मंगलवार, 31 मार्च 2026

VKM Varanasi Main ऐतिहासिक शोध विधियों पर सप्तदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन

इतिहास विभाग' व 'इतिवृत्त क्लब' के व्याख्यान में विषय विशेषज्ञों ने साझा किए विचार 




dil india live (Varanasi). Varanasi के कमच्छा स्थित वसन्त कन्या महाविद्यालय में 'इतिहास विभाग' और 'इतिवृत्त क्लब' के संयुक्त तत्वावधान में ऐतिहासिक शोध विधियों पर सप्तदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन समारोह सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 'हिस्टोरिका संस्थान' द्वारा प्रयोजित की गयी थी। कार्यशाला में दस विषयों पर, दस अलग अलग विषय विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। 

पहले दिन 23 मार्च का व्याख्यान डॉ. श्वेता सिंह (इतिहास विभाग) द्वारा ऐतिहासिक स्रोतों एवं उसके प्रकृति एवं वर्गीकरण पर व्याख्यान दिया गया तो दूसरे दिन 24 मार्च 2026 का व्याख्यान प्रोफेसर कल्पना आनंद (समाजशास्त्र विभाग) द्वारा 'थीसिस राइटिंग और रेफरेंसिंग' पर तथा डॉ. प्रिया सिंह (अर्थशास्त्र विभाग) ने 'क्वालिटेटिव एंड क्वांनिटेटिव मेथड पर व्याख्यान दिया। 25 मार्च का व्याख्यान डॉ सिमरन सेठ (समाजशास्त्र विभाग) द्वारा "तुलनात्मक, नृजातीय और पर्यावरणीय इतिहास' और डॉ. आरती चौधरी द्वारा (प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति पुरातत्व विभाग) नया पुरातत्व' विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। चौथे दिन 26 मार्च 2026 डॉ. विनीता (शिक्षाशास्त्र विभाग, एम, पी. जी. कॉलेज) सामाजिक विज्ञान अनुसंधान में साहित्यिक चोरी को समझनाः अवधारणाएँ, कारण और परिणाम' एवं डॉ. विपिन सोलंकी (भूगोल विभाग, शारदा विश्वविद्यालय, नोएडा) द्वारा 'जनसांख्यिकी, स्थानिक तकनीकें और संगणनात्मक' विषय पर व्याख्यान दिया गया। 28 मार्च 2026 को डॉ. शशिकेश कुमार गोंड (इतिहास विभाग) द्वारा' ऐतिहासिक स्रोतों और साक्ष्यों की व्याख्या एवं डॉ. आरती कुमारी (ए. आई. एच. सी.) द्वारा 'पुरातत्व और भौतिक संस्कृति' व्याख्यान प्रस्तुत किया। अन्तिम व्याख्यान 30 मार्च 2026 को डॉ. रामप्रकाश शर्मा (इतिहास विभाग, एस.पी. जैन महाविद्यालय, सासाराम, बिहार) ने 'इतिहासः पद्धतिगत बहसें और परिप्रेक्ष्य' दिया गया। 

राष्ट्रीय कार्यशाला के अंतर्गत ही एक विशेष व्याख्यान डॉ. अंजली चंद्रा (मैक्स हॉस्पिटल, दिल्ली) के तहत महिलाओं में हो रहे कैंसर के कारणों एवं उपचारों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसी क्रम में कार्यशाला समापन समारोह सत्र का शुभारम्भ एवं इतिवृत्त क्लब की तृतीय संस्करण पत्रिका के विमोचन के साथ शुरू किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने इस बात पर बल दिया कि आज के दौर में इस तरह की कार्यशाला का होना बच्चों में इसके प्रति जागरूकता उत्पन्न करना जरूरी अन्यथा AI से प्रभावित होकर कई बार वो गलत मार्ग अपना लेते हैं। महाविद्यालय प्रबंधिका श्रीमती उमा भट्टाचार्या ने छात्राओं तथा विभाग को बधाई देते हुए इस तरह के कार्यशालाओं एवं व्याख्यानों के आयोजन के लिए प्रोत्साहन किया। इसी क्रम में पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. स्मृति भटनागर मैम ने इतिहास लेखन में तथ्य एवं वस्तुनिष्ठता पर बल देते हुए कहा और तथ्यों का वास्तविक निरूपण करने के लिए इतिहासकार को समकालिक अधिकाधिक साक्ष्यों, पुस्तकों एवं विचारशैलियों का ध्यान रखते हुए व्याख्या करनी चाहिए। 'द हिस्टोरिको संस्थान के संस्थापक, विष्णु कांत उपाध्याय एवं बसन्त कुमार चौबे ने कहा कि इतिहास लेखन करते समय समाज के हर तबके की भूमिका को उजागर करना आवश्यक है, तभी सही इतिहास का निरूपण किया जा सकता है। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन डॉ अनुजा त्रिपाठी, अतिथियों का स्वागत डॉ. श्वेता सिंह द्वारा कार्यशाला विवरण वाचन रणनीति राय द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शशिकेश कुमार गोंड द्वारा किया गया। कार्यक्रम में समस्त शिक्षकगण एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।

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