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शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025

ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्म गुरु Pope Francis का Vatican City में अंतिम संस्कार कल

सेंट पीटर्स बेसिलिका की मिट्टी में राजकीय सम्मान के साथ होंगे दफ़न 

पोप फ्रांसिस का ईस्टर के दूसरे दिन हुआ था निधन


Vatican City (dil India live). रोमन कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्म गुरु पोप फ्रांसिस का अंतिम संस्कार 26 अप्रैल शनिवार को किया जाएगा। पोप फ्रांसिस का ईस्टर के दूसरे दिन 21 अप्रैल को निधन हो गया था। वर्तमान में पोप फ्रांसिस के पार्थिव शरीर को वेटिकन सिटी के सेंट पीटर्स बेसिलिका में रखा गया है जहां राजकीय सम्मान के साथ वो विश्राम कर रहे है। पोप का अंतिम संस्कार शनिवार 26 अप्रैल को सेंट पीटर्स बेसिलिका में किया जाना है। पोप के अंतिम संस्कार में कई वैश्विक नेता उपस्थित होंगे और उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले नेताओं की सूची काफी लंबी है। पोप फ्रांसिस को अंतिम श्रद्धांजलि देने और उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए प्रिंस विलियम, डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर कई अन्य नेताओं का जमावड़ा लगेगा। बता दें कि भारत की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस सप्ताह के अंत में किए जाने वाले पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए शुक्रवार को वेटिकन सिटी रवाना हो चुकी है। राष्ट्रपति मुर्मू के साथ केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू, अल्पसंख्यक मामलों एवं मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और गोवा विधानसभा के उपाध्यक्ष जोशुआ डी सूजा भी हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपनी पत्नी मेलानिया के साथ पोप के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। ट्रुथ सोशल पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रम्प ने कहा, “मेलानिया और मैं रोम में पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार में जाएंगे। हम वहां होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

केंसिंग्टन पैलेस द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक प्रिंस विलियम शाही परिवार की ओर से वेटिकन में 88 वर्षीय पोप के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। प्रिंस विलियम इस महीने की शुरुआत में रानी कैमिला के साथ रोम आए थे। यहां उन्होंने पोप से वेटिकन में मुलाकात भी की थी। वहीं 10 डाउनिंग स्ट्रीट ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोपीय संघ का कहना है कि आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन रोम पहुंच रहे हैं। पोप को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कैथोलिक चर्च से परे, लाखों लोगों को अपनी विनम्रता और कम भाग्यशाली लोगों के प्रति शुद्ध प्रेम से प्रेरित किया।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए रोम पहुचेंगे। पोप को श्रद्धांजलि देने पहुंचने से पहले उन्होंने कहा कि हम पोप के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। बता दें कि पोप की मृत्यु के बाद मैक्रों ने हिंद महासागर क्षेत्र का दौरा बीच में ही छोड़ दिया था।

पोप फ्रांसिस के गृह देश अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली अंतिम संस्कार में शिरकत करेंगे। बता दें कि पोप का अपने देश अर्जेंटीना की राजनीति के साथ नाजुक रिश्ता था। पोप का जन्म अर्जेंटीना में वर्ष 1936 में हुआ था।

ऐसे ही ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और उनकी पत्नी जंजा पोप के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। इसके बारे में बोलते हुए, लूला ने कहा कि फ्रांसिस ने “उन आर्थिक मॉडलों की कड़ी आलोचना की है, जिन्होंने मानवता के साथ बहुत अन्याय किया है”। इस बीच, ब्राजील ने भी पोप के लिए सात दिन का शोक घोषित किया।

इस अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले अन्य गणमान्य व्यक्तियों में आयरलैंड से प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन, स्पेन से राजा फेलिप और रानी लेटिज़िया, बेल्जियम से राजा फिलिप और रानी मैथिल्डे, प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ, पूर्वी तिमोर से राष्ट्रपति जोस रामोस-होर्ता, जर्मनी से राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर और निवर्तमान चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़, हंगरी से राष्ट्रपति तामस सुल्योक, इटली से राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला और प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, लातविया से राष्ट्रपति एडगर्स रिंकेविक्स, लिथुआनिया से राष्ट्रपति गीतानास नौसेदा, पोलैंड से राष्ट्रपति इली बोलोजान, स्विट्जरलैंड से राष्ट्रपति करिन केलर-सटर, चेक गणराज्य से प्रधानमंत्री पेट्र फियाला शामिल है। 

