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रविवार, 27 जुलाई 2025

National: Hazrat Imam Hussain का चेहल्लूम 15 अगस्त को

पहले तिरंगा लहराएंगे फिर हुसैन का उठाएंगे परचम

सफर का चांद दिखाई दिया, शहीदाने कर्बला की याद में मजलिसे हुई तेज़

Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live). 30 मोहर्रम को देश भर में हिजरी साल के दूसरे महीने सफर का चांद देखा गया। ये वो महीना है जिसकी 20 तारीख को इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का चेहलूम सारी दुनिया में पूरी अकीदत के साथ मनाया जाता है। इसे अरबईन के नाम से भी जाना जाता है। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि इस महीने में कई अहम तारीखें हैं। शहर ए बनारस में 16 सफर यानी 11 तारीख से ही जुलूसों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इसी महीने की 10 तारीख को बीबी सकीना की शहादत का ग़म मनाया जाएगा। 16 और 17 को आठवें इमाम अली रज़ा के शहादत का ग़म मनाया जाएगा। 28 सफर को हजरत मोहम्मद (से.) और इमाम हसन की शहादत का ग़म मनाया जाएगा। शहर में 7 दिनों तक लगातार विभिन्न इलाकों में अलम, ताबूत, ताज़िए के जुलूस निकाले जाएंगे। मुख्य कार्यक्रम 15 अगस्त शुक्रवार यानी 20 सफर को मनाया जाएगा। फरमान हैदर ने बताया कि इमाम हुसैन का चालीसवां मनाने के लिए सारी दुनिया से करोड़ों लोग कर्बला पहुंचते हैं। इसमें भी लाखों लोग नजफ़ से कर्बला की 100 किमी की दूरी पैदल तय करते हैं इसे मशी के नाम से जाना जाता है। फरमान हैदर ने कहा कि चालीसवां 15 अगस्त को है। इस मौके पर पहले तिरंगा फहराया जाएगा और उसके बाद जुलूस निकलेगा। 


इस दौरान शहर में दर्जनों जुलूस निकाले जाएंगे। हुसैनी परचम के साथ लोग अपने देश का तिरंगा भी लहराएंगे। तिरंगा देश भक्ति और आजादी का प्रतीक है। इमाम हुसैन ने भी जुल्म के खिलाफ कुर्बानी पेश करके सारी इंसानियत को आजादी से रूबरू कराया। उन्होंने इस सिलसिले से शासन प्रशासन से अपील की है के रास्तों की साफ सफाई, बिजली पानी तथा सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान देने का कष्ट किया जाए। ग़म ए हुसैन के सिलसिले से इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का बीसवां शहर भर में मजलिस मातम और ताबूत उठाकर मनाया गया। कई जगह रात भर नोहा मातम भी हुआ।

मंगलवार, 22 जुलाई 2025

International: विश्व प्रसिद्ध सूफी संत Hazrat Makhdoom Ashraf के उर्स में अकीदतमंदों का हुजूम

सूफियाना रंग में किछौछा शरीफ़, दरगाह में मिल्लत की दिखी तस्वीर

Mohd Rizwan 

Ambedkar Nagar (dil India live). हजरत मखदूम अशरफ सिमनानी के उर्स पर सूफियाना रंग में किछौछा शरीफ़ दरगाह जहां नज़र आ रही है वहीं दूसरी ओर उर्स में सभी मज़हब और संप्रदाय के लोगों की हाजिरी से मिल्लत की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है। यहां सभी हज़रत के आस्ताने पर अपनी अकीदत लुटाते दिखाई दे रहे हैं।

उर्स पर किछौछा दरगाह परिसर सूफियाना तराने में रंगा हुआ है। मलंगों की पेशकश और लाखों अकीदतमंदों की आंखों में रूहानी चमक इस मौके को और खास बना रही है। मलंग गेट से लेकर आस्ताना तक की गलियों में सूफी रंग बिखर रहे हैं। दरगाह परिसर रोशनी और रुहानियत से जगमगाने लगा है। देश-विदेश से पहुंचे हजारों जायरीन की मौजूदगी में हर तरफ या मखदूम की सदाएं गूंज रही हैं। सज्जादानशीन व ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मोइनुद्दीन अशरफ (मोइन मियां) समेत दरगाह से जुड़े लोगों की मौजूदगी उर्स को खास बना रही है। मलंगों और फोखराओं के काफिले के साथ रुहानी माहौल बन रहा है। सूफियाना तराने व करतब पेश कर समां बांध दिया। दरगाह पर चादरपोशी की रस्म अदा कर मुल्क की सलामती, एकता और अमन-चैन की दुआ मांगी जा रही है। इस बीच दुनिया भर से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। बड़ी तादात में लोग रात रात भर दरगाह के बाहर रुहानी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

