शुक्रवार, 6 मार्च 2026

Ramadan ka Paigham 16 : यहां जानिए कद्र वाली रात की सच्चाई

हज़ार रातों में अफज़ल है शबेकद्र की एक रात



Varanasi (dil India live)। रमज़ान महीने की इबादतों के क्या कहने। अल्लाह हो अकबर। रब का आफर केवल इसी महीने ज्यादा रहता है वो इसलिए भी की यह महीना अल्लाह का महीना है जिसके शुरू होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। इस महीने के आखिरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें ताक रातें कहा जाता है। ये हैं रमज़ान की 21, 23, 25, 27 व 29 वीं की शब। इममें से कोई एक शबेकद्र की रात होती है। यह रात हजार महीनों से बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि इन पांचों रातों में मुस्लिम मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। यही वजह है कि मर्द ही नही महिलाएं और बच्चे भी घरों में रात जागकर इबादत करते दिखाई देते हैं। 

उलेमा कहते हैं कि रब कहता है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। उस रात का नाम शबे कद्र है। यानी यह कद्र वाली रात है कि जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। यह रात बड़ी बरकतों वाली रात होती है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में रब कुबूल करता है। ओ पाक परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके में हम सबको जहन्नुम की आग से बचा और रमज़ान की इबादत की तौफीक दे... आमीन।


हाफ़िज़ कारी शाहबुद्दीन 

(उस्ताद मदरसा फारुकिया, रेवड़ी तालाब वाराणसी)


 

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