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रविवार, 6 सितंबर 2026

ISSRA Varanasi का Special Hajj कैंप में उमड़े जायरीन

कैंप में हज पर जाने वाले जायरीन को मिला निःशुल्क मेडिकल फॉर्म

ISSRA Varanasi का Special Hajj कैंप September 2026
इसरा के हज कैंप में निःशुल्क मेडिकल स्क्रीनिंग फार्म लेने जुटे लोग 


dil india live 

Varanasi (वाराणसी)। इंडियन सोसाइटी फॉर सोशल रिवॉल्यूशन एंड एक्शन (ISSRA) मुख्यालय उल्फत बीबी का हाता, अर्दली बाजार, वाराणसी में आज 06.09.2026 को स्पेशल हज कैंप मौलाना हसीन हबीबी अहमद हबीबी की सदारत में सम्पन्न हुआ।

कैंप में हज 2027 के लिए आरजी तौर पर चुने गये हज जायरीन के लिए निःशुल्क मेडिकल स्क्रीनिंग एवं फिटनेस प्रोफार्मा का वितरण किया गया साथ ही उन्हें आभा आईडी जनरेट करने की मुकम्मल जानकारी दी गई एवं हज से मुताल्लिक शुरूआती जानकारी भी दी गई। हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा दिनांक 01.09.2026 को जारी सर्कुलर नं.-10 जारी किया गया है जिसके बारे में कैंप में आएं हुए लोगों को पूरी जानकारी दी गई।


इन जिलों के जायरीन रहे मौजूद
इस मौके पर वाराणसी से मो. अशफाक, तसलीम, नुरूल होदा, मोहम्मद हबीब, मंसूर, परवेज, हमीदुर्रहान, इकबाल अहमद, मिर्जापुर से जुनैद अहमद, परवेज आलम, गाजीपुर से शमसुद्दीन नदीम, जौनपुर से मो. शकील, मोहम्मद रशीद, एकबाल अहमद, शम्स परवेज, गाजीपुर से शमसुद्दीन, मुर्सलीम, देवरिया से मकसूद, मुहम्मद तालीम, चंदौली से मेराज आलम, अब्दुल माजिद, सुलतान अहमद, फुरकान, सुहैल खान, भदोही से आफताब अहमद, सलीम मौजूद रहे।

ख़्वातीन की हुई पर्दे में अलग ट्रेनिंग 

औरतों में लेडीज ट्रेनर सबीका खान, निकहत फातमा और सनम खान के द्वारा औरतों को पर्दे के एहतेमाम के साथ निःशुल्क मेडिकल स्क्रीनिंग एवं फिटनेस प्रोफार्मा जहां वितरित किया गया वहीं दूसरी ओर उन्हें हज यात्रा की तमाम जरूरी जानकारियां दी। इस मौके पर आसिया खातून, खलीफुन निशा, सलीम आरा, शबाना आजमी, मुमताज, जाहिरा, रन्नो, किसमत जहां, शबनम तथा इसरा के पदाधिकारीगण तथा सदस्यगण मौजूद थे।

कार्यक्रम की निजामत इसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां ने करते हुए हैं क्या है इस पर बारीकी से रौशनी डाली तो इसरा के अध्यक्ष शाहरुख खान ने लोगों का आभार व्यक्त किया।

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रविवार, 12 जुलाई 2026

UP Varanasi News: Hajj 2026 मुकम्मल कर kaba से kashi लौटे जायरीन का "जश्न-ए-हुज्जाज-ए-कराम" में हुआ खैरमकदम

बोलें हाजी : काबा पर पड़ी नज़र तो खूब बहें आंसु, भूल गए दुआएं 

ISSRA के तत्वावधान में वाराणसी में हज 2026 से लौटे हाजी और हाजियों का सम्मान समारोह हुआ। जायरीनों ने अपने अनुभव साझा किए और 2027 में हज पर जाने की दुआ मांगी। इस पर तमाम लोगों ने आमीन कहा। यहां जानिए पूरी खबर देखिए वीडियो dil india live पर...

