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शनिवार, 27 जून 2026

10 Mahe moharram: बोल मोहम्मदी या हुसैन...की सदाओं संग कर्बला में ताजिया हुई दफन

यौमे आशूरा पर कर्बला पहुंचा ताजिये का जुलूस, शिया वर्ग ने किया दर्द भरे नौहों पर मातम 

दरगाहे फातमान में हुई शामें गरीबा की मजलिस 

सुन्नी मस्जिदों घरों में खिचडे़ की फातेहा, रखा गया नफिल रोज़ा, हुआ शहादत नामा




dil india live (Varanasi). वाराणसी में इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत के गम में शहर कि बल खाती गलियों-मुहल्लों से लेकर सूदूर ग्रामीण इलाकों तक से तकरीबन 1000 से ज्यादा ताजियों का जुलूस शुक्रवार को अकीदत के साथ निकाला गया। इससे पहले घरों में कुरानख्वानी और फातिहा हुई। इमामबाड़ों और अजाखानों में नौहाख्वानी और मजलिसें हुईं। बोल मोहम्मदी या हुसैन...की सदाओं संग दफन होने के लिए ताजिया का जुलूस कर्बला पहुंचा, तो दूसरी ओर शहर भर की शिया अंजुमनों ने जंजीर और कमा का मातम किया, जिसे देखकर तमाम लोग कांप उठे। इस दौरान सुन्नी मस्जिदों में कर्बला के शहीदों की याद में शहादतनामा पेश किया गया, और मोमीनीन ने नफल रोज़ा रखा, शाम में अज़ान की सदाओं पर रोज़ा खोला गया।


इससे पहले शहर और ग्रामीण इलाकों से सुबह 10 बजे के बाद से ही नौवीं मुहर्रम को इमाम चौक पर बैठाए गए ताजियों का जुलूस उठाया जाना शुरू हो गया जो अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुंचा। हालांकि ज्यादातर बड़े और कदीमी ताजिया जुमा होने की वजह से असर की नमाज़ के समय निकल कर मगरिब बाद तक ठंडा हो गया। 

लल्लापुरा, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, दालमंडी, नई सड़क, रामापुरा, बजरडीहा आदि इलाकों के ताजिये दरगाहे फातमान पहुंचे तो बड़ी बाजार, दोषीपुरा, कज्जाकपुरा, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीलीकोठी, पुरानापुल आदि इलाकों के ताजिये सदर इमामबाड़ा लाट सरैया ले जाया गया। इस बार जुलूस मार्ग बदल कर कज्जाकपुरा आरओबी सदर इमामबाड़े जुलूस पहुंचा। उधर शिवाला, गौरीगंज, नवाबगंज आदि की ताजिये भवनिया कब्रिस्तान में दफन हुए। शिवपुर, बीएचयू, लंका आदि इलाकों से भी ताजिये कर्बला पहुंचकर ठंडे हुए। दरगाहे फातमान मार्ग पर खासी भीड़ देर शाम तक उमड़ी रही। ताजिये के साथ ढोल, ताशा बजाते और युवा लाठी, डंडे आदि के जरिये फन-ए-सिपाहगिरी का मुजाहिरा करते हुए चल रहे थे।














नफिल रोजा रखकर पेश की अकीदत

सुन्नी समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में घरों में फातिहा और दुआख्वानी की। नफिल रोजा रखकर अकीदत पेश की। मगरिब की नमाज के बाद इफ्तार करके रोजा खोला गया। इस दौरान मस्जिद अल कुरैश में सामूहिक रोज़ा इफ्तार का एहतमाम किया गया था।


