शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

BLW Varanasi Main सात कर्मचारियों को दी गई विदाई

समारोह में बरेका के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव को कर्मियों ने किया साझा




F. Farouqi Babu 

dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के प्रशासन भवन स्थित कीर्ति कक्ष में आज 28 फरवरी 2026 को आयोजित सेवानिवृत्ति समारोह में बरेका परिवार ने अपने सात कर्मचारियों को ससम्मान भावभीनी विदाई दी। समारोह में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं परिजनों की गरिमामयी उपस्थिति में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के दीर्घकालीन योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके उज्ज्वल, स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की मंगलकामना की गई।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों में टी.जी.टी. धीरेन्द्र कुमार सिंह, मुख्य कर्मचारी एवं कल्याण निरीक्षक कैलाश नाथ, वरिष्ठ तकनीशियन (क्रेन चालक) राजेश बहादुर, वरिष्ठ तकनीशियन (फिटर) जय कृष्णा ठाकुर, वरिष्ठ तकनीशियन (इलेक्ट्रिकल) अबिनाश कुमार मल्ल, तकनीशियन (ड्राइवर एम एंड पी) शिव सेवक राम तथा तकनीशियन (क्रेन चालक) शशि प्रसाद मिश्रा शामिल रहे। इस अवसर पर सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपने सेवाकाल के अनुभव साझा करते हुए बरेका के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त किया।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों से शिष्टाचार भेंट के दौरान प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी लालजी चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि “आप सभी कर्मचारी बरेका परिवार की अमूल्य धरोहर हैं। अपनी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन एवं समर्पण से आपने न केवल बरेका बल्कि भारतीय रेल की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आपकी सेवाएँ एवं कार्य के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।”

इससे पूर्व कीर्ति कक्ष में आयोजित समारोह में उप मुख्य कार्मिक अधिकारी, मुख्यालय समीर पॉल ने सभी सेवानिवृत्तजनों के स्वस्थ, सुखद एवं शांतिपूर्ण जीवन की कामना करते हुए कार्यक्रम को औपचारिक रूप से सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह के रूप में आयोजित किए जाने की घोषणा की। उप मुख्य कार्मिक अधिकारी, मुख्यालय समीर पाल ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप फोल्डर प्रदान कर आत्मीय शुभकामनाएँ दीं।




 इस अवसर पर जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया तथा उनके उत्कृष्ट योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ एवं सुखद जीवन की कामना की।  समारोह में मुख्य कर्मचारी कल्याण निरीक्षक विजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी, सहकर्मी एवं परिजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्मिक विभाग के कल्याण अनुभाग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का भावपूर्ण संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन सहायक कार्मिक अधिकारी पीयूष मिंज द्वारा किया गया।

ईसाई और मुस्लिम रोज़ा चल रहा साथ साथ

रमज़ान का पहला अशरा "रहमत" का मुकम्मल, मगफिरत का अशरा शुरू 



dil india live (Varanasi). मुक़द्दस रमज़ान का पहला अशरा "रहमत" का शनिवार को मुकम्मल हो गया। रहमत का अशरा पूरा होते ही रमज़ान का दूसरा मगफिरत का अशरा शुरू हो गया। पहले अशरे में रब बंदों पर रहमतें नाजिल फ़रमाता है। तो दूसरे अशरे में अल्लाह अपने नेक बंदों की गुनाहों को माफ कर देता है। तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नम से आजादी का 21 रमज़ान से शुरू होगा। आखिरी अशरे में अल्लाह अपने नेक बंदों को जहन्नुम से आजाद कर देता है।

जो लोग रमज़ान के तीनों अशरे में कामयाबी से रोज़ा रखते हैं रब उन्हें जन्नत में आला मुकाम देता है। रोजेदारों के लिए जन्नत सजाया जाता है। जन्नत का एक खास दरवाजा बाबे रययान है उलेमा फ़रमाते हैं कि उस दरवाजे से केवल रोजेदारों को जन्नत में दाखिल किया जाएगा।


