शनिवार, 27 जून 2026

Hajj 2027 पर जाने वालों के लिए इसरा ने लगाया स्पेशल कैंप

भरवाया गया ऑनलाइन निःशुल्क हज फार्म

dil india live (Varanasi). हज कमेटी ऑफ इण्डिया द्वारा हज 2027 के लिए सर्कुलर जारी कर दिया गया है। इसे देखते हुए जायरीन का ऑनलाईन हज फार्म भरवाने की इसरा द्वारा घोषणा की गई है। इसे देखते हुए इसरा (ISSRA) मुख्यालय उल्फत बीबी कंपाउंड, अर्दली बाजार वाराणसी में मौलाना हसीन हबीबी की सदारत में हज 2027 पर जाने की तमन्ना रखने वाले जायरीन के लिए ऑनलाइन निःशुल्क हज फार्म भरवाने हेतु "स्पेशल हज कैम्प" आज दिनांक 27.06.026 को सकुशल सम्पन्न हुआ।

इस कैम्प में वाराणसी सहित पूर्वी पूर्वान्चल कई जिलों से आये हुए इच्छुक हज जायरीनों ने निःशुल्क हज फार्म भरवाया तथा साथ ही हज 2027 से सम्बन्धित शुरूआती आवश्यक जानकारी हासिल की। वाराणसी से मोहम्मद हबीब, अब्दुल रशीद, सुहैल खां, मंसूर, परवेज आलम, अनीस अंसारी सोनभद्र से मोहम्मद आरिफ खान, हमीदुर्रहमान, चंदौली से फुरकान अहमद, मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद अमीन, आजमगढ़ से रफीक अहमद हाशमी, सफीक अहमद हाशमी, जौनपुर से मोहम्मद खलील, कमाल अख्तर, फैजान, औरतों में आशिया खातून, खलीफुन्ननिशा, सबीहा, फरजाना बेगम, सबाना आजमी, खालिदा, निकहत सुलताना, शकीला, अंजुम आरा आदि मुख्य थे तथा ट्रेनर में हसीन हबीबी साहब, मौलाना मुबारक साहब, हाफिज गुलाम रसूल तथा लेडीज ट्रेनर में सबीहा खातून, सनम खान, निकहत फातमा तथा इसरा के पदाधिकारीगण एवं सदस्य हाजिर थें।





11 Mahe moharram: दालमंडी से निकला "लुटा हुआ काफिले" का कदीमी जुलूस

जुलूस में 'चुप' का बज रहा था डंका, सलाम और कलाम पढ़ रहे थे अजादार



dil india live (Varanasi). 27 जून (11 Moharram 2026) को दिन में 11 बजे डॉ. मुज्तबा जाफ़री, जीशान जाफरी और मुर्तुज़ा जाफ़री की अगुवाई में मरहूम डा. नाज़िम जाफ़री के इमामबाड़े से "लुटे हुए काफ़िले" का ऐतिहासिक जुलूस उठाया गया। इस जुलूस को बनारस में सदियों से "चुप का डंका" कहा जाता है। जुलूस के आगे-आगे सैयद आबिद नक़वी लुटे हुए काफ़िले के जुलूस का एलान करते हुए चल रहे थे। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कर्बला के हादसे के बाद जब इमाम हुसैन का लुटा हुआ काफ़िला, यानी अहले-बैत के बच्चे और ख़वातीन क़ैदी बनाकर शहरे शाम की ओर रवाना किए गए, उसी ग़मनाक मंज़र की याद में यह जुलूस पूरी ख़ामोशी के साथ निकाला गया। रास्ते भर अज़ादार ख़ामोशी के आलम में सलाम व कलाम पढ़ते हुए चल रहे थे।कर्बला के शहीदों का लुटा हुआ काफिला नई सड़क, फाटक शेख सलीम, पितरकुंडा, लल्लापुरा होकर होकर दरगाहे फातमान पहुंचा।

जुलूस में गूंजा इमाम हुसैन का नाम

जुलूस के दौरान सरफ़राज़ ने पूरे जुलूस में इमाम हुसैन के नाम को बुलंद रखा और सबको हुसैनियत का पैग़ाम दिया। इस मौक़े पर उन्होंने स्व नाज़िम जाफ़री और मरहूम हकीम मोहम्मद काज़िम के बेहतरीन कलाम भी पेश किए, जिन्हें सुनकर अज़ादारों की आँखें नम हो गईं।

