हरितालिका तीज नारी शक्ति, अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक-अनुपमा राय
dil india live
Varanasi (वाराणसी)। नव्या भूमिहार क्लब काशी महिला संगठन द्वारा हरितालिका तीज का भव्य कार्यक्रम बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम ककरमत्ता स्थित होटल ली लोटस ग्रैंड में आयोजित किया गया, जिसमें 150 से अधिक महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान शिव-पार्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। सभागार को तीज की पारंपरिक सजावट से सजाया गया था।
इस अवसर पर संगठन की संस्थापक अनुपमा राय ने कहा कि हरितालिका तीज नारी शक्ति, अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। महिलाओं को अपने व्यस्त जीवन में से कुछ समय अपने लिए निकालकर ऐसे सशक्त मंच पर आना चाहिए और सामाजिक रूप से सक्रिय होना चाहिए।
कार्यक्रम का कुशल संचालन वैशाली, रीना राय, परी राय, स्वामी रश्मि, ऋतु राय और अर्पिता राय ने संयुक्त रूप से किया। समारोह में पधारे सभी अतिथियों का भव्य स्वागत प्रीति राय, मधुलिका राय, नीतू सिंह और अंजलि तिवारी सौम्या राय द्वारा किया गया।
इनकी रही खास मौजूदगी इस अवसर पर अर्चना सिंह, समिता सिंह, अनीता राय, मंजू सिंह, माया राय, प्राची राय, वंदना राय, प्रीति सिंह, सीमा सिंह, प्रियंका राय, वर्षा राय, मीना राय, अर्चना राय, रूपम सिंह, अनीता सहित संगठन की 150 महिलाएं उपस्थित रहीं।
हिंदी विभाग की छात्राएं 'पुनर्नवा' का स्वयं करती हैं प्रकाशन
dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी (VKM kamacha Varanasi) में हिन्दी विभाग की पत्रिका 'पुनर्नवा' के द्वितीय संस्करण का अनावरण प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव, प्रबंधक उमा भट्टाचार्या, पिलग्रिम्स के प्रकाशक रामानंद तिवारी एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.आशा यादव द्वारा किया गया। पत्रिका के संदर्भ में विभागाध्यक्ष प्रो.आशा यादव ने बताया कि यह पत्रिका विभाग की छात्राओं द्वारा निकाली जाती है जिसमें हिंदी विभाग की सभी छात्राओं के सृजनात्मक लेखन को प्रकाश में लाने का प्रयास रहता है। इसके साथ ही उनके भीतर प्रकाशन कौशल का निर्माण भी इस पत्रिका का ध्येय है। 'पुनर्नवा' के इस द्वितीय संस्करण में कविता, कहानी, नाटक, समीक्षात्मक लेख, संस्मरण एवं साक्षात्कार इत्यादि विधाओं की रचनाएं प्रकाशित हैं। इसके संपादक मंडल में मांडवी सिन्हा, सृष्टि कुमारी, रिद्धिमा जायसवाल, वंदना गुप्ता एवं मोनिका का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अनावरण समारोह में जुटीं हस्तियां
इस आयोजन में पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी भाषा एवं साहित्य शोध अध्ययनपीठ के अध्यक्ष अरूण कुमार द्विवेदी, उपाध्यक्ष, प्रो. सविता भारद्वाज एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. मीनू पाठक के साथ ही काशी कला कस्तूरी की अध्यक्ष- डाॅ. शबनम खातून, डॉ. जया शाही (वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट) उपस्थित थीं तथा वरिष्ठ कलाप्रेमी एवं विद्वानों में डाॅ. सरिता लखोटिया, डाॅ. कुसुम मिश्रा (पूर्व प्राचार्या, वसन्त कन्या महाविद्यालय), डाॅ. बीना सिंह, डाॅ. स्वरवन्दना शर्मा,गृह विज्ञान विभाग से प्रो. संगीता देवड़िया, प्रो. गरिमा उपाध्याय, प्रो. अंशु शुक्ला, संगीत गायन विभाग से प्रो. सीमा वर्मा, डाॅ. पूनम वर्मा, सौम्यकान्ति मुखर्जी, मनोविज्ञान विभाग से डॉ. शशिप्रभा ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की तो हिन्दी विभाग से प्रो. सपना भूषण,डाॅ. शुभांगी श्रीवास्तव, डाॅ0. प्रीति विश्वकर्मा, राजलक्ष्मी के साथ ही हिन्दी विभाग की सभी विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज की।
झूमें श्रोता: डा. जया शाही ने किया भोजपुरी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति
dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में 31.08.2026 को हिन्दी विभाग के पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी भाषा एवं साहित्य शोध अध्ययनपीठ और काशी कला कस्तूरी वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में पं. हरिराम द्विवेदी के गीतों पर एकाग्र गीतांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वसन्त महिला महाविद्यालय, राजघाट से मुख्य अतिथि कलाकार डाॅ. जया शाही द्वारा पं. हरिराम द्विवेदी के भोजपुरी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति की गयी।
कजरी ने किया रस माधुर्य का संचार
जया शाही के मधुर स्वरों में विदाई गीत, झूला गीत, सोहर एवं कजरी ने वातावरण में रस माधुर्य का संचार कर दिया। इस दौरान मौजूद श्रोता झूम उठें। आयोजन में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने पं. हरिराम द्विवेदी के वैविध्यपूर्ण सृजनात्मकता को याद करते हुए उनको नमन किया। महाविद्यालय की प्रबंधक उमा भट्टाचार्या द्वारा सभी के लिए शुभ मंगल कामना संदेश प्रेषित किया गया। कार्यक्रम में औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं अध्ययनपीठ की महासचिव प्रो. आशा यादव ने पण्डित जी के रचना संसार के सौन्दर्य को व्याख्यायित किया। उन्होंने कहा कि पं. हरिराम द्विवेदी का व्यक्तिगत करूणा, प्रेम इत्यादि भाव उनकी रचनाओं में समष्टिगत होकर आयी है। यही समष्टि भाव उनके रचनात्मक व्यक्तित्व को अमर बना देती है।
आयोजन में इनकी रही खास मौजूदगी
इस आयोजन में पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी भाषा एवं साहित्य शोध अध्ययनपीठ के अध्यक्ष अरूण कुमार द्विवेदी, उपाध्यक्ष, प्रो. सविता भारद्वाज एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. मीनू पाठक, काशी कला कस्तूरी की अध्यक्ष डाॅ. शबनम खातून के अलावा डाॅ. सरिता लखोटिया, डाॅ. कुसुम मिश्रा (पूर्व प्राचार्या, वसन्त कन्या महाविद्यालय), डाॅ. बीना सिंह, डाॅ. स्वरवन्दना शर्मा, पिलग्रिम्स के पूर्व प्रकाशक रामानन्द तिवारी, गृह विज्ञान विभाग से प्रो. संगीता देवड़िया, प्रो. गरिमा उपाध्याय, प्रो. अंशु शुक्ला, संगीत गायन विभाग से प्रो. सीमा वर्मा, डाॅ. पूनम वर्मा, सौम्यकान्ति मुखर्जी, मनोविज्ञान विभाग से डॉ. शशिप्रभा, हिन्दी विभाग से प्रो. सपना भूषण, डाॅ. शुभांगी, डाॅ. प्रीति, राजलक्ष्मी उपस्थित रहीं। तबले पर अमित, हारमोनियम पर हर्षित ने संगत की तो संचालन राजलक्ष्मी ने किया।
ये है पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह की यौमे पैदाइश ईद मिलाद-उन-नबी का जश्न
सरफराज अहमद/ मोहम्मद रिजवान
dil india live (Varanasi). देश दुनिया भर में आज फिर ईद है। ये रमज़ान के रोज़े रखने की खुशी में मनाई जाने वाली ईद नहीं बल्कि ये ईद उस शख्सियत की दुनिया में आमद की खुशी में है जिसने हमें इस्लाम का सिस्टम दिया, जिसने हमें रोज़ा रखना, नमाज़ पढ़ना ही नहीं जिंदगी जीने से लेकर दुनिया से रुखसत होने तक का सलीका बताया। ये ईद-मिलादुन्नबी का जश्न मनाया जा रहा है। इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) के जन्मदिन की खुशी की ईद है, इसे हम ईद मिलादुनन्बी या ईद-ए-मिलाद कहते है।
दरअसल रबीउल अव्वल की 12 वीं तारीख को ही हजरत मोहम्मद (स.) की यौमे पैदाइश (जन्म) हुई थी इसीलिए मुस्लिम इस दिन को जश्न के रूप में मनाते हैं। इस खास मौके पर रात भर मस्जिदों मुहल्लों में इबादत होती हैं और जलसा (इस्लामिक सभा) का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजरत मोहम्मद (स.) की शान में नातिया कलाम व नज़्म अकीदतमंद पेश करते हैं। कई जगहों पर जुलुसे मोहम्मदी निकाले जाते है। इस दिन मस्जिदों व घरों में कुरान को खास तौर पर पढ़ा जाता है और गरीबों में जरूरत की चीजें खैरात व सदका की जाती हैं।
पैगंबर मोहम्मद (स.) की पैदाइश
पैगंबर मोहम्मद (स.) का जन्म अरब के शहर मक्का में 571 ईस्वी में 12 रबीउल अव्वल को सुबह सादिक के वक्त हुआ था। नबी की पैदाइश की सुबह अरब में हर तरफ नूर की बारिश हो रही थी। इस्लामी किताबों में आया है जैसी सुबह उस दिन थी वैसी ना तो कभी सुबह हुई न ही फिज़ा में कभी ऐसी ताजगी देखी गई।
पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) के जन्म से पहले ही उनके वालिद का इंतकाल (निधन) हो चुका था। जब वह 6 वर्ष के थे तो उनकी वालिदा जनाबे आमीना का भी इंतकाल हो गया। मां के इंतकाल के बाद पैगंबर मोहम्मद (स.) अपने चाचा अबू तालिब और दादा अबू मुतालिब के साथ रहने लगे। इनके वालिद का नाम अब्दुल्लाह और मां का नाम बीबी आमिना था। अल्लाह ने सबसे पहले पैगंबर हजरत मोहम्मद को ही पवित्र कुरान अता की। इसके बाद ही पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) ने पवित्र कुरान का पैगाम दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया।
नबी ने क ऐसा इस्लाम का सिस्टम बनाया कि आज पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी, समझी और याद की जाने वाली किताब कुरान मजीद है। हर मुसलमान नमाज़ में कुरान की आयतें पढ़ता है। इसलिए पूरी दुनिया में कुरान पढ़ी और याद की जाती है। संपूर्ण कुरान कंठस्थ करने वाले हाफ़िज़ कहलाते हैं जो अकेले बनारस में ही दस हजार से ज्यादा हैं, पूरे देश और दुनिया का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है।
आज उसी शख्सियत पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह (स.) की यौमे पैदाइश ईद मिलाद-उन-नबी के तौर पर मनाया जा रहा है।
सज गये मुस्लिम इलाक़े गूंज रही नात
इस्लाम धर्म के आखिरी पैगम्बर, हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.) की यौमे पैदाइश की खुशी में मंगलवार की शाम मुसालिम इलाके रौशनी और सजावट से इतराते नज़र आये। इस दौरान सारा जहां नबी की मोहब्बत और अकीदत लुटाता नज़र आया। हर तरफ नूर की बारिश और डायसो से नबी की शान में कलाम पेश करते शायरों का जज्बा और जुनून देखते ही बन रहा था। यह नज़ारा था अर्दली बाज़ार मुख्य रोड का। यहां देर रात तक शायरों ने जहां कलाम पेश किया वही उलेमा की तकरीर से भी अकीदतमंद फैज़याब हुए। मध्यरात्रि तक शायरों के कलाम फिजा में खुशबू बिखेरते नजर आए। नबी की शान में एक से एक उम्दा कलाम गूंज रहा था।
उधर मरकजी यौमुन्नबी कमेटी की ओर से ईद मिलादुन्नबी पर, आज किसकी आमद से हर तरफ उजाला है, आखिरी पैयंबर है और नूर वाला है... व, आमीना का लाल देखो जगमग जगमग करता है...। जैसे कलाम पेश करते हुए मंगलवार की रात जुलूस निकाला गया। जुलूस बेनियाबाग के पूर्वी छोर हड़हा मैदान से निकला। इसके बाद सराय हाड़हा, छत्तातले, नारियल बाजार, दालमंडी, नई सड़क, मस्जिद खुदा बख्श, कुरैशबाग मस्जिद, उस्ताद बिसमिल्लाह खान मार्ग होकर भीखा शाह गेट पर पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस में शकील अहमद बबलू, महमूद खां, रेयाज अहमद, इमरान अहमद, दिलशाद अहमद आदि व्यवस्था संभाले हुए थे।
जगमगा उठा मुस्लिम इलाका
Eid miladunnabi 2026 के जश्न के दौरान मुस्लिम इलाके रौशनी से नहां उठे। अर्दली बाजार, पक्की बाजार, मकबूल आलम रोड, नदेसर, लल्लापुरा, हबीबपुरा, नई सड़क, दालमंडी, सराय हड़हा, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, शक्कर तालाब, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीली कोठी, बड़ी बाजार आदि इलाकों में खूबसूरत विद्युतीय सजावट देखने को मिली। हर तरफ बरसात और बारिश के बावजूद खूबसूरत सजावट की गई थी।
बैठक में हुआ तय, सौ वाहन को ही पास, स्टाल लगाकर बांटे तबर्रुक न बजाएं डीजे
dil india live (Varanasi). ACP Bhelupur गौरव कुमार की अध्यक्षता में 1501 वां जश्ने ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर निकलने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी सकुशल संपन्न कराने के लिए जुलूस के आयोजक और विभिन्न मुहल्लों के प्रतिष्ठित लोगों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने कहा कि जुलूस पैग़म्बरे इस्लाम का है इसकी खूबसूरती और पाकीज़गी बनाएं रखें कोई ऐसा काम न करें जिससे माहौल खराब हो। तय रुप से अमन और मिल्लत के साथ हर साल की तरह जुलूस निकालें।
