रविवार, 31 मई 2026

Police Commissioner ने की समीक्षा बैठक, जानिए क्या हुई चर्चा

कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़, प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने का निर्देश

जनसामान्य की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण थाना स्तर पर हो-मोहित अग्रवाल

dil india live (Varanasi). पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल द्वारा राजपत्रित अधिकारियों के साथ कैम्प कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

 उन्होंने निर्देशित किया कि थाना स्तर पर अपराध नियंत्रण, रात्रि गश्त, ऑपरेशन चक्रव्यूह, यातायात प्रबंधन एवं अन्य पुलिस दायित्वों के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित कर पुलिसिंग को परिणामोन्मुख बनाया जाए। जनसामान्य की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण थाना स्तर पर ही सुनिश्चित करने, जनता के प्रति संवेदनशील एवं शालीन व्यवहार बनाए रखने तथा महिला सुरक्षा एवं महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई करने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही अपराधों एवं संभावित घटनाओं के पूर्व आकलन, अपराधियों की सक्रिय निगरानी, प्रमुख चौराहों एवं संवेदनशील स्थलों पर 24×7 पुलिस दृश्यता तथा यूपी-112 वाहनों की रणनीतिक तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। 

बैठक में पीड़ितों से नियमित संवाद स्थापित कर विवेचना की प्रगति से अवगत कराने, चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु विशेष अभियान चलाने तथा काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं के प्रति विनम्र व्यवहार एवं सुगम दर्शन व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त हुक्का बार, मानव तस्करी, अवैध खनन, अवैध स्लॉटरिंग एवं अन्य संगठित अपराधों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। 

Mukhtar Ansari की 4 करोड़ की संपत्ति मामले में ज़फ़र को बड़ा झटका

दावा खारिज, गैंगस्टर कोर्ट ने नहीं दी राहत, संपत्ति पर राज्य सरकार का दावा रहेगा बरकरार

सरफराज अहमद 

dil india live (Barabanki). मऊ के बाहुबली विधायक रहे मुख्तार अंसारी के करीबी (गैंग के सक्रिय सदस्य बताए गए) जफर उर्फ चन्दा को न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। लगभग 4 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति को लेकर दाखिल की गई जफर की अपील को गैंगस्टर न्यायालय ने खारिज कर दिया है। अब इस संपत्ति पर राज्य सरकार का दावा बरकरार रहेगा।

प्राप्त समाचार के अनुसार थाना कोतवाली नगर, बाराबंकी में दर्ज मुकदमा संख्या 369/2021 में मुख्तार अंसारी एवं उसके गैंग के सदस्यों के विरुद्ध धारा 419, 420, 467, 468, 471 आईपीसी सहित अन्य धाराओं में मामला पंजीकृत किया गया था। पुलिस जांच में जफर उर्फ चन्दा को मुख्तार अंसारी गैंग का सक्रिय सदस्य बताया गया है। आरोप है कि वह मुख्तार अंसारी की सुरक्षा में हथियारों के साथ एम्बुलेंस पर चलता था तथा गैंग की आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहता था। इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद जफर और अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। 

पुलिस के अनुसार जांच में यह तथ्य सामने आया कि जफर उर्फ चन्दा ने पिछले 10 से 12 वर्षों के दौरान गैंग के साथ मिलकर आपराधिक गतिविधियों से अवैध धन अर्जित किया और अपने नाम पर बड़े पैमाने पर संपत्तियां खरीदीं। इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 4 करोड़ रुपये आंका गया। इसके आधार पर जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम की धारा 14 (1) के तहत कार्रवाई करते हुए उक्त संपत्ति को राज्य के पक्ष में कुर्क करने का आदेश पारित किया था।

शनिवार, 30 मई 2026

Bakhrid का तीन दिनी महा पर्व Aman और Millat के साथ सम्पन्न

रब की रज़ा के लिए तीन दिनों में लाखों जानवर हुए कुर्बान



Sarfaraz/Rizwan 

dil India live (Varanasi)। देश दुनिया में बक़रीद का तीन दिनी त्योहार अमनों मिल्लत के साथ सम्पन्न हो गया। बकरीद पर अकेले बनारस में तीन दिनों में मोमिनीन ने रब की रज़ा के लिए लाखों छोटे–बडे जानवरों की कुर्बानी दी। कुर्बानी के बाद उसका तबर्रुक लोगों ने अपने अजीजों, ग़रीबों, मिस्कीनों व उनके हकदारों को तकसीम किया। 

इससे पहले कुर्बानी का तीन दिनी पर्व बक़रीद का आगाज़ पहले दिन जुमेरात को रब की रजा के लिए मस्जिदों, ईदगाहों में नमाज़ के साथ शुरू हुआ था। केवल अपने शहर बनारस में ही लाखों लोगों ने रब की बारगाह में सिजदा किया था। नमाज के बाद से घरों में छोटे–बडे जानवरों की कुर्बानी का जो आगाज़ हुआ वो तीन दिनों तक रवायत के साथ मगरिब की नमाज़ के पहले तक चलता रहा। 

खुशियों में डूबे नज़र आएं मोमिन 

तीन दिन चलने वाली ईदुल अजहा कि खुशियों में मोमिनीन डूबे नज़र आएं। इस मौके पर दोनों वर्गों के लोगों ने दावतों का एक साथ लुत्फ उठाया। तीसरे और अंतिम दिन शाम तक लोगों ने कुर्बानी की। कुर्बानी के बाद गोश्त और सेवईयों का तबर्रुक अजीजों, ग़रीबों और मिसकीनो में तकसीम किया। घरों और आसपास के लोगों के यहां घर के छोटे-छोटे बच्चे तबर्रुक पहुंचाते नज़र आएं तो दूर दराज घरों के बड़े बाइक और कार व अन्य साधनों से तबर्रुक पहुंचाने अपने अज़ीजो और रिश्तेदारों के यहां आते जाते दिखाई दिए। इस बार भी ईदुल अजहा पूरे अमनों मिल्लत और सौहार्द के साथ संपन्न हो गया। इससे जिला जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने जहां राहत की सांस ली वहीं उलेमा ने अल्लाह रब्बुल इज्जत का शुक्रिया अदा किया की रब ने अमनों मिल्लत के साथ त्योहार सम्पन्न कराया। कल इतवार होने से लोगों को त्योहार के साथ एक छुट्टी मिल रही है इससे लोगों को आराम का मौका मिलेगा। सोमवार से सभी अपने अपने कामों में व्यस्त हो जाएंगे।

