तेजस्वी बोलें: सरकार मुझे मरवाना चाहती है, हथियार दे रहा हूं, मरवा दे
Patna (dil India live)। बिहार विधानसभा में गुरुवार को वोटर सूची पुनरीक्षण को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, उनके समर्थक विधायकों - मंत्री से तीखी नोंक-झोंक के साथ बहस हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष पर अशालीन शब्दों का इस्तेमाल भी हुआ।
बाद में विस परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल उन्हें मरवाना चाहता है। उन्होंने कहा कि विधायक जनक सिंह ने उन्हें मां-बहन की गालियां दीं। तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने कभी अपशब्द नहीं बोला जबकि भाजपा के विधायक और डिप्टी सीएम भी उन्हें गालियां देते हैं।
विधायक जनक सिंह ने मां-बहन की गालियां दी
तेजस्वी बोले - 'सरकार मुझे मरवाना चाहती है तो मैं अपना लाइसेंसी हथियार देता हूं वह मुझे मरवा दे। विधायक जनक सिंह ने मां-बहन की गालियां दी, जबकि मैंने कोई अपशब्द नहीं बोला। राजनीतिक जीवन में मैंने कभी अपशब्द नहीं बोला, जबकि मुझे सदन में मां-बहन की गालियां दी गई। जब हम जोर से बोलेंगे तो गीला हो जाएगा...। भाजपा सारी सीमाएं लांघ रही है। भाजपा के विधायक ने जिस तरह मुझे गालियां दी हैं, वो कभी भी आज तक सदन में नहीं हुआ। भाजपा के डिप्टी सीएम भी मुझे गालियां देते हैं। सरकार में हिम्मत है तो मुझे जेल भेज दे गोली मार दे, क्योंकि आज माइक तोड़कर मेरी तरफ मारने की कोशिश की गई।'
सदन में तेजस्वी संग सत्ता पक्ष की गर्म बहस
सदन में वोटर सूची गहन पुनरीक्षण का फॉर्म दिखाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि '11 तरह के डॉक्यूमेंट मांगे हैं, लेकिन कितने तरह के डॉक्यूमेंट आम आदमी के पास हैं, यह आप बताईये। फिर जब कोई पत्रकार दिल्ली से आकर सच दिखा रहे हैं कि कैसे फर्जीवाड़ा हो रहा है, कैसे फर्जी साईन हो रहे हैं, कैसे फॉर्म को बिना किसी डॉक्यूमेंट के अपलोड किया जा रहा है तो उस पर आप लोगों ने एफआईआर करा दी।' आप कौन होते हैं यह तय करने वाले...? इसी बात पर सम्राट चौधरी उठ खड़े हुए और उन्होंने कहा कि -'जिसका बाप खुद अपराधी हो, लूटेरा हो उसका बेटा क्या बोलेगा?' इसी बात पर हंगामा होने लगा और फिर विधान सभा अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई को 4 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। इस दौरान भाजपा के जनक सिंह ने गाली गलौज की।
अब अशोक चौधरी फिर उठ खड़े हुए और तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि अपने विभाग में एक भी योजना अगर दी हो तो कहिये। तेजस्वी यादव ने कहा कि - 'सरकार हमारी योजना को पीछे पीछे घोषणा कर रही है। यह सरकार मेरे द्वारा घोषित माय-बहन योजना का भी नक़ल करेंगे। यह सरकार नकलची है।
हम सारा क्रेडिट नीतीश कुमार को देने के लिए तैयार हैं लेकिन यह विजन किसका है? यह विजन मेरा था। प्रधानमंत्री नीतीश कुमार कब चीनी की मिल खुलवायेंगे और लोगों को चाय पिलायेंगे? मुख्यमंत्री ऐसा चाहिए जो अचेत अवस्था में न हो। नीतीश कुमार जी, अपने आप के आसपास बैठे लोगों को पहचानिए। आपका जदयू जदयू नहीं बल्कि भाजपा हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हाईजैक कर लिया है।' इसके जवाब में विजय चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि आप भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हाइजैक करने की कोशिश किये थे, लेकिन आप नहीं कर पाए।
सम्राट और विजय चौधरी यह बोले...
एसआईआर पर सम्राट चौधरी बोले- "जो प्रवासी बाहर जाते हैं, ऐसे 26 लाख लोगों को चिह्नित किया गया है। 2005 में 11 प्रतिशत बिहार से बाहर जाते थे। आज का रिपोर्ट है कि यह दो प्रतिशत से भी कम है। अभी 26 लाख लोग चिह्नित हुए हैं।
चुनाव आयोग में कल नेता विरोधी दल यह कह रहे थे कि भारत निर्वाचन आयोग कोई आंकड़ा नहीं जारी कर रहा है, जबकि यह कागज और आंकड़े सामने हैं। किसी का भी वोट नहीं कट रहा, यह मंत्री विजय चौधरी बता चुके हैं।"
इससे पहले मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा- "सभी नेता, विधायक अपना नाम तो अपडेट करा रहे हैं और जनता को भ्रमित कर रहे हैं कि पुनरीक्षण बंद करा दिया जाना चाहिए। 95 प्रतिशत वोटरों की जांच के बाद इसे रोकने की इस तरह की जिद करना गलत है। चुनाव आयोग ने अबतक कोई ऐसा काम नहीं किया है कि उसकी मंशा पर सवाल उठाया जाए।
संविधान में लिखा है कि जिसे नागरिकता मिली हुई है, वही मताधिकार रख सकता है। बिहार का कोई सही नागरिक मतदाता सूची से बाहर नहीं रहे, यही हमलोग भी चाहते हैं। गहन पुनरीक्षण भी संविधान और लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत है। पुनरीक्षण हर चुनाव के पहले होता है। गहन पुनरीक्षण इतने समय बाद हो रहा है। इसमें फर्क है।
सामान्य पुनरीक्षण में सिर्फ दावे देखे जाते हैं। किसी का नाम जुड़ता या हटाया जाता है, उसमें। अब 22 वर्षों बाद यह जो विशेष गहन पुनरीक्षण हो रहा है। एसआईआर में एक-एक घर में जाकर देखा जाता है कि वह मतदाता घर में हैं कि नहीं।
पिछली बार, 2003 में भी एक महीने में यह काम हुआ था, इस बार भी लगभग उतने ही समय में हो रहा है। फिर दिक्कत क्यों है? मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण पर विभिन्न दलों की राय आपने सुनी है।
उच्चतम न्यायालय में मामला है, फिर भी सदन संचालन की सहूलियत के लिए एसआईआर पर आपने चर्चा की अनुमति दी। सत्ता ने आपत्ति नहीं की। अच्छा लगा कि विपक्ष के नेता ने भी पहली पंक्ति में कहा कि एसआईआर के विरोध में नहीं हैं, लेकिन अंतिम पंक्ति में कहा कि बिहार सरकार गारंटी दे कि कोई मतदाता छूटेगा नहीं।
तो, महोदय सरकार की तरफ से सदन और सभी मतदाताओं को आश्वास्त करना चाहते हैं कि बिहार सरकार भी यही चाहती है कि कोई भी सही मतदाता, मतदाता सूची बाहर नहीं जाए। मतदान का अधिकार सिर्फ नागरिक की करता है। हर व्यक्ति जो यहां रह रहा है, वह मताधिकार नहीं रखता।"