dil india live (Varanasi). इंडियन सोसाइटी फॉर सोशल रिवोल्यूशन एंड एक्शन (Issra) के तत्वावधान में हज 2026 से मुकम्मल करके लौटे हज्जीन/हाजियों के एजाज में "जश्न-ए-हुज्जाज-ए-करम" का एहतमाम Sunday 12 जुलाई 2026 को ग्रीन पैलेस, happy home English School (हैप्पी होम इंग्लिश स्कूल) के पास, आजाद नगर कॉलोनी, मकबूल आलम रोड वाराणसी में मौलाना अब्दुल हादी खान हबीबी की सरपरस्ती में किया गया।

अरबी रुमाल से हुआ खैरमकदम  
इसरा की ओर से जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां ने कार्यक्रम में आएं हाजियों का जोरदार खैरमकदम किया गया। हाजियों को अरबी रुमाल और हज्जीन को ख़्वातीन द्वारा अरबी दुपट्टा पहनाकर उनका खैरमकदम किया गया।



हाजियों ने साझा की मक्का और मदीना की यादें 

हज से लौटकर आएं हाजियों ने अपने जज्बात बयां किए, वाराणसी के हाजी इश्तियाक हुसैन ने कहा कि जब रौज-ए-अकदस सामने आया तो आंखों में सिर्फ आंसू थे। न दिल की बात याद रही न दुआएं, सब कुछ भूल गए बस आंसू बहते रहें। गाजीपुर के हाजी हनीफ ने ISSRA द्वारा दिए गए हज ट्रेनिंग कैंप और पर्चे की तारीफ की। कहा इससे हज के अरकान पूरे करने में काफी सुविधा हुई। मऊ के हाजी खुशीद ने कहा कि काबा शरीफ और मस्जिद-ए-नबवी पर अल्लाह की रहमत बरसती है। रामनगर के हाजी मो. इमरान ने कहा कि अल्लाह अपने मेहमानों के लिए फरिश्तों को भेजता है। एक ही दिन में उमराह और कई तवाफ के बाद जब जम-जम पीकर सेहत की दुआ मांगी जाती है तो सारी थकान दूर हो जाती है। 

चंदौली के हाजी डॉ. फिरोज ने कहा कि 40 दिन हज, उमराह और इबादत में कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। तवाफ-ए-विदा के वक्त लगा जैसे रूह जिस्म से निकल जाएगी। जौनपुर के हाजी मोईनुद्दीन ने कहा कि मदीना में रौज-ए-अकदस के सामने रो-रोकर सभी के लिए दुआ मांगी तो अल्लाह ने सभी को हज से सरफराज किया।दूसरे राज्यों के हाजियों की मदद हाजियों ने बताया कि ISSRA के ट्रेनिंग कैंप में सीखे गए अरकान की जानकारी उन्होंने मध्य प्रदेश, कश्मीर, बिहार, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और दिल्ली के हाजियों को भी दी।



कार्यक्रम के अंत में उलेमा और हाजी साहबान ने दुआ की कि जो लोग 2026 में किसी वजह से हज पर नहीं जा सके या जिनकी तमन्ना 2027 के लिए है, अल्लाह उन्हें अगले साल 2027 में हज नसीब फरमाए...इस पर मौजूद लोगों ने आमीन कहा।

इस मौके पर लेडीज हज ट्रेनर सबीहा खातून, चांद अफसाना, सनम खान, निकहत फातिमा सहित हाजिया आशिया बेगम, तबस्सुम बानो, रजिया बेगम आदि मौजूद थी। साथ ही मौलाना हसीन अहमद हबीबी, मौलाना मुबारक, मौलाना निजामुद्दीन, हाफिज हबीबुर्रहमान, कारी शाहबुद्दीन, डाक्टर हम्ज़ा, शफातुल्लाह, हशमतुल्लाह राजू, दाऊद बाबी आदि ISSRA के पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे।


सोमवार, 28 अप्रैल 2025

Hajj Camp main बताया कब मारना है शैतान को कंकरी,कब दी जाएं कुर्बानी

तवाफे जियारत है फर्ज, बिना इसके आपका हज नहीं होगा पूरा 

Varanasi (dil India live). ISSRA, वाराणसी, यूपी द्वारा नस्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प का आयोजन इसरा (ISSRA) मुख्यालय उल्फत कंपाउंड, अर्दली बाजार, वाराणसी में किया गया। हज कैंप की सरपरस्ती मौलाना अब्दुल हादी खाँ हबीबी कर रहे थे तो शहर के मायनाज ओलमा की मौजूदगी में कैंप सकुशल सम्पन्न हुआ। मुख्य ओलमा में हाफिज गुलाम रसूल, मौलाना हसीन अहमद हबीबी आदि ने हज यात्रा पर रौशनी डाली। इससे पहले हज कैंप का आगाज़ हाफिज गुलाम रसूल ने पाक कुरान की तिलावत से किया।


इसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां ने कहा कि हिन्दुस्तान से जाने वाले हाजी अमूमन हज्जे तमत्वों करते है। जिसमें तरतीब वाजिब है। सबसे पहले मीना पहुंचकर 10 जिलहिज्ज्जा को बड़े शैतान को कंकरी मारना (रमी) है। फिर उसके बाद कुर्बानी करनी है। कुर्बानी वाजिब है। फिर हलक (सिर मुड़वाये) या तकसीर करवायें। अगर इस तरतीब के खिलाफ किया तो दम वाजिब हो जायेगा। मौलाना हसीन हबीबी साहब ने बताया कि 10 जिलहिज्जा को कंकरी मारने (रमी) कुर्बानी, हलक व तकसीर कराने के बाद आप एहराम का कपडा उतार दें। अब आप एहराम की हालत से बाहर हो गये। मीना अपने खेमे में पहुँचकर गुस्ल करें और नया या पाक-साफ कपड़ा पहनकर इत्र वगैरह लगाकर मिना से मक्का शरीफ जाकर तवाफे जियारत करें। तवाफे जियारत फर्ज है बिना इसके किये आपका हज पूरा नहीं होगा। अगर 10 जिलहिज्जा को आपने तवाफे जियारत न किया हो तो 11 जिलहिज्जा को तीनों शैतानों को कंकरी मारने के बाद तवाफे जियारत मक्का शरीफ जाकर कर लें। आपको याद रहे कि गुरुबे आफताब से पहले मीना में वापस आना। क्यों कि रात में मिना में कयाम वाजिब है। अगर आपने 11 जिलहिज्जा को तवाफे जियास्त न किया हो तो 12 जिलहिज्जा को तीनो शैतानों को कंकरी मारने के बाद मगरिब से पहले मक्का शरीफ जाकर तवाफे जियास्त कर ले और गुरू आफताब से पहले मिना वापस आकर मीना से मक्का शरीफ के लिए रवाना हो और सूरज गुरुब हो गया तो 13 जिलहिज्जा को रुकना वाजिब हो जायेगा और फिर 13 जिलहिज्जा को फिर शैतान को कंकरी मारना होगा। 

औरतों में लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून, समन खान, अनम फातमा आदि मौजूद थी। लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून ने औरतों को तवाफे जियारत के बारे में बताते हुए कहा कि बेवज़ू तवाफे जियारत किया तो दम वाजिब हो जायेगा। नापाक कपड़ों में हर किस्म का तवाफ मकरूह है। अगर आपने तवाफे जियारत नहीं किया तो हज ही नहीं होगा। इसका कोई बदल नहीं है क्योंकि तवाफे जियारत फर्ज है। 

इनकी रही खास मौजूदगी 

वाराणसी से एकलाख अहमद, मोहम्मद अशरफ, फखरूद्दीन, अली बख्श, रियाज अहमद, नसीर जमाल, मोहम्मद हनीफ, शमीम अहमद, बरूदीन, शमशेर अंसारी, सर्फद्दीन चंदौली से जावेद अली, मसी अहमद खान, नियामतउलाह खान, मंजूर आलम, मो. साजिद बलिया से मुनौवर हुसैन, इम्तियाज अहमद, गाजीपुर से लाल मोहम्मद, मोहम्मद आजम, नसीदुल अमीन, आफताब आलम, जौनपुर से सिददीक जफर, अब्दुल कलाम, अब्दुल वकार, सोनभद्र से मो. आरिफ खान तथा ख़्वातीन में सीमा परवीन, सलमा बेगम, नूरजहां, चांद अफसाना, सुल्ताना, जैतुन निशा, रूखसाना परवीन, खुशबू बानो, मरियम बीबी, दरख्शाह बेगम, निकहत खान, सनम सहित इसरा के सदस्यगण एवं पदाधिकारीगण मौजूद थे।