इस मौके पर उन्होंने साफ किया कि जुलूस के आयोजक सदर काजी मौलाना हसीन अहमद हबीबी हैं जिन्हें 100 वाहनों का पास जारी करने का डीसीपी काशी जोन ने अख्तियार दिया है। वो वाहनों को पास जारी कर रहे हैं बिना पास के जुलूस में कोई भी वाहन शामिल नहीं होगा अगर कोई होता है या माहौल खराब करने की कोशिश करता है तो उसके लिए वो खुद जिम्मेदार होगा।
एसीपी ने यह भी कहा कि खाने पीने का सामान स्टाल लगाकर ही बांटे कोई वाहनों से नहीं बांटा जाएगा। डीजे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा लाउड स्पीकर का ही प्रयोग करें जिले के बाहर के वाहन जुलूस में शामिल न किए जाएं। इस दौरान एसीपी गौरव कुमार ने आयोजक मौलाना हसीन अहमद हबीबी से पूछा कि जुलूस में आगे कौन रहेगा? मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने कहा कि जिसे भी आगे आना हो वह आ सकता है मगर सुबह 6.30 बजे मेरा जुलूस उठेगा उससे पहले उसे आना होगा हम सबसे पीछे भी रहने को तैयार हैं मगर जुलूस उठने के बाद किसी को जुलूस ओवर टेक करने नहीं दिया जाएगा वो जुलूस के पीछे ही रहेगा। हमारे पांच सौ वालेंटियर जुलूस में अपने ड्रेस में होंगे वो किसी को भी न ओवर टेक करने न माहौल खराब करने देंगे। इस मौके तय हुआ कि जुलूसे मोहम्मदी में सौ गाड़ी ही शामिल होंगी वो भी जिसके पास आयोजक द्वारा जारी पास होगा।
बैठक में जोन के सभी थाना प्रभारी, सभी चौकी प्रभारी और संभ्रांत लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कल निकलेगा जुलूसे मोहम्मदी
हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह (से.) की पैदाइश के मुबारक मौके पर शहर में अज़ीमुश्शान जुलूसे मोहम्मदी का आयोजन किया गया है। यह जुलूस 12 रबीउल-अव्वल, 26 अगस्त 2026, बुधवार, सुबह 06:30 बजे नगीना वाली मस्जिद के पास अज़हरी मैदान, रेवड़ी तालाब से उठेगा। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से गुजरता हुआ बेनिया बाग (फुटबॉल ग्राउंड) के मैदान में पहुंच कर उलमा-ए-किराम के पाकीज़ा बयानात और दुआओं पर इख़्तेताम पज़ीर होगा। वहीं शहर काजी मौलाना जमील अहमद रज़वी की क़यादत वाला जुलूस रेवड़ी तालाब मैदान में पहुंच कर समाप्त होगा।
बेनियाबाग में होगी इनकी तकरीर
इस जश्न में खुसूसी तौर पर तशरीफ़ ला रहे हैं - खलीफा-ए-शहज़ादा-ए-गौसुल आज़म, खतीबे यूरोप व एशिया हज़रत अल्लामा सैयद कौसर रब्बानी साहब किबला (मुम्बई) और शहज़ादा-ए-आला हज़रत हज़रत अल्लामा मुफ्ती मोहम्मद इमरान रज़ा खां कादरी बरेलवी (बरेली शरीफ)। सदारत मुफ्ती अब्दुल हादी खां हबीबी और मौलाना हसीन अहमद हबीबी की तकरीर होगी।
इस साल की खास बातें
इस जश्न में खुसूसी तौर पर तशरीफ़ ला रहे हैं - खलीफा-ए-शहज़ादा-ए-गौसुल आज़म, खतीबे यूरोप व एशिया हज़रत अल्लामा सैयद कौसर रब्बानी साहब किबला (मुम्बई) और शहज़ादा-ए-आला हज़रत हज़रत अल्लामा मुफ्ती मोहम्मद इमरान रज़ा खां कादरी बरेलवी (बरेली शरीफ)।
इस बात पर दें खास ध्यान
बिना पास के वाहन जुलूस में लेकर न शामिल हो
जुलूस में D.J. का इस्तेमाल सख्त मना है। सिर्फ लाउड स्पीकर का इस्तेमाल करें।
तबर्रूक या खाने पीने का सामान स्टाल लगाकर बांटे
गाड़ियों से खाने-पीने का सामान न बांटे
जुलूस में शामिल गाडियां एक दूसरे को ओवरटेक न करें
जुलूस की पाकीज़गी बनाएं रखें और दुरुद व नबी की शान में नातिया कलाम पढ़ें।
गाड़ियों के पास के लिए आयोजक से संपर्क करें।
अर्दली बाज़ार में अंजुमन फैजाने नूरी की सजावट और तैयारियां जोरों पर ।
रोशनी से जगमगाएंगी मस्जिदें और घर, सज गया सजावटी सामानों का बाजार
dil india live (Varanasi). ईद मिलाद-उन-नबी के जश्न को अब गिनती के दिन रह गये हैं, पूर्वांचल भर में सजावट का काम शुरू हो गया है। वाराणसी, जौनपुर आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, चंदौली, मिर्ज़ापुर, भदोही, गोरखपुर, श्रावस्ती, सोनभद्र, देवरिया आदि जिले में सजावट का काम शुरू हो गया है। रोशनी से मुस्लिम इलाकों की मस्जिदें नबी की पैदाइश की पूर्व संध्या 11 रबीउल अव्वल को जगमगा उठेंगी। नूर नबी बुक डिपो के रेयाज अहमद नूर बताते हैं कि पूर्वांचल भर में मुम्बई वाया बनारस से ही सजावटी सामान सप्लाई होता है।
