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गुरुवार, 3 सितंबर 2026

URS Mubarak Hazrat Baba Bahadur शहीद रहमतुल्लाह अलैह में बरसात के बावजूद जुटे अकीदतमंद

कोई हम को दबा नहीं सकता, हम बहादुर शहीद वाले हैं...

हज़रत बहादुर शहीद के उर्स पर उमड़ा जनसैलाब
Hazrat Baba Bahadur Shahid News Varanasi September 2026


dil India live (Varanasi). मुश्किलों में सदा संभाले हैं शहरे काशी में ये निराले हैं, कोई हमको दबा नहीं सकता, हम बहादुर शहीद वाले हैं...।

यह कलाम जब मशहूर शायर अहमद आज़मी ने वाराणसी में छावनी स्थित सद्भावना पार्क में तशरीफ़ फ़रमा हजरत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह के उर्स में पेश किया तो मजमा मचल उठा, लोगों ने नारे तकबीर अल्लाह हो अकबर.. की सदाएं बुलंद कर उठें। 

कौमी एकता की मिसाल, हज़रत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स मुबारक देर रात गुस्ल शरीफ के साथ शुरू हुआ। गुस्ल से पहले बाबा के सद्भावना पार्क में जश्ने ईद मिलाद-उन-नबी का जलसा हुआ जिसमें सभी मज़हब के लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। बरसात के बावजूद लोगों के हौसले बुलंद थे। इस दौरान अहमद आज़मी का एक और कलाम लोगों की जुबान पर राज करता दिखा। 





क्या बयां करे कोई मर्तबा मदीने का, अर्श पे भी होता है तज़किरा मदीने का...। इसे लोग गुनगुनाते नज़र आएं। इस दौरान निज़ाम बनारसी ने भी कई उम्दा कलाम पेश किया।

उर्स में 1 सितंबर 2026, बरोज़ मंगलवार जश्न ईद मिलादुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और रात 2:30 बजे कुल शरीफ व सुबह लंगर का प्रोग्राम हुआ। गद्दीनशीन बड़े सगीरउल्लाह खान व समीउल्लाह खान की अगुवाई में जलसे में मौलाना शम्सुद्दीन साहब रज़वी और मौलाना अब्दुल कय्यूम आदि ने नूरानी तकरीर किया। नकीबुल हिंद कारी वसीम अकरम की निजामत और हफीज़ अहमद आजमी, निज़ाम बनारसी जैसे शायरों ने अपने कलाम से हज़रत बहादुर शहीद को खिराजे अकीदत पेश किया।

गुस्ल का पानी जायरीन में हुआ तकसीम 

जलसे के साथ ही हज़रत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह का मध्यरात्रि गुस्ल हुआ। इस मौके पर गुस्ल का पानी सभी जायरीन में तकसीम किया गया। इसे लेने के लिए लोग दूर दराज़ से बाबा के दर पर जुटे हुए थे। माना जाता है कि गुस्ल के पानी से तमाम लोगों को अचूक फायदा होता है। इस मौके पर उलेमा ने औलिया कराम की ज़िंदगी और उनकी रहनुमाई की चर्चा की। उलेमा ने कहा कि नबी और सहाबा के मिशन को औलिया-ए-कराम ने आगे बढ़ाया। हज़रत बहादुर शहीद के रास्ते पर मौजूद लोगों से चलने की वकालत की।

उर्स के दूसरे रोज़ बुधवार की शाम चादर गागर का जुलूस बाबू भाई के दौलतखाने से निकला जो मगरिब की नमाज़ के बाद बाबा के दर पर पहुंचा, जहां बाबा की चादरपोशी की गई व देर रात महफिले समां का आयोजन हुआ।

