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शनिवार, 9 अगस्त 2025

UP: Varanasi Main 11 अगस्त को उठेगा अंगूरों वाला ताबूत

जियारत को पहुंचेगी शहर भर की खवातीन, 43 वें साल भी होगी मजलिस

Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). वाराणसी में 11 अगस्त को डॉ नुजहत फातमा और नौशीन फातमा की अगुवाई में 8 वे इमाम अली रज़ा की शहादत पर ग़म मनाने के लिए मजलिस का आयोजन होगा और उसके बाद अंगूरों वाला ताबूत उठाया जाएगा। फरमान हैदर ने बताया कि इसे अंगूरों वाला ताबूत इसलिए कहते हैं कि इमाम रज़ा को जालिमों ने धोखे से अंगूर में ज़हर मिला कर खिलाया था जिसे १२४५ साल पहले उनकी शहादत हुई थी। इमाम का आलीशान रौजा ईरान के मशहद प्रांत में स्थित है। उनकी शहादत की याद में मजलिस का आगाज 1 बजे दिन में मोहतरमा माहे तलत और कनीज फातमा की तिलावत से होगा। इस मौके पर अनाया फातमा अल्लाह के नाम से मजलिस का आगाज़ करेंगी तो सोजख्वानी और मर्सिया तज़ीन फातमा और मेहरीन फातमा करेंगी। मजलिस को खिताब करने के लिए नौगांवां सादात अमरोहा से तंजीम आब्दी नौगांवां सादात (दिल्ली) रौनक अफरोज होंगी।

मजलिस के समापन पर हाय इमाम रज़ा की सदाओं के साथ अंगूरों वाला ताबूत उठाया जाएगा। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खान की बड़ी बेटी जरीना फातमा जो पिछले ४२ सालों से लगातार नोहा पढ़ रही हैं अपने सहयोगियों के साथ नोहाख्वानी पेश करेंगी। नोहा पेश करने के लिए शिखा फातमा, गुड़िया फातमा, इमरोज़ फातमा भी मौजूद रहेंगी। दर्द भरे नौहो की बोल पर जोरदार मातमों का ख़्वातीन नज़राना पेश करेंगी।इस अवसर पर विशेष रूप से नोहख्वानी करने के लिए अंजुमन अंसारे हुसैनी अवामी बड़ी बाजार दोषीपुरा को आमंत्रित किया गया है।

बुधवार, 12 मार्च 2025

Ramzan mubarak (11) रोजेदारों के लिए समुद्र की मछलियां भी करती हैं दुआएं

रब की रज़ा के लिए बंदा रखता है रोज़ा


Varanasi (dil India live). फरमाने रसूल (स.) है कि रमजान अल्लाह का महीना है और उसका बदला भी रब ही देंगा। यही वजह है कि रमजान का रोज़ा बंदा केवल रब की रज़ा के लिए ही रखता है। रोज़ा वो इबादत है जो दिखाई नहीं देती बल्कि उसका पता या तो रब जानता है या फिर रोज़ा रखने वाला।

रमजान में जब एक मोमिन रोज़ा रखने की नियत करता है तो वो खुद ब खुद गुनाहों से बचता दिखायी देता हैं। उसे दूसरों की तकलीफ़ का पता भूखे प्यासे रहकर रोज़ा रखने पर कहीं ज्यादा होता है।रमजान का अन्य महीनों पर फजीलत हासिल है। हजरत अबू हुरैरा (रजि.) के अनुसार रसूल अकरम (स.) ने इरशाद फरमाया, कि माहे रमजान में पांच चीजें विशेष तौर पर दी गयी है, जो पहली उम्मतों को नहीं मिली थी। पहला रोजेदार के मुंह की महक अल्लाह को मुश्क से ज्यादा पसंद है। दूसरे रोजेदार के लिए समुद्र की मछलियां भी दुआ करती हैं और इफ्तार के समय तक दुआ में व्यस्त रहती हैं। तीसरे जन्नत हर दिन उनके लिए आरास्ता की जाती है। अल्लाह फरमाता है कि करीब है कि मेरे नेक बंदे दुनिया की तकलीफें अपने ऊपर से फेंक कर तेरी तरफ आवें। चौथे इस माह में शैतान कैद कर दिये जाते हैं और पांचवें रमजान की आखिरी रात में रोजेदारों के लिए मगफिरत की जाती है। सहाबा ने अर्ज किया कि शबे मगफिरत शबे कद्र है। फरमाया- नहीं, ये दस्तूर है कि मजदूर का काम खत्म होने के वक्त मजदूरी दी जाती है। हजरत इबादा (रजि) कहते हैं कि एक बार अल्लाह के रसूल (स.) ने रमजान उल मुबारक के करीब इरशाद फरमाया कि रमजान का महीना आ गया है, जो बड़ी बरकतवाला है। हक तआला इसमें तुम्हारी तरफ मुतव्ज्जो होते हैं और अपनी रहमते खास नाजिल फरमाते हैं। गलतियों को माफ फरमाते हैं। दुआ को कबूल करते हैं। बदनसीब है वो लोग जो इस माह में भी अल्लाह की रहमत से महरूम रहे, रोज़ा नहीं रखा, तरावीह नहीं पढ़ी, इबादत में रातों को जागे नहीं।

हाफ़िज़ अहमद आज़मी 
मदरसा शिक्षक व मशहूर शायर