अज़ाख़ानों में मजलिसों का सिलसिला

अज़ाख़ाना-ए-जाफ़री और दरगाहे फातमान में मौलाना वसी असग़र पाशा ने पुरदर्द मजलिस को ख़िताब किया। फातमान में अपने ख़िताब के दौरान उन्होंने फ़रमाया कि कर्बला महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि इमाम हुसैन का अपने ख़ुदा के साथ बांधा गया एक मुआहिदा (अहद) है, जिसे इमाम ने अपने और अपने अज़ीज़ों के ख़ून से निभाया। उनके इस बयान ने पूरी मजलिस को रुला दिया।


फातमान में पेश हुए सलाम

दरगाहे फातमान में अज़ादारों ने इमाम हुसैन की बारगाह में सलाम पेश किए। सलाम पढ़ने वालों में समर जाफ़री, सलमान हैदर, हैदर कैरतपुर, अज़ादारे-हुसैनी पद्मश्री ऐनुल हसन रिज़वी और शम्सुल हसन रिज़वी, मुनाजिर हुसैन मंजू, सैयद आलिम हुसैन, शकील अहमद जादूगर, नेयाब रज़ा, सैयद हैदर मेहंदी, ज़फ़र अब्बास आदि शामिल रहे। पूरे माहौल में ग़म और अक़ीदत की झलक साफ़ नज़र आई और भारी तादाद में अज़ादारों ने जुलूस व मजलिसों में शिरकत कर इमाम हुसैन को खिराजे-अक़ीदत पेश किया।

सैयद फरमान हैदर की कमी खली 
इस बार मोहर्रम के जुलूस में शिया जामा मस्जिद के पूर्व प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर मरहूम की कमी सभी को खल रही थी मोहर्रम के दौरान वो काफी सक्रिय रहा करते थे। खासकर लुटे हुए काफिले के जुलूस में मरहूम फरमान हैदर जब दालमंडी से माइक संभाले, "अशरे को भी शब्बीर का जो गम नहीं करते, वो पैरवी-ए-सरवरे आलम नहीं करते, हिम्मत हो तो महशर में पयंबर से भी कहना, हम जिंदा-ए-जावेद का मातम नहीं करते...।" जब पढ़ते हुए नयी सड़क पहुंचते थे, तो वो मंज़र देखने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था। 

बारहवीं मोहर्रम को निकलेगा तीजा का जुलूस

हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कल बारहवीं मोहर्रम को शहर भर में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों का तीजा मनाया जाएगा। इस मौक़े पर इमामबाड़ों में फ़ातिहा दिलाई जाएगी, इमाम के फूल की मजलिसें होंगी और तीजे के जुलूस उठाए जाएंगे, जो अपने पारंपरिक रास्तों से होते हुए दरगाहे फातमान और सदर इमामबाड़ा (लाट सरैया) पर शाम को संपन्न होंगे।

10 Mahe moharram: बोल मोहम्मदी या हुसैन...की सदाओं संग कर्बला में ताजिया हुई दफन

यौमे आशूरा पर कर्बला पहुंचा ताजिये का जुलूस, शिया वर्ग ने किया दर्द भरे नौहों पर मातम 

दरगाहे फातमान में हुई शामें गरीबा की मजलिस 

सुन्नी मस्जिदों घरों में खिचडे़ की फातेहा, रखा गया नफिल रोज़ा, हुआ शहादत नामा




dil india live (Varanasi). वाराणसी में इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत के गम में शहर कि बल खाती गलियों-मुहल्लों से लेकर सूदूर ग्रामीण इलाकों तक से तकरीबन 1000 से ज्यादा ताजियों का जुलूस शुक्रवार को अकीदत के साथ निकाला गया। इससे पहले घरों में कुरानख्वानी और फातिहा हुई। इमामबाड़ों और अजाखानों में नौहाख्वानी और मजलिसें हुईं। बोल मोहम्मदी या हुसैन...की सदाओं संग दफन होने के लिए ताजिया का जुलूस कर्बला पहुंचा, तो दूसरी ओर शहर भर की शिया अंजुमनों ने जंजीर और कमा का मातम किया, जिसे देखकर तमाम लोग कांप उठे। इस दौरान सुन्नी मस्जिदों में कर्बला के शहीदों की याद में शहादतनामा पेश किया गया, और मोमीनीन ने नफल रोज़ा रखा, शाम में अज़ान की सदाओं पर रोज़ा खोला गया।