गुरुवार, 28 मई 2026

Urdu Adab k महान शायर बशीर बद्र हमारे बीच नहीं रहे

ईदुल अजहा के दिन 91 वर्ष की आयु में भोपाल में निधन

dil india live (Bhopal). उर्दू शायरी की दुनिया के महान शायर बशीर बद्र आज हमारे बीच नहीं रहे। 91 वर्ष की आयु में भोपाल में ईदुल अजहा के मुकद्दस दिन उनका निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और डिमेंशिया से जूझ रहे थे। बशीर बद्र साहब ने ग़ज़ल को सिर्फ़ अदब की महफ़िलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आम लोगों के दिलों तक पहुँचा दिया। उनकी शायरी में मोहब्बत, तन्हाई, रिश्ते, दर्द और इंसानी एहसास बेहद सादगी और गहराई से दिखाई देते हैं। 

कुछ अमर शेर जो हर दिल की आवाज़ हैं

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी

यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो

न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में

तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में

उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था। उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक विरासत रहेगी। 

श्रद्धांजलि स्वरूप कुछ पंक्तियाँ

अल्फ़ाज़ के उस फ़नकार को सलाम
जिसने दर्द को भी ख़ूबसूरती से लिखा
महफ़िलें ख़ामोश होंगी अब शायद
पर हर दिल में बशीर बद्र हमेशा रहेंगे ज़िंदा।। 

(सुमंगला सुमन) 

 


मुशायरों में, उनको कई बार सुना

आम बोलचाल की भाषा में लिखे बशीर बद्र के शेर ज़िन्दगी की गहरी सच्चाई बयान करते। कई-कई बार लोकसभा में, उनके शेर सुनाई दिये। कम लोगों को पता होगा कि बशीर बद्र ने अटल बिहारी वाजपेयी के लिए लखनऊ में भी चुनाव प्रचार किया था।

उनके शेर जो मुझे पसंद हैं: वो ये हैं... 
“दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, 
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों” 
“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, 
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में” 
“बड़े लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना, 
दरिया जहाँ समंदर से मिला, दरिया नहीं रहता” 
“कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी, 
यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता” 
"जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है, 
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा" 
“उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, 
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए”
(वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार एके लारी)

ईदगाहों व मस्जिदों में हज़रत इब्राहीम की याद हुई ताज़ा

नमाज संग शुरू हुआ कुर्बानी का तीन दिनी महा पर्व 

Eid ul azha की नमाज के बाद ईदगाहों व मस्जिदों में देश में खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे की गुरुवार को दुआए मांगी गई। नमाज को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। संवेदनशील इलाकों में पुलिस फोर्स तैनात की गई । सुरक्षा पर विशेष नजर थी, ड्रोन कैमरों से भी निगरानी हो रही थी। हर गतिविधि पर पैनी नजर पुलिस के आलाधिकारी रखें हुए थे। भारी फोर्स की मौजूदगी में अमन और मिल्लत के माहौल के बीच बकरीद की नमाज़ अदा हुई तो प्रशासन ने राहत की सांस ली। दिल इंडिया लाइव की एक खास रिपोर्ट यहां पढ़ें...



sarfaraz/Rizwan/F. Farouqi 
Varanasi (dil India live)। ईद-उल-अजहा (Eid ul azha) यानी बकरीद पर रब की बारगाह में पहले मोमीनीन ने सिजदे में सिर झुकाया, फिर ख़ुदा की राह में विभिन्न छोटे बड़े जानवरों की कुर्बानी पेश की। कुर्बानी के साथ ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बकरीद का तीन दिनी त्योहार गुरुवार को पूरी अकीदत के साथ शुरू हो गया। इस दौरान ईदगाहों और मस्जिदों के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी। पुलिस अधिकारियों ने ईदगाहों का मुआयना किया। बकरीद की नमाज सुबह पौने पौने 6 बजे से 10.30 बजे के बीच जब सकुशल संपन्न हुई तो जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। नमाज अदा करने के बाद बकरा, भेड़, दुंबा आदि जानवरों की कुर्बानी का जो दौर शुरू हुआ वो तीन दिनों तक ऐसे ही जारी रहेगा। 

काजी-ए-शहर बनारस मौलाना जमील अहमद ने ईदुल अजहा की लोगों को मुबारकबाद पेश की। इस दौरान उनसे मिलने और मुसाफा करने लोगों का हुजूम उनके दौलतखाने पर उमड़ा हुआ था। इससे पहले ईद-उल-अजहा की नमाज पूरी अकीदत के साथ अदा की गई। मस्जिद हमीदिया शक्कर तालाब में मुफ्ती-ए-बनारस अहले सुन्नत मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारूकी प्यारे मियां, मस्जिद लंगड़े हाफिज नई सड़क में मौलाना जकीउललाह असदुल कादरी, मुगलिया मस्जिद बादशाह बाग में मौलाना हाफिज हसीन अहमद हबीबी, शाही मस्जिद ज्ञानवापी में मौलाना अब्दुल आखिर नोमानी, शाही मस्जिद ढ़ाई कंगूरा में हाफिज नसीम अहमद बशीरी ने नमाज अदा करायी। 




ऐसे ही बड़ी ईदगाह विद्यापीठ में मौलाना शमीम, मस्जिद रंग ढलवां फाटक शेख़ सलीम में मौलाना जाहिद, मस्जिद उल्फत बीबी अर्दली बाजार में शैखुल हदीस मौलाना इल्यास कादरी, जामा मस्जिद कम्मू खां डिंठोरी महाल में मौलाना शमसुद्दीन, छोटी मस्जिद डिठोरी महाल में हाफिज शाहरूख तो शिया जामा मस्जिद मीर गुलाम अब्बास अर्दली बाजार में मौलाना तौसीफ़ अली व मस्जिद डिप्टी जाफ़र बख़्त, शिवाला‌ में बक़रीद की नमाज़ मौलाना मुहम्मद हुसैन ने अदा कराई। 

ऐसे ही मस्जिद जियापुरा लल्लापुरा में मो. मोइनुद्दीन अंसारी, ईदगाह हकीम सलामत अली में मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, मस्जिद टकटकपुर दरगाह में मौलाना अजहरुल कादरी, मस्जिद याकूब शहीद लंका नगवां में हाफिज मोहम्मद ताहिर, चमेली की मस्जिद कच्ची बाग़ में मौलाना रेयाज़ अहमद क़ादिरी, छंगा बाबा की मस्जिद में मौलाना लतीफ अहमद सेराजी, रहीम दमड़ी की मस्जिद मौलाना नसीर अहमद सेराजी, दाल की मस्जिद में मौलाना निहालुद्दीन सेराजी, गुलरोग़न की मस्जिद में मौलाना रिज़वान अहमद ज़ियाई व मीनार वाली मस्जिद, पीली कोठी में मौलाना मक़सूद अहमद क़ादिरी ने नमाज अदा कराकर लोगों को बकरीद की मुबारकबाद दी। मस्जिद नई बस्ती गौरीगंज में हाफिज परवेज़, जामा मस्जिद राजातालाब में मौलाना जुल्फेकार, मस्जिद हज़रत शाह मूसा शाह ककरमत्ता में हाफ़िज़ खालिद कमाल, मस्जिद ईदगाह लाटशाही में हाफिज हबीबुर्रहमान, ईदगाह पुराना पुल में मौलाना शकील ने नमाज अदा कराई।


