बुधवार, 25 मार्च 2026

DAV PG College Main दो दिवसीय ICSSR प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

काशी के शिल्पियों ने बनाई दुनिया भर में काशी की पहचान - प्रो. अवधेश प्रधान




dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में आईसीएसएसआर द्वारा प्रायोजित 'वाराणसी के सांस्कृतिक गलियारे की कला, शिल्प और लोक परंपरा में संरक्षित पवित्र भूमि और विरासत' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन बुधवार को समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा काशी के शिल्पी भी काशी की पहचान रहे है, यहां मिट्टी और लकड़ी के बने खिलौने एवं गत्ते के बने मुखौटे जो बनारस की पहचान रहे, उन्हें आज दुनियाभर में विशिष्ट उत्पाद के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि काशी ने शास्त्रीय संगीत के साथ साथ उप शास्त्रीय और लोक संगीत को भी अपनाया। 

विशिष्ट अतिथि बीएचयू के म्यूज़ियोलॉजी विभाग की प्रो. उषा रानी तिवारी ने कहा कि काशी ही एक शहर है जहाँ के विरासत भी जीवंत है, जहाँ परंपराएँ दैनिक जीवन और अनुष्ठानों के माध्यम से निरंतर जीवित रहती हैं। सात वार, नौ त्योहार की उक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वाराणसी में वर्ष भर में लगभग 365 दिनों में 513 त्योहार मनाए जाते हैं, जो इसकी अद्वितीय सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष प्रो. अनीता सिंह ने काशी को विविध दृष्टिकोण से देखने और ऐसे शैक्षणिक संवादों की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसके अलावा विभिन्न सत्रों में दिल्ली विश्वविद्यालय के वरुण गुलाटी ने कहा कि काशी में ज्ञान को अर्जित नही किया जाता है ज्ञान को जिया जाता है। प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा, प्रो. अनूप मिश्रा, प्रो. समीर कुमार पाठक ने भी विचार रखे। 

     संयोजक डॉ. महिमा सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, संचालन श्रीयुक्ता बासनेट एवं धन्यवाद डॉ. इंद्रजीत मिश्रा ने दिया। इस मौके पर विभाग की डॉ. बन्दना बालचंदनानी, डॉ. नजमुल हसन, डॉ. प्रज्ञा अग्रवाल, डॉ. आराधना सिंह, खितेश विराट शर्मा, शुभम कुमार, अनुजा रंजन आदि शामिल रही।


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