मुस्लिम रोजों के साथ ही साथ ईसाई रोज़ा जिसे चालीसा या यहां उपवास काल कहा जाता है अपने रफ्तार पर है। शनिवार को महा उपवास काल के भी दस रोज़े पूरे कर लिए गए। सेंट मैरीज महागिरजा, तेलियाबाग सीएनआई चर्च, लाल गिरजाघर, सेंट पॉल चर्च, सिगरा, सेंट थॉमस चर्च गौदोलिया, राम कटोरा चर्च, ईसीआई चर्च सुंदरपुर आदि से जुड़े मसीही समुदाय ने अपना दसवां उपवास पूरा किया। इस दौरान प्रार्थना सभा और मसीही गीत गाए गयें।

 

 

Ramadan ka Paigham 10 : सभी मजहबों में मिल्लत बांटता माहे रमज़ान

सौहार्द और मोहब्बत की दावत देता रमज़ान का रोज़ा



dil india live (Varanasi)। मुकद्दस रमज़ान का महीना हिन्दू-मुस्लिम एकता और सौहार्द की मिसाल है। रमजान के रोज़े के बहाने एक दस्तरखान पर दोनों कौम के लोग एक-दूसरे के जहां नज़दीक आते हैं, वहीं मुस्लिम कल्चर और तहज़ीब में वो टोपी, कुर्ता पहन कर इस तरह से घुल मिल जाते हैं कि उनमें यह पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि कौन मुस्लिम है या कौन हिन्दू। यही नहीं बहुत से ऐसे हिन्दू हैं जो रोज़ा रखते हैं, बहुत से ऐसे गैर मुस्लिम है जो रोज़ा रखने के साथ ही साथ मुस्लिम भाईयों को रोज़ा इफ्तार की दावत देते हैं। ये सिलसिला रमज़ान के बाद बंद नहीं होता बल्कि ये पूरे साल किसी न किसी रूप में हिंदुस्तान में जारी रहता है, चाहे वो ईद हो बकरीद हो, क्रिसमस, गुरु पर्व, दशहरा, दीपावली व होली आदि पर्व। इन त्योहारों को तमाम मजहबों के लोग एक साथ मनाते हैं। पता ये चला कि हक़ की जिन्दगी जीने की रमज़ान हमें तौफीक देता है। आखिर क्या वजह है कि रमज़ान में ही इतनी इबादत की जाती है? दरअसल इस महीने को अल्लाह ने अपना महीना करार दिया है, रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीक़े से तो गुज़ारता ही हैतो एक महीना माहे रमज़ान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। यही वजह है कि एतेकाफ से लेकर तमाम इबादतों में सोने को भी रब ने इबादत में शामिल किया है। 

ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सब मुसलमानों को रोज़ा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे और हम सबकी हर नेक तमन्ना व जायज़ ख्वाहिशात को पूरा कर दे..आमीन।

       डाक्टर एहतेशमुल हक 
(अध्यक्ष सुल्तान क्लब वाराणसी)
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Ramadan ki khas namaz तरावीह कई मस्जिदों में हुई मुकम्मल

कुरान हुई मुकम्मल, सूरे तरावीह पूरे रमज़ान अदा करना जरूरी-मुफ्ती अब्दुल हन्नान 





Mohd Rizwan

Varanasi (dil India live).वाराणसी की विभिन्न मस्जिदों में नमाजे तरावीह में कुरान मुकम्मल होना जारी है। शिवाला रोड पर मस्जिद हज़रत रहीम खां में हाफीज सैय्यद मुज़म्मिल ने जब तरावीह के आखिरी पारे की आखिरी सुरे मुकम्मल की तो सलाम व नमाज़ के बाद उनका जोरदार इस्तेकबाल किया गया। सैयद जावेद अली, सैयद साजिद अली, सैयद राशिद अली, अफसर खां आदि लोगों ने हाफीज सैय्यद मुज़म्मिल को फूल मालाओं से लाद दिया। इस दौरान लोगों ने हाफ़िज़ साहब की हौसला अफजाई की। ऐसे ही शनिवार को मस्जिद जाहिद शहीद पठानी टोला में हाफ़िज़ हाफ़िज़ इमामुद्दीन ने तरावीह मुकम्मल कराई। इस मौके पर उनकी जोरदार गुलपोशी की गई। सलाम और दुआओं के बाद लोगों में तबर्रूक तकसीम किया गया।