इससे पहले शहर और ग्रामीण इलाकों से सुबह 10 बजे के बाद से ही नौवीं मुहर्रम को इमाम चौक पर बैठाए गए ताजियों का जुलूस उठाया जाना शुरू हो गया जो अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुंचा। हालांकि ज्यादातर बड़े और कदीमी ताजिया जुमा होने की वजह से असर की नमाज़ के समय निकल कर मगरिब बाद तक ठंडा हो गया। 

लल्लापुरा, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, दालमंडी, नई सड़क, रामापुरा, बजरडीहा आदि इलाकों के ताजिये दरगाहे फातमान पहुंचे तो बड़ी बाजार, दोषीपुरा, कज्जाकपुरा, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीलीकोठी, पुरानापुल आदि इलाकों के ताजिये सदर इमामबाड़ा लाट सरैया ले जाया गया। इस बार जुलूस मार्ग बदल कर कज्जाकपुरा आरओबी सदर इमामबाड़े जुलूस पहुंचा। उधर शिवाला, गौरीगंज, नवाबगंज आदि की ताजिये भवनिया कब्रिस्तान में दफन हुए। शिवपुर, बीएचयू, लंका आदि इलाकों से भी ताजिये कर्बला पहुंचकर ठंडे हुए। दरगाहे फातमान मार्ग पर खासी भीड़ देर शाम तक उमड़ी रही। ताजिये के साथ ढोल, ताशा बजाते और युवा लाठी, डंडे आदि के जरिये फन-ए-सिपाहगिरी का मुजाहिरा करते हुए चल रहे थे।














नफिल रोजा रखकर पेश की अकीदत

सुन्नी समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में घरों में फातिहा और दुआख्वानी की। नफिल रोजा रखकर अकीदत पेश की। मगरिब की नमाज के बाद इफ्तार करके रोजा खोला गया। इस दौरान मस्जिद अल कुरैश में सामूहिक रोज़ा इफ्तार का एहतमाम किया गया था।


जुलूस में जंजीर का मातम

शिया समुदाय ने मजलिस, मातम व जुलूस निकाल कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया। जगह-जगह से अंजुमनों ने अलम, ताबूत दुलदुल का जुलूस उठाया। अजादारों ने कमा, जंजीर से मातम किया। जोहर की नमाज के बाद शहर की सभी अंजुमनों के जुलूस उठने लगे। अंजुमन हैदरी नई सड़क, अंजुमन जौव्वादिया कच्चीसराय, अंजुमन मातमी जौव्वादिया पितरकुडा, अंजुमन गुलजारे अब्बासिया व अंजुमन कासिमिया अब्बासिया आदि ने मातम का नज़राना पेश किया। गौरीगंज व शिवाला से अलम, दुलदुल का जुलूस उठाया गया। इस दौरान बड़े संग बच्चे भी सीनाजनी, खंजर, कमा से मातम कर रहे थे। खूनी मातम देख जियारतमंदों की आंखें नम हो गईं।

उधर, अर्दली बाजार इमामबाड़े से अंजुमन इमामिया के कमा व जंजीर का मातम देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान काफी भीड़ रही। अर्दली बाजार से दसवीं मोहर्रम को अलम, ताबूत, दुलदुल का जुलूस यौम-ए अशूरा को उल्फत बीबी हाता स्थित मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़ा से उठा। जुलूस में अंजुमन इमामिया के नेतृत्व में लोग नौहाखानी, मातम और सीनाजनी करते हुए चल रहे थे। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ नदेसर, अंधरापुल, लोहा मंडी, पिशाचमोचन के रास्ते देर शाम फातमान पहुंच कर ठंडा हुआ़। जुलूस में इरशाद हुसैन "शद्दू ", जैन, दिलशाद, ज़ीशान, फिरोज़, जफर अब्बास, दिलकश. मिसम, अयान, शाद, अमान, अलमदार हुसैन, अद्दनान, अरशान आदि ने सहयोग किया।


शामे गरीबां की मजलिस 
शाम में जुलूस के बाद देर शाम शिया समुदाय की ओर से शाम-ए-गरीबां की मजलिसें हुई। दरगाहे फातमान, दालमंडी, पितरकुंडा, काली महाल, गौरीगंज व शिवाला में मजलिस को उलेमा ने खेताब करते हुए शहीदान-ए-कर्बला का जिक्र किया। 