 ऐसे ही मस्जिद रज़ा मदनपुरा, जहांगीर मस्जिद हटिया, डोमन की मस्जिद, मस्जिद बरतले, शिवाला की मस्जिद अब्दुल रहीम खां, नूरी रिजवी मस्जिद नरिया, मस्जिद बुलाकी शहीद अस्सी, मस्जिद हबीबीया, मस्जिद सम्मन खां गौरीगंज, मस्जिद गौसिया नवाबगंज, मस्जिद अस्तबल, मस्जिद कुशता बेगम शिवाला, मस्जिद पिपलानी कटरा, मस्जिद अल कुरैश, ईदगाह मस्जिद दायम खां, बिचलीं मस्जिद कचहरी समेत लोहता, बजरडीहा, रामनगर, जंसा, बड़ागांव, चोलापुर, पुराना पुल आदि में भी ईदुल अजहा की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज के बाद लोगों ने एक दूसरे से गले मिल कर ईद मुबारक कहा।

बकरीद के गोश्त का तीन हिस्सा

बकरीद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह के नाम पर छोटे बड़े जानवरों की कुरबानी देकर कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटते नज़र आए। इसमें उन्होंने एक हिस्सा खुद के खाने के लिए, दूसरा हिस्सा गरीबों के लिए और तीसरा अजीजो के लिए लिए किया। कुर्बानी के बाद गोश्त का तबर्रुक लोगों को तकसीम किया गया। इस दौरान दावतों का भी दौर चला जिसमें दोनों मज़हब के लोगों ने हिस्सा लिया। सभी ने सेवइयों का भी लुत्फ उठाया।

मस्जिदों व ईदगाहों पर दिखा मेले सा नज़ारा 

बकरीद की नमाज के दौरान मुहल्लों की जामा मस्जिदों और ईदगाहों के आसपास मेले सा नज़ारा देखने को मिला। इस दौरान नमाज के बाद बच्चे अपने अजीजों के साथ गुब्बारे, खिलौने व आइसक्रीम खरीदते दिखाई दिए। इस दौरान पूरा माहौल नूरानी नज़र आ रहा था।

बकरीद की क्या है कहानी

शैखुल हदीस मौलाना इल्यास कादरी ने कहा कि बकरीद पैगम्बर हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। एक बार खुदा ने हजरत इब्राहिम का इम्तिहान लेने के लिए ख्वाब में आदेश दिया कि हजरत इब्राहीम अपनी सबसे अजीज चीज़ की कुर्बानी दें। हज़रत इब्राहीम अपनी तमाम अज़ीज़ चीजें कुर्बान करते गये फिर भी उन्हें यही ख़्वाब आता रहा। हजरत इब्राहिम के लिए अब सबसे अजीज उनके बेटे हजरत इस्माईल थे, जिसकी कुर्बानी के लिए वे तैयार हो गए और उन्हे कुर्बानी के लिए ले गये। हज़रत इब्राहीम ने हज़रत इस्माईल को जैसे ही जेबा करने के लिए समंदर के पास लिटाया, छूरी ने हज़रत इस्माईल कि गर्दन पर चलने से इंकार कर दिया। इसके बाद कुर्बानी से पहले रब ने हजरत इस्माईल की जगह ये कहते हुए कुर्बानी के लिए दुम्बा भेज दिया कि वो हज़रत इब्राहिम का इम्तेहान ले रहे थे और इम्तेहान में वो पास हो गये। तभी से कुर्बानी का पर्व मनाया जा रहा है। 

70000 का मोबाइल मत लो 17000 से काम चलाओ

मौलाना ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं क्या जरूरत है कुर्बानी की ये पैसा बचा कर क़ौम की भलाई में लगाया जाए? मौलाना ने कहा कि इस्लाम का कानून न कभी बदला है न बदलेगा। बदलना है तो खुद को बदलों 70 हजार का मोबाइल मत लो 17 हजार के मोबाइल से काम चलाओ, जो रकम बचे उसे दीन इसलाम की राह में खर्च करो।



बुधवार, 27 मई 2026

Varanasi main Bakhrid ka Time : यहां जानिए कब किस मस्जिद में अदा की जाएगी नमाज

ईद-उल-अजहा कल, नमाज़ के बाद होगी कुर्बानी, देर रात तक होती रही तैयारियां 



varanasi (dilindialive)। देश-दुनिया में 28 मई को ईदुल अजहा यानी बकरीद का त्योहार पूरी अकीदत के साथ मनाया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां देर रात तक होती रही। देर रात तक बकरो और सेवईयो की खरीदारी bakhrid के मुक़द्दस पर्व को देखते हुए समाचार लिखे जाने तक हो रही थी। उधर बकरों की खरीद के साथ ही खोवा, सेवई, मेवा, प्याज,अदरक आदि की भी खरीदारी देर रात तक होती है, दरअसल कुर्बानी के साथ ही घरों में लज़ीज सेवईयां भी बनती है। इसकी तैयारियां ख्वातीन देर रात से ही करती हैं। 
उधर शहर में बेनियाबाग बकरा मंडी बंद होने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी, देर रात तक लोग रेवड़ी तालाब, बड़ी बाजार, सरैया, कोनिया, लल्लापुरा, बजरडीहा आदि इलाकों में जानवरों की खरीदारी फरोख्त के लिए परेशान देखें गये। 
दरअसल बकरीद के दिन को कुर्बानी और त्याग के दिन के रूप में याद किया जाता है। इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के मुताबिक, कुर्बानी का त्योहार बकरीद रमजान के दो महीने बाद आता हैं। इस्लाम धर्म में बकरीद तीन दिन होती है, आमतौर पर बक़रीद पर छोटे-बड़े जानवरों की कुर्बानी दी जाती है। इस दिन की एक खासियत यह भी है कि बकरीद पर जहां जानवर को अल्लाह की राह में कुर्बान किया जाता हैं, वहीं दूसरी ओर काबा में ज़ायरीन हज के अरकान मुकम्मल कर रहे होते हैं। जो काबा हज पर गये हैं उन्हें दोहरी खुशी नसीब होती है। एक बक़रीद की दूसरी हज की।











police Commissioner ने किया गश्त 

पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल द्वारा आगामी बकरीद के दृष्टिगत किया गया पैदल गश्त कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। उन्होंने बकरीद पर्व के दृष्टिगत गोदौलिया, चौक, दालमण्डी से लंगड़ा हाफिज़ मस्जिद तथा जैतपुरा रोड से बकरिया मंडी तक सघन पैदल गश्त कर सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया गया। पैदल गश्त के दौराननिर्देश दिया कि -