अकीदत का मरकज़ हज़रत बहादुर शहीद का दर 

 हज़रत बहादुर शहीद का दर लोगों की बिगड़ी बनाने के लिए मशहूर है। जो परेशानहाल हैं या फिर भूत प्रेत ने जिन्हें घेर रखा है, या जिसे औलाद नहीं हो रही है ऐसे लोग बाबा के आस्ताने पर दस्तक देते हैं और यहां से सुकुन पाकर, अपनी झोली भर कर वापस लौटते हैं। गद्दीनशीं मो. सग़ीरुल्लाह खां दावा करते हैं कि यह आस्ताना मिल्लत का मरकज़ है। यहां सभी मज़हब के लोग बिना किसी भेदभाव के हाजिरी लगाने उमड़ते हैं। वो दिखाते हैं कि ये देखिये भूतों से छुटकारा पाने के लिए झूमती औरतें, पुरुष और बुजुर्ग दिन भर यहां आते हैं और बाबा के फैज़ से ठीक हो कर यहां से जाते हैं। यहां आने वालों का भरोसा बाबा में है जो उन्हें इस आधुनिक युग में भी जिसमें साइंस भूत-प्रेत जैसी बातों को नहीं मानता, फिर भी तमाम लोग हज़ारों की संख्या में यहां से फ़ैज़ उठाने आते हैं। 

पूर्वांचल के साथ ही बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मुंबई तक से लोग यहां अपनी परेशानी दूर करने पहुंचते है। बाबा के उर्स में मेला लगा हुआ था। आम दिनों में भी यहां काफी भीड़ होती है। हर जुमेरात व नवचंदी जुमेरात को भूत, प्रेत से छुटकारे के लिए जायरीन आते हैं। लोगों का दावा है कि शैतान (भूत) कितना भी शक्तिशाली हो बाबा के गुस्ल का पानी पड़ते ही वो पनाह मांगता है। इस दर पर सभी का मज़हब एक है वो है मानवता।

गुरुवार, 13 अगस्त 2026

Minority news Varanasi Uttar Pradesh 13 August 2026: Hazrat खरबूजा शहीद के Urs में उमड़ा अकीदतमंदों का मजमा

मन्नतें व मुराद मांगने बाबा के दर पर जुटें मन्नती

Minority news Varanasi Uttar Pradesh August 2026: Hazrat खरबूजा शहीद का Urs


Mohd Rizwan 

dil india live (Varanasi). हज़रत खरबूजा शहीद बाबा रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स जुमेरात को अकीदत के साथ मनाया गया। उर्स जायरीन का मजमा मन्नतें व मुराद मांगने उमड़ा हुआ था। इसमें हिंदू मुस्लिम दोनों मजहब के लोग अकीदत लुटाते दिखाई दिए। कोई बाबा के दर पर मन्नतें मांग रहा था तो कोई मत्था टेकता दिखाई दिया।

Minority news Varanasi Uttar Pradesh August 2026 Hazrat खरबूजा शहीद का उर्स



इससे पहले बाबा के नदेसर सिथत बाबा के दर पर गुस्ल हुआ। गुस्ल के दौरान बाबा के दर पर जायरीन का हुजूम दिखा। गुस्ल के बाद बाबा हज़रत खरबूजा शहीद के दर पर फातेहा पढ़ने व मन्नतें और मुराद मांगने लोगों का आने जाने का सिलसिला शुरू हो गया। 

चादरपोशी करने उमड़ा हुजूम 
मगरिब की नमाज़ के बाद बाबा के दर पर जलालुद्दीन, मोहम्मद सलीम व मोहम्मद सलमान आदि की मौजूदगी में चादरपोशी की गई। चादर गागर का जुलूस सदर बाजार में बाबू भाई के दौलतखाने से उठकर बाबा के दर पहुंचा। उर्स में फातेहा, कुरानख्वानी, कुल शरीफ, मिलाद व मुल्क में अमन मिल्लत और देश की तरक्की की दुआएं मांगी गई।


रविवार, 30 नवंबर 2025

URS Hazrat Rahim Shah Baba : रहीमी दरबार में उमड़े बाबा के दीवाने

हज़रत रहीम शाह बाबा के तीन दिनी उर्स पर माहौल दिखा नूरानी

 