सैय्यद सलमान हैदर ने बताया कि 11 वीं मुहर्रम को लुटे हुए काफिले का जुलूस दालमंडी में हकीम काजिम के इमामबाड़े से जुमेरात को सुबह 10 बजे से उठेगा। उधर परवेज़ कादिर खां की अगुवाई में उठा दूल्हे का कदीमी जुलूस छिटपुट घटनाओं को छोड़कर सकुशल संपन्न हो गया। इस दौरान जुलूस 60 ताजिया को सलामी और 72 अलाव पर दौड़ने के बाद शिवाला स्थित इमाम बाड़ा दूल्हा कासिम नाल पहुंच कर ठंडा हुआ। शाम में पुनः पानी वाला दूल्हा निकला जो आसपास के इलाकों में होकर वापस शिवाला पर सम्पन्न हुआ। उधर, मरकजी सीरत कमेटी की ओर से नई सड़क स्थित खूजर वाली मस्जिद में जिक्र शोहदा-ए-कर्बला कार्यक्रम हुआ जिसमें उलेमा ने कर्बला के वाक़यात पर रौशनी डाली।

जिया क्लब ने लगाया कैंप 

जिया क्लब द्वारा मोहर्रम की 10 तारीख इमामे हुसैन की शहादत पर पितरकुंडा पर मोहर्रम के जुलूस पर एक कैंप लगाया गया था जहां एक ओर अल्पाहार बांटने की व्यवस्था किया गया था वहीं दूसरी ओर एक मेडिकल कैंप लगाया गया था जिसमें आए हुए सभी ताजियादारों के लिए रोजा रखे हुए लोगों को रोज खुलवाया गया व जुलूस में आए हुए लोगों का उपचार कराया गया। फजलुर रहमान, इरशाद अंसारी, रब्बानी अंसारी, शमीम अंसारी, हाजी काजू आदि मौजूद थे तो जुलूस का संचालन समाजसेवी शकील अहमद जादूगर ने किया।

शुक्रवार, 26 जून 2026

world famous dulhe का निकला जुलूस, आग के अंगारों पर दौड़े इमाम हुसैन के दीवाने

इमाम चौक पर बैठी ताजिया, ज़ियारत को उमड़े अकीदतमंद



dil India live (Varanasi). 9 वीं मोहर्रम को मुस्लिम बहुल इलाके 'या हुसैन या हुसैन' की सदाओं से गूंज उठें। शहीदाने कर्बला की याद में इमाम चौकों पर जहां ताजिया मलीदे और शर्बत की फातेहा के बाद बैठा दी गई वहीं शहर भर में विभिन्न मस्जिदों में हुए जलसे में जिक्रे  इमाम हुसैन की शहादत को शिद्दत से याद किया गया। वहीं दूल्हे का विश्व प्रसिद्ध जुलूस शिवाला से निकल कर आग के अंगारों पर दौड़ता हुआ आगे बढ़ा तो वहीं दूसरी ओर शहर भर में गश्ती अलम का जुलूस निकला। इस मौके पर इमाम चौकों और इमामबाड़ों में ताज़िए की जियारत को देर रात तक हुजुम उमड़ा हुआ था। 



आग पर से दौड़े इमाम हुसैन के दीवाने 

हज़रत कासिम की याद में नौवीं मोहर्रम की मध्यरात्रि विश्व प्रसिद्ध (प्राचीन) दूल्हे का जुलूस इमामबाड़ा हज़रत कासिम नाल से सदर परवेज कादिर खां कि अगुवाई में निकाला गया। इस दौरान सवारी पढ़ने के बाद जुलूस को दूल्हा कमेटी ने आवाम के हवाले किया जो अपने कदीमी रास्तों में लगी आग पर से होकर आगे बढ़ता रहा। जुलूस उठने से पूर्व ही अकीतदमंदों का जनसैलाब शिवाला से लेकर तमाम अलाव के पास उमड़ा हुआ था। 

लोगों का हुजूम या हुसैन, या हुसैन...की सदाएं बुलंद करते हुए आग के अंगारों पर दौड़ते हुए हज़रत इमाम हुसैन, हज़रत कासिम समेत कर्बला में शहीद हुए 72 हुसैनियों को सलामी पेश करते हुए इमाम चौकों पर बैठायी गई तकरीबन 60 ताजियों को सलामी देने व 72 अलाव से होकर जुमे की सुबह वापस लौटेगा। जुलूस शहर के छह थाना क्षेत्रों से गुजरता है। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी। 

