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गुरुवार, 3 सितंबर 2026

Education News 2 September 2026 Varanasi: युवाओं को मिला सजग खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश

भोजन केवल व्यक्तिगत पसंद नहीं, अनेक सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारकों का परिणाम : प्रो. अंशु शुक्ला

Education News dhirendra mahila Mahavidyalaya Varanasi September 2026


dil india live (Varanasi). राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर धीरेंद्र महिला पी.जी. कॉलेज के गृह विज्ञान विभाग द्वारा छात्राओं में संतुलित आहार, सजग खान-पान एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा की प्रो. अंशु शुक्ला ने “आप वही हैं जो आप खाते हैं, लेकिन आप जो खाते हैं, उसका चुनाव कौन कर रहा है? युवाओं के खान-पान के चुनाव और उन्हें प्रभावित करने वाले छिपे कारक” विषय पर विद्यार्थियों को रोचक कहानी एवं संवादात्मक शैली में संबोधित किया।

अपने व्याख्यान को पारंपरिक पोषण संबंधी उपदेश से अलग रखते हुए प्रो. अंशु शुक्ला ने एक काल्पनिक युवा पात्र की दैनिक जीवनचर्या के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया कि भोजन का चुनाव हमेशा उतना सरल और स्वतंत्र नहीं होता, जितना पहली दृष्टि में दिखाई देता है। उन्होंने विद्यार्थियों के समक्ष यह प्रश्न रखा कि जब कोई युवा नाश्ता छोड़ता है, भोजनालय में उपलब्ध त्वरित भोजन का चयन करता है, सामाजिक माध्यमों पर किसी खाद्य पदार्थ को देखकर उसे खाने की इच्छा महसूस करता है अथवा किसी आकर्षक विज्ञापन से प्रभावित होकर कोई खाद्य पदार्थ खरीदता है, तो क्या वह प्रत्येक स्थिति में पूरी तरह स्वतंत्र होकर निर्णय ले रहा होता है?

डिजिटल माध्यमों की भूमिका से इच्छा प्रभावित

उन्होंने कहा कि हमारे खान-पान के निर्णय केवल व्यक्तिगत रुचि या इच्छा से निर्धारित नहीं होते। परिवार, मित्र-समूह, आर्थिक स्थिति, भोजन की उपलब्धता, समय का अभाव, सुविधा, स्वाद, आदत, तनाव, सामाजिक परिवेश, विज्ञापन, संचार माध्यम तथा सामाजिक माध्यम जैसे अनेक कारक हमारे भोजन संबंधी व्यवहार को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से युवाओं के जीवन में सामाजिक माध्यमों और डिजिटल माध्यमों की बढ़ती भूमिका ने भोजन के प्रति उनकी पसंद और इच्छाओं को प्रभावित करने की नई परिस्थितियां उत्पन्न की हैं।


प्रो. शुक्ला ने विद्यार्थियों को समझाया कि भूख और किसी विशेष खाद्य पदार्थ की तीव्र इच्छा एक समान नहीं होती। कई बार व्यक्ति शारीरिक रूप से भूखा न होने पर भी किसी खाद्य पदार्थ को देखकर, उसकी सुगंध से अथवा उसके प्रचार से उसे खाने के लिए प्रेरित हो जाता है। इसलिए स्वस्थ खान-पान की दिशा में पहला कदम भोजन पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि अपने भोजन संबंधी व्यवहार को समझना और उसके पीछे के कारणों के प्रति सजग होना है।

उन्होंने भोजन के आकर्षक प्रचार एवं पैकेट पर लिखे विभिन्न दावों के प्रति भी विद्यार्थियों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि केवल “बहु-अनाज”, “अधिक प्रोटीन”, “प्राकृतिक” अथवा “शून्य शर्करा” जैसे आकर्षक शब्दों को देखकर किसी खाद्य पदार्थ को पूर्णतः स्वास्थ्यवर्धक मान लेना उचित नहीं है। उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ के लेबल, संघटक, मात्रा तथा पोषण संबंधी जानकारी को समझकर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि “पैकेट के सामने लिखे दावे से अधिक महत्वपूर्ण उसके पीछे दी गई वास्तविक जानकारी है।”

