति का संगम, विषय पर आधारित इस प्रतियोगिता में छात्राओं ने मिट्टी, लकड़ी, पत्थर आदि प्राकृतिक माध्यमों से तैयार अपने हस्तनिर्मित कार्यों के माध्यम से मौलिकता और सृजनशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सभी प्रतियोगिताओं में छात्राओं ने अपनी प्रतिभा, कल्पनाशक्ति तथा सृजनात्मक क्षमता का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया, जिससे सर्जना महोत्सव महाविद्यालय के सांस्कृतिक जीवन में एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। 

इन कार्यक्रमों का संचालन व संयोजन डॉ. पूनम वर्मा, डॉ. दीक्षा जायसवाल, डॉ. शशिकेश कुमार गोंड तथा डॉ. आरती चौधरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एवं प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन जिन निर्णायकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से किया, उनमें मालविका, राजलक्ष्मी जायसवाल, डॉ. सुधा चौबे, डॉ. वर्षा सिंह, डॉ. नेहा वर्मा, डॉ. कल्पना द्विवेदी, डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. रवि कुमार, सुशील कुमार यादव, अंजू लता सिंह, डॉ. खुशबू मिश्रा, प्रवीरा सिन्हा, प्रो. संगीता देवड़िया, प्रो. गरिमा उपाध्याय तथा डॉ. प्रियंका प्रमुख रूप से सम्मिलित रहीं।

Education : शिक्षा चौपाल में अभिभावकों के साथ हुआ सीधा और आत्मीय संवाद

'शिक्षा चौपाल' में गूंजा बच्चों के सपनों और अभिभावकों के विश्वास का स्वर




dil india live (Varanasi). कंपोजिट विद्यालय कोटवां (विकास खंड चिरईगांव) में 'शिक्षा चौपाल' का आगाज़ एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) विज्ञान रश्मि त्रिपाठी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान छात्राओं ने सरस्वती वंदना नृत्य से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस मौके पर कंपोजिट विद्यालय कोटवा के छात्र-छात्राओं ने अनेक मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां से सभी का खूब मंनोरंजन किया।

इस मौके पर कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण वह था जब  अभिभावकों के साथ सीधा और आत्मीय संवाद किया गया। जिसमें उन्होंने खुल कर अपनी भावनाएं व्यक्त की। शुरुआत में अपने काम को छोड़कर आने के कारण चिंतित अभिभावकों का मन तब गदगद हो गया जब उन्होंने नन्हें बच्चों को आत्मविश्वास के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते देखा। बच्चों के सपनों को सुनकर अभिभावक भावुक हो उठे और उन्होंने संकल्प लिया कि वे अब बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजेंगे।


अभिभावकों और बच्चों की बातें सुनने के बाद, एआरपी रश्मि त्रिपाठी ने पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा और विभागीय बिंदुओं पर अपनी बात रखी और साथ ही प्रेरणा दिया कि किस प्रकार अभिभावक और अध्यापक मिलकर एक शानदार विद्यालय बना सकते है और बच्चों के सपने सच कर सकते हैं। विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत कर सकते हैं,संचालन करते हुए वेणु टकसाली ने कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उनका शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित करना है। दीक्षा ऐप, स्मार्ट क्लास और विज्ञान किट के माध्यम से बच्चों में जिज्ञासा पैदा करना है। अभिभावकों द्वारा बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने और शिक्षकों के संपर्क में रहने की प्रतिबद्धता। 


शिक्षा के प्रति समर्पण दिखाने वाले शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया गया। इसमें प्रवीण तिवारी (कंपोजिट विद्यालय कोटवां), अनुराधा भार्गव (प्राथमिक विद्यालय सराय मोहाना) राजेन्द्र प्रसाद (प्राथमिक विद्यालय नेवादा), विनोद कुमार उपाध्याय (प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर,एहतेशामुल हक (प्राथमिक विद्यालय गोराकला) एवं सम्मानित निपुण  विद्यार्थी में अभिमन्यु (कंपोजिट विद्यालय कोटवां), अनुष्का (प्राथमिक विद्यालय सराय मोहाना), संध्या (प्राथमिक विद्यालय नेवादा), दिव्यांश (प्राथमिक विद्यालय शंकरपुर), सृष्टि  (प्राथमिक विद्यालय गौराकला), विद्यालय के प्रधानाध्यापक राम सिंह ने अभिभावकों के विद्यालय के प्रति बढ़ते लगाव की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की शिक्षिका वेणु टकसाली ने किया। अंत में ARP रश्मि त्रिपाठी ने सभी अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापन दिया। खण्ड शिक्षा अधिकारी प्रीति सिंह ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कार्यक्रम की सार्थकता की सराहना की। कार्यक्रम में भरी संख्या में अभिभावक मौजूद थे।