  • Mohd Rizwan 

dil india live (Varanasi)। हज़रत रहीम शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिनी सालाना उर्स अकीदत और एहतराम के साथ बाबा के बेनिया स्थित रहीमी दरबार में दूसरे दिन भी मनाया जा रहा है। उर्स के मौके पर हज़रत रहीम शाह बाबा के दर पर अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा हुआ है। उर्स में अकीदतमंद जहां मन्नती चादरें पेश कर रहे थे वहीं जियारत करने वाले सिर झुकाकर वहां पहुंचे हुए हैं। इस मौके पर फातिहा पढ़ने दूर-दराज़ से अकीदतमंद जुटे हुए थे।



दूसरे दिन इतवार को फज्र के बाद कुरआनख्वानी, बाद नमाज असर ग़ुस्ल मजार शरीफ, बाद नमाज मगरिब सरकारी चादर पोशी हुई व मिलाद शरीफ में लोगों का हुजूम उमड़ा। बाद नमाज इशा लंगर व महफिले समा का आयोजन समाचार लिखे जाने तक जारी था।

शनिवार को हुई थी शुरुआत 

तीन दिनी उर्स की शुरुआत शनिवार को हजरत रहीम शाह बाबा के दर पर पाक कुरान की तेलावत से हुई। जोहर की नमाज के बाद महफिल-ए-समां का आयोजन किया गया। शाम को चादरपोशी और मगरिब की नमाज के बाद मीलाद शरीफ में अकीदतमंद जुटे हुए थे। उर्स के मौके पर तकरीर और लंगर का भी दौर देर रात तक चला। आने वालों का खैरमखदम सज्जादानशीन मोहम्मद सैफ रहीमी कर रहे थे। उर्स को देखते हुए दरगाह को सजाया गया था, तथा आसपास भी विद्युतीय सजावट की गई थी। 

रविवार, 27 जुलाई 2025

National: Hazrat Imam Hussain का चेहल्लूम 15 अगस्त को

पहले तिरंगा लहराएंगे फिर हुसैन का उठाएंगे परचम

सफर का चांद दिखाई दिया, शहीदाने कर्बला की याद में मजलिसे हुई तेज़

Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live). 30 मोहर्रम को देश भर में हिजरी साल के दूसरे महीने सफर का चांद देखा गया। ये वो महीना है जिसकी 20 तारीख को इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का चेहलूम सारी दुनिया में पूरी अकीदत के साथ मनाया जाता है। इसे अरबईन के नाम से भी जाना जाता है। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि इस महीने में कई अहम तारीखें हैं। शहर ए बनारस में 16 सफर यानी 11 तारीख से ही जुलूसों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इसी महीने की 10 तारीख को बीबी सकीना की शहादत का ग़म मनाया जाएगा। 16 और 17 को आठवें इमाम अली रज़ा के शहादत का ग़म मनाया जाएगा। 28 सफर को हजरत मोहम्मद (से.) और इमाम हसन की शहादत का ग़म मनाया जाएगा। शहर में 7 दिनों तक लगातार विभिन्न इलाकों में अलम, ताबूत, ताज़िए के जुलूस निकाले जाएंगे। मुख्य कार्यक्रम 15 अगस्त शुक्रवार यानी 20 सफर को मनाया जाएगा। फरमान हैदर ने बताया कि इमाम हुसैन का चालीसवां मनाने के लिए सारी दुनिया से करोड़ों लोग कर्बला पहुंचते हैं। इसमें भी लाखों लोग नजफ़ से कर्बला की 100 किमी की दूरी पैदल तय करते हैं इसे मशी के नाम से जाना जाता है। फरमान हैदर ने कहा कि चालीसवां 15 अगस्त को है। इस मौके पर पहले तिरंगा फहराया जाएगा और उसके बाद जुलूस निकलेगा। 


इस दौरान शहर में दर्जनों जुलूस निकाले जाएंगे। हुसैनी परचम के साथ लोग अपने देश का तिरंगा भी लहराएंगे। तिरंगा देश भक्ति और आजादी का प्रतीक है। इमाम हुसैन ने भी जुल्म के खिलाफ कुर्बानी पेश करके सारी इंसानियत को आजादी से रूबरू कराया। उन्होंने इस सिलसिले से शासन प्रशासन से अपील की है के रास्तों की साफ सफाई, बिजली पानी तथा सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान देने का कष्ट किया जाए। ग़म ए हुसैन के सिलसिले से इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला का बीसवां शहर भर में मजलिस मातम और ताबूत उठाकर मनाया गया। कई जगह रात भर नोहा मातम भी हुआ।

