7 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
7 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 23 जून 2026

7 moharram: बड़ागांव, चौहट्टा में मेंहदी और दुलदुल का निकला जुलूस

लोहता में अलम सददा की जियारत तो रिज़वी हाउस में ख़्वातीन का मातम


dil india live (Varanasi). 7 moharram को शहर भर अनेक आयोजन कर्बला के शहीदों की याद में आयोजित हुआ। इस मौके पर चौहट्टा लाल खां से सातवीं मुहर्रम मंगलवार को मेंहदी, ताबूत, अलम और दुलदुल का कदीमी जुलूस परम्परागत तरीके से निकाला गया। इस जुलूस में विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी व मातम का नज़राना पेश किया। उधर बड़ागांव में मजलिस को मौलाना सैयद शकिर इमाम गाजीपुरी ने खिताब करते हुए कर्बला के मसायब बयान किया। इसके बाद जुलुस मरहूम सैय्यद अब्बास हुसैन के इमामबाड़े से निकला। जुलूस में शामिल महेंदी, अल्लम, दुलदुल संग सैकड़ों लोग नौहाख्वानी व मातम करते हुए चल रहे थे।

जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ अब्बासिया मस्जिद स्थित कर्बला एवं गंजे शहीदा पर पहुंचा जहां रौजे पर सलामी देकर पुनः इमामबाड़े पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलुस में रास्ते भर नगर की विभिन्न अंजुमानों ने नौहाख्वानी, मातम किया। जुलूस में मुख्य रूप से सैयद अबूल हसन, सैयद जफरूल हसन, आरिफ, जेमी, प्रिन्स, अम्मार, बादशाह हुसैन, खुशीद हुसैन, जिशान हुसैन, मोहम्मद दानिश, कमरुल हसन, रूमान हुसैन आदि शामिल थे। 

इसी क्रम में चौहट्टा लाल खां स्थित अजाखाना मोहतमिम कासिम का प्राचीन जुलूस देर रात्रि में निकाला गया। जुलूस निकलने से पूर्व मजलिस को डाक्टर शफीक हैदर ने खिताब किया। जुलूस में अंजुमन आबिदिया ने दर्द भरा नौहा पढ़ा जिसे सुनकर अकीदत मंदों की आंखे नम हो गयी। गमें शब्बीर क्या-क्या है, इसे बिस्मिल समझते है, कहानी कर्बला वालों की अहले दिल समझाते है। जुलूस में इस्लाम एण्ड पाटी ने शहनाई पर मातमी धुन प्रस्तुत की। ऊंट, बैण्ड बाजा और ताशा, ढोल से जुलूस का आकर्षण बढ़ गया। अकीदत मंद महिलाओं, पुरुष और बच्चों का हुजूम देर रात्रि तक जमा रहा। मेंहदी का जुलूस अपने कदीमी रास्तो इमामबाड़ा मीरघुरा होता हुआ सदर इमामबाड़ा लाट सरैया जाकर समाप्त हुआ। रास्ते भर अकीदतमंदो ने दुलदुल को दूध पिलाया और मन्नते व मुराद मानी। जुलूस में विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी, मातम किया। 


कदीमी बाल का हुआ मातम, जुटी ख़्वातीन 

सातवीं मुहर्रम मंगलवार को पूर्वाहन १२ बजे शेख सलीम फाटक स्थित रिज़वी हाउस पर खातूनों महिलाओं ने कदीमी बाल का मातम किया और मन्नत मांगा। इस दौरान मजलिस को सम्बोधित करती हुई मोहतरमा नुजहत फरमान ने कहाकि हजरत इमाम हुसैन हजरत इमाम के भतीजे हजरत कासिम जो इमाम हसन के १३ वर्षीय पुत्र पुत्र थे, जिनका अकद इमाम हुसैन की बेटी फातिमा कुबरा से हुआ था और वे कर्बल की जंग में शहीद हो गये थे। यजीदों ने खैमें में आग लगा दी, लाशे इमाम हुसैन पामाल किया। उनकी लाश कर्बला की जलती रेत पर चालीस दिनों तक बेगोरों कफन रही। नन्हें अली असगर को शहीद कर दिया गया। शामे गरीबा आ गयी, कर्बलावालों ने सब कुछ बर्दाशत किया। आज यही वजा है कि सारी दुनिया में हुसैन का नाम याद किया जाता है ओर यजीद जिंदा रहकर मुर्दाबाद हो गया। हुसैन शहीद होकर कयामत तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। हुसैन कल भी जिंदाबाद थे, आज भी जिन्दाबाद है। मोतरमा नुजहत फरमान ने कहाकि लाखों रौजे है जहां में हजरते अब्बास के ऐ यजीदों बेहया तेरा ठिकाना है कहां, सारे मसलक की किताबों को उठाकर देख लो, कर्बला सा वकेया दुनिया में मिलता है कहां।

