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शुक्रवार, 22 मई 2026

Hajj 2026: अय्याम शुरू होने में अब गिनती के रह गए दिन

पूर्वांचल की मस्जिदों में इसरा ने कराया हज जायरीन के लिए दुआएं 

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dil india live (Varanasi). हज का अय्याम शुरू होने में अब गिनती के दिन रह गए है। इसे देखते हुए हज के लिए सक्रिय रहने वाली संस्था इसरा (ISSRA) वाराणसी द्वारा इज्तेमाई दुआख्वानी का प्रोग्राम 22. 05.2026 जुमा को वाराणसी सहित पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में किया गया। 

वाराणसी में इज्तेमाई दुआख्वानी का मुख्य केन्द्र मुगलिया शाही जामा मस्जिद बादशाह बाग में सारी दुनिया से मक्क-ए-मुकर्रमा पहुंचे हुए हज जायरीन की सेहत व हज बखैरियत मुकम्मल होने और मुल्क में अमनों अमान खुशहाली के लिए इज्तेमाई दुआख्वानी की गई। मौलाना हसीन अहमद हबीबी की सदारत व इसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां के संयोजन में बाद नमाज जुमा यह पूर्व घोषित कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ऐसे ही अपनी अपनी मस्जिदों में पेश इमामों ने पूर्वांचल के जिलों में एक साथ सारी दुनिया से पहुंचे हुए हज जायरीन की सेहत बखैरियत हज मुकम्मल होने व कुबूल होने एवं अपने मुल्क सकुशल वापसी की इज्तेमाई दुआ की गई। साथ ही साथ अपने मुल्क में अमनो-अमान व खुशहाली के लिए भी इज्तेमाई दुआ अल्लाह तआला की वरगाह में हाथ उठाकर की गई। अल्लाह तआला से खुसुसी तौर से दुआ की गई कि मुल्क में अमनो-अमान, आपसी भाईचारे को बरकरार रखते हुए पूरी सादगी के साथ सारे त्योहार सकुशल सम्पन्न हो ताकि गंगा-जमुनी तहजीब के लिए मशहूर शहर बनारस की अपनी खासियत बरकरार रहे और अल्लाह तआला हम सबकों को ऐसी सद्बुद्धि दें कि हम अपने-अपने कर्तव्यों को समझते हुए प्रशासन का पूर्ण सहयोग दें। जिससे बनारस सहित पूरे उ.प्र. व देश में अमनो अमान व खुशहाली कायम रहे। इन जिलों में इज्तेमाई दुआ के इस प्रोग्राम को कामयाब बनाने के लिए हर जिले में इसरा (ISSRA) ने अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त किया था। जिन्होंने इस दुआ के प्रोग्राम को काययाब बनाने में अपना प्रशंसनीय सहयोग प्रदान कर सफल बनाया। उनमें क्रमश बनारस में हाजी सुल्तान, अलहम अंसारी, मो. शाहरूख इम्तियाज अहमद, हाजी नौशाद, मो. फिरोज, मुख्तार अहमद, सेराज, तथा अलहन, जौनपुर से डॉ. शकील, फैजान खलील, गाजीपुर से मकसूद अंसारी, हाजी नसीम, इमरान अनवार अहमद, बलिया में डॉ. बदरेआलम, डा. मो. अरशद असारी, मऊ से डॉ. सरफराज, सलीम अहमद, चंदौली से मो. शाहीद, मो. नफीस, पप्पू, सोनभद्र से हाजी रिजवान, नफीस, महताब आलम व हाजी ताहिर भदोही से इजहार खान बाबू, गोरखपुर से सलाउ‌द्दीन, मो. नदीम, पप्पू, मो. नदीम, इलाहाबाद से मोहम्मद अजहरूद्दीन व महफूज सिद्दीकी, प्रतापगढ़ से महमूद खान, कौशाम्बी में दाउद अहमद, मिर्जापुर में गुलाम रब्बानी, कुशीनगर में हाजी लियाकत अली, सिद्धार्थनगर में मोहम्मद अली, महराजगंज में अहमद हुसैन आदि शामिल थे। 