आकर्षित कर रहे स्टाइलिश झंडे, झालर व बैज
सजावटी सामानों का बाजार वाराणसी में सज गया है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में तैयारियां तेज हो गई हैं। अर्दली बाज़ार, पक्की बाजार, नई सड़क, दालमंडी, बड़ी बाजार, पीली कोठी, लोहता, मदनपुरा, पड़ाव और रामनगर समेत विभिन्न इलाकों में सजावट और धार्मिक सामग्री की दुकानें सज गई हैं। बाजारों में स्टाइलिश झंडे, झालर, बैज और अन्य सजावटी सामान लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
ईद मिलाद-उन-नबी को लेकर मस्जिदों में भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मस्जिदों को विद्युत झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जा रहा है। पर्व के अवसर पर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में भी आकर्षक विद्युत सजावट की जाएगी जिससे पूरा इलाका रोशनी से जगमगाता नजर आएगा।
ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर दालमंडी क्षेत्र में देर रात तक जुलूस के भ्रमण की तैयारियां भी की जा रही हैं। पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह है और बाजारों में खरीदारी का सिलसिला शुरू हो गया है। मुश्ताक अहमद ने बताया कि खास बात यह है कि इस बार झंडे, बैज, बिल्ले और सजावट के अन्य सामानों के दामों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। दुकानदारों के मुताबिक, ग्राहकों की सुविधा को देखते हुए सामान सामान्य कीमतों पर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। पर्व को लेकर बाजारों में धीरे-धीरे रौनक बढ़ने लगी है। हालांकि दालमंडी चौड़ीकरण के चलते हुए ध्वस्तीकरण से इंतजामिया अंजुमनों के सामने तमाम तरह की चुनौतियां हैं। आसपास की गलियों में मलवा, गंदगी, सीवर जाम आदि के बीच इतना बड़ा पर्व कैसे मनाया जाए। इससे इतर सरफराज अहमद कहते हैं कि नबी का जश्न है वो खुद इंतजाम करना लेंगे।
अंजुमन हैदरी चौक के दर्द भरे नौहों पर हुआ जंजीर का मातम
थम गया ग़म का अय्याम, मनेगी ईदे जेहरा की खुशियां
dil india live (Varanasi). 22 August 2026 दिन शनिवार को दालमंडी पुरानी अदालत से स्थित शब्बीर और सफदर के इमामबाड़े से साठे का कदीमी जुलूस निकाला गया।
इसी के साथ 2 महीना 8 दिन से चले आ रहे ग़म का अय्याम मुकम्मल हो गया और अब शिया वर्ग ईदे जेहरा की खुशियों में डूबा नज़र आएगा। शब्बीर और सफदर के इमामबाड़े से अंजुमन हैदरी चौक की अगुवाई में निकाला गया यह जुलूस दालमंडी, नई सड़क, फटाक शेख सलीम, काली महाल, पितरकुंडा होता हुआ दरगाहे फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ। पढ़िए दिल इंडिया लाइव की एक रिपोर्ट और तस्वीरें व वीडियो...।
जुलूस में लियाकत अली, शराफत हुसैन नोहेख्वानी करते हुए चल रहे हैं। जुलूस में अलम, ताबूत, दुलदुल और ऊंट पर हजरत इमाम हुसैन की बेटी जनाबे सकीना का कुर्ता, इमाम हुसैन के बेटे अली असगर का झूला, अनेक शहीदों का समान प्रतीक के तौर पर दर्शाया गया था। जुलूस नई सड़क पहुंचा तो वहां जंजीर का मातम हुआ। क्या छोटे क्या बड़े, क्या बूढ़े, सब जंजीर का मातम करते हुए इमाम हुसैन से अपनी अकीदत बयां कर रहे थे।
रास्ते में कई स्थानों पर उलेमा की तकरीर हुई। इस जुलूस में मौलाना इरशाद अब्बास नकवी, मौलाना नदीम असगर ने कर्बला के मसायब बयां किए। जुलूस में या हुसैन की सदाएं बुलंद हो रही थी है और या हुसैन अलविदा कहते हुए लोग चल रहे थे।
जुलूस में इनकी रही खास मौजूदगी
प्रमुख रूप से असकरी रज़ा सईद, नायाब रज़ा, शाहिद, काजिम रज़ा, नायाब हुसैन,सैयद फिरोज़ हुसैन, हैदर मेहंदी, मुर्तुजा शम्सी, नदीम हुसैन, कमाल रजा, यूशा अब्बास, हसन मेहंदी, अफरोज अख्तर, शब्बीर हुसैन, शकील अहमद जादूगर आदि मौजूद थे।
शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय के सहयोग से लगा रक्तदान शिविर
मुख्य सतर्कता अधिकारी अंकुर चंद्रा सहित 41 लोगों ने किया रक्तदान
F. Farouqi / Ajit Singh rajput
dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के केंद्रीय चिकित्सालय द्वारा 5 अगस्त बुधवार को शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय, वाराणसी के सहयोग से केंद्रीय चिकित्सालय सभागार (सेमिनार हॉल) में एक विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। प्रातः 08:30 बजे से अपराह्न 03:00 बजे तक आयोजित इस शिविर में बरेका के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उनके पारिवारिक सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर में कुल 41 स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने रक्तदान कर मानव सेवा का अनुकरणीय संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बरेका के प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर मनीष कुमार द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रधान वित्त सलाहकार मुक्तेश मित्तल तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी अंकुर चंद्रा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
शिविर का प्रथम रक्तदान कर्मचारी परिषद के सदस्य अमित कुमार ने किया। इसके पश्चात मुख्य सतर्कता अधिकारी अंकुर चंद्रा, उप मुख्य अभिकल्प इंजीनियर, यांत्रिक-II, ऋतुराज एवं उप मुख्य अभिकल्प इंजीनियर, इंजन, पंकज सक्सेना सहित अनेक अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने रक्तदान कर दूसरों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया।
इस अभियान की विशेष उपलब्धि यह रही कि टेक्निकल ट्रेनिंग सेंटर के प्राचार्य सुभाष चंद्र यादव एवं इंस्ट्रक्टर राजीव कुमार वर्मा के विशेष सहयोग से एक्ट अप्रेंटिस के लगभग 10 प्रशिक्षुओं ने भी स्वैच्छिक रक्तदान किया। रक्तदान शिविर के दौरान उपस्थित लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व, नियमित रक्तदान से होने वाले स्वास्थ्य लाभ तथा आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने के विषय में भी जागरूक किया गया।
इस अवसर पर प्रमुख मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने सभी रक्तदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्तदान मानवता की सर्वोच्च सेवाओं में से एक है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान करने का आह्वान किया। शिविर के सफल संचालन में वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार मौर्य तथा नर्सिंग स्टाफ की कमला श्रीनिवासन, प्रतिभा कुमारी एवं उनकी टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक प्रभारी जितेंद्र पटेल एवं उनकी टीम ने रक्त संग्रहण की संपूर्ण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
रक्तदान अभियान के दौरान बरेका कर्मचारी परिषद के सदस्य अमित कुमार, मनीष कुमार सिंह, श्रीकांत यादव, संतोष कुमार यादव एवं धर्मेंद्र कुमार सिंह पूरे समय उपस्थित रहकर रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन करते रहे।
शिविर में कई प्रेरणादायी उदाहरण भी देखने को मिले। केंद्रीय चिकित्सालय में कार्यरत नंदलाल सिंह यादव ने अपना तीसरा रक्तदान किया, जबकि भंडार विभाग के सुधीर कुमार ने 33वाँ रक्तदान कर सभी के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की। वहीं स्टोर डिपो के मुकेश कुमार सिंह ने कर्मचारियों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने में सक्रिय योगदान दिया।
अंत में जन संपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने शिव प्रसाद गुप्त मंडलीय चिकित्सालय, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों तथा रक्तदाताओं के प्रति सफल आयोजन में उनके अमूल्य सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कहा कि ऐसे जनहितकारी अभियान समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है