इससे पहले दूल्हा कमेटी ने एक ओहदेदारान को दूल्हा बनाया जिस पर सवारी पढ़ी गई। डंडे में लगी घोड़े की नाल लिये दूल्हे को पकड़ने की लोगों में होड़ मची हुई थी। पीछे पीछे अकीदतमंदों का जनसैलाब जुलूस में शामिल था। जुलूस विभिन्न मुहल्लों में इमाम चौकों पर बैठे ताजिये को सलामी देने शिवाला कि गलियों में लगी आग से होकर अस्सी, दुर्गाकुंड होते हुए समाचार लिखे जाने तक अहातारोहिला, गौरीगंज की ओर रवाना हो गया था। दूल्हे का जुलूस भेलूपुर, रेवड़ी तालाब, बाजार सदानंद, रामापुरा, गौदोलिया, नयी सड़क लल्लापुरा, फातमान, पितरकुंडा, दालमंडी, मदनपुरा, सोनारपुरा व हरिश्चंद्र घाट होकर वापस शिवाला के इमामबाड़ा दूल्हा हज़रत कासिम नाल पहुंच कर सम्पन्न होगा।

जुलूस के साथ विभिन्न थानों की पुलिस के अलावा रिजर्व पुलिस, पीएसी के जवान तैनात थे। कमेटी के अध्यक्ष परवेज कादिर खां ने बताया कि जुलूस सुबह पहुंचेगा और पुन: शिवाला स्थित इमामबाड़ा दूल्हा कासिम नाल से शाम में उठेगा जो शिवाला घाट पर पहुंच कर ठंडा होगा। 

निकला गश्ती अलम का जुलूस 

दूल्हे का जुलूस निकलने के बाद गश्ती अलम का जुलूस विभिन्न शिया इमामबाडों से निकाला गया। जुलूस गश्त करते हुए एक जगह से दूसरे जगह तक आता जाता दिखाई दिया। इस दौरान लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। खासकर अर्दली बाज़ार, लल्लापुरा, पितरकुंडा, नयी सड़क, दालमंडी, चौहट्टा, पठानी टोला, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, लोहता, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा आदि में भारी भीड़ देखी गई।










इमाम चौक पर बैठाईं गई ताजिया 

कारीगरी के बेहतरीन नमूनों और कलात्मक डिजाइनों से सजायी गई छोटी बड़ी ताजिया अंतिम रूप देने के बाद शाम को बैठा दी गई। इन ताजियों को देखने के लिए आज शाम से भीड़ देर रात तक जमी रही। खासकर लल्लापुरा स्थित रांगे का ताजिया, बाकराबाद के बुर्राक की ताजिया, बजरडीहा स्थित शीशे का ताजिया, उल्फत बीबी के हाते की ज़री की ताजिया़, कोयला बाजार स्थित नगीने का ताजिया, फूलों की ताजिया, दालमंडी स्थित पीतल की ताजिया, गौरीगंज की शीशम की ताजिया, चपरखट की ताजिया, शिवाला की कुम्हार की ताजिया, दोषीपुरा की शाबान की ताजिया, बजरडीहा की कागज की ताजिया के अलावा सैकड़ों मन्नती ताजिया आज गुरुवार की शाम इमाम चौक पर बैठा दी गई । इन ताजियों की जियारत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। 

दस तारीख के रोज़े की फजीलत

इस दौरान दो दिन का मोमीनीन रोज़ा भी रखते हैं। कुछ लोग 9 वीं मोहर्रम और 10 वीं मोहर्रम को तो कुछ लोग 10 वीं, 11 वीं मोहर्रम को रोज़ा रहते हैं। मौलाना अजहरुल कादरी कहते हैं मोहर्रम की दस तारीख के रोज़े की बहुत फजिलत है। मौलाना कहते हैं कि कर्बला के मैदान में शहादत देकर इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाया है। अब तमाम दुनिया के इंसानों को चाहिए कि इमाम हुसैन के पैगाम को बचाएं। उनके नाना के दीन की हिफाजत करें। बुराई से बचें और नेकी व हमदर्दी के रास्ते पर चलें।

