इमाम चौक पर बैठी ताजिया, ज़ियारत को उमड़े अकीदतमंद
देर रात निकला दूल्हे का जुलूस
dil India live (Varanasi). 9 वीं मोहर्रम को मुस्लिम बहुल इलाके 'या हुसैन या हुसैन' की सदाओं से गूंज उठें। शहीदाने कर्बला की याद में इमाम चौकों पर जहां ताजिया मलीदे और शर्बत की फातेहा के बाद बैठा दी गई वहीं शहर भर में विभिन्न मस्जिदों में हुए जलसे में जिक्रे इमाम हुसैन की शहादत को शिद्दत से याद किया गया। वहीं दूल्हे का विश्व प्रसिद्ध जुलूस शिवाला से निकल कर आग के अंगारों पर दौड़ता हुआ आगे बढ़ा तो वहीं दूसरी ओर शहर भर में गश्ती अलम का जुलूस निकला। इस मौके पर इमाम चौकों और इमामबाड़ों में ताज़िए की जियारत को देर रात तक हुजुम उमड़ा हुआ था।
आग पर से दौड़े इमाम हुसैन के दीवाने
हज़रत कासिम की याद में नौवीं मोहर्रम की मध्यरात्रि विश्व प्रसिद्ध (प्राचीन) दूल्हे का जुलूस इमामबाड़ा हज़रत कासिम नाल से सदर परवेज कादिर खां कि अगुवाई में निकाला गया। इस दौरान सवारी पढ़ने के बाद जुलूस को दूल्हा कमेटी ने आवाम के हवाले किया जो अपने कदीमी रास्तों में लगी आग पर से होकर आगे बढ़ता रहा। जुलूस उठने से पूर्व ही अकीतदमंदों का जनसैलाब शिवाला से लेकर तमाम अलाव के पास उमड़ा हुआ था।
लोगों का हुजूम या हुसैन, या हुसैन...की सदाएं बुलंद करते हुए आग के अंगारों पर दौड़ते हुए हज़रत इमाम हुसैन, हज़रत कासिम समेत कर्बला में शहीद हुए 72 हुसैनियों को सलामी पेश करते हुए इमाम चौकों पर बैठायी गई तकरीबन 60 ताजियों को सलामी देने व 72 अलाव से होकर जुमे की सुबह वापस लौटेगा। जुलूस शहर के छह थाना क्षेत्रों से गुजरता है। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी।
इससे पहले दूल्हा कमेटी ने एक ओहदेदारान को दूल्हा बनाया जिस पर सवारी पढ़ी गई। डंडे में लगी घोड़े की नाल लिये दूल्हे को पकड़ने की लोगों में होड़ मची हुई थी। पीछे पीछे अकीदतमंदों का जनसैलाब जुलूस में शामिल था। जुलूस विभिन्न मुहल्लों में इमाम चौकों पर बैठे ताजिये को सलामी देने शिवाला कि गलियों में लगी आग से होकर अस्सी, दुर्गाकुंड होते हुए समाचार लिखे जाने तक अहातारोहिला, गौरीगंज की ओर रवाना हो गया था। दूल्हे का जुलूस भेलूपुर, रेवड़ी तालाब, बाजार सदानंद, रामापुरा, गौदोलिया, नयी सड़क लल्लापुरा, फातमान, पितरकुंडा, दालमंडी, मदनपुरा, सोनारपुरा व हरिश्चंद्र घाट होकर वापस शिवाला के इमामबाड़ा दूल्हा हज़रत कासिम नाल पहुंच कर सम्पन्न होगा।
जुलूस के साथ विभिन्न थानों की पुलिस के अलावा रिजर्व पुलिस, पीएसी के जवान तैनात थे। कमेटी के अध्यक्ष परवेज कादिर खां ने बताया कि जुलूस सुबह पहुंचेगा और पुन: शिवाला स्थित इमामबाड़ा दूल्हा कासिम नाल से शाम में उठेगा जो शिवाला घाट पर पहुंच कर ठंडा होगा।
निकला गश्ती अलम का जुलूस
दूल्हे का जुलूस निकलने के बाद गश्ती अलम का जुलूस विभिन्न शिया इमामबाडों से निकाला गया। जुलूस गश्त करते हुए एक जगह से दूसरे जगह तक आता जाता दिखाई दिया। इस दौरान लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। खासकर अर्दली बाज़ार, लल्लापुरा, पितरकुंडा, नयी सड़क, दालमंडी, चौहट्टा, पठानी टोला, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, लोहता, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा आदि में भारी भीड़ देखी गई।
इमाम चौक पर बैठाईं गई ताजिया
कारीगरी के बेहतरीन नमूनों और कलात्मक डिजाइनों से सजायी गई छोटी बड़ी ताजिया अंतिम रूप देने के बाद शाम को बैठा दी गई। इन ताजियों को देखने के लिए आज शाम से भीड़ देर रात तक जमी रही। खासकर लल्लापुरा स्थित रांगे का ताजिया, बाकराबाद के बुर्राक की ताजिया, बजरडीहा स्थित शीशे का ताजिया, उल्फत बीबी के हाते की ज़री की ताजिया़, कोयला बाजार स्थित नगीने का ताजिया, फूलों की ताजिया, दालमंडी स्थित पीतल की ताजिया, गौरीगंज की शीशम की ताजिया, चपरखट की ताजिया, शिवाला की कुम्हार की ताजिया, दोषीपुरा की शाबान की ताजिया, बजरडीहा की कागज की ताजिया के अलावा सैकड़ों मन्नती ताजिया आज गुरुवार की शाम इमाम चौक पर बैठा दी गई । इन ताजियों की जियारत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था।
दस तारीख के रोज़े की फजीलत
इस दौरान दो दिन का मोमीनीन रोज़ा भी रखते हैं। कुछ लोग 9 वीं मोहर्रम और 10 वीं मोहर्रम को तो कुछ लोग 10 वीं, 11 वीं मोहर्रम को रोज़ा रहते हैं। मौलाना अजहरुल कादरी कहते हैं मोहर्रम की दस तारीख के रोज़े की बहुत फजिलत है। मौलाना कहते हैं कि कर्बला के मैदान में शहादत देकर इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाया है। अब तमाम दुनिया के इंसानों को चाहिए कि इमाम हुसैन के पैगाम को बचाएं। उनके नाना के दीन की हिफाजत करें। बुराई से बचें और नेकी व हमदर्दी के रास्ते पर चलें।











