हजरत मखदूम अशरफ का 639वां उर्स

किछौछा में सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ रहमतुल्लाह अलैह का 639 वां वार्षिक उर्स पिछले दिनों सज्जादानशीन सैयद मोहिउद्दीन अशरफ के परचम कुशाई के साथ शुरू हुआ था। ढोल नगाड़ों की धुनों के बीच दरगाह के सज्जादानशीन सैयद मोहिउद्दीन अशरफ अशरफीउल जिलानी ने अपने खानवादए अशरफिया के लोगों के साथ ऐतिहासिक मलंग गेट के पास झंडारोहण कर सालाना उर्स का आगाज किया। सज्जादानशीन सै. मोहिउद्दीन अशरफ, सै. फैजान अहमद चांद, एआईसीसी सदस्य मेराजुद्दीन किछौछवी, बदीउद्दीन अशरफ, सै. मजहरुद्दीन अशरफ, सूफीए मिल्लत सै. आसिफ अशरफ, अल्हाज सै. अकिल अशरफ समेत अन्य लोगों का फूलों का सेहरा पहना कर गर्मजोशी से इस्तकबाल किया गया।

बुधवार, 26 फ़रवरी 2025

Hazrat जंजीरा शाह व सिक्कड़ शाह का 3 दिनी Urs

विद्युती रौशनी से जगमग हुई दरगाह, तेलावत, फातेहा संग उर्स शुरू 

Varanasi (dil India live). हज़रत जंजीरा शाह व हज़रत सिक्कड़  शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिनी 153 वां सालाना उर्स पूरी अकीदत के साथ बाबा के हबीबपुरा आस्ताने पर कुरानख्वानी व फातेहा संग मंगलवार को शुरू हो गया। इस दौरान जश्ने ईद मिलादुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का सालाना जलसा भी होगा। जिसमें नामचीन अंजुमने नातिया कलाम पेश करेंगी। इसमें अंजुमन फिरदौसे अदब (चाहमहमा), अंजुमन रजाए मुस्तफा (कर्णघण्टा), अंजुमन मुहब्बाने अहलेबैत (सराय हड़हा), अंजुमन अनवारे मुस्तफा (छत्तातले), अंजुमन अनवारे रहमत (कपड़ा मण्डी), अंजुमन  पैगामे अहलेबैत (लल्लापुरा), अंजुमन  दावते इस्लाम (खजुरी), अंजुमन गुलामाने मदीना (खजुरी) व अन्जुमन मोहिब्बाने इस्लाम (नई पोखरी) आदि मुख्य हैं। जो अपने नूरानी कलाम से लोगों को फैजयाब करेंगी। नाज़ खां ने बताया कि आयोजन में सपा नेता दिलशाद अहमद उर्फ दिल्लू, राशिद सिदद्दीकी (बनारस व्यापार मण्डल), मो. नाज खान मुजददीदी, मो. खालिद मुजददीदी (राजू खान) तसलीम अंसारी, अब्दुल मतीन, अनवर अली मुजददीदी आदि उर्स के दौरान व्यवस्था संभाले रहेंगे। उर्स के अंतिम दिन महफिले समां (कव्वाली) 27 फरवरी जुमेरात को बाद नमाजे इशा होगी। तीन दिन के उर्स में दीन, दुनिया और आखिरी के लिए दुआओं के साथ ही मुल्क में अमन और देश की तरक्की के लिए सदाएं गूंजेगी।

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2025

Hazrat Ali Akbar की शान में सजी महफ़िल, पढ़े गए क़सीदे

शायरों के उम्दा कलाम से बंधे रहें अकीदतमंद 

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). कर्बला के शहीद-ए-आजम हज़रत इमाम हुसैन के बड़े बेटे हज़रत अली अकबर की यौमे विलादत पर वक़्फ़ इमामबाड़ा बीरज्जी साहिबा, नईसड़क में महफ़िल का आयोजन हुआ। इमामबाड़े के मुतवल्ली सैय्यद एजाज़ हुसैन जाफ़री (गुड्डू बाक़री) के संयोजन में आयोजित इस महफ़िल का आग़ाज़ ताहिर जवाद ने पाक कुरान की तिलावत से किया। महफ़िल की निज़ामत कर रहे हसन वास्ती ने नाते पाक का नज़राना पेश किया। इसके बाद शहर भर के मशहूर-ओ मारूफ़-शायरों ने अपने अपने कलाम पेश किये जिनमें मौलाना ज़हीन हैदर, दिलकश ग़ाज़ीपुरी, मौलाना इक़बाल ईमानी, मौलाना गुलज़ार मौलाई, मौलाना वसीम असग़र, अतश बनारसी, अंसार बनारसी, वफ़ा बुतुरबी, इकराम भीकपूरी, शराफत बनारसी, शाहआलम बनारसी, आशूर बनारसी, ज़ैदी बनारसी, नज़ाकत चंदौलवी समेत 32 शोअरा ने बारगाहे मौला में नज़राना ए अक़ीदत पेश किया। 


महफ़िल की अध्यक्षता मौलाना सैय्यद मुहम्मद अक़ील हुसैनी ने की एवं मौलाना सैय्यद ज़मीरुल हसन रिज़वी ने महफ़िल को ख़िताब किया व दुआख़्वानी के साथ आगामी एक साल के लिए महफ़िल को मुल्तवी किया। महफ़िल में शायरों ने अपने कलाम से ऐसा समां बांधा की देर रात तक महफ़िल में सुभान अल्लाह की गूंज रही। ज्ञात हो कि शाबान माह की 11 तारीख़ को इमाम हुसैन के बड़े बेटे हज़रत अली अकबर जिनको हम शबीहे पैग़म्बर भी कहा जाता है उनकी यौमे वेलादत पर इस महफ़िल का आयोजन होता चला आया है।