जब इस मशहूर शायर की आंखों से निकला अश्क का सैलाब

अजमेर का यादगार नातिया मुशायरा और जिगर मुरादाबादी के हालात





dil india live (Varanasi). अजमेर शरीफ़ में एक नातिया मुशायरा था। फेहरिस्त बनाने वालों के सामने यह बड़ी मुश्किल थी कि जिगर मुरादाबादी को इस मुशायरे में कैसे बुलाया जाए। वे खुले रिंद थे और नातिया मुशायरे में उनकी शिरकत आसान नहीं थी। अगर फेहरिस्त में उनका नाम न रखा जाए तो फिर मुशायरा ही क्या रह जाता। आयोजकों के बीच कड़ा मतभेद पैदा हो गया। कुछ उनके हक़ में थे और कुछ खिलाफ़।

दरअसल जिगर का मामला ही शुरू से बहुत विवादास्पद रहा था। बड़े-बड़े शैख़ और आरिफ़-बिल्लाह, उनकी शराबनौशी के बावजूद उनसे मोहब्बत करते थे। उन्हें गुनहगार तो समझते थे, मगर सुधार के योग्य। शरियत के सख़्त पाबंद उलेमा भी उनसे नफ़रत करने के बजाय अफ़सोस करते थे कि हाय, कैसा अच्छा आदमी है, किस बुराई का शिकार हो गया। आम लोगों के लिए वे एक बड़े शायर थे, लेकिन थे शराबी। इन तमाम रियायतों के बावजूद उलेमा और शायद अवाम भी यह इजाज़त नहीं दे सकते थे कि वे नातिया मुशायरे में शरीक हों।

आख़िर बहुत सोच-विचार के बाद मुशायरे के आयोजकों ने फैसला किया कि जिगर को दावत दी जानी चाहिए। यह इतना साहसिक फैसला था कि इससे बड़ा जिगर की इज़्ज़त का कोई इकरार हो ही नहीं सकता था। जब जिगर को बुलाया गया तो वे सिर से पाँव तक काँप उठे।

“मैं गुनहगार, रिंद, सियाहकार, बदनसीब — और नातिया मुशायरा! नहीं साहब, नहीं।”

अब आयोजकों के सामने यह समस्या थी कि जिगर साहब को कैसे तैयार किया जाए। उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे और होंठों से इनकार। नातिया शायर हमीद सिद्दीकी ने उन्हें मनाने की कोशिश की, उनके मुरब्बी नवाब अली हसन ताहिर ने प्रयास किया, लेकिन वे किसी भी हाल में राज़ी नहीं हो रहे थे। आख़िरकार असगर गोंडवी ने हुक्म दिया और जिगर ख़ामोश हो गए।

सिरहाने बोतल रखी थी, उसे कहीं छिपा दिया। दोस्तों से कह दिया कि कोई उनके सामने शराब का नाम तक न ले। दिल पर जैसे कोई ख़ंजर से लकीर-सी खींचता था, वे बे-इख़्तियार शराब की ओर दौड़ते थे, मगर फिर रुक जाते थे। लेकिन मुझे नात लिखनी है। अगर शराब का एक क़तरा भी हलक़ से उतरा, तो किस ज़बान से अपने आका की मदह लिखूँगा। यह मौक़ा मिला है तो मुझे इसे खोना नहीं चाहिए। शायद यह मेरी बख़्शिश की शुरुआत हो। शायद इसी बहाने मेरी इस्लाह हो जाए, शायद अल्लाह को मुझ पर तरस आ जाए! एक दिन गुज़रा, दो दिन गुज़र गए। वे सख़्त अज़ीयत में थे। नात के मज़मून सोचते थे और ग़ज़ल कहने लगते थे। सोचते रहे, लिखते रहे, काटते रहे, लिखे हुए को काट-काट कर थकते रहे। आख़िर एक दिन नात का मतला हो गया।

फिर एक शेर हुआ, फिर तो जैसे बारिश-ए-अनवार हो गई। नात मुकम्मल हुई तो उन्होंने सज्द-ए-शुक्र अदा किया। मुशायरे के लिए इस तरह रवाना हुए जैसे हज को जा रहे हों। जैसे कौनेन की दौलत उनके पास हो। जैसे आज उन्हें शोहरत की सिदरत-उल-मुन्तहा तक पहुँचना हो।

