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गुरुवार, 31 जुलाई 2025

IIT Kanpur के प्रोफेसर Ajeet चतुर्वेदी BHU के बनाए गए VC

प्रोफेसर अजीत तीन साल के लिए बनाए गए कुलपति 

70 वर्ष की आयु तक बने रहेंगे इस ख्यातिलब्ध पद पर प्रोफेसर अजीज 

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी को बीएचयू का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की तरफ से गुरुवार को इस आशय का पत्र बीएचयू कुलसचिव कार्यालय को प्राप्त हुआ। प्रो.चतुर्वेदी की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के लिए या 70 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, तब तक के लिए होगी। 

चतुर्वेदी बीएचयू के 29 वें कुलपति

प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी बीएचयू के 29 वें कुलपति बने। बता दें कि प्रो. चतुर्वेदी 1994 से लेकर 1996 तक आईआईटी बीएचयू के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर रह चुके हैं। वो बीएचयू को नजदीक से जानते हैं।

 प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी ने आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 1986 से 1995 तक बी.टेक., एम.टेक. और पीएच.डी. किया। 1996 में आईआईटी बीएचयू के बाद वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर रहे।

1999 में आईआईटी कानपुर आ गए। यहां उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष, अनुसंधान एवं विकास डीन और उप निदेशक जैसे पदों को संभाला। अगस्त 2012 में उन्हें प्रोफेसर बनाया गया और मार्च 2015 से वे आईआईटी कानपुर में संजय और रचना प्रधान चेयर प्रोफेसरशिप पर रहे, इसके बाद वे 2017 में फिर आईआईटी रुड़की चले गए। प्रो.चतुर्वेदी जनवरी 2017 से अक्टूबर 2022 तक रुड़की के निदेशक रहे। इसके बाद वह फिर आईआईटी कानपुर लौट आए। उन्हें INSA टीचर्स अवार्ड, आईआईटी कानपुर का विशिष्ट शिक्षक पुरस्कार और सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी का टैन चिन तुआन फैलोशिप प्राप्त हुआ है। वे टेलीकॉम स्टैंडर्ड्स डेवलपमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया (TSDSI) के संस्थापक सदस्य भी हैं।

मंगलवार, 1 जुलाई 2025

UP : Varanasi k BHU पहुंचे संसदीय स्थायी समिति के सदस्यगण

राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह के नेतृत्व मेंबीएचयू का किया दौरा

समिति सदस्यों ने बीएचयू एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ की बैठक


Varanasi (dil India live). सोमवार को शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने मंगलवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय का अध्ययन दौरा किया। संसद सदस्य, राज्यसभा, दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में राज्यसभा और लोकसभा के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के केन्द्रीय कार्यालय में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ बैठक की। स्थायी समिति के सदस्यों में संसद सदस्य बिकास रंजन भट्टाचार्य, डॉ. भीम सिंह, राजीव राय, रेखा शर्मा, बृजमोहन अग्रवाल, अमरदेव शरददाव काले, डॉ. हेमांग जोशी, तथा शोभनाबेन महेन्द्रसिंह बरैया बैठक में उपस्थित रहे।  

बैठक में एस. के. बरनवाल, अपर सचिव, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, प्रो. संजय कुमार, कुलपति (कार्यवाहक), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, प्रो. एस. एन. संखवार, निदेशक, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू, प्रो. आशीष बाजपेयी, निदेशक, प्रबंध शास्त्र संस्थान, बीएचयू, प्रो. अमित पात्रा, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बीएचयू, विवेक कुमार, निदेशक, शिक्षुता प्रशिक्षण बोर्ड, कानपुर, प्रो. आशीष खरे, कुलसचिव, केंद्रीय विश्वविद्यालय इलाहाबाद, प्रो. लक्ष्मी कांत मिश्रा, डीन-शिक्षण, मोतीलाल नेहरू एनआईटी, इलाहाबाद, तथा उच्च शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार, के प्रतिनिधि के तौर पर काशी विद्यापीठ, वाराणसी, के कुलपति प्रो. ए. के. त्यागी भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान शिक्षण, उद्योग-अकादमिक सहयोग और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र में श्रेष्ठ पद्धतियों और प्रमुख उपलब्धियों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में आने वाली चुनौतियों (वित्तीय, मानव संसाधन, स्थान और प्रशासनिक) का अवलोकन किया गया। इस दौरान काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारीगण तथा अन्य संस्थानों के अधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


बैठक के उपरांत, समिति के सदस्यों ने 'सीडीसी भवन' का दौरा किया, जहाँ उन्हें विश्वविद्यालय में अनुसंधान व नवोन्मेष के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। इसके अतिरिक्त समिति सदस्यों ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) स्थित 'छात्र गतिविधि केंद्र' और 'प्रिसिजन इंजीनियरिंग हब (पीईएच)' का भी दौरा किया। यह दौरा शैक्षणिक और तकनीकी नवाचारों को समझने के लिए महत्वपूर्ण था।