• बकरीद पर्व के दौरान किसी भी स्थिति में सार्वजनिक स्थानों एवं सड़कों पर नमाज अदा न की जाए। अधिक संख्या होने पर विभिन्न पालियों में नमाज सम्पन्न कराते हुए व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 
• कुर्बानी केवल घर के अंदर एवं बंद परिसरों में ही कराई जाए। सार्वजनिक स्थानों, खुले क्षेत्रों एवं मार्गों पर कुर्बानी पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी, उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
• सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सतत निगरानी रखी जाए। कुर्बानी से संबंधित फोटो अथवा वीडियो सामग्री साझा करने वालों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
• कुर्बानी से उत्पन्न अपशिष्ट को निर्धारित स्थल अथवा नगर निगम की गाड़ियों में ही डाला जाए। अपशिष्ट को खुले स्थानों, सड़कों अथवा मार्गों के किनारे किसी भी स्थिति में न फेंका जाए तथा अपने आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए।
• प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। ऐसे मामलों में तत्काल कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।
• ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, वीडियोग्राफी एवं सतत पुलिस निगरानी के माध्यम से प्रत्येक गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
• संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील क्षेत्रों, प्रमुख धार्मिक स्थलों तथा भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी एवं मोबाइल गश्ती दलों की प्रभावी तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।

 पुलिस आयुक्त द्वारा धर्मगुरुओं से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों की जानकारी प्राप्त की गई तथा आपसी भाईचारा, सामाजिक सौहार्द एवं शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखते हुए पर्व सम्पन्न कराने की अपील की गई।
 जनपद में लगभग 700 मस्जिदों एवं करीब 80 ईदगाहों में बकरीद की नमाज अदा की जाएगी। सभी स्थलों पर सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु पर्याप्त पुलिस बल एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
 सभी अधिकारी एवं थाना प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमणशील रहकर नियमित गश्त करें तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु पुलिस एवं प्रशासन के मध्य प्रभावी समन्वय बनाए रखें।





bakhrid की कहानी है दिलचस्प

बकरीद पैगम्बर हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। दरअसल खुदा ने हजरत इब्राहिम का इम्तिहान लेने के लिए ख्वाब में हुक्म दिया कि इब्राहिम अपनी सबसे अजीज चीज़ रब के लिए कुर्बानी दें। हजरत इब्राहिम के लिए सबसे अजीज उनके साहबजादे हजरत इस्माइल थे, जिसकी कुर्बानी के लिए वे रब की रज़ा के लिए तैयार हो गए। उन्हे कुर्बानी के लिए ले भी गये मगर ऐन कुर्बानी से पहले रब ने हजरत इस्माईल की जगह ये कहते हुए जेबाह के लिए दुम्बा भेज दिया कि वो हज़रत इब्राहिम का इम्तेहान ले रहे थे और इम्तेहान में वो पास हो गये, तभी से कुर्बानी का पर्व मनाया जाता है।

इस साल 28 मई को पूरे देश में बकरीद का पर्व मनाया जाएगा। ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज का टाइम टेबल जारी हो चुका है। सुबह पौने 6 बजे से लेकर 10.00 बजे तक ईदुल अजहा की नमाज अदा की जाएगी। दुनिया भर के मुसलमान ईद की तरह कुर्बानी पर भी गरीबों का खास ख्याल रखते हैं। कुर्बानी के सामान का तीन हिस्सा बांटकर एक हिस्सा गरीबों को दिया जाता है। दो हिस्सों में एक खुद के लिए और दूसरा हिस्सा दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए रखा जाता है। मुसलमानों का विश्वास है कि पैगंबर हजरत इब्राहिम की कठिन परीक्षा ली गई। अल्लाह ने उनको अपने बेटे पैगम्बर हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने को कहा जिसमें वो पास हो गये।

ईदुल अजहा की नमाज का वक्त

मस्जिद याकूब शहीद नगवां 7.00 बजे
मस्जिद रज़ा मदनपुरा 6.45 बजे 
मुगलिया शाही जामा मस्जिद बादशाह 6.45 बजे 
मस्जिद जहांगीर हटिया मदनपुरा 6.30 बजे, शाही जामा मस्जिद ज्ञानवापी 7.30 बजे, आलमगीर मस्जिद धरहरा 7.00 बजे, मस्जिद सुग्गा गड्ही (मौलाना शाह) कोयला बाजार 6.45 बजे, जामा मस्जिद, नदेसर 7.00 बजे। 
ईदगाह, काशी विद्यापीठ 7.30 बजे
ईदगाह सदरबाग 7.15 बजे
बिचली मस्जिद, कचहरी 7.15 बजे 
मस्जिद गफूरी, कचहरी 7.30 बजे 
मस्जिद लाट शाही बाबा 7.30 बजे
मस्जिद उल्फत बीबी 7.30 बजे, जामा मस्जिद कम्मू खां डिठोरी महाल 7.30 बजे, ईदगाह लंगर, नवापुरा 7.30 बजे, मस्जिद लंगड़े हाफिज नयी सड़क 10.00 बजे, लाट मस्जिद, सरैयां 8.30 बजे, ईदगाह पुरानापुल 7:45 बजे, ईदगाह गोगा की बाग, जलालीपुरा 6:45 बजे, मस्जिद उस्मान गनी ककरमत्ता 7:00 बजे, नूरी मस्जिद ककरमत्ता 7:00 बजे, बड़ी मस्जिद ककरमत्ता 7:15 बजे, मस्जिद शाह मूसा शाह ककरमत्ता 7:15 बजे, शाही मस्जिद ढ़ाई कंगूरा चौहट्टा लाल खां 7.30, मस्जिद बीबी रजिया दालमंडी 8.00 बजे, नौव्वा पोखर मस्जिद, आदमपुर 6.00 बजे, मंगरू शाह मस्जिद, सलेमपुरा 5.45 बजे, मस्जिद कुदबन शहीद 5.45 बजे, मस्जिद काजी सादुल्लाहपुरा 7.00 बजे, मस्जिद वरूणा पुल मस्जिद 6.45, मस्जिद खरबूजा शहीद 6.45 बजे, मस्जिद अबु हनीफा अमानुल्लाहपुरा 5.45 बजे, जामा मस्जिद, अमानुल्लाहपुरा 5.45 बजे, जामा मस्जिद दाल, कच्चीबाग 7.00 बजे, जामा मस्जिद खोजापुरा 6:45 बजे, मस्जिद शहीद बाबा अमरपुर, सरैया 6:45 बजे, जिन्नती मस्जिद 8:30 बजे, मस्जिद अल कुरैशी फाटक शेख सलीम 7: 00 बजे, मस्जिद रंगढ़लवा फाटक शेख सलीम 7:15 बजे।

( रिपोर्टर सरफराज अहमद/ एफ फारुकी बाबू व मोहम्मद रिजवान)