ऐसे ही बड़ी मस्जिद बक्शी जी अन्धरापुल मुकम्मल तरावीह हाफिज मोहम्मद शाकिर ने कराया। इस मौके पर मुतवल्ली अब्दुल रहमान की मौजूदगी व पेश इमाम मौलाना अब्दुल हकीम की अगुवाई में उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया गया।इस मौके पर बदरुद्दीन खां एडवोकेट, हाजी सुल्तान, बसपा नेता शाहिद अली खान, मोहिउद्दीन खान एडवोकेट, राकी, अजीम, मोहम्मद गुलफाम व फैज खान आदि सैकड़ों नमाज़ी मौजूद थे। उधर जामा मस्जिद कम्मू खां डिठोरी महाल में तरावीह मुकम्मल हुई, तरावीह के दौरान इमाम साहब का जोरदार खैरमकदम किया गया। आखिर में लोगों को तबर्रूक देकर रुखसत किया गया।
 




इससे पहले मस्जिद अल कुरैश फाटक शेख सलीम में हाफिज इरफान ने तरावीह मुकम्मल कराई। इस मौके पर हाफ़िज़ इरफान का ज़ोरदार इस्तेकबाल किया गया। लोगों ने उनकी गुलपोशी की। तरावीह मुकम्मल होने पर मुफ्ती अब्दुल हन्नान ने लोगों से अपील किया कि तरावीह में कुरान भले ही मुकम्मल हो गई मगर तरावीह पूरे रमज़ान भर पढ़ना जरूरी है। इसलिए ईद का चांद होने तक अपनी अपनी मस्जिदों में सूरे तरावीह जारी रखें। ऐसे ही अर्दली बाजार छोटी मस्जिद, मस्जिद जलालीपुरा, मस्जिद लल्लापुरा, बजरडीहा आदि में भी तरावीह की नमाज मुकम्मल हुई। तरावीह के बाद लोगों में तबर्रूक तकसीम किया गया। तरावीह के द्वारा विभिन्न मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में काफी चहल-पहल दिखाई दी।

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

UP k Varanasi Main अदा की गई रमज़ान के दूसरे जुमे की नमाज

या रब हम सबको पांचों वक्त का नमाज़ी बना दे...आमीन

जुमे की नमाज में अमन और मिल्लत की गूंजीं सदाएं






Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). मुक़द्दस रमजान के दूसरे जुमे को मस्जिदों में नमाजियों का जहां हुजूम उमड़ा वहीं मस्जिदों, इबादतगाहों का माहौल नूरानी नज़र आया। इस दौरान लोगों ने रब से दुआएं मांगी। इस्लाम में जुमे के दिन को छोटी ईद के तौर पर मनाया जाता है और रमजान के महीने में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन मस्जिदों में विशेष जुमे की नमाज अदा की गई और लोगों ने एक-दूसरे से मुसाफा कर जुमे की मुबारकबाद दी। 

मस्जिद याकूब शहीद नगवां में हाफ़िज़ मोहम्मद ताहिर, मस्जिद लाटशाही में हाफ़िज़ हबीबुर्रहमान, मस्जिद उल्फत बीबी में हाफ़िज़ साकिब रज़वी, मस्जिद ढ़ाई कंगूरा में हाफ़िज़ नसीम अहमद बशीरी, मस्जिद दायम खां में हाफ़िज़ नसीर, मस्जिद शक्कर तालाब में मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारूकी प्यारे मियां, मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ में मौलाना वलीउल्ला आरिफ, मुगलिया मस्जिद बादशाह बाग में मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने नमाज़ के पहले तकरीर कर रमज़ान की जहां फजीलत बयां किया वहीं नमाजे जुमा के बाद दुआ में उन्होंने रब से मुल्क में अमन मिल्लत और रोज़गार में तरक्की के साथ ही नमाजियों को पांचों वक्त का पक्का सच्चा नमाज़ी बनाएं जाने की रब से दुआएं मांगी। 

ऐसे ही मस्जिद अलकुरैश, मस्जिद ताराशाह, कपड़ा मार्केट, मस्जिद लाटसरैया, शिया जामा मस्जिद दारानगर, मस्जिद लंगडे हाफिज, मस्जिद ज्ञानवापी, मस्जिद उल्फत बीबी विद्यापीठ, मस्जिद कम्मू खां, जामा मस्जिद नदेसर, मस्जिद हबीबीया गौरीगंज, मस्जिद नयी बस्ती गौरीगंज, खजूर वाली, मस्जिद बड़ी काजी सादुल्लाह पुरा, मस्जिद कमनगढहा, मस्जिद रंगीले शाह, मस्जिद नयी बस्ती, मस्जिद खाकी शाह बाबा, मस्जिद बुलाकी शहीद, मस्जिद बाबा फरीद, मस्जिद सुग्गा गढही, मस्जिद अस्तबल शिवाला, मस्जिद जलालीपुरा, मस्जिद लाट सरैया, मस्जिद भोले शाह दीवान, मस्जिद वरुणा पुल आदि मस्जिदों सैकड़ों मस्जिदों में जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज के बाद दुआएं और मुसाफा किया गया।