मुख्य मस्जिदें जहां हुई दुआख्वानी

मस्जिद दायम खां पक्की बाजार के पेश इमाम मौलाना नसीर, मस्जिद हाता उल्फत बीबी के पेश इमाम मौलाना इल्यास कादरी, गफूरी मस्जिद कचहरी के पेश इमाम हाफिज इरफान, मस्जिद लाटशाही बाबा के पेश हाफिज हबीबुर्रहमान, मुगलिया शाही मस्जिद बादशाह बाग के पेश इमाम मौलाना हसीन हबीबी, जहांगीरी मस्जिद हरहुआ बाजार के पेश इमाम हाफिज गुलाम रसूल, नूरी मस्जिद नरिया वाराणसी, तारा मस्जिद कुड़ी मौलाना नुरुददीन, जामा मजिस्द कूड़ी बाजार मौलाना जलील, बड़ी जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जियाउल हक, ईदगाह चोलापुर के पेश इमाम हाफिज जमालुद्दीन, मस्जिद मीरा शाह बाबा हबीबपुरा, चेतगंज के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद नईम, मस्जिद काले खां के पेश इमाम मौलाना हाजी अब्दुल हादी खां, मस्जिद लाल सहतूत औरंगाबाद के पेश इमाम हाजी अश्फाक, छोटी मस्जिद पानी टंकी के पेश इमाम मौलाना निजामुद्दीन, जुमा मस्जिद सदर बाजार के पेश इमाम रूखसार अहमद, जामा मस्जिद राजा बाजार के पेश इमाम मौलाना मजहरूल हक, जामा मस्जिद खाजापुरा गड़ही के पेश इमाम हाजी मौलाना युनूस, मस्जिद आशिक माशूक सिगरा के पेश इमाम मौलाना कमालुद्दीन, जामा मस्जिद काश्मीरीगज खोजवा के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद वाहिद रजा, मस्जिद जलालीपुरा के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद उमर, बड़ी मस्जिद छत्ता तले के पेश इमाम मौलाना कारी साजिद, मस्जिद पिपलानी कटरा के पेश इमाम मौलाना इस्लामुद्दीन।

धानापुर चन्दौली के जुमा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज इलियास शम्श, जामा मस्जिद चकिया चंदौली के पेश इमाम, बडी जामा मस्जिद बड़गवां चंदौली के पेश इमाम हाफिज मकबूल, जुमा मस्जिद सतपोखरी दुलहीपुर के पेश इमाम जैनुल आब्दीन, जामा मस्जिद चहनियों कारी ऐनुल हक, जुमा मस्जिद बडागाव के पेश इमाम हाजी सेराजुद्दीन, नगरा बलिया मदीना मस्जिद के पेश इमाम मौलाना नसीम, बडी मस्जिद गुदड़ी बाजार बलिया के पेश इमाम मौलाना अजहर, मस्जिद विशुनीपुर के पेश इमाम कारी नौशाद अहमद, बड़ी मस्जिद उमरगंज के पेश इमाम मौलाना आजम, जामा मस्जिद बेल्थरा रोड के पेश इमाम मौलाना मंजूर, मस्जिद कामिल शाह रहमतुल्ला अलैह के पेश इमाम वलिदपुर, मऊ में शाही मस्जिद कोपागंज के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद नजीर शाह, जौनपुर में शाही बड़ी मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती मौलाना फैसल, जामा मस्जिद बदरूल इस्लाम शाहगंज जौनपुर के पेश इमाम मौलाना हमजा, जामा मस्जिद मोहम्मदाबाद आजमगढ़ के पेश इमाम हाफिज शाहजहां, जुमा मस्जिद महराजगंज मौलाना मोइनुद्दीन, अस्करगंज, गोखपुर के पेश इमाम मौलाना अनीस, जामा मस्जिद कुशीनगर के पेश इमाम हाजी लियाकत अली, मस्जिद स्टेशन रोड प्रतापगढ़ के पेश इमाम मौलाना रियाजुल हसन कासमी, जुमा मस्जिद ओबरा के पेश इमाम कारी मोहम्मद असलम, भदोही, जामा मस्जिद कल्लन शाह तकिया के पेश इमाम हाफिज अच्छे, गाजीपुर जामा मस्जिद आदि पूर्वांचल के सभी मस्जिदों में एक साथ पूरे मुल्क में खुशहाली एवं अमनो अमान की दुआख्वानी हुई।