गुरुवार, 25 जून 2026

Dulhe ka Julus: पूरी दुनिया में केवल बनारस में उठाया जाता है दूल्हे का जुलूस

या हुसैन, या हुसैन...की सदाओं संग आग पर दौड़ेगा दूल्हे का जुलूस

शिवाला से दूल्हे का जुलूस आज 


dil india live (Varanasi). बनारस में मुहर्रम की नौवीं तारीख यानी गुरुवार की रात सैकड़ों साल पुरानी रवायतों के साथ आग पर दूल्हे का कदीमी जुलूस दौड़ेगा। शहीदाने कर्बला की याद में इस तरह का दुनिया में इकलौता 'दूल्हे का जुलूस' अपनी अलग रवायत और खास पहचान रखता है। दूल्हा कमेटी के सदर परवेज कादिर खान की मानें तो इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम के घोड़े की नाल के साथ 'दूल्हा' नंगे पांव 30 टन से ज्यादा लकड़ियों के लाल अंगारों पर से होकर गुजरता है इस दौरान ‘या हुसैन, या हुसैन’ की सदाएं बुलंद होती है। दूल्हे के वापस इमामबाड़ा पहुंचने के बाद ही ताजियों के जुलूस उठाएं जाते हैं। 72 अलाव व 60 ताजिये को सलामी देकर रात को उठा यह जुलूस सुबह वापस इमामबाड़े लौटता है।

दूल्हा कासिम नाल कमेटी के सदर परवेज कादिर खान बताते हैं कि  हजरत कासिम की शादी तय थी लेकिन कर्बला की जंग का ऐलान होने और जंग में उनके शहीद होने के कारण शादी नहीं हुई। क्यों की उन्होंने शादी के बजाय जंग में शहीद होना पसंद किया। इसलिए उनकी याद में ही सैकड़ों साल पुरानी रवायतों को बनारस के लोग निभाते चले आ रहे हैं। हजरत कासिम के घोड़े की नाल को पकड़ने वाले को दूल्हा कहा जाता है और उस पर इमाम हुसैन की सवारी आती है।

इमामबाड़े में रखी है कदीमी "नाल"

शिवाला के जिस इमामबाड़े से दूल्हे का जुलूस उठता है वहां हजरत कासिम के घोड़े की नाल सुरक्षित रखी हुई है। इसे सिर्फ इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवीं मुहर्रम और 10 वीं को ही बाहर निकाला जाता है। इमामबाड़ा की दीवारों पर प्रतीकात्मक रूप से खून के छींटे कर्बला के मंजर की बयां करते हैं।

दूल्हे का जुलूस जुमेरात की रात 10 बजे शिवाला से उठेगा जो भदैनी, अस्सी दुर्गाकुंड, बाराती बेगम के इमामबाड़े, गौरीगंज, भेलूपुर, रेवड़ी तालाब, नई सड़क होते हुए माध्यरात्रि के बाद फातमान पहुंचेगा। 12 किलोमीटर लंबे रास्ते में जगह-जगह लोग जुलूस आने के पहले ही दस-दस मन लकड़ी के अलाव जलाएंगे। इस दौरान पहले दूल्हा अंगारों पर दौड़ता है और फिर सब उसके पीछे-पीछे दौड़ते हैं।

हिन्दूओं ने सौंपी थी मुस्लिमों को "नाल"

दूल्हा कासिम नाल कमेटी के पूर्व सेक्रेटरी सलीम शिवालवी बुजुर्गों की सुनी बताते हैं कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके घोड़े की नाल गंगा में स्नान कर रहे पंडित रामफल को मिली थी। नेपाली रियासत के रामफल को वो नाल आकर्षित कर रही थी इसलिए उन्होंने एक लोहे के बक्से में उसे रख दिया। सलीम शिवालवी बताते हैं कि मोहर्रम आने पर उस नाल से या हुसैन, या हुसैन... की सदाओं निकलती। इसे देखते हुए पंडित रामफल ने नाल का इस्लामिक महत्व समझते हुए उसे शिवाला के मुस्लिमों को दे दिया। तब से लगातार मोहर्रम की 9 व 10 तारीख को दूल्हे का जुलूस उठाया जा रहा है।




प्रशासन ने की तैयारियों की समीक्षा

'दूल्हे' को अंगारों पर चलते देखने के लिए दूर-दूर से लोगों के आने के चलते भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा खास इंतजाम रखा जाता हैं। जुलूस से पूर्व ही तैयारियों की समीक्षा बैठक की जाती है ताकि शांति व्यवस्था कायम रहे।