बीएचयू मुख्यद्वार पर हुआ भव्य स्वागत 

इस दौरान समिति के सदस्यों का बीएचयू के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इसके पश्चात्, समिति सदस्य मालवीय भवन पहुँचे, जहाँ विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा पर 'माल्यार्पण' कर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का समन्वयन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त कुलसचिव एवं नोडल अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने किया।

गुरुवार, 10 अप्रैल 2025

BHU में HOMOEOPATHY OPD शुरू न होना दुखद

13 को बीएचयू में हैनिमैन जयंती, जुटेंगे होमियोपैथिक चिकित्सा जगत के दिग्गज
हीरक मुखर्जी 
गोपाल यादव 


Varanasi (dil India live). डा. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनिमैन की 270 वीं जयंती समारोह वाराणसी होमियोपैथिक डीलर्स एसोसिएशन (वाराणसी एवं चन्दौली) द्वारा 13 अप्रैल रविवार को मनाया जाएगा। यह आयोजन सुबह 10.00 बजे से शाम 6.00 बजे तक बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में समारोहपूर्वक चलेगा। वाराणसी होमियोपैथिक डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल यादव, महामंत्री विवेक जायसवाल व कोषाध्यक्ष हीरक मुखर्जी ने एक खास बातचीत में कहा कि आजादी के सात दशक बाद भी बीएचयू में होमियोपैथी ओपीडी न शुरू होना दुखद है। कहा कि इतनी अच्छी और सस्ती होमियोपैथी के साथ तब तक न्याय नहीं हो सकता जब तक इसे बीएचयू जैसी मेडिकल हब में शुरू नहीं किया जा सकता। तीनों ने बताया कि कोविड काल में भी होमियोपैथी ने अभूतपूर्व योगदान दिया जिसे सब ने सराहा।इस दौरान आयोजन में वैज्ञानिक सत्र भी होगा जिसमें एक्सपर्ट अपने उद्गार साझा करेंगे। समारोह का उद्घाटन प्रसिद्ध होमियोपैथ चिकित्सक प्रो. आर. के. भाटिया, मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री दया शंकर मिश्र दयालु , विशिष्ट अतिथि प्रो. अंजली वाजपेयी, (संकाय प्रमुख, शिक्षा संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी) होंगे तो अध्यक्षता प्रो. ओम शंकर, (हृदय रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बी.एच.यू.) के साथ ही डा. के.के. शुक्ला, उ.प्र. गौरव पुरस्कार सम्मान प्राप्त डा. अर्पिता चटर्जी, पूर्व होमियोपैथिक चिकित्साधिकारी, बी.एच.यू., वाराणसी संयोजक प्रो. प्रीतम सिंह, (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बी.एच.यू. वाराणसी) बतौर वक्ता अपने उद्गारों को लोगों से साझा करेंगे।   हीरक मुखर्जी ने बताया कि आयोजन की व्यवस्था गोपाल यादव, शशिप्रकाश वाष्र्णेय, घनश्याम गुप्ता, विवेक जायसवाल, डा. अमित कुमार व डा. सौरभ गुप्ता आदि संभाले रहेंगे।

जानिए होमियोपैथी के जनक डा. हैनीमैन को

डॉ. सैमुअल क्रिश्चियन फ़्रेडरिक हैनीमैन (1755-1843) होम्योपैथी के संस्थापक थे। वे एक एलोपैथिक चिकित्सक थे जिन्होंने बाद में होम्योपैथी की ओर रुख किया। उनके अथक प्रयोगों और मूल सोच ने होम्योपैथी को जन्म दिया।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

डॉ. सैमुअल क्रिश्चियन फ़्रेडरिक हैनीमैन का जन्म 10 अप्रैल, 1755 को जर्मनी के मीसेन शहर में हुआ था। वे एक एमडी योग्यता वाले चिकित्सक थे। उन्होंने अपनी आजीविका के लिए एलोपैथिक चिकित्सा छोड़ दी और अनुवाद का काम करने लगे।

होम्योपैथी चिकित्सा के सिद्धांत

उन्होंने 'जैसे इलाज वैसे ही' और शक्तिकरण के सिद्धांतों पर आधारित होम्योपैथी को जन्म दिया। उन्होंने न्यूनतम खुराक और एकल उपाय का सिद्धांत पूरी दुनिया को दिया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन शक्ति में वांछित बदलाव लाने के लिए, दवा की मात्रा (खुराक) की ज़रूरत न्यूनतम संभव है।

आज समूची दुनिया कर रही याद

उन्होंने 1812 से 1821 तक लीपज़िक विश्वविद्यालय में होम्योपैथी पर एक चेयर की स्थापना की। 2 जुलाई, 1843 को पेरिस में 89 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके नाम पर वाशिंगटन, डीसी में एक स्मारक भी बना है। आज डॉ. सैमुअल क्रिश्चियन फ़्रेडरिक हैनीमैन भले ही हम लोगों के बीच नहीं हैं पर समूची दुनिया उन्हें जाति, धर्म, संप्रदाय, रंग भेद से इतर उन्हें याद कर रही है और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे रही है। क्यों की आज ही के दिन वो पैदा हुए और अपने अभूतपूर्व योगदान के बाद दुनिया में छा गए।