सोमवार, 9 मार्च 2026

DAV PG College Varanasi: एनएसएस का सात दिवसीय शिविर शुरू

रविदास पार्क में जुटे राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवी 

युवाओं के विकास में एनएसएस की भूमिका उल्लेखनीय


dil india live (Varanasi). डीएवी पीजी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना के यूनिट सी, एफ एवं जी द्वारा सात दिवसीय शिविर का शुभारंभ सोमवार को नगवां स्थित रविदास पार्क में हुआ। मुख्य अतिथि स्थानीय पार्षद प्रतिनिधि डॉ. रविन्द्र सिंह, मुख्य वक्ता आर्यमहिला पीजी कॉलेज की आचार्य डॉ. पुष्पा त्रिपाठी एवं विशिष्ट अतिथि डीएवी पीजी कॉलेज की उप प्राचार्य प्रो. संगीता जैन सहित कार्यक्रम अधिकारियों ने संयुक्त रुप से शिविर का शुभारंभ किया। 

पार्षद प्रतिनिधि डॉ. रविन्द्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था के रूप में स्थापित है।  युवाओं के व्यक्तित्व एवं सामाजिक विकास में एनएसएस की भूमिका बहुत उल्लेखनीय है। डॉ. पुष्पा त्रिपाठी ने राष्ट्रीय सेवा योजना की आधारशिला के प्रयासों का वर्णन किया और छात्रों के संस्कार पर पड़ने वाले प्रभाव को बताया। इन्होंने स्वयं सेवको को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य व भावात्मक विकास हेतु अभिप्रेरित किया। प्रो. संगीता जैन ने सामाजिक परिप्रेक्ष्य में के एनएसएस की उपयोगिता को बताया एवं साइबर युग में सामाजिक मूल्यों के साथ स्वयं की सुरक्षा और समाज व राष्ट्र हित के विभिन्न आयामों को बताया।


इसके पूर्व कार्यक्रम का प्रारंभ राष्ट्रीय सेवा योजना के लक्ष्य गीत एवं ताल से हुआ उसके बाद समस्त स्वयं सेवकों का परिचय हुआ। संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राजेश कुमार झा, स्वागत डॉ. मनीषा सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने दिया। कार्यक्रम में सभी यूनिट के स्वयंसेवक उपस्थित रहे।


Masjid Hazrat yaqub shahid में हुई इफ्तार दावत, जुटे रोजेदार

रोजेदारों ने रब से मांगा देश में अमन, मिल्लत और कारोबार में बेहतरी



Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil india live). मुकद्दस रमजान जैसे जैसे अपनी रुखसती की ओर है वैसे वैसे इफतार दावतों का दौर भी अपने शबाब पर है। इसी क्रम में मस्जिद याकूब शहीद नगवां समेत कई जगहों पर रोज़ा इफ्तार दावत का आयोजन किया गया। मस्जिद हज़रत याकूब शहीद में रोज़ा इफ्तार में लोगों का हुजूम उमड़ा। मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, गौरीगंज, नवाबगंज, कश्मीरीगंज, बजरडीहा साकेतनगर, सुंदरपुर आदि इलाकों से अकीदतमंदों ने पहुंच कर न सिर्फ रोज़ा इफ्तार किया बल्कि नमाजे मगरिब अदा कर दुआ में भी शामिल हुए और बाबा के दर पर हाजिरी लगाई व फातेहा पढ़ा। इस मौके पर मुल्क में अमन और मिल्लत, कारोबार में बेहतरी की दुआएं मांगी गई।इफ्तार दावत में आए हुए तमाम लोगों का खैरमकदम मस्जिद के इमामे जुमा हाफ़िज़ मोहम्मद ताहिर अपने साथियों के साथ कर रहे थे। यहां लोगों का हुजूम इफ्तार के दौरान उमड़ा हुआ था। हाफ़िज़ मोहम्मद ताहिर ने बताया कि रमज़ान अब अपनी रुखसती की ओर है। दो अशरा मंगलवार को मुकम्मल हो जाएगा। तीसरे अशरे का आगाज़ भी मंगलवार को हो जाएगा। रमज़ान का आखिरी अशरा जहन्नुम से आजादी का है।