 दुआख्वानी के मौके पर अलहम अंसारी, मो इम्तियाज, मो. शाहरूख, हाजी नौशाद, सेराज अहमद, मुख्तार मोहममद फिरोज, सेराज अहमद आजाद, मौलाना शाबान, मोहम्मद असलम, मोहम्मद युसूफ, रेयाज, निजाम, हाजी शमसुद्दीन, हाजी करीमुद्दीन, मो. शफीक, राजू, हाजी शुऐब, तथा इसरा के पदाधिकारीगण एवं सदस्यगण मौजूद थे।

गुरुवार, 20 मार्च 2025

Ramzan mubarak (19)-रमजान नेकियों का मौसम-ए-बहार

जल्दी करें कहीं रमजान की दौलत से महरूम न रह जाएं

Varanasi (dil india live)। बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का मौका देने वाला मुक़द्दस रमज़ान का दूसरा अशरा पूरा होने वाला है। इस मुकद्दस महीने की रूहानी चमक से दुनिया रोशन है, और फिजा में घुलती अजान और दुआओं में उठते हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे कि मिसाल पेश कर रहे हैं। दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने का रास्ता दिखाने वाला माहे रमजान में भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी आदि सभी बुराइयों पर लगाम लगाने की कोशिश रोजेदार को अल्लाह के बेहद नजदीक पहुंचा देती है। माहे रमजान में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम इच्छाओं को रोकता है। बदले में अल्लाह अपने उस इबादत गुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है। इसके बावजूद भी बहुत से लोग इस माहे मुबारक की खूबियों से अब भी दूर हैं। उनसे यही कहना है कि जल्दी करें कहीं रमजान की दौलत से महरूम न रह जाएं।

इस्लाम की पांच बुनियादों में रोजा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। रमजान इंसान के अंदर जिस्म और रूह है। आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैं, जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते है।

अमूमन 30 दिनों के रमजान माह को 10-10 दिन केे तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा ‘रहमत’ का है। इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा ‘मगफिरत’ का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है। जबकि तीसरा अशरा 'जहन्नुम से आजादी' का है। इस आखिरी अशरे में रब रोज़ा रखने वाले को जहन्नुम से आजाद कर देता है।

नेकियों और इबादत का महीना रमज़ान 

महीने भर के रोज़े  रखना, रात में तरावीह की नमाज़ पढना, क़ुरान की तिलावत करना, एतेकाफ़ में बैठना, अल्लाह से दुआ मांगना, ज़कात देना, अल्लाह का शुक्र अदा करना। इसीलिये इस माह को नेकियों और इबादतों का महीना माना जाता है। तरावीह की नमाज़ में महीना भर कुरान पढना। जिससे क़ुरान पढना न आने वालों को भी क़ुरान सुनने का सबाब ज़रूर मिलता है। रमजान को नेकियों का मौसम-ए-बहार कहा गया है। रमजान को नेकियों का मौसम भी कहा जाता है। इस महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत ज्यादा करता है। अपने अल्लाह को खुश करने के लिए रोजो के साथ, कुरआन की तेलावत, जकात, फितरा, खैरात, सदका निकालता है। यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का है। इसलिए उनकी भरपूर मदद की जाती है। या अल्लाह हर मुुसलमान को रोज़ा रखने कि तौफीक देेे…आमीन।

  • हाजी फारुख खां 
(जनरल सेक्रेटरी इसरा, वाराणसी )