उन्होंने कई दिनों से शराब नहीं पी थी, लेकिन हलक़ सूखा नहीं था। इधर तो यह हाल था, दूसरी तरफ़ मुशायरा-गाह के बाहर और शहर के चौराहों पर एहतिजाजी पोस्टर लग गए थे कि एक शराबी से नात क्यों पढ़वाई जा रही है। लोग भड़के हुए थे।

अंदेशा था कि जिगर साहब को कोई नुक़सान न पहुँच जाए। यह ख़तरा भी था कि लोग स्टेशन पर जमा होकर नारेबाज़ी न करें। इन हालात को देखते हुए आयोजकों ने जिगर की आमद को ख़ुफ़िया रखा था। वे कई दिन पहले अजमेर शरीफ़ पहुँच चुके थे, जबकि लोग समझ रहे थे कि वे मुशायरे वाले दिन आएँगे।

जिगर अपने ख़िलाफ़ होने वाली इन कार्रवाइयों को ख़ुद देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे।

कहां फिर यह मस्ती, कहां ऐसी हस्ती

जिगर की जिगर तक ही मैख़्वारियां हैं

आख़िर मुशायरे की रात आ गई। जिगर को बड़ी सुरक्षा के साथ मुशायरे में पहुंचा दिया गया। मंच से आवाज़ उभरी—

“रईस-उल-मुतग़ज़्ज़िलीन हज़रत जिगर मुरादाबादी!” ……

इस ऐलान के साथ ही एक शोर उठ खड़ा हुआ। जिगर ने बड़े धैर्य के साथ मजमे की ओर देखा… और प्रेम से भरे स्वर में बोले—

“आप लोग मुझे हूट कर रहे हैं, या रसूल पाक की नात को—जिसे पढ़ने की सआदत मुझे मिलने वाली है और जिसे सुनने की सआदत से आप अपने आप को महरूम करना चाहते हैं?”

शोर को जैसे सांप सूंघ गया। बस यही वह विराम था, जब जिगर के टूटे हुए दिल से यह आवाज़ निकली—

एक रिंद है और मद्हत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

हां, कोई नज़र-ए-रहमत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

जो जहां था, ठहर गया। ऐसा लग रहा था जैसे उनकी ज़बान से शेर अदा हो रहा हो और क़बूलियत का परवाना अता किया जा रहा हो।

नात क्या थी—गुनहगार के दिल से निकली हुई आह थी, पनाह की ख़्वाहिश थी, आंसुओं की सबील थी, बख़्शिश का ख़ज़ाना थी। वे ख़ुद रो रहे थे और सबको रुला रहे थे। दिल नरम हो गए, मतभेद मिट गए। रहमत-ए-आलम का क़सीदा था—भला ग़ुस्से की खेती कैसे हरी रह सकती थी!

“यह नात इस शख़्स ने कही नहीं है, इससे कहलवाई गई है।” मुशायरे के बाद हर ज़बान पर यही बात थी। 

जिगर मुरादाबादी की वो नात देखें 

एक रिंद है और मद्हत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

हां, कोई नज़र-ए-रहमत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

नज़र का दामन तंग है, और जल्वों की फ़रावानी

ऐ तलअत-ए-हक़, तलअत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

ऐ ख़ाक़-ए-मदीना, तेरी गलियों के सदक़े

तू ख़ुल्द है, तू जन्नत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इस तरह कि हर सांस इबादत में मशग़ूल हो

देखूं मैं दर-ए-दौलत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इश्क़ के ग़म की एक नंग भी दीदार की मुन्तज़िर है

सदक़े तेरे, ऐ सूरत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

कौनेन का ग़म, याद-ए-ख़ुदा और शफ़ाअत

दौलत है यही, दौलत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

ज़ाहिर में ग़रीब-उल-ग़ुरबा फिर भी

यह आलम-शाहों से बढ़कर है सत्वत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

इस उम्मत-ए-आसी से न मुंह फेर, ख़ुदाया

नाज़ुक है बहुत ग़ैरत-ए-सुल्तान-ए-मदीना

कुछ हमको नहीं काम, जिगर, और किसी से

काफ़ी है बस एक निस्बत-ए-सुल्तान-ए-मदीना।।

(सोशल मीडिया से)