भारतीय लोककलाओं का संरक्षण समय की आवश्यकता-उमा भट्टाचार्या
dil india live (Varanasi). काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संबद्ध एवं NAAC मान्यता प्राप्त वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ 'IQAC' के तत्वावधान में संगीत (गायन) विभाग एवं संगीत (वादन) विभाग द्वारा संगीत संवर्धन हेतु समर्पित संस्था ‘सप्तक’ के सहयोग से “कजरी महोत्सव” का गरिमामय आयोजन महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मां वसंत, डॉ एनी बेसेंट के समक्ष पुष्पार्चन के साथ हुआ। संगीत गायन विभाग की छात्राओं ने विभागाध्यक्ष प्रो. सीमा वर्मा के निर्देशन में महाविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया। प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारतीय लोकसंगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान का आधार है। कजरी जैसी लोकविधाएँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोकजीवन की संवेदनाओं, प्रकृति प्रेम, सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में भारतीय सांस्कृतिक परम्पराओं के प्रति सम्मान एवं संवेदनशीलता विकसित करने के लिए निरंतर ऐसे आयोजनों होते रहे है। इसी क्रम में कजरी महोत्सव का आयोजन नये सत्र के साथ वर्षा-ऋतु के आगमन का आवश्यक पर्व है।
महाविद्यालय की प्रबंधक उमा भट्टाचार्या ने अपने संदेश में आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय लोककलाओं का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें तथा लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
कार्यक्रम की सूत्रधार, संगीत गायन विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. सीमा वर्मा ने कजरी को पूर्वांचल की सांस्कृतिक चेतना और लोकजीवन की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि लोकसंगीत हमारी परम्पराओं, सामाजिक मूल्यों तथा सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत स्वर है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय लोकसंस्कृति से जोड़ने तथा लोककलाओं के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
कार्यक्रम में प्रख्यात शास्त्रीय एवं लोकगायिका विदुषी सुचरिता गुप्ता और उनकी संस्था ‘सप्तक’ ने मुख्य प्रस्तुति दी। उन्होंने सावन ऋतु की भावभूमि पर आधारित पारंपरिक कजरियों, ढुलमुनिया कजरी, शास्त्रीय कजरी, झूला इत्यादि की मनोहारी प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुमधुर गायकी, भावपूर्ण अभिव्यक्ति तथा शास्त्रीयता और लोकधुनों के सुंदर समन्वय ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। प्रत्येक प्रस्तुति पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
संगीत (गायन) विभाग की छात्राओं ने भी विविध कजरी गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वाद्य-संगीत की आकर्षक संगत ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने लोकसंगीत की समृद्ध परम्परा, बनारस की सांस्कृतिक विरासत तथा भारतीय संगीत की लोकधारा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
नृत्य प्रस्तुतियों में, संस्कृत विभाग की कुमारी प्रतिष्ठा तथा इतिहास विभाग कुमारी आली प्रकाश ने क्रमशः कालिदास के महाकाव्य ‘मेघदूतम्’ तथा पण्डित बिरजू महाराज की संगीत रचना पर प्रभावशाली नृत्य प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन IQAC की ओर से प्रभावी ढंग से किया गया तथा अंत में सभी अतिथियों, कलाकारों, सहयोगी संस्था ‘सप्तक’, प्राध्यापकों, छात्राओं एवं उपस्थित श्रोताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस अवसर पर संगीत गायन एवं वादन विभाग के साथ महाविद्यालय के सभी शिक्षक/शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही। पूरे आयोजन में उत्साह, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
इमाम हसन, इमाम हुसैन समेत कर्बला के शहीदों को किया गया याद