Ramadan ka Paigham 9: तीन अशरों में बटा है "माहे रमज़ान"

रहमत का दस रोज़ा पूरा होते ही शुरू होगा मगफिरत का अशरा




dil india live (Varanasi)। मुकद्दस रमज़ान केवल कोई पर्व या त्योहार का महज नाम ही नहीं है बल्कि रमज़ान नाम है उस इस्लामिक सिस्टम और सिद्धांत का जिस पर अमल करके एक रोजेदार अपनी जिंदगी संवारता है। यही वजह है कि रमज़ान को दस दस दिन के तीन हिस्सों में बांटा गया है। जिसे अशरा कहते हैं। 

पहला अशरा रहमत का, दूसरा आशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है। "अशरा" दस दिन को कहते हैं। कहा जाता है कि रहमत के पहले दस दिन रोज़ादारों पर रब अपनी रहमत बरसाता है। फिर दस दिन मगफिरत का होता है जिसमें अल्लाह रोज़ेदारों की गुनाह माफ कर देता है यानी मगफिरत फरमाता है। इसके बाद रमज़ान के आखिरी अशरे में अल्लाह रोज़ेदारों को जहन्नुम से आज़ाद कर देता है।जो रमजान का पूरा रोजा रखेगा, तीसो दिन रोजा रखने में कामयाब रहेगा। उसे जहन्नम की आग नहीं खा पाएगी और उसे जन्नत में दाखिल किया जाएगा। रोजेदारों के लिए जन्नत में एक खास दरवाजा बाबे रययान होगा, जिसमें से केवल रोजेदार ही जन्नत में दाखिल होंगे। रमजान के तीन अशरो को जिसने भी कामयाबी से पूरा किया, जैसा कि रब चाहता है तो वो रोज़ेदार जन्नत का हकदार होगा। रब उसे जहन्नुम से आजाद कर देगा।

कल शुरू होगा मगफिरत का अशरा 

मुक़द्दस रमज़ान का नौ रोज़ा आज मुकम्मल हो गया। कल रमज़ान की रहमत का अशरा पूरा हो जाएगा। रमजान का रहमत का सफर पूरा होने के साथ ही इस माहे मुबारक का दूसरा अशरा मगफिरत शनिवार को शुरू हो जाएगा।

 

        एस.एम खुर्शीद 

(सदर इस्लामिक फाउंडेशन आफ इंडिया)

 

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

DAV PG College Varanasi के विरासत फोरम में हुई आज की राजनीति पर चर्चा

विद्यार्थियों को समसामयिक विषयों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की दी प्रेरणा




dil india live (Varanasi). डीएवी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के अकादमिक फोरम विरासत द्वारा गुरुवार को आज की राजनीति और भविष्य का भारत विषय पर वाद-विवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में समसामयिक राजनीतिक परिदृश्य के प्रति जागरूकता, तार्किक चिंतन एवं लोकतांत्रिक संवाद की भावना को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने लोकतांत्रिक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को समसामयिक विषयों पर गंभीर अध्ययन एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी।

वाद-विवाद में विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष दोनों दृष्टिकोणों से अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। वर्तमान राजनीति की चुनौतियाँ, युवाओं की भूमिका, लोकतांत्रिक आदर्शों की प्रासंगिकता तथा भविष्य के भारत की दिशा जैसे मुद्दों पर सारगर्भित तर्क रखे गए।

इनकी रही खास मौजूदगी 

कार्यक्रम का संयोजन विरासत फोरम के समन्वयक डॉ. शोभनाथ पाठक, संचालन डॉ. प्रतिभा मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवनारायण ने दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ.संजय कुमार सिंह, डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह,  डॉ. शशिकांत यादवा उपस्थित रहे। छात्र प्रिंस पाण्डेय, विशाल महतो, दीपक यादव, आंचल आदि ने विचार रखे।