मुकम्मल हुआ 19 रोज़ा 
सोमवार को जैसे ही मस्जिद से अजान की सदाएं, अल्लाह हो अकबर, अल्लाह... फिज़ा में बुलंद हुई तमाम रोजेदारों ने रमजान का 19 वां रोजा खोला। सभी ने खजूर और पानी से इफ्तार का आगाज़ किया। इस दौरान तमाम लजीज इफ्तारी का रोजेदारों ने लुफ्त उठाया।

Ramadan Mubarak 19 : जानिए क्या है 'एतेकाफ', रोजेदारों के लिए 'एतेकाफ' का क्या है हुक्म

रमज़ान के आखिरी अशरे में रखा जाता है 'एतेकाफ'


Varanasi (dil India live)। यूं तो रमजान का पूरा महीना ही इबादत के लिए खास मायने रखता है, लेकिन इसके आखिर के 10 दिन सबसे महत्वपूर्ण माने गये हैं। रमजान के आखिरी अशरे में मस्जिद में 'एतेकाफ' करना सुन्नत है। एतेकाफ पर बैठने वाले ईद का चांद देखने के बाद ही मस्जिद से अपने घर लौटते हैं। 

हदीस के मुताबिक एतेकाफ में बैठकर इबादत करने वाले लोगों के अल्लाह सभी गुनाह माफ कर देता है। एतेकाफ सुन्नते केफाया है, अगर मोहल्ले का एक शख्स भी एतेकाफ करले तो सभी के लिए यह रहमतवाला होता है। सभी बरी हो जाते हैं, अगर कोई नहीं बैठा तो पूरा मुहल्ला गुनाहगार होगा। रब का अजाब मुहल्ला झेलेगा। बहुत सारी मस्जिदों में कई लोग 'एतेकाफ' पर बैठते हैं। यही नहीं दावते इस्लामी इंडिया के लोग कंकड़िया बीर मस्जिद में पूरे मेम्बर्स ही ऐतेकाफ पर बैठते है।

मुक़द्दस रमज़ान को तीन अशरों में बांटा गया है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नुम से आजादी का अशरा । दूसरा अशरा जब मुकम्मल होता है तो एतेकाफ शुरू होता है। इसलिए तीसरा अशरा शुरू होने से पहले मोमिनीन असर की नमाज के बाद मस्जिद में एतेकाफ के लिए दाखिल हो जाते हैं। तीसरा अशरा "जहन्नुम की आग से निजात" दिलाने वाला कहा जाता है। इस अशरे में की गई इबादत के बदले अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ कर उन्हें जहन्नुम की आग से निजात दे देता है। इसी अशरे की कोई एक रात शबे कद्र होती है। इसलिए लोग रात-रात भर जाग कर इबादत करते हैं। बताते हैं कि शबे कद्र में इबादत का सवाब एक हजार रातों की इबादत के बाराबर होता है। इस रात में मांगी गई दुआओं को अल्लाह कुबूल फरमाता है।

मौलाना शफीक अजमल
(प्रमुख इस्लामी विद्वान रेवड़ी तालाब वाराणसी)





रविवार, 8 मार्च 2026

18 Roza Mukammal, अज़ान की सदाओं पर हुई इफ्तार

रोज़ा इफ्तार दावत में दिखा मिल्लत का नज़ारा 

अब्बास मुर्तजा शम्सी के दौलतखाने व बनकट में रोज़ा हुआ इफ्तार





dil india live (Varanasi). कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता  अब्बास मुर्तुजा शम्सी के दालमंडी स्थित दौलतखाने पर इतवार को रोजा इफ्तार दावत का भव्य आयोजन किया गया। इस इफ्तार पार्टी में शहर अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे अपनी पूरी कमेटी के साथ जहां शामिल हुए वहीं इफ्तार दावत में शिरकत करने आए लोगों का अब्बास मुर्तजा शम्सी ने जोरदार स्वागत किया। 