पिछले दिनों पीस कमेटी की बैठक डायमंड होटल परिसर में हुई। बैठक में मोहर्रम पर्व ताजिया जुलूस विश्व विख्यात शिवाला दुल्हे का जुलूस 25 जून 2026 को रात्रि में निकाले जाने के संबंध में विस्तृत चर्चा वार्तालाप महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजर रखते हुए उपस्थित थाना भेलूपुर क्षेत्र से आए सम्मानित जनमानस, ताजियादार, दूल्हा कमेटी के समस्त पदाधिकारी स्वयंसेवक समाज संगठन सोसाइटी परिवार के पदाधिकारी स्वयंसेवक इस महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहकर जुलूस को सकुशल संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान पर चर्चा की।


बैठक की अध्यक्षता गौरव कुमार (सहायक पुलिस आयुक्त सर्किल भेलूपुर), संचालन मुख्तार अहमद (प्रदेश प्रवक्ता समाज संगठन सोसाइटी), धन्यवाद दुर्गा सिंह (प्रभारी निरीक्षक थाना भेलूपुर) व स्वागत परवेज कादिर खान ने किया।

रेवड़ी तालाब, मदनपुरा व नवाबगंज से निकला जुलूस 

थाना भेलूपुर क्षेत्र में रेवड़ी तालाब के अशफ़ाक नगर में 24 जून 2026 को रात्रि 11:00 बजे परंपरागत रेवड़ी तालाब दूल्हा कमेटी के द्वारा  जुलूस भारी भीड़ के साथ निकाला गया जो विभिन्न रास्तों से होते हुए पांडेय हवेली स्थित इमाम चौक परिसर में भोर में वापस सम्पन्न हुआ। ऐसे ही मदनपुरा थाना दशाश्वमेध क्षेत्र में प्रातः काल जुलूस सकुशल संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण जुलूस में गौरव कुमार (सहायक पुलिस आयुक्त सर्किल भेलूपुर ज़ोन काशी पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी) दुर्गा सिंह (प्रभारी निरीक्षक थाना भेलूपुर) संतोष कुमार सिंह (थाना अध्यक्ष थाना दशाश्वमेध) विशाल विक्रम सिंह, शिवम श्रीवास्तव आदि ने महत्वपूर्ण जुलूस में शामिल थे।


समाज संगठन रही मुस्तैद 
समाज संगठन सोसाइटी परिवार सर्किल भेलूपुर शाखा चेतगंज शाखा जैतपुरा, शाखा चौक, शाखा दशाश्वमेध, शाखा सिगरा, शाखा लक्सा के समस्त पदाधिकारी इस महत्वपूर्ण जुलूस में उपस्थित रहकर  शांति व्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते दिखे। प्रदेश प्रवक्ता समाज संगठन सोसाइटी मुख्तार अहमद द्वारा नवाबगंज से रात्रि 10:00 बजे निकलने वाले दुल्हे के जुलूस का नेतृत्व किया गया। जुलूस नवाबगंज से होकर दुर्गा कुंड स्थित इमामबाड़े में जाकर समाप्त हुआ है।




Bihar : मुस्लिम बेटियों और बेटों ने किया बड़ा काम

बीपीएससी में मिली 12 को एसडीएम और 10 को डीएसपी जैसी ज़िम्मेदारी




dil india live (Patna). बिहार लोक सेवा आयोग की 70 वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के नतीजों में मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहद काबिले तारीफ है। इस बार कई मुस्लिम छात्राओं ने भी बड़ी कामयाबी हासिल कर मिसाल पेश की है। उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा कर सबको हेरानी कर दिया है। 20 जून को जारी किए गए नतीजों के मुताबिक, बिहार प्रशासनिक सेवा यानी एसडीएम के 200 पदों में 12 मुस्लिम उम्मीदवारों ने कामयाबी हासिल की है। इनमें 5 महिला और 7 पुरुष उम्मीदवार शामिल हैं। मुस्लिम उम्मीदवारों की प्रशासनिक और पुलिस सेवा में कामयाबी का आंकड़ा निराशाजनक रहा है। बीपीएससी में प्रशासनिक सेवाओं के लिए 6 फीसदी मुस्लिम उम्मीदवार को जबकि पुलिस सेवा में 7.35 फीसदी उम्मीदवार कामयाब रहे। 