भोजन में “अच्छा” और “बुरा” की प्रवृत्ति 

व्याख्यान के दौरान उन्होंने भोजन को “अच्छा” और “बुरा” कहकर देखने की प्रवृत्ति पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वस्थ खान-पान का अर्थ किसी एक खाद्य पदार्थ को पूर्णतः त्याग देना नहीं है, बल्कि संतुलित, विविधतापूर्ण और संयमित आहार पद्धति विकसित करना है। एक बार पिज्जा, मिठाई अथवा किसी अन्य पसंदीदा खाद्य पदार्थ का सेवन व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य का निर्धारण नहीं करता; वास्तविक महत्व उसके दीर्घकालीन खान-पान के स्वरूप और आदतों का होता है।

अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन

युवाओं में बढ़ते त्वरित एवं अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन पर चर्चा करते हुए प्रो. शुक्ला ने कहा कि व्यवहार में परिवर्तन हमेशा एक दिन में संभव नहीं होता। यदि कोई युवा जंक फूड का सेवन तत्काल पूरी तरह बंद नहीं कर सकता, तो उसे लेकर अपराधबोध उत्पन्न करने के बजाय उसकी मात्रा एवं आवृत्ति को धीरे-धीरे कम करने तथा उसके स्थान पर अधिक पौष्टिक और संतुलित विकल्पों को शामिल करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य का लक्ष्य पूर्णतावाद नहीं, बल्कि निरंतर बेहतर विकल्पों की ओर बढ़ना होना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों का ध्यान भारतीय खान-पान की समृद्ध परंपरा की ओर भी आकर्षित किया। दाल, अनाज, मोटे अनाज, सब्जियाँ, मौसमी फल, दही, अंकुरित अनाज, मेवे एवं बीज जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों में उपलब्ध पोषण विविधता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली अपनाने का अर्थ अपनी पारंपरिक खाद्य विरासत को भूल जाना नहीं है। स्थानीय, मौसमी और विविधतापूर्ण खाद्य पदार्थों को आधुनिक जीवनशैली के साथ संतुलित रूप से जोड़ा जा सकता है।

प्रो. शुक्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वस्थ जीवन केवल भोजन तक सीमित नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त जल सेवन, नियमित शारीरिक सक्रियता, पर्याप्त नींद, तनाव का उचित प्रबंधन तथा सजग भोजन व्यवहार एक समग्र स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि शारीरिक सक्रियता को केवल व्यायामशाला तक सीमित न मानें, बल्कि पैदल चलना, सीढ़ियों का उपयोग करना, खेलना, नृत्य करना तथा दैनिक जीवन में सक्रिय रहना भी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण संदेश “ज्ञान और व्यवहार के बीच का अंतर” रहा। प्रो. शुक्ला ने कहा कि अधिकांश युवाओं को यह जानकारी होती है कि फल-सब्जियाँ उपयोगी हैं, नियमित शारीरिक सक्रियता आवश्यक है और अत्यधिक अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन उचित नहीं है; फिर भी केवल जानकारी व्यवहार में परिवर्तन की गारंटी नहीं देती। इसके लिए व्यक्ति को अपने समय, सुविधा, आर्थिक परिस्थितियों, सामाजिक परिवेश और आदतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे छोटे एवं व्यावहारिक परिवर्तन करने होंगे जिन्हें वह लंबे समय तक बनाए रख सके।

इसी संदर्भ में उन्होंने विद्यार्थियों को भोजन चुनते समय स्वयं से पाँच प्रश्न पूछने का सुझाव दिया—मैं क्या खा रहा/रही हूँ? मैं इसे क्यों खा रहा/रही हूँ? मैं कितना खा रहा/रही हूँ? मैं इसे कितनी बार खाता/खाती हूँ? और मेरे समग्र आहार में क्या कमी रह जा रही है? उन्होंने कहा कि इन प्रश्नों का उद्देश्य स्वयं को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि भोजन के प्रति सजगता विकसित करना है।

कार्यक्रम में भारत सरकार की आहार क्रांति पहल (GIST Initiative) के अंतर्गत उत्तम पोषण एवं उत्तम स्वास्थ्य के महत्व के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार, स्थानीय एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थों के महत्व तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ राष्ट्र की आधारशिला स्वस्थ एवं जागरूक युवा पीढ़ी से ही निर्मित होती है।