मंगलवार, 22 जुलाई 2025

International: विश्व प्रसिद्ध सूफी संत Hazrat Makhdoom Ashraf के उर्स में अकीदतमंदों का हुजूम

सूफियाना रंग में किछौछा शरीफ़, दरगाह में मिल्लत की दिखी तस्वीर

Mohd Rizwan 

Ambedkar Nagar (dil India live). हजरत मखदूम अशरफ सिमनानी के उर्स पर सूफियाना रंग में किछौछा शरीफ़ दरगाह जहां नज़र आ रही है वहीं दूसरी ओर उर्स में सभी मज़हब और संप्रदाय के लोगों की हाजिरी से मिल्लत की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है। यहां सभी हज़रत के आस्ताने पर अपनी अकीदत लुटाते दिखाई दे रहे हैं।

उर्स पर किछौछा दरगाह परिसर सूफियाना तराने में रंगा हुआ है। मलंगों की पेशकश और लाखों अकीदतमंदों की आंखों में रूहानी चमक इस मौके को और खास बना रही है। मलंग गेट से लेकर आस्ताना तक की गलियों में सूफी रंग बिखर रहे हैं। दरगाह परिसर रोशनी और रुहानियत से जगमगाने लगा है। देश-विदेश से पहुंचे हजारों जायरीन की मौजूदगी में हर तरफ या मखदूम की सदाएं गूंज रही हैं। सज्जादानशीन व ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद मोइनुद्दीन अशरफ (मोइन मियां) समेत दरगाह से जुड़े लोगों की मौजूदगी उर्स को खास बना रही है। मलंगों और फोखराओं के काफिले के साथ रुहानी माहौल बन रहा है। सूफियाना तराने व करतब पेश कर समां बांध दिया। दरगाह पर चादरपोशी की रस्म अदा कर मुल्क की सलामती, एकता और अमन-चैन की दुआ मांगी जा रही है। इस बीच दुनिया भर से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। बड़ी तादात में लोग रात रात भर दरगाह के बाहर रुहानी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

हजरत मखदूम अशरफ का 639वां उर्स

किछौछा में सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ रहमतुल्लाह अलैह का 639 वां वार्षिक उर्स पिछले दिनों सज्जादानशीन सैयद मोहिउद्दीन अशरफ के परचम कुशाई के साथ शुरू हुआ था। ढोल नगाड़ों की धुनों के बीच दरगाह के सज्जादानशीन सैयद मोहिउद्दीन अशरफ अशरफीउल जिलानी ने अपने खानवादए अशरफिया के लोगों के साथ ऐतिहासिक मलंग गेट के पास झंडारोहण कर सालाना उर्स का आगाज किया। सज्जादानशीन सै. मोहिउद्दीन अशरफ, सै. फैजान अहमद चांद, एआईसीसी सदस्य मेराजुद्दीन किछौछवी, बदीउद्दीन अशरफ, सै. मजहरुद्दीन अशरफ, सूफीए मिल्लत सै. आसिफ अशरफ, अल्हाज सै. अकिल अशरफ समेत अन्य लोगों का फूलों का सेहरा पहना कर गर्मजोशी से इस्तकबाल किया गया।