आयोजन में अमन, मिल्लत और देश व कौम की तरक्की के लिए लोगों ने नमाज के बाद दुआ में हाथ उठाया। इफ्तार पार्टी में धर्म और जाति से ऊपर उठ कर सभी ने मोहब्बत का पैगाम दिया। इस इफ्तार पार्टी में शामिल होने मुनाजिर हुसैन मंजू, पूर्व पार्षद हाजी ओकास अंसारी (वर्तमान पार्षद पति). राघवेंद्र चौबे, राशिद सिद्दीकी, मो. सलीम, गणेश शंकर पाण्डेय, प्रमोद वर्मा, शकील अहमद जादूगर आदि मौजूद थे। 

उधर लोहता के बनकट में आज खानकाहे आलिया, कामीलिया, आबदानिया में मौलाना सूफी मोहम्मद ज़कीउल्लाह असदुल क़ादरी के ज़ेरे एहतमाम मुकद्दस 18 रमज़ान को रोज़ा इफ्तार दावत का आयोजन किया गया। मौलाना जकीउल्लाह असदुल कादरी की अगुवाई में हुए रोज़ा इफ्तार में मस्जिद से जैसे ही अज़ान की सदाएं बुलंद हुई तमाम रोजेदारों ने अपना 18 वां रोज़ा मुकम्मल किया। इस दौरान मौजूद तमाम लोगों ने लज़ीज़ इफ्तार का लुत्फ उठाया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता सैयद फसाहत हुसैन बाबू भी इफ्तार में शामिल हुए।

Ramadan Mubarak 18 : रमज़ान हो रहा रुख्सत, तड़प रहे हैं खुदा के नेक बंदे

...काश जिंदगी में रमज़ान की नेमत और मिल जाती



मुकद्द्स रमज़ान जैसे-जैसे रुखसत होने लगता है। रातों की इबादतें बढ़ जाती है। खुदा के नेक बंदे उन इबादतों में तड़प उठते हैं। कि काश रमज़ान कुछ दिन और होता तो इबादत का और मौका मिल जाता। पता नहीं अगले रमज़ान में इसका मौका मिले या न मिले। एक तरफ ईद की तैयारियां चल रही है। लोग बाज़ारों का रुख करते हैं मगर खुदा के नेक बंदे रब से यही दुआ करते हैं कि काश मेरे रब जिंदगी में रमज़ान की नेमत और मिल जाती तो इबादत का और मौका मिलता। दुआ करते-करते वो बेज़ार होकर रो पड़ते हैं। दिल इण्डिया लाइव की एक रिपोर्ट..।


dil India live (Varanasi)। रमज़ान जैसे-जैसे रुखसत होने लगता है। रातों की इबादतें बढ़ जाती है। खुदा के नेक बंदे उन इबादतों में तड़प उठते हैं। कि काश रमज़ान कुछ दिन और रुक जाता तो थोड़ा और इबादत का मौका मिल जाता। पता नहीं अगले रमज़ान में इबादत का मौका मिले या न मिले। हम हयात में हों न हो। एक तरफ ईद की तैयारियां चल रही है। लोग बाज़ारों का रुख कर रहे हैं। बंदा पूरे महीने कामयाबी से रोज़ा रखने के बाद अपनी कामयाबी की उनमें खुशी तलाश रहा है, वहीं कुछ ऐसे भी खुदा के नेक बंदे हैं जो इन दुनियावी मरहले से दूर होकर अपने रब से रमज़ान के आखिरी वक्त तक दुआएं मांगता है। लोगों की मगफिरत के लिए पूरी-पूरी रात जागकर इबादत करते है। इस्लामी मामलों के जानकार मौलाना अमरुलहुदा कहते हैं रमज़ान का आखिरी अशरा रोज़ेदारों के लिए खासी अहमीयत रखता है। इसमें ताक रातों में खूब इबादत मोमिनीन करते है ताकि उनकी मगफिरत तो हो ही साथ ही जो लोग दीन से भटक गये हैं, जो रोज़े और नमाज़ की अहमीयत नहीं समझ सके वो नादान भी सही राह पर आ जायें।

