परम्परायें ही हमे जड़ो से जोड़ती है - प्रो.धनजंय सिंह
dil india live (Varanasi).वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को आईसीएसएसआर के सहयोग से आयोजित 'वाराणसी के सांस्कृतिक गलियारे की कला, शिल्प और लोक परंपरा में संरक्षित पवित्र भूमि और विरासत' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता आईसीएसएसआर, नई दिल्ली के सदस्य सचिव प्रो.धनंजय सिंह ने कहा कि हमारी संस्कृति, हमारी परम्परा ही हमें हमारी जड़ो से जोड़ती है, हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को जानना होगा। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एक मॉडल प्रतिमान के रूप में उभर कर सामने आया है, हमारे पास ऐसी अनगिनत स्वरूप है जो हमारे संस्कृति के साथ साथ अर्थतंत्र को भी मजबूती प्रदान करते है।
विशिष्ट वक्ता नागरी प्रचारिणी सभा, काशी के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने कहा कि काशी को सिर्फ हेरिटेज शहर कह कर काम नही चलाया जा सकता, प्राचीनता, पुरातनता तो काशी के कण कण में व्याप्त है। काशी गंगा की तरह प्रवाहमान होकर विकसित होने वाला शहर है। आईआईटी बीएचयू की विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. अमिता सिन्हा ने मणिकर्णिका घाट पर आधारित पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दिया। अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर संजय कुमार ने कहा कि बनारस स्थिर रहने वाला शहर नही है, इतिहास में ना जाने कितनी बार इसका विंध्वस हुआ और उतनी ही बार इसका विकास हुआ। इस शहर को कोई नियंत्रित नही कर सकता, यह स्वयं से संचालित होता है। इसके पूर्व संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यापर्ण से हुआ।
स्वागत कॉलेज के का. प्राचार्य प्रो.मिश्रिलाल, विषय स्थापना डॉ. महिमा सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. इंद्रजीत मिश्रा ने दिया। विभिन्न सत्रों में प्रो. आरती निर्मल, डॉ. विनीता चंद्रा, डॉ. जसविंदर कौर, भानुमति मिश्रा आदि विद्वानों ने भी विचार रखे। इस अवसर पर विभाग के डॉ. नजमुल हसन, डॉ. प्रज्ञा अग्रवाल, डॉ. आराधना सिंह, खितेश विराट शर्मा, शुभम कुमार, शीयुक्ता बासनेट, अनुजा रंजन सहित अन्य विभागों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।




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