जुलूस में जंजीर का मातम

शिया समुदाय ने मजलिस, मातम व जुलूस निकाल कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया। जगह-जगह से अंजुमनों ने अलम, ताबूत दुलदुल का जुलूस उठाया। अजादारों ने कमा, जंजीर से मातम किया। जोहर की नमाज के बाद शहर की सभी अंजुमनों के जुलूस उठने लगे। अंजुमन हैदरी नई सड़क, अंजुमन जौव्वादिया कच्चीसराय, अंजुमन मातमी जौव्वादिया पितरकुडा, अंजुमन गुलजारे अब्बासिया व अंजुमन कासिमिया अब्बासिया आदि ने मातम का नज़राना पेश किया। गौरीगंज व शिवाला से अलम, दुलदुल का जुलूस उठाया गया। इस दौरान बड़े संग बच्चे भी सीनाजनी, खंजर, कमा से मातम कर रहे थे। खूनी मातम देख जियारतमंदों की आंखें नम हो गईं।

उधर, अर्दली बाजार इमामबाड़े से अंजुमन इमामिया के कमा व जंजीर का मातम देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान काफी भीड़ रही। अर्दली बाजार से दसवीं मोहर्रम को अलम, ताबूत, दुलदुल का जुलूस यौम-ए अशूरा को उल्फत बीबी हाता स्थित मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़ा से उठा। जुलूस में अंजुमन इमामिया के नेतृत्व में लोग नौहाखानी, मातम और सीनाजनी करते हुए चल रहे थे। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ नदेसर, अंधरापुल, लोहा मंडी, पिशाचमोचन के रास्ते देर शाम फातमान पहुंच कर ठंडा हुआ़। जुलूस में इरशाद हुसैन "शद्दू ", जैन, दिलशाद, ज़ीशान, फिरोज़, जफर अब्बास, दिलकश. मिसम, अयान, शाद, अमान, अलमदार हुसैन, अद्दनान, अरशान आदि ने सहयोग किया।


शामे गरीबां की मजलिस 
शाम में जुलूस के बाद देर शाम शिया समुदाय की ओर से शाम-ए-गरीबां की मजलिसें हुई। दरगाहे फातमान, दालमंडी, पितरकुंडा, काली महाल, गौरीगंज व शिवाला में मजलिस को उलेमा ने खेताब करते हुए शहीदान-ए-कर्बला का जिक्र किया। 


सैय्यद सलमान हैदर ने बताया कि 11 वीं मुहर्रम को लुटे हुए काफिले का जुलूस दालमंडी में हकीम काजिम के इमामबाड़े से जुमेरात को सुबह 10 बजे से उठेगा। उधर परवेज़ कादिर खां की अगुवाई में उठा दूल्हे का कदीमी जुलूस छिटपुट घटनाओं को छोड़कर सकुशल संपन्न हो गया। इस दौरान जुलूस 60 ताजिया को सलामी और 72 अलाव पर दौड़ने के बाद शिवाला स्थित इमाम बाड़ा दूल्हा कासिम नाल पहुंच कर ठंडा हुआ। शाम में पुनः पानी वाला दूल्हा निकला जो आसपास के इलाकों में होकर वापस शिवाला पर सम्पन्न हुआ। उधर, मरकजी सीरत कमेटी की ओर से नई सड़क स्थित खूजर वाली मस्जिद में जिक्र शोहदा-ए-कर्बला कार्यक्रम हुआ जिसमें उलेमा ने कर्बला के वाक़यात पर रौशनी डाली।

जिया क्लब ने लगाया कैंप 

जिया क्लब द्वारा मोहर्रम की 10 तारीख इमामे हुसैन की शहादत पर पितरकुंडा पर मोहर्रम के जुलूस पर एक कैंप लगाया गया था जहां एक ओर अल्पाहार बांटने की व्यवस्था किया गया था वहीं दूसरी ओर एक मेडिकल कैंप लगाया गया था जिसमें आए हुए सभी ताजियादारों के लिए रोजा रखे हुए लोगों को रोज खुलवाया गया व जुलूस में आए हुए लोगों का उपचार कराया गया। फजलुर रहमान, इरशाद अंसारी, रब्बानी अंसारी, शमीम अंसारी, हाजी काजू आदि मौजूद थे तो जुलूस का संचालन समाजसेवी शकील अहमद जादूगर ने किया।