कार्यक्रम का संचालन गृह विज्ञान विभाग की डॉ. अर्चना सिंह ने किया। विभाग की ओर से रेखा पटेल एवं तनुश्री मिश्रा ने मुख्य वक्ता प्रो. अंशु शुक्ला एवम् सुश्री शालिनी प्रिया, शोध क्षात्रा का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग की विनीता जी ने आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को पोषण संबंधी जानकारी देने के साथ-साथ अपने दैनिक भोजन संबंधी निर्णयों को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान किया। व्याख्यान का मूल संदेश यही रहा कि स्वस्थ भविष्य किसी एक बड़े संकल्प से नहीं, बल्कि प्रतिदिन लिए जाने वाले छोटे-छोटे सजग निर्णयों से निर्मित होता है। युवाओं के लिए आवश्यक है कि वे भोजन को केवल स्वाद और तात्कालिक सुविधा के आधार पर न देखें, बल्कि उसके पोषण, आवश्यकता, मात्रा, आवृत्ति और अपने समग्र स्वास्थ्य के संदर्भ में समझदारी से चुनाव करें।

“भोजन आपका चुनाव है, लेकिन उस चुनाव को प्रभावित करने वाली दुनिया को पहचानना भी उतना ही आवश्यक है।” 
प्रो.अंशु शुक्ला 

शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

Education News Varanasi Uttar Pradesh 07August 2026: युवाओं से नशामुक्त जीवन अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान

राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता संगोष्ठी का हुआ आयोजन 

Education News Varanasi UP August 2026


dil india live (Varanasi). महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के महाराजा डॉ. विभूति नारायण सिंह परिसर में 07August 2026 को “नशा मुक्त भारत अभियान पखवाड़ा” के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा नशा मुक्ति जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने नशे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से नशामुक्त जीवन अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। इस अवसर पर, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. महेश कुमार, डॉ. अर्चना पाण्डेय, डॉ. राम प्रकाश सिंह यादव एवं डॉ. सर्वेश मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त किए।

Education News Varanasi UP 07August 2026

Education News Varanasi UP 07August 2026

कार्यक्रम के अंत में स्वयंसेवकों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने बताया कि अभियान के अंतर्गत परिसर में विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं को नशामुक्त भारत के निर्माण में सहभागी बनाना है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अर्चना कुमारी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रमेश मिश्रा ने किया। इस अवसर पर शिक्षकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

UP: Varanasi Main Mukhyamantri युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत कार्यशाला

रविन्द्र जायसवाल ने किया युवाओं से स्वरोजगार करने के लिए उद्यमिता की भावना  विकसित करने का आह्वान

Varanasi (dil India live). मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 17 जुलाई को दो सत्र- पूर्वाह्न 10.00 से 1.00 बजे तथा अपराह्न 2.00 से 5.00 बजे तक  कार्यशाला का सफल आयोजन कमिश्नरी ऑडिटोरियम, वाराणसी में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन रविन्द्र जायसवाल थे, व विशिष्ट अतिथि मुख्य विकास अधिकारी वाराणसी तथा संयुक्त आयुक्त उद्योग, वाराणसी मंडल, वाराणसी की गरिमामयी उपस्थित रही। संयुक्त आयुक्त उद्योग, वाराणसी मंडल , वाराणसी द्वारा स्वागत भाषण एवं विषय प्रवर्तन किया गया।मंत्री रविन्द्र जायसवाल द्वारा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान में गारंटी मुक्त, ऋण मुक्त 5 लाख तक की परियोजना के लिए ऋण प्राप्त होने की सुविधा का उल्लेख करते हुए युवाओं द्वारा स्वरोजगार करने के लिए उद्यमिता की भावना  विकसित करने का आह्वान किया गया। स्थानीय विशेषता के अनुरूप आधुनिक ढंग से अपने उद्यम/व्यवसाय को प्रारंभ करने तथा इसे विकसित करने की सलाह दी गई। मंत्री रविन्द्र जायसवाल द्वारा समस्त संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास कर स्वरोजगार प्रेरणा का अभियान चलाए जाने का भी सुझाव दिया गया।