बुधवार, 26 फ़रवरी 2025

Hazrat जंजीरा शाह व सिक्कड़ शाह का 3 दिनी Urs

विद्युती रौशनी से जगमग हुई दरगाह, तेलावत, फातेहा संग उर्स शुरू 

Varanasi (dil India live). हज़रत जंजीरा शाह व हज़रत सिक्कड़  शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिनी 153 वां सालाना उर्स पूरी अकीदत के साथ बाबा के हबीबपुरा आस्ताने पर कुरानख्वानी व फातेहा संग मंगलवार को शुरू हो गया। इस दौरान जश्ने ईद मिलादुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का सालाना जलसा भी होगा। जिसमें नामचीन अंजुमने नातिया कलाम पेश करेंगी। इसमें अंजुमन फिरदौसे अदब (चाहमहमा), अंजुमन रजाए मुस्तफा (कर्णघण्टा), अंजुमन मुहब्बाने अहलेबैत (सराय हड़हा), अंजुमन अनवारे मुस्तफा (छत्तातले), अंजुमन अनवारे रहमत (कपड़ा मण्डी), अंजुमन  पैगामे अहलेबैत (लल्लापुरा), अंजुमन  दावते इस्लाम (खजुरी), अंजुमन गुलामाने मदीना (खजुरी) व अन्जुमन मोहिब्बाने इस्लाम (नई पोखरी) आदि मुख्य हैं। जो अपने नूरानी कलाम से लोगों को फैजयाब करेंगी। नाज़ खां ने बताया कि आयोजन में सपा नेता दिलशाद अहमद उर्फ दिल्लू, राशिद सिदद्दीकी (बनारस व्यापार मण्डल), मो. नाज खान मुजददीदी, मो. खालिद मुजददीदी (राजू खान) तसलीम अंसारी, अब्दुल मतीन, अनवर अली मुजददीदी आदि उर्स के दौरान व्यवस्था संभाले रहेंगे। उर्स के अंतिम दिन महफिले समां (कव्वाली) 27 फरवरी जुमेरात को बाद नमाजे इशा होगी। तीन दिन के उर्स में दीन, दुनिया और आखिरी के लिए दुआओं के साथ ही मुल्क में अमन और देश की तरक्की के लिए सदाएं गूंजेगी।

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2025

Hazrat Ali Akbar की शान में सजी महफ़िल, पढ़े गए क़सीदे

शायरों के उम्दा कलाम से बंधे रहें अकीदतमंद 

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). कर्बला के शहीद-ए-आजम हज़रत इमाम हुसैन के बड़े बेटे हज़रत अली अकबर की यौमे विलादत पर वक़्फ़ इमामबाड़ा बीरज्जी साहिबा, नईसड़क में महफ़िल का आयोजन हुआ। इमामबाड़े के मुतवल्ली सैय्यद एजाज़ हुसैन जाफ़री (गुड्डू बाक़री) के संयोजन में आयोजित इस महफ़िल का आग़ाज़ ताहिर जवाद ने पाक कुरान की तिलावत से किया। महफ़िल की निज़ामत कर रहे हसन वास्ती ने नाते पाक का नज़राना पेश किया। इसके बाद शहर भर के मशहूर-ओ मारूफ़-शायरों ने अपने अपने कलाम पेश किये जिनमें मौलाना ज़हीन हैदर, दिलकश ग़ाज़ीपुरी, मौलाना इक़बाल ईमानी, मौलाना गुलज़ार मौलाई, मौलाना वसीम असग़र, अतश बनारसी, अंसार बनारसी, वफ़ा बुतुरबी, इकराम भीकपूरी, शराफत बनारसी, शाहआलम बनारसी, आशूर बनारसी, ज़ैदी बनारसी, नज़ाकत चंदौलवी समेत 32 शोअरा ने बारगाहे मौला में नज़राना ए अक़ीदत पेश किया। 


महफ़िल की अध्यक्षता मौलाना सैय्यद मुहम्मद अक़ील हुसैनी ने की एवं मौलाना सैय्यद ज़मीरुल हसन रिज़वी ने महफ़िल को ख़िताब किया व दुआख़्वानी के साथ आगामी एक साल के लिए महफ़िल को मुल्तवी किया। महफ़िल में शायरों ने अपने कलाम से ऐसा समां बांधा की देर रात तक महफ़िल में सुभान अल्लाह की गूंज रही। ज्ञात हो कि शाबान माह की 11 तारीख़ को इमाम हुसैन के बड़े बेटे हज़रत अली अकबर जिनको हम शबीहे पैग़म्बर भी कहा जाता है उनकी यौमे वेलादत पर इस महफ़िल का आयोजन होता चला आया है।