रविवार, 15 मार्च 2026

Ramadan ka Paigham 25 : इफ्तार के वक्त मांगी गई दुआएं कभी वापस नहीं होती

...इबादत में करें और तेज़ी माहे रमज़ान जा रहा 


Varanasi (dil India live)। इबादत और रब की मोहब्बत का मुक़द्दस महीना रमजान की इबादत में मोमिनीन जुटे हुए हैं। पूरी रात तीसरी शब-ए-कद्र यानी 25 रमज़ान की रात की इबादत रोज़ा रखने वालोंने जागकर किया। दरअसल अलविदा जुमा के बाद से ही यह मान लिया जाता है कि अब रमज़ान कुछ दिन या कुछ घंटों का मेहमान है। इसलिए इबादतगाहों और घरों में कसरत से रब को राज़ी करने में तमाम लोग जुट जाते हैं। और रो रोकर दुआएं मांगी जाती है। मुश्किलकुशा हजरत अली फरमाते हैं कि जब रोज़ेदार इफ्तार के वक्त दुआ करता है तो वो ज़रुर कुबुल होती है और रोज़ा जिस्म की ज़कात है।

परवरदिगार फरमाता है कि माहे रमज़ान कितना बरकतों और रहमतो का महीना है इसका अंदाजा बंदा इसी से लगा ले कि इस महीने में हमने दुनिया की सबसे मुकद्दस किताब कुरान मजीद नाज़िल फरमाया है। यही नहीं रमज़ान का चांद होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं। यह भी रमज़ान की खासियत है कि इसमें नबी-ए-करीम (स.) के बड़े नवासे जन्नत के सरदार, शेरे खुदा मौला अली व जनाबे फातेमा के साहबज़ादे इमाम हसन की पैदाइश 15 रमज़ान सन् 3 हिजरी को मदीना मुनव्वरा में हुई थी। ऐसे ही मुकद्दस रमज़ान की 21 तारीख को ही मुश्किलकुशा हजरत मौला अली की मस्जिदें कुफा में शहादत हुई थी। हज़रत अली काबा में पैदा हुए और मस्जिद में शहीद हुए। इमाम ज़ाफर सादिक ने फरमाया कि जिन चीज़ों से रोज़ा टूटता है उसमें झूठ, गीबत, चुगलखोरी, दो मोमिन के बीच लड़ाई कराना, किसी के लिए गलत नज़र रखना, झूठी कसम खाना शामिल है। रोज़ा तकवे का सबब और अल्लाह की नज़दीकी हासिल करने का ज़रिया है। रोज़ा जहन्नुम से बचाने की ढाल है और जन्नत में दाखिले का ज़रिया है। ऐ अल्लाह तू हम सबको सही राह दिखा। परवरदिगार हम सबको रमज़ान के रोज़े रखने की तौफीक दे और रोज़े की कामयाबी पर सभी को ईद की खुशियां दे...आमीन 

         फैजानुल हक़  
(विज्ञान शिक्षक पूर्व माध्यमिक विद्यालय चौहाननपुरवा, बहराइच)

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