ये नहीं होंगे अंतिम संस्कार में शामिल 

कुछ ऐसे नेता भी हैं जो पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार में हिस्सा नहीं लेंगे। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल है। ये ऐसे नेता हैं जो अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। रुस के राष्ट्रपति पुतिन अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। अंतिम संस्कार में शामिल ना होने का क्रेमलिन ने कोई विशेष कारण नहीं बताया है। मगर अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के गिरफ्तारी वारंट के कारण उनकी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा सीमित हो चुकी है। उन्होंने कैथोलिक चर्च के प्रमुख कार्डिनल केविन फैरेल को एक संदेश भेजा। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि वह अंतिम संस्कार में उपस्थित नहीं होंगे। उनके अलावा ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कैरी, चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक और नीदरलैंड के राजा विलेम अलेक्जेंडर आदि भी पोप के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे।

सोमवार, 30 मई 2022

Bishop Varanasi: 2015 में आज ही बिशप बने थे बिशप यूजीन जोसेफ

बिशप बनने के सात वर्ष पूरा होने पर सभी दे रहे हैं बधाई

वाराणसी धर्म प्रांत के तीसरे धर्माध्यक्ष हैं बिशप यूजीन जोसेफ 

Varanasi (dil India live)। आज ही के दिन 30 मई 2015 में पोप फ्रांसिस ने फादर यूजीन जोसेफ को वाराणसी का नया बिशप नियुक्त किया था। इस घोषणा के बाद जहां वाराणसी धर्म प्रांत को तीसरा बिशप मिल गया था वहीं फादर यूजीन जो बिशप राफी मंजली के इलाहाबाद तबादले के बाद से प्रशासक के अस्थाई पद पर आसीन थे। वो फादर से बिशप यूजीन हो गये थे।

जी हां आज वही दिन है जब  वैटिकन से घोषणा हुई थी कि वाराणसी के नये धर्माध्यक्ष बिशप यूजीन बना दिए गए हैं। तब नई दिल्ली स्थित देश के कैथोलिक बिशप सम्मेलन के मुख्यालय व वाराणसी के बिशप हाउस में इसकी सूचना मिलते ही खुशी की लहर दौड़ गई थी। आज उन्हें बिशप बनाए जाने के सात वर्ष पूरा होने पर न सिर्फ मसीही समुदाय बल्कि सभी उन्हें विश कर रहे हैं।

कौन हैं बिशप यूजीन जोसेफ

बिशप का जन्म 31 जुलाई, 1958 को राजकमंगलम, नागरकोइल, तमिलनाडु में हुआ था। कार्मेल स्कूल, नागरकोइल से स्कूली शिक्षा के बाद, उन्होंने सेंट थेरेसा के माइनर सेमिनरी, अजमेर और फिर सेंट चार्ल्स सेमिनरी, नागपुर, महाराष्ट्र से शिक्षा लिया। उन्हें 10 अप्रैल 1985 को वाराणसी सूबा के लिए एक पुजारी नियुक्त किया गया था। उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय, वाराणसी से अंग्रेजी में मास्टर डिग्री और टाउनसेंड स्कूल ऑफ बिजनेस, न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट में मास्टर्स की शिक्षा प्राप्त किया। वह अंग्रेजी, हिंदी और तमिल के जानकार है।

एक पुरोहित के रूप में वे सेंट थॉमस पैरिश, शाहगंज में सहायक पादरी और सेंट थॉमस इंटर कॉलेज में थे, माइनर सेमिनरी के वाइस-रेक्टर। वह सेंट जॉन इंटर-कॉलेज के प्रिंसिपल भी थे, अवर लेडी ऑफ लूर्डेस पैरिश, गाजीपुर के पुरोहित भी रहे। वे क्षेत्रीय ग्रामीण केंद्र के निदेशक और नव साधना कॉलेज, वाराणसी के प्राचार्य, सेंट मैरीज अस्पताल, वाराणसी के निदेशक और डायोसीज़ के एजुकेशन सोसाइटी के विक्टर महासचिव व वाराणसी के सेंट मैरी स्कूल ऑफ नर्सिंग के संस्थापक निदेशक समेत  विभिन्न पदों पर रहने के बाद 2015 में वाराणसी धर्म प्रांत के बिशप बनाते गये। वो 2016 में रोम की यात्रा पर गए तो उन्हें ईसाई धर्म के दुनिया के सबसे बड़े धर्म गुरु पोप फ्रांसिस से मुलाकात करने और उनका आशीष पाने का सुअवसर प्राप्त हुआ।