इस मौके पर या हुसैन-या हुसैन... की सदा आने लगी। मजलिस में शामिल सैकड़ों महिलाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। मजलिस के बाद अंजुमन हैदरी निस्वां ने प्रभावशाली नौहा पढ़ा और बाल का मातम किया गया और कर्बला के मंजर को दर्शाया गया। नौहे के बोल कुछ इस तरह थे ये पुकारे रन में असगर वे जुबान वे जुबानी, कोई तुम में है मुसलमां जो पिला दे मुझको पानी, मैं हुसैन का हूं बेटा और हसन का हूं भतीजा, मेरे जद रसूले वर हक मैं अली की हूं निशानी। सुनते ही दूर-दराज से आयी महिलाओं की आंखों से आंसुओं के एक-एक कतरे बहने लगे और कर्बला का मंजर याद आने लगे। 

इस अनोंखे बाल के मातम और मजलिस को सुनने के लिए दूर-दराज से सैकड़ों की संख्या में गाजीपुर, जौनपुर, शाहगंज, आजमगढ़, मऊ, इलाहाबाद, मिर्जापुर, दुलाईपुर, बड़ागांव, रामनगर आदि जिलों से आयी हुई थी। जायरीनों में तबरुक (प्रसाद) का भी वितरण किया गया। उधर लोहता में अलम सददा का जुलूस निकाला गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच छोटे बड़े रंग-बिरंगे अलम सददा को देखने, अलम सददा की जियारत करने लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था।

गुरुवार, 10 जुलाई 2025

UP Main VKM Varanasi का मना 71 वां स्थापना दिवस

अच्छे अभिभावक बनकर बच्चों को सिखाएं सफल जीवन का वास्तविक रहस्य-उमा भट्टाचार्य

Varanasi (dil India live). उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 10 जुलाई 2025 को वसन्त कन्या महाविद्यालय का 71 वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने शुभकामनाएं प्रेषित की। कार्यवाहक प्राचार्या डा. शांता चटर्जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाविद्यालय की स्थापना मात्र एक संयोग नहीं बल्कि एनी बेसेंट की दूरदर्शिता की अद्भुत उपलब्धि है। 


महाविद्यालय की प्रबन्धक उमा भट्टाचार्य ने कहा कि हमें अपने जीवन का एक निश्चित उद्देश्य तय करना पड़ेगा। आज हमें अपने जीवन को बेहद सहज बनाने की आवश्यकता है। अच्छे अभिभावक बनकर ही हम अपने बच्चों को सफलता के साथ साथ जीवन का वास्तविक रहस्य सीखा सकते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान डॉ. आर पी सोनकर, एसोसिएट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग द्वारा लिखित पुस्तक'आधुनिक व्याहारिक मनोविज्ञान ' का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की सभी शिक्षक शिक्षिकाएं मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूनम पाण्डेय ने दिया।

शुक्रवार, 7 मार्च 2025

7 दिनी NSS camp के 5 वें दिन हुई निःशुल्क नेत्र जांच

ग्रामीणों को निःशुल्क नेत्र जांच कर दिया गया परामर्श


Varanasi (dil India live). वाराणसी के चित्तूपुर खास गांव में पंचायत भवन मे 07 March को निशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया। उमा प्रेम नेत्रालय, चितईपुर के ऑप्टोमेट्रिस्ट की टीम द्वारा इस शिविर में सैकड़ों ग्रामीणों की निशुल्क नेत्र जांच और परामर्श दिया गया। शिविर का आयोजन एनएसएस की चल रही सामुदायिक सेवा पहल के तहत वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी की एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप द्वारा किया गया था।           


इस कार्यक्रम का उद्देश्य नेत्र स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना और ग्रामीण आबादी को सुलभ नेत्र देखभाल सेवाएं प्रदान करना था।  डॉ. अरुण गुप्ता के नेतृत्व में ऑप्टोमेट्रिस्ट की टीम ने पूरी तरह से आंखों की जांच की, जिसमें दृश्य तीक्ष्णता परीक्षण, अपवर्तन परीक्षण और रेटिना स्कैन शामिल थे। दृष्टि संबंधी समस्याओं वाले मरीजों को मुफ्त चश्मा प्रदान किया गया, जबकि आगे के उपचार की आवश्यकता वाले लोगों को अनुवर्ती देखभाल के लिए उमाप्रेम नेत्रालय में भेजा गया। डॉ. शशि प्रभा कश्यप ने उमाप्रेम नेत्रालय की टीम को उनके समर्थन और विशेषज्ञता के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "नेत्र जांच शिविर एक बड़ी सफलता थी, और हम समुदाय को यह आवश्यक सेवा प्रदान करने में सक्षम होने पर गर्व महसूस कर रहे हैं।" इस कार्यक्रम को ग्रामीणों ने खूब सराहा, जिन्होंने मुफ्त नेत्र देखभाल सेवाएं प्राप्त करने के अवसर की सराहना की। शिविर से स्थानीय आबादी के नेत्र स्वास्थ्य और कल्याण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। इस नेत्र जांच शिविर में 50 एनएसएस स्वयंसेवक, शिक्षक और प्राथमिक विद्यालय के छात्र और स्थानीय ग्रामीण लाभान्वित हुए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।