रोने-गिड़गिड़ाने वाला खुदा को बेहद पसंद 

छोटी मस्ज़िद औरंगाबाद के इमाम मौलाना निज़ामुद्दीन चतुर्वेदी कहते हैं कि खूब इबादत के बाद भी खुदा के नेक बंदे सिर सजदे में और हाथ इबादत में उठाये खुदा से यही दुआ करते हैं कि इस बार इबादत ज्यादा नहीं कर पाया ऐ मेरे रब जिंदगी में रमज़ान की नेमत और मिल जाये ताकि और इबादत का मौका मिले। वो बताते हैं कि दुआओं के दौरान ज़ार-ज़ार रोने और गिड़गिड़ाने वाला खुदा के नज़दीक बेहद पसंद किया जाता है। इसलिए खुदा के नेक बंदे रमज़ान की रुखसती पर दुआ के वक्त रो पड़ते हैं।

अजाब नाजिल होगा जो रोज़ा नहीं रखते 

मदरसा फारुकिया के कारी शाहबुददीन कहते हैं हममें से कई ऐसे भी बंदे हैं जो रमज़ान महीने की अहमीयत नहीं समझ पाये, रात की इबादत तो दूर दिन में ही वो चाय खाने और पान की दुकानों को आबाद किये रहते हैं। हदीस और कुरान में आया है कि ऐसे लोगों पर खुदा का अज़ाब नाज़िल होगा। हाफिज तहसीन रज़ा (ग़ालिब) कहते है कि जिन लोगों ने रब के महीने की अहमीयत नहीं समझी। जो दिन रोज़े व रात इबादत में गुज़रनी चाहिए उसे ज़ाया किया। शर्म आती है ऐसे लोगों पर जो खुद को मुसलमान तो कहते हैं मगर उनमें मोमिन की कोई पहचान नहीं नज़र आती। रमज़ान में मोमिनीन ऐसे लोगों के लिए भी दुआएं करते हैं। मौलाना अकील हुसैनी कहते हैं कि जो कुछ भी नेकिया रमज़ान में कमाया है उसे ईद में लूटा न दें, क्यों कि रमज़ान की नेकियां ही साल भर इंसान को बुरे कामों और बुराईयों से बचाती हैं। रमज़ान में कमाई नेकियों को संजो कर रखे। जैसे रमज़ान में मस्जिद आबाद थी वैसे ही पूरे साल इबादत करें।



UP K Varanasi Main Parwaaz welcome सोसाइटी ने बांटी स्पेशल रमज़ान किट

इंसानियत के प्लेटफार्म को ज़िंदा कीजिए और अपनी जिंदगी का सबूत पेश कीजिए-मौलाना हसीन अहमद हबीबी 

सदर काजी -ए-शहर द्वारा मंथली राशन किट भी किया गया तकसीम 





dil india live (Varanasi). 18 रमज़ान सन 1447 हिजरी इतवार को परवाज़ वेलफेयर सोसाइटी बनारस की तरफ से मुस्लिम इंटर कालेज लल्लापुरा गेट के बाहर ज़रूरतमंद ख्वातीन को स्पेशल इफ्तार किट तक्सीम किया गया और साथ ही साथ मंथली राशन किट और कपड़े के साथ-साथ नकाब तक़्सीम किया गया। तंजीम परवाज़ वेलफेयर सोसाइटी के अहम ज़िम्मेदार शम्सी के हाथों से तक़सीम कराया गया साथ ही साथ यह उल्लेखनीय है की 1 साल से ज़्यादा अरसा हुआ तंजीम का यह सिलसिला सदर क़ाज़ी ए शहर बनारस मौलाना हसीन अहमद हबीबी की सरपरस्ती में हर महीने पाबंदी के साथ राशन किट जरूरतमंदों तक पहुंचाई जा रही है और आज रमज़ान शरीफ के महीने में 8 मार्च को पहला स्टॉल लगा जहां से यह तमाम चीज तक्सीम की गई। दूसरा स्टाइल हमारा कैंप इंशाल्लाह औरंगाबाद में और तीसरा कैंप हमारा इंशाल्लाह बजरडीहा में लगेगा। 

