दुनिया में हम रहें न रहें, पर वतन रहे...
मुशायरा व कवि सम्मेलन में पहुंचे दोहा कतर से भी शायर
Mohd Rizwan
Chandauli (dil India live)। स्प्रिंग स्काई होटल मुगलसराय में उर्दू शिक्षक चंदौली व मीरास फाउंडेशन लखनऊ के सौजन्य से महफिले मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता मशहूर उस्ताद शायर आबिद हाशमी ने तो मंच संचालन डॉ अज़हर साईद (डायट लेक्चरर उर्दू) ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर अदीब श्री अतीक़ अंज़र (दोहा क़तर) की उपस्थिति ने मुशायरा और कवि सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय बना दिया। विशिष्ट अतिथि प्रो. नसीम अहमद (पूर्व विभाग अध्यक्ष उर्दू विभाग ,काशी हिंदू विश्वविद्यालय) ने स्वागत भाषण देते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के संक्षिप्त इतिहास पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उनकी दो प्रमुख पुस्तकों इंतखाब ए ग़ज़लियत ए सौदा, मुसहफ़फ़ी का दीवान ए हशतुम और मसानवी बहररात मोहब्बत का विमोचन भी मुख्य अतिथि अतीक अंजर एवं अध्यक्ष आबिद हाशमी के हाथों किया गया। इस दौरान,
दुनिया में हम रहें न रहें, पर वतन रहे,
मरने के बाद प्यारा तिरंगा कफ़न रहे...। जैसा कलाम मशहूर शायर अहमद आज़मी ने पेश किया तो मौजूद तमाम लोग देश भक्ति के रंग में रंगते चले गए। इस दौरान मुशायरा एवं कवि सम्मेलन में मुख्य रूप से स्वतंत्रता आंदोलन के वीर सपूतों के बलिदानों को याद करते हुए वर्तमान राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों एवं हिंदू मुस्लिम एकता पर शायरी और कविताएं डॉ. शाद मशरिकी, जमजम रामनगरी, सुहैल उसमानी, आलम बनारसी, आकाश मिश्रा, सुरेश अकेला, डॉ नवीन, इशरत जहां, ज़िया अहसानी, गौहर बनारसी, अशफ़ाक़ुर रहमान शरर, कासीमुद्दीन, दानिश इकबाल तथा शफ़ाअत अली शकूराबादी ने भी प्रस्तुत की।
इस मौके पर धन्यवाद ज्ञापन अक्षर रोमानी द्वारा किया गया। इस अवसर पर बनारस, जौनपुर, भदोही, गाजीपुर, मिर्जापुर एवं चंदौली आदि के श्रोताओं ने शायरी और काव्य पाठ का लुत्फ उठाया।