मुख्य विकास अधिकारी ने अपने संबोधन में युवाओं को स्वयं पर विश्वास करने, अपने प्रोजेक्ट हेतु आवश्यक तैयारी कर लगन से काम करने को कहा गया। इसके अतिरिक्त योजना के प्रचार प्रसार  के लिए आयोजित इस कार्यशाला का पूरा लाभ उठाने तथा अपने अन्य साथियों को भी योजना के बारे में बताने , पंजीकरण कराने को कहा गया। योजना के जनपद में क्रियान्वयन में प्रगति  की प्रशंसा की गई। मंत्री जी एवं अन्य अतिथिगण द्वारा योजनांतर्गत 5 लाभार्थियों को विभिन्न कार्यों के लिए ऋण वितरण किया गया। समाधान समिति के विशेषज्ञों द्वारा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। विशेषज्ञों द्वारा इनोवेटिव बिजनेस मॉडल, फ्रेंचाइजी बिजनेस मॉडल, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने, सीएम युवा हेल्पलाइन पोर्टल, आवेदन प्रक्रिया के संबंध में विशेष प्रस्तुतीकरण किया गया।


कार्यशाला में उपस्थित विद्यार्थियों, लाभार्थियों, बैंकर्स की जिज्ञासाओं का समाधान समिति के विषय विशेषज्ञ, अग्रणी जिला प्रबंधक एवं उद्योग विभाग के अधिकारी गण द्वारा किया गया। मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन सहायक आयुक्त उद्योग द्वारा किया गया। कार्यशाला का आयोजन कार्यालय -उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र, वाराणसी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में उद्योग विभाग , युवा कल्याण,खाद्य प्रसंस्करण, एन आर एल एम,हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग आदि के अधिकारी/कार्मिक गण, खंड विकास अधिकारी, विभिन्न आई टी आई, महाविद्यालय /विश्वविद्यालय, तकनीकी शिक्षा के शिक्षक गण, अंतिम वर्ष एवं पासआउट विद्यार्थी, संभावित लाभार्थी, सी एस सी संचालक, बैंक अधिकारी,बैंक जनपद समन्वयक आदि उपस्थित रहे।

गुरुवार, 12 जनवरी 2023

Dav pg college nss camp

जीवन में सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी



Varanasi (dil india live). राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर गुरूवार को डीएवी पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना की सात इकाईयों द्वारा स्वामी विवेकानन्द को समर्पित एक दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में स्वयंसेवकों द्वारा महाविद्यालय परिसर की साफ सफाई की गयी। खेल मैदान आदि जगहों पर जमा प्लास्टिक के कचरों को साफ कर स्वच्छता का संदेश दिया। इसके अलावा एक जनजागरूकता रैली भी निकाली गयी जो मैदागिन, कबीरचौरा से होते हुए महाविद्यालय पहुॅची। रैली में स्वयंसेवक स्वामी विवेकानन्द से जुड़े स्लोगन एवं नारे लगाते हुए चल रहे थे।

इस अवसर पर स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कार्यक्रम अधिकारियों ने कहा कि युवाओं को स्वामी विवेकानन्द के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। जीवन में आगे बढ़ना है तो सर्वप्रथम जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना होगा। वक्ताओं ने यह भी कहा कि एक सच्चा गुरू आपके जीवन को बदल सकता है। स्वामी विवेकानन्द के जीवन को बदलने में भी उनके गुरू स्वामी रामकृष्ण परमहंस का योगदान था।

शिविर के प्रारम्भ में स्वयंसेवकों ने लक्ष्य गीत प्रस्तुत किया। उसके बाद डॉ. नजमूल हसन ने रासेयो का उद्देश्य बताया। डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने स्वअनुशासन के विषय में रौशनी डाली। डॉ. बन्दना बालचन्दनानी ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख किया। शिविर में डॉ. कल्पना सिंह, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. सिद्धार्थ सिंह एवं डॉ. शशिकान्त यादव ने भी सम्बोधित किया। कुमार पारितोष, गोविन्द नारायण वैभव, रौनक आदि स्वयंसेवकों ने स्वामी विवेकानन्द पर विचार प्रकट किया। कार्यक्रम में सौ से अधिक स्वयंसवेक शामिल रहे।