कैंप में डॉक्टर अफ़ज़ल मिस्बाही, हाफ़िज़ अब्दुल क़दीर, राज़ खान  मोहम्मद आबिद साहब कारी हसीन साहब परवाज़ वेलफेयर सोसाइटी के जनरल सिक्योरिटी मौलाना क़ौसैन मोअज़्ज़म मदनी, मोहम्मद असलम उस्ताद के अलावा बहुत सारे ज़िम्मेदार हज़रात ने हिस्सा लिया।


 

मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने कहा कि बनारस के अहले खैर हज़रात से गुज़ारिश है के परवाज़ वेलफेयर सोसाइटी की तरह आप भी आला हज़रत वेलफेयर सोसाइटी, राज़ा वेलफेयर सोसाइटी, मुफ्ती आज़म वेलफेयर सोसाइटी, मुजाहिदे मिल्लत वेलफेयर सोसाइटी आदि अनेक तंज़ीम बनाये और कोशिश की जाए कि घूम घूम कर जो मांगने वालों का रास्मो रिवाज भीड़ भाड़ है इसे रोकें और यह मांगने वाला सिस्टम खत्म करें। ज़रूरतमंदों को उनके घर तक पहुंचाएं और तालीम पर ज़ोर दीजिए।

अपने माहौल के अंदर, सोसाइटी के अंदर तालीम आम कीजिए। खराब हालत को दूर कीजिए, इकरा मकतब परवाज़ वेलफेयर सोसाइटी ने चालू किया है आप भी हर-हर इलाके में इकरा मकतब जहां पर हर तरह की शिक्षा का इंतजाम हो सोसाइटी में कोई भी बंदा जाहिल ना रह जाए। यह सिलसिला सिर्फ किसी धर्म विशेष के लिए ना हो बल्कि किसी भी धर्म जात के लोग हों जो कमजोर हैं मजबूर हैं ऐसे लोगों की मदद करने के लिए इंसानियत के प्लेटफार्म को ज़िंदा कीजिए और अपनी जिंदगी का सबूत पेश कीजिए।

Ramadan ka Paigham 17: 17 रमज़ानुल मुबारक, 2 हिजरी को हुई थी 'जंगे बदर'

यौम-ए-फुरकान: हक और बातिल का पहला मुकाबला"



dil india live (Varanasi). यही वह ऐतिहासिक सरज़मीन है जिसे 'मैदान-ए-बदर' कहा जाता है। आज से लगभग 1400 साल पहले, 17 रमज़ानुल मुबारक, 2 हिजरी को इसी मैदान में इस्लाम की सबसे पहली और सबसे अज़ीम जंग लड़ी गई थी। इस जंग की कुछ खास बातें जो हर मुसलमान का ईमान ताज़ा कर देती हैं:

बेमिसाल मुकाबला: एक तरफ अल्लाह के रसूल ﷺ की कयादत में सिर्फ 313 निहत्थे सहाबा थे, और दूसरी तरफ कुरैश का 1000 का लश्कर जो हथियारों और घोड़ों से लैस था। अल्लाह की Asked: इसी मैदान में अल्लाह के नबी ﷺ ने सजदे में गिरकर दुआ मांगी थी, जिसके बाद आसमान से फरिश्तों की फौज उतारी गई और हक को बातिल पर ऐसी जीत मिली जिसने तारीख बदल दी। नतीजा: इस जंग ने साबित कर दिया कि जीत तादाद से नहीं, बल्कि ईमान की ताकत और अल्लाह की मदद से मिलती है। आज भी इस मैदान की खामोशी उस अज़ीम फतह की गवाही देती है। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हमें बदर के शहीदों और सहाबा-ए-किराम के नक्श-ए-कदम पर चलने वाला बनाए और हमारे ईमान को वैसी ही मजबूती अता फरमाए। आमीन, सुममा आमीन। (सोशल मीडिया से)