BLW Varanasi Main में हुआ नुक्कड़ नाट्य का मंचन

नाट्य के माध्यम से गूंजा पर्यावरण संरक्षण का संदेश


F.Farooqui babu/ Ajeet Singh rajpoot

dil india live (Varanasi). रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में महाप्रबंधक आशुतोष पंत के नेतृत्व में 15 मई 2026 से 5 जून 2026 तक “विश्व पर्यावरण दिवस-2026” अभियान चलाया जा रहा है। उत्साह एवं जनभागीदारी के साथ मनाया जा रहे अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, ऊर्जा संरक्षण, जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास के प्रति समाज में व्यापक जागरूकता उत्पन्न करना है।

इसी क्रम में 26 मई को बरेका स्थित जलालीपट्टी मार्केट में “हम सबकी जिम्मेदारी” विषय पर एक प्रभावशाली एवं जन-जागरूकता से परिपूर्ण नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। बरेका नाट्य दल द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने अपनी जीवंत अभिनय शैली, प्रभावशाली संवादों एवं सामाजिक संदेशों के माध्यम से उपस्थित नागरिकों एवं कर्मचारियों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।


नाटक के माध्यम से कलाकारों ने पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देते हुए जल एवं ऊर्जा बचाने, अधिकाधिक वृक्षारोपण करने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा स्वच्छ एवं हरित वातावरण बनाए रखने के लिए लोगों को प्रेरित किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए पर्यावरण सुरक्षा के संदेश को सराहा।

कार्यक्रम में मुख्य संरक्षा अधिकारी जितेंद्र अग्रवाल, उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर/पीओएच राजेश कुमार, जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

नुक्कड़ नाटक का निर्देशन सुधाकर मनी द्वारा किया गया। नाटक में आलोक कुमार सिंह, नीरज कुमार सिंह, सुशील कुमार त्रिपाठी, मुकेश कुमार दुबे, अविनाश कुमार सिंह, शरद कुमार श्रीवास्तव, बहादुर प्रसाद एवं अमिताभ प्रथम कुमार ने अपनी प्रभावशाली एवं आकर्षक प्रस्तुति से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं हरित भविष्य के निर्माण हेतु सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

सोमवार, 25 मई 2026

Parwaz welfare Society का जनगणना जागरुकता कैंप 26 को मदनपुरा में

दो साल से लोगों की खिदमत कर रही है परवाज़ वेलफेयर सोसायटी 


dil india live (Varanasi). परवाज़ वेलफेयर सोसायटी की ओर से लगातार तकरीबन दो साल से सामाजिक कार्य को निःशुल्क किया जा रहा है। परवाज़ वेलफेयर सोसायटी के प्रमुख मौलाना हसीन अहमद हबीबी बताते हैं कि सोसायटी की ओर से लोगों का फैमिली कार्ड, आयुष्मान कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, वक्फ रजिस्ट्रेशन समेत तमाम काम निःशुल्क किया जा रहा है। 

इसके साथ ही एसआईआर और अब जनगणना के लिए अलग-अलग मुहल्लों में कैंप लगाकर लोगों की मदद की जा रही है। इसी क्रम में 26 मई को मदनपुरा में हटिया मस्जिद के सामने हाजी जलालुद्दीन के पास कैंप लगाकर जन गणना के लिए जागरुकता अभियान चलाया जाएगा साथ ही अन्य जरूरी कार्य भी संपादित होंगे। उन्होंने लोगों से अपील किया है कि ज्यादा से ज्यादा लोग कैंप का लाभ उठाएं।



रविवार, 24 मई 2026

UP K Varanasi Main Ghazi Miya की फिर लौटी बारात

गाज़ी मियां का लगा मेला, उमड़ा दोनों वर्ग का हुजूम 

सुल्तान क्लब ने लगाया चिकित्सा शिविर 


Varanasi (dil India live)। बड़ी बाजार स्थित हज़रत सैयद सालार मसूद (गाजी मियां) की दरगाह पर शनिवार को शुरू हुआ मेला इतवार अपने शबाब पर पहुंच गया।मेले में लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। इस दौरान सुल्तान क्लब के मेम्बर्स लोगों की खिदमत में जुटे दिखाई दिए। लोगों का हुजूम देर रात तक अस्थाई दुकानों पर खरीदारी करने जुटा हुआ था।

उधर देर रात सनाउल्लाह के मकान से बारात निकली जो विभिन्न रास्तों से होकर सलारपुर बड़ी बाजार पहुंची। दरगाह में बारात आते ही लोगों ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। शादी की रस्म शुरू हुई थी कि किसी बात को लेकर औरतों से बारतियों की बहस हो गई तभी पास में रखा हुआ मटका टूट गया और बात बढ़ गई। लोगों ने बीच बचाव किया, समझाया मगर बाराती नहीं माने तेज हवाएं चलने लगी, शादी टूट गई, बारात वापस लौट गयी।



बारात में हिंदू और मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली।

इस मौके पर लगे मेले में पूर्वांचल भर से हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। सदर हाजी सेराजुददीन व गद्दीनशीं हाजी एजाजुद्दीन हाशमी कमेटी के लोगों के साथ व्यवस्था संभाले हुए थे। हाजी एजाजुद्दीन हाशमी ने बताया कि मेले की मान्यता है कि जिस किसी भी जायरीन की मुराद पूरी होती है, वो इस मेले में आकर चादर, मलीदा वगैरह चढ़ाते हैं। मेले में पूरे पूर्वांचल भर से लोग आते हैं। समाचार लिखे जाने तक गाजी मियां के दर पर दोनों मज़हब का जमावड़ा था।




Bharat Vigyan Yatra का आशा केंद्र वाराणसी में हुआ भव्य स्वागत

वैज्ञानिक दृष्टिकोण बढाने के उद्देश्य के निकली भारत विज्ञान यात्रा

विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों का किया गया प्रस्तुतिकरण

dil india live (Varanasi). गोरखपुर से वाराणसी पहुंची भारत विज्ञान यात्रा के सदस्यों का भंदहा कला स्थित आशा ट्रस्ट परिसर में पहुचने पर भव्य स्वाग्य किया गया । इस यात्रा में गोरखपुर के विभिन इंटर कालेजों के विज्ञान विषय के प्राध्यापक शामिल हैं जिनका उद्देश्य बच्चो को विज्ञान के छोटे प्रयोगों को आसानी से समझाना है।  इस अवसर पर अभिनंदन करते हुए आशा ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशक्ति को विकसित करने की बहुत आवश्यकता है ऐसे में इस तरह के जागरूकता अभियानों का महत्व है।


 

यात्रा के संयोजक एस टी अली ने बताया कि 'भारत विज्ञान यात्रा' एक प्रमुख शैक्षणिक व प्रेरणादायक अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छात्रों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के प्रति जागरूक करना है, ताकि 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में युवा प्रतिभाओं का योगदान सुनिश्चित किया जा सके।