गांधीजी ने देश को आजाद कराने के लिए इमाम हुसैन का ही रास्ता चुना-नैय्यर जलालपुरी
मजलिस, जुलूस व फातेहा का हुआ शहर भर में आयोजन
Mohd Rizwan
dil india live (Varanasi). देश भर की तरह वाराणसी की विभिन्न अंजुमनों ने इमाम हसन इमाम हुसैन समेत कर्बला के शहीदों का चेहल्लुम मनाया। अंजुमन इमामिया के संयोजन में अर्दली बाज़ार के मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े से चेहल्लुम का जुलूस निकला। जुलूस में दुलदुल, अलम, अली असगर का झूला, ताबूत व अमारी शामिल थी। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ, पुनः उसी इमामबाड़े में सम्पन्न हुआ।
सारी दुनिया के लिए मिसाल है इमाम हुसैन
अंजुमन इमामिया की ओर से अर्दली बाज़ार से निकले चेहलुम के जुलूस में मशहूर जाकिर डॉक्टर अब्बास रज़ा नैय्यर जलालपुरी (लखनऊ) ने तकरीर करते हुए कहा कि इमाम हुसैन केवल एक इंसान नहीं बल्कि एक विचारधारा है। उनसे मोहब्बत के लिए हिन्दू या मुसलमान होना ज़रूरी नहीं बल्कि इंसान होना जरूरी है। नैय्यर जलालपुरी ने कहा कि इमाम हुसैन जैसे महापुरुषों को धर्म की बेड़ियों में नहीं बांधा जा सकता। गांधीजी ने देश को आजाद कराने के लिए इमाम हुसैन का ही रास्ता चुना था इस बात का उल्लेख उन्होंने स्वयं विभिन्न जगहों पर किया है।
अंजुमन हुसैनी, अंजुमन अंसारे हुसैनी, अंजुमन पैगामे हुसैनी, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन इमामिया आदि ने नौहाख्वानी व मातम किया। रास्ते में जगह जगह सबील लगाकर तबर्रुक का वितरण किया जा रहा था। जुलूस के साथ साथ जहां इमाम हुसैन का परचम चल रहा था तो वही हिंदुस्तान का परचम तिरंगा भी लहरा था। इस मौके पर अंत में मोमिनो का शुक्रिया अंजुमन इमामिया के जनरल सेक्रेटरी ज़फ़र अब्बास रिजवी ने किया।
उधर हजरत इमाम हुसैन की याद में 400 साल से ज्यादा कदीमी काली तुरबत का अलम उठाया गया। चेहल्लुम का जुलूस इमामबाड़ा कच्चीसराय दालमंडी से मुतवल्ली सैयद इकबाल हुसैन, लाडले हसन की देखरेख में इमामबाड़े से नौहाखवानी व मातम करते हुए उठाया गया। अंजुमन जावादिया की अगुवाई में जुलूस दालमंडी, नई सड़क, फटाक शेख सलीम, काली महाल, पितरकुंडा होते हुए दरगाहे फातमान जाकर सम्पन्न हुआ। अंजुमन के नौहाखां अफाक हैदर, साजिद हुसैन, कविश बनारसी का लिखा नौहा गूंजी है कर्बला में सदा मैं हुसैन हूं, नाना मेरे रसूले खुदा मैं हुसैन हूं... पेश किया तो तमाम लोगों ने मातम का नज़राना पेश किया। ऐसे ही कई नौहे फिज़ा में बुलंद हो रहे थे। दालमंडी में खंदक रास्तों से होकर जुलूस निकाला गया।
जुलूस में मुख्य रूप से जरगम हैदर, शकील हुसैन जैदी, हैदर मौलाई, शाहीन हुसैन, शारिक हुसैन, शरीफ जीशान, बादशाह अली, सकलैन हैदर, मसकन हैदर, रेहान हुसैन, शाह आलम, इमरान हुसैन आदि मौजूद थे। जुलूस का संचालन शकील अहमद जादूगर ने किया।
उधर वक़्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली व मेहंदी बेगम गोविंदपूरा छत्तातले से ताजिया व अलम का चेहलुम का कदीमी जुलूस अपनी परंपराओं के अनुसार मुतवल्ली सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के ज़ेरे एहतमाम उठा।जुलूस उठने के पूर्व मौलाना ने मजलिस पढ़ते हुए कर्बला में इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत का जिक्र किया I जुलूस उठने पर सवारी पढी गई - "जब गोरे गरीबा से वतन में हरम आए" । जुलूस नया चौक, गुदड़ी बाजार होते हुए दालमंडी स्थित हकीम काजिम के इमामबाड़ा पहुंचा जहां से दुलदुल शामिल हुआ और अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाखवानी व मातम किया।
जुलूस दालमंडी, खजूर वाली मस्जिद, नई सड़क, शेख सलीम फाटक, तुलसी कुआं, काली महल, पितरकुंडा होते हुए लल्लापुरा स्थित फ़ातमान पहुंच कर समाप्त हुआ। ऐसे ही गौरीगंज,शिवाला, बजरडीहा, चौहट्टा लाल खां, दोषीपुरा, रामनगर आदि इलाकों में भी फातेहा, मजलिसे हुई और इमाम हुसैन का चेहल्लुम मनाया गया। समाचार लिखे जाने तक शिया इमामबाड़ों और घरों से दर्द भरे नौहों की सदाएं बुलंद हो रही थी।