शनिवार, 7 मार्च 2026

Muqaddas Ramadan: जी हां हम हैं नन्हें रोजेदार

​वाराणसी के हुदा राफी व हम्द रफी ने रखा रोजा,पेश की मिसाल



​dil india live (Varanasi). रमज़ान की रहमतों और बरकतों का क्या कहना, अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर। यह वो मुक़द्दस महीना है जिसमें रब्बुल इज्ज़त बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि छोटे छोटे मासूम बच्चों को भी रोज़ा रखने की तौफीक अता फरमाता है। रब की रज़ा के लिए घर वालों से जिद करके वाराणसी के पठानी टोला की रहने वाली 9 वर्षीय नन्ही हुदा रफ़ी और उसका भाई हम्द राफी ने भी रोजा रखकर मिसाल पेश किया है। इसके चलते इन मासूम बच्चों के वालिदैन (अपने माता-पिता) का सिर भी फख्र से ऊंचा हो गया है।

 घर वालों का कहना है कि दोनों बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज और मेहनती हैं। उनके इस सफर में उनके माता-पिता और उस्तादों का अहम योगदान रहा, जिनके सही मार्गदर्शन और लगन ने इस कठिन कार्य को मुमकिन कर दिखाया। दोनों की इस उपलब्धि की खबर जैसे ही पठानी टोला और आसपास के इलाकों में फैली, उन्हें बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि नन्ही हुदा व हम्द राफी अन्य बच्चों के लिए एक मिसाल हैं। "बेटियां हर मैदान में आगे बढ़ रही हैं, और हुद ने भी यह साबित कर दिया कि अगर इरादे नेक हों और मेहनत सच्ची, तो उम्र कोई बाधा नहीं बनती।" ऐसा ही होनहार हम्द राफी भी है। वाराणसी के सेंट मैरीज कांवेंट स्कूल में तालीम ले रहे दोनों बच्चों ने यह दिखा दिया है कि अगर इरादें नेक हों तो मंजिल आसान हो जाती है।


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