  

यात्रा दल में शामिल सदस्यों द्वारा विज्ञान विशेषकर रसायन के विभिन्न प्रयोगों का प्रस्तुतिकरण करके उसके महत्व को विस्तार से समझाया गया।   

इनकी रही खास मौजूदगी 
यात्रा दल में आयुष शर्मा, सत्यम यादव, दिवाकर, खुश्बुद्दीन भी शामिल रहे, कार्यक्रम संयोजन में सौरभ चन्द्र, अवनीश पाण्डेय, अमित कुमार, दीन दयाल सिंह, प्रदीप सिंह, वैभव पाण्डेय, सनी, ब्रजेश कुमार, रमेश प्रसाद आदि की प्रमुख भूमिका रही।


पुण्यतिथि 24 मई: मजरूह सुल्तानपुरी: बगावती तेवर और मज़लूमों का मसीहा

मैं अकेला ही चला था जानिब ए मंज़िल मगर, 

लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।


dil india live (Varanasi). साझी संस्कृति, धर्मनिरपेक्षता के प्रतीक और अपनी धुन के पक्के,अड़चनों के सामने चट्टान की तरह अडिग इस महान सपूत की गोद में खेल कर बड़े होने का हमें गौरव प्राप्त है। ये वही मजरूह है जिन्होंने बालासाहब ठाकरे के हाथों से फिल्मी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण अवार्ड लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि जिन फिरकापरस्त ताकतों का हमने जीवन भर विरोध किया उनके हाथ से सम्मानित होना हमें कतई गवारा नहीं,ये विरोध उन्होंने उस वक़्त जताया जब ठाकरे अपने जीवन के सबसे ऊंचे पायदान पर खड़े थे।

मजरूह का मिजाज देखिये

रोक सकता हमें ज़िंदान ए बला क्या मजरूह,
हम तो आवाज़ है दीवार से छन जाते हैं।

मजरूह और हमारे वालिद सागर सुल्तानपुरी बेहतरीन दोस्त थे।मेरे वालिद गांधियन आंदोलन की उपज थे तो मजरूह प्रगतिशीलता के प्रतीक और प्रतिबद्ध कम्युनिस्ट आंदोलन की अग्रिम पंक्ति के सिपाही,पर दोनों के विचारों की भिन्नता कभी आड़े हाथों नही आयी और दोनों का घर एक दूसरे का आशियाना बना रहा।एक विशेष बात जो मैंने नोट की थी कि मजरूह ने कभी भी गाँधीजी की आलोचना नही की।हां अलबत्ता वो नेहरू के नाम पर जरूर तैश में आ जाते थे पर भाषा का संयम बना रहता।बाद में मेरे वालिद साहब ने बताया था कि मजरूह वो शख्स है जो मजदूरों के हक़ के लिए चलने वाली तहरीक से न केवल जुड़े रहे वल्कि अहम किरदार रहे।उन्होंने नेहरू की पालिसी के खिलाफ और मजदूरों के हड़ताल के पक्ष में एक इंक़लाबी कविता पढ़ी और हड़ताल का नेतृत्व किया।नतीजतन उन्हें सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया और  लगभग दो साल जेल की हवा खानी पड़ी। मजरूह को सरकार ने सलाह दी कि अगर वे माफ़ी मांग लेते हैं, तो उन्हें जेल से आज़ाद कर दिया जाएगा, लेकिन मजरूह सुल्तानपुरी इस बात के लिए राजी नहीं हुए और उन्हें दो वर्ष के लिए जेल भेज दिया गया। नेहरू की ऐसी आलोचना शायद किसी ने की हो----

मन में ज़हर डॉलर के बसा के,
फिरती है भारत की अहिंसा.
खादी की केंचुल को पहनकर,
ये केंचुल लहराने न पाए.
ये भी है हिटलर का चेला,
मार लो साथी जाने न पाए.
कॉमनवेल्थ का दास है नेहरू,
मार लो साथी जाने न पाए.

सत्ता की छाती पर चढ़कर एक शायर ने वह कह दिया था, जो इससे पहले इतनी साफ़ और सपाट आवाज़ में नहीं कहा गया था. यह मज़रूह का वह इंक़लाबी अंदाज़ था, जिससे उन्हें इश्क़ था. वह फिल्मों के लिए लिखे गए गानों को एक शायर की अदाकारी कहते थे और चाहते थे कि उन्हें उनकी ग़ज़लों और ऐसी ही इंक़लाबी शायरी के लिए जाना जाए।

 1986 तक कमोबेश मजरूह साहब अगर जाड़ों में उत्तर प्रदेश आते तो हमारे घर आना उनकी यात्रा का एक अहम पड़ाव होता था और हमें उनका इंतजार।शायद वालिद साहब के वही इकलौते दोस्त थे जो बाल्यावस्था में कुछ रुपये उस वक़्त रोज हम भाइयों को देते थे जिनकी लालच में हम सब उनकी बात माना करते थे। दिन भर घर पर शेर ओ शायरी का माहौल रहता और हमारी वालिदा साहिबा को खाने के नए नए फरमान दिए जाते। मेरी वालिदा साहिबा मजहबी मिज़ाज की थी और कई बार मजरूह साहब की आलोचना पर्दे की आड़ से कर देती कि कुछ इबादत भी कर लिया कीजिये।अल्लाह को क्या मुंह दिखाओगे तो जवाब होता कि भाभी आप अपनी इबादतों का कुछ हिस्सा हमें वक़्फ़ कर दीजियेगा और बस मेरा बेड़ा पार।

"मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वही ए इलाही है,
मजहब तो बस मजहब ए दिल है बाकी सब गुमराही है।,"
(24 मई 2000 को वे इस दुनिया से कूच कर गए।)

  •  डॉ. मोहम्मद आरिफ
(लेखक गांधीवादी, शांति कार्यकर्ता व इतिहासकार हैं)

Iran's Supreme Leader के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल हकीम ने Kashi को किया ख़िताब

ज़ुल्म के सामने न झुकना हमने इमाम हुसैन से सीखा- डॉक्टर अब्दुल हकीम इलाही


Mohd Rizwan 

dil india live (Varanasi). मोमिनीने बनारस के तत्वाधान में Iran's Supreme Leader (ईरान के सुप्रीम लीडर) आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की याद में एक मजलिस का आयोजन किया गया। सभा के मुख्य अतिथि ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल हकीम इलाही ने काशी के लोगों को ख़िताब करते हुए कहा कि भारत और ईरान का रिश्ता सदियों पुराना है और उस पर बनारस शहर की मिसाल एक ख़ूबसूरत नगीने की तरह है। अगर समय कम न होता तो मैं घंटों इस खूबसूरत शहर की शान बयान करता। ये एक ऐसा शहर है जिसकी पूरी दुनिया में मिसाल दी जाती है जहां हर धर्म के मानने वाले अपने अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं और सुकून से ज़िंदगी गुज़ारते हैं।