एसडीएम पद के लिए कामयाबी हासिल करने वाली महिला उम्मीदवारों में यासमीन बानो, साहेबा खान, मावरा जफर, सायका खातून और समरीन फातमा शामिल हैं। वहीं, पुरुष उम्मीदवारों में मोहम्मद इश्तियाक रहमान, रागिब नौशाद, रेयान हुसैन, मोहम्मद लुत्फुर रहमान, मोहम्मद शाह फहद, साकिब हसन और मुस्कान के अलावा अन्य नाम भी लिस्ट में शामिल हैं। इन उम्मीदवारों में कई ने राज्य स्तर पर बेहतर रैंक हासिल की है। मुस्लिम उम्मीदवारों में मोहम्मद इश्तियाक रहमान टॉप 20 में शामिल हैं। मोहम्मद इश्तियाक रहमान ने 11वीं रैंक हासिल की, जबकि यासमीन बानो ने 33 वीं और साहेबा खान ने 35 वीं रैंक हासिल की। इसके अलावा रागिब नौशाद 39 वें और मावरा जफर 74 वें स्थान पर हैं।

वहीं, बिहार पुलिस सेवा यानी डीएसपी के 136 पदों के लिए चुने गए उम्मीदवारों में 10 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जगह बनाई है। इनमें 5 महिला और 5 पुरुष उम्मीदवार शामिल हैं। डीएसपी पद के लिए सफल महिला उम्मीदवारों में शिरीन नाज, बुशरा रहमान, जन्नत निशा, सानिया कलीम और हशमत सबा शामिल हैं। वहीं, पुरुष उम्मीदवारों में मोहम्मद सरफराज आलम, अताउल हक, अहमद फराज, सद्दाम हुसैन और मोहम्मद हसनैन आलम ने कामयाबी हासिल की है। मोहम्मद सरफराज, पूरे बिहार में डीएसपी के रैंक में पहले स्थान पर रहे। इसी तरह ओवर ऑल रैंक के हिसाब से मोहम्मद सरफराज आलम ने राज्य स्तर पर 60 वीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा शिरीन नाज ने 259वीं और बुशरा रहमान ने 327वीं रैंक हासिल की। एसडीएम के मुकाबले डीएसपी पद के लिए मुस्लिम उम्मीदवारी की कामयाबी का फीसदी बेहतर है। 

बिहार प्रशासनिक सेवा में एसडीएम पद के चयनित

1. रोल नंबर - 502119, मोहम्मद इश्तेयाक रहमान, 11 पुरुष

2. रोल नंबर - 558246, यासमीन बानो, 33 महिला

3. रोल नंबर - 481260, साहेबा खान, 35 महिला

4. रोल नंबर - 397642,  रागिब नौशाद, 39 पुरुष

5. रोल नंबर - 427154, मावरा जफर, 74 महिला

6. रोल नंबर - 302559, रेयान हुसैन, 132 पुरुष

7. रोल नंबर - 225394, मोहम्मद लुत्फुर रहमान, 144 पुरुष

8. रोल नंबर - 528729, मोहम्मद शाह फहाद, 156 पुरुष

9.रोल नंबर - 392458, साकिब हसन, 222 पुरुष

10. रोल नंबर - 520027, साइका खातून, 236 महिला

11. रोल नंबर - 328162, समरीन फातमा, 282 महिला

12. रोल नंबर - 124474, मुस्कान, 1768 महिला

बिहार पुलिस सेवा में चयनित मुस्लिम उम्मीदवार

1. रोल नंबर - 537173, मोहम्मद सरफराज आलम, 60 पुरुष

2. रोल नंबर - 493468, शिरीन नाज, 259 महिला

3. रोल नंबर - 219247,  बुशरा रहमान, 327 महिला

4. रोल नंबर - 207877, अताउल हक, 444 पुरुष

5 रोल नंब - 442891, अहमद फराज, 510 पुरुष

6. रोल नंबर - 126802 सद्दाम हुसैन, 543 पुरुष

7. रोल नंबर - 442233,  मोहम्मद हसनैन आलम, 619 पुरुष

8. रोल नंबर - 220779, जन्नत निशा, 695 महिला

9. रोल नंबर - 474656, सानिया कलीम, 821 महिला

10. रोल नंबर - 308446, हश्मत सबा, 1124 महिला