ज़ुल्म के सामने अपना सर नहीं झुकाया

डॉक्टर इलाही ने मजलिस को ख़िताब करते हुए कहा कि आज हम सब एक ऐसे इंसान को याद करने के लिए बैठे हैं जिसने इंसानियत की खिदमत के लिए अपनी जान का नज़राना दे दिया लेकिन ज़ालिम और ज़ुल्म के सामने अपना सर नहीं झुकाया। 

जलसे का आग़ाज़ मौलाना सरताज और क़ारी सदरे आलम ने तिलावते कलामे पाक से किया। मौलाना सैय्यद अक़ील हुसैनी, डॉक्टर शफ़ीक़ हैदर, मौलाना सैय्यद ज़मीरुल हसन ने रहबर की ख़िदमात और उनकी ज़िंदगी पर रौशनी डाला। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया ने देख लिया के एक 86 साल के बुजुर्ग ने बड़ी बड़ी ताकतों को चारों खाने चित कर दिया। उसने अपनी जान तो दे दी पर अपनी इज़्ज़त का समझौता नहीं किया और पूरे ईरान के सर को ऊंचा कर दिया। हम ऐसे मर्द को नमन करते हैं। 


मुफ़्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने फ़ारसी भाषा में अपना शोक संदेश पढ़ कर सुनाया जिसमें उन्होंने शेख अली हजी की मिसाल देते हुए कहा कि हमारा बनारस शहर ऐसा खूबसूरत शहर है कि जब यहां शेख अली हजी आये तो यहीं के होकर रह गए साथ ही उन्होंने रहबर की शहादत पर इज़हारे ग़म किया। जलसे का संचालन मौलाना तौसीफ़ अली ने किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में अकीदतमंद मौजूद थे। प्रोग्राम के आयोजक एमजियो ट्रस्ट की ओर से मुहम्मद मुर्तुज़ा जाफ़री ने डॉक्टर इलाही को स्मृति चिन्ह देकर उनका शुक्रिया अदा किया। 

दरगाहे फ़ात्मान के मुतवल्ली सैय्यद अब्बास रिज़वी शफ़क़ ने जलसे को कामयाब बनाने में अपना भरपूर सहयोग प्रदान किया। इमामे जुमा मौलाना ज़फरुल हुसैनी ने आये हुए सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया। आये हुए लोगों का स्वागत मुनाजिर हुसैन मंजू ने किया।

शनिवार, 23 मई 2026

All India Muslim Jamat ने बक़रीद को लेकर जानिए क्या किया ऐलान

सड़क और चौराहों पर नमाज़ पढ़ने व कुर्बानी करने से बचें-मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी

कुर्बानी का फोटो और विडियो सोशल मीडिया पर न करें वायरल 

  • Mohd Rizwan 
dil india live (Bareliy). बरेली से बकरीद को लेकर बड़ी और अहम खबर आ रही है यहां आल इंडिया मुस्लिम जमात प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने देश भर के मुस्लिमों को एडवाइजरी जारी किया है। उन्होंने कहा है कि खुली जगह पर कुर्बानी न करें, घर या स्लॉटर हाउस का कुर्बानी में इस्तेमाल करें। मौलाना शाहबुद्दीन ने सोशल मीडिया पर कुर्बानी के फोटो-वीडियो, पोस्ट न करने की सलाह दी है। 
आल इंडिया मुस्लिम जमात प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने सड़क और चौराहों पर नमाज़ पढ़ने से बचने की अपील की है, मौलाना ने कहा कि मस्जिद में ही नमाज अदा करें, नमाज़ इस तरह पढ़ें किसी को कोई तकलीफ़ न हो। दूसरे धर्मों की आस्था और भावनाओं का सम्मान करने की उन्होंने अपील किया है। बंगाल और दिल्ली में कुर्बानी विवाद के बीच आये आल इंडिया मुस्लिम जमात के इस महत्वपूर्ण बयान को ख़ासी अहमियत दी जा रही है। मुस्लिम जमात प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने सड़क की बजाय मस्जिद में ज्यादा भीड़ होने पर एक ही मस्जिद में कई बार जमात कराने की भी सलाह दी है।

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आर इंडिया मुस्लिम जमात प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने सड़क और चौराहों कुर्बानी न करने व प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करने की भी हिदायत दी है। उन्होंने है भी कहा है कि अगर कुर्बानी या नमाज के वक्त किसी तरह का कहीं कोई विवाद होता है तो शांतिपूर्ण तरीके से मसले का हल निकालें  और अधिकारियों को इसकी तत्काल सूचना दें।

 

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शुक्रवार, 22 मई 2026

Hajj 2026: अय्याम शुरू होने में अब गिनती के रह गए दिन

पूर्वांचल की मस्जिदों में इसरा ने कराया हज जायरीन के लिए दुआएं 

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dil india live (Varanasi). हज का अय्याम शुरू होने में अब गिनती के दिन रह गए है। इसे देखते हुए हज के लिए सक्रिय रहने वाली संस्था इसरा (ISSRA) वाराणसी द्वारा इज्तेमाई दुआख्वानी का प्रोग्राम 22. 05.2026 जुमा को वाराणसी सहित पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में किया गया। 

वाराणसी में इज्तेमाई दुआख्वानी का मुख्य केन्द्र मुगलिया शाही जामा मस्जिद बादशाह बाग में सारी दुनिया से मक्क-ए-मुकर्रमा पहुंचे हुए हज जायरीन की सेहत व हज बखैरियत मुकम्मल होने और मुल्क में अमनों अमान खुशहाली के लिए इज्तेमाई दुआख्वानी की गई। मौलाना हसीन अहमद हबीबी की सदारत व इसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां के संयोजन में बाद नमाज जुमा यह पूर्व घोषित कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ऐसे ही अपनी अपनी मस्जिदों में पेश इमामों ने पूर्वांचल के जिलों में एक साथ सारी दुनिया से पहुंचे हुए हज जायरीन की सेहत बखैरियत हज मुकम्मल होने व कुबूल होने एवं अपने मुल्क सकुशल वापसी की इज्तेमाई दुआ की गई। साथ ही साथ अपने मुल्क में अमनो-अमान व खुशहाली के लिए भी इज्तेमाई दुआ अल्लाह तआला की वरगाह में हाथ उठाकर की गई। अल्लाह तआला से खुसुसी तौर से दुआ की गई कि मुल्क में अमनो-अमान, आपसी भाईचारे को बरकरार रखते हुए पूरी सादगी के साथ सारे त्योहार सकुशल सम्पन्न हो ताकि गंगा-जमुनी तहजीब के लिए मशहूर शहर बनारस की अपनी खासियत बरकरार रहे और अल्लाह तआला हम सबकों को ऐसी सद्बुद्धि दें कि हम अपने-अपने कर्तव्यों को समझते हुए प्रशासन का पूर्ण सहयोग दें। जिससे बनारस सहित पूरे उ.प्र. व देश में अमनो अमान व खुशहाली कायम रहे। इन जिलों में इज्तेमाई दुआ के इस प्रोग्राम को कामयाब बनाने के लिए हर जिले में इसरा (ISSRA) ने अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त किया था। जिन्होंने इस दुआ के प्रोग्राम को काययाब बनाने में अपना प्रशंसनीय सहयोग प्रदान कर सफल बनाया। उनमें क्रमश बनारस में हाजी सुल्तान, अलहम अंसारी, मो. शाहरूख इम्तियाज अहमद, हाजी नौशाद, मो. फिरोज, मुख्तार अहमद, सेराज, तथा अलहन, जौनपुर से डॉ. शकील, फैजान खलील, गाजीपुर से मकसूद अंसारी, हाजी नसीम, इमरान अनवार अहमद, बलिया में डॉ. बदरेआलम, डा. मो. अरशद असारी, मऊ से डॉ. सरफराज, सलीम अहमद, चंदौली से मो. शाहीद, मो. नफीस, पप्पू, सोनभद्र से हाजी रिजवान, नफीस, महताब आलम व हाजी ताहिर भदोही से इजहार खान बाबू, गोरखपुर से सलाउ‌द्दीन, मो. नदीम, पप्पू, मो. नदीम, इलाहाबाद से मोहम्मद अजहरूद्दीन व महफूज सिद्दीकी, प्रतापगढ़ से महमूद खान, कौशाम्बी में दाउद अहमद, मिर्जापुर में गुलाम रब्बानी, कुशीनगर में हाजी लियाकत अली, सिद्धार्थनगर में मोहम्मद अली, महराजगंज में अहमद हुसैन आदि शामिल थे। 

मुख्य मस्जिदें जहां हुई दुआख्वानी

मस्जिद दायम खां पक्की बाजार के पेश इमाम मौलाना नसीर, मस्जिद हाता उल्फत बीबी के पेश इमाम मौलाना इल्यास कादरी, गफूरी मस्जिद कचहरी के पेश इमाम हाफिज इरफान, मस्जिद लाटशाही बाबा के पेश हाफिज हबीबुर्रहमान, मुगलिया शाही मस्जिद बादशाह बाग के पेश इमाम मौलाना हसीन हबीबी, जहांगीरी मस्जिद हरहुआ बाजार के पेश इमाम हाफिज गुलाम रसूल, नूरी मस्जिद नरिया वाराणसी, तारा मस्जिद कुड़ी मौलाना नुरुददीन, जामा मजिस्द कूड़ी बाजार मौलाना जलील, बड़ी जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जियाउल हक, ईदगाह चोलापुर के पेश इमाम हाफिज जमालुद्दीन, मस्जिद मीरा शाह बाबा हबीबपुरा, चेतगंज के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद नईम, मस्जिद काले खां के पेश इमाम मौलाना हाजी अब्दुल हादी खां, मस्जिद लाल सहतूत औरंगाबाद के पेश इमाम हाजी अश्फाक, छोटी मस्जिद पानी टंकी के पेश इमाम मौलाना निजामुद्दीन, जुमा मस्जिद सदर बाजार के पेश इमाम रूखसार अहमद, जामा मस्जिद राजा बाजार के पेश इमाम मौलाना मजहरूल हक, जामा मस्जिद खाजापुरा गड़ही के पेश इमाम हाजी मौलाना युनूस, मस्जिद आशिक माशूक सिगरा के पेश इमाम मौलाना कमालुद्दीन, जामा मस्जिद काश्मीरीगज खोजवा के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद वाहिद रजा, मस्जिद जलालीपुरा के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद उमर, बड़ी मस्जिद छत्ता तले के पेश इमाम मौलाना कारी साजिद, मस्जिद पिपलानी कटरा के पेश इमाम मौलाना इस्लामुद्दीन।

धानापुर चन्दौली के जुमा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज इलियास शम्श, जामा मस्जिद चकिया चंदौली के पेश इमाम, बडी जामा मस्जिद बड़गवां चंदौली के पेश इमाम हाफिज मकबूल, जुमा मस्जिद सतपोखरी दुलहीपुर के पेश इमाम जैनुल आब्दीन, जामा मस्जिद चहनियों कारी ऐनुल हक, जुमा मस्जिद बडागाव के पेश इमाम हाजी सेराजुद्दीन, नगरा बलिया मदीना मस्जिद के पेश इमाम मौलाना नसीम, बडी मस्जिद गुदड़ी बाजार बलिया के पेश इमाम मौलाना अजहर, मस्जिद विशुनीपुर के पेश इमाम कारी नौशाद अहमद, बड़ी मस्जिद उमरगंज के पेश इमाम मौलाना आजम, जामा मस्जिद बेल्थरा रोड के पेश इमाम मौलाना मंजूर, मस्जिद कामिल शाह रहमतुल्ला अलैह के पेश इमाम वलिदपुर, मऊ में शाही मस्जिद कोपागंज के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद नजीर शाह, जौनपुर में शाही बड़ी मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती मौलाना फैसल, जामा मस्जिद बदरूल इस्लाम शाहगंज जौनपुर के पेश इमाम मौलाना हमजा, जामा मस्जिद मोहम्मदाबाद आजमगढ़ के पेश इमाम हाफिज शाहजहां, जुमा मस्जिद महराजगंज मौलाना मोइनुद्दीन, अस्करगंज, गोखपुर के पेश इमाम मौलाना अनीस, जामा मस्जिद कुशीनगर के पेश इमाम हाजी लियाकत अली, मस्जिद स्टेशन रोड प्रतापगढ़ के पेश इमाम मौलाना रियाजुल हसन कासमी, जुमा मस्जिद ओबरा के पेश इमाम कारी मोहम्मद असलम, भदोही, जामा मस्जिद कल्लन शाह तकिया के पेश इमाम हाफिज अच्छे, गाजीपुर जामा मस्जिद आदि पूर्वांचल के सभी मस्जिदों में एक साथ पूरे मुल्क में खुशहाली एवं अमनो अमान की दुआख्वानी हुई।

 दुआख्वानी के मौके पर अलहम अंसारी, मो इम्तियाज, मो. शाहरूख, हाजी नौशाद, सेराज अहमद, मुख्तार मोहममद फिरोज, सेराज अहमद आजाद, मौलाना शाबान, मोहम्मद असलम, मोहम्मद युसूफ, रेयाज, निजाम, हाजी शमसुद्दीन, हाजी करीमुद्दीन, मो. शफीक, राजू, हाजी शुऐब, तथा इसरा के पदाधिकारीगण एवं सदस्यगण मौजूद थे।