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मंगलवार, 4 अगस्त 2026

minority news Varanasi Uttar Pradesh 4 August 2026: Varanasi में मनाया गया कर्बला के शहीदों का Chehalum

इमाम हसन, इमाम हुसैन समेत कर्बला के शहीदों को किया गया याद

गांधीजी ने देश को आजाद कराने के लिए इमाम हुसैन का ही रास्ता चुना-नैय्यर जलालपुरी 

मजलिस, जुलूस व फातेहा का हुआ शहर भर में आयोजन
minority news Varanasi Uttar Pradesh August 2026


  • Mohd Rizwan 

dil india live (Varanasi). देश भर की तरह वाराणसी की विभिन्न अंजुमनों ने इमाम हसन इमाम हुसैन समेत कर्बला के शहीदों का चेहल्लुम मनाया। अंजुमन इमामिया के संयोजन में अर्दली बाज़ार के मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े से चेहल्लुम का जुलूस निकला। जुलूस में दुलदुल, अलम, अली असगर का झूला, ताबूत व अमारी शामिल थी। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ, पुनः उसी इमामबाड़े में सम्पन्न हुआ।

सारी दुनिया के लिए मिसाल है इमाम हुसैन  

अंजुमन इमामिया की ओर से अर्दली बाज़ार से निकले चेहलुम के जुलूस में मशहूर जाकिर डॉक्टर अब्बास रज़ा नैय्यर जलालपुरी (लखनऊ) ने तकरीर करते हुए कहा कि इमाम हुसैन केवल एक इंसान नहीं बल्कि एक विचारधारा है। उनसे मोहब्बत के लिए हिन्दू या मुसलमान होना ज़रूरी नहीं बल्कि इंसान होना जरूरी है। नैय्यर जलालपुरी ने कहा कि इमाम हुसैन जैसे महापुरुषों को धर्म की बेड़ियों में नहीं बांधा जा सकता। गांधीजी ने देश को आजाद कराने के लिए इमाम हुसैन का ही रास्ता चुना था इस बात का उल्लेख उन्होंने स्वयं विभिन्न जगहों पर किया है।
अंजुमन हुसैनी, अंजुमन अंसारे हुसैनी, अंजुमन पैगामे हुसैनी, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन इमामिया आदि ने नौहाख्वानी व मातम किया। रास्ते में जगह जगह सबील लगाकर तबर्रुक का वितरण किया जा रहा था। जुलूस के साथ साथ जहां इमाम हुसैन का परचम चल रहा था तो वही हिंदुस्तान का परचम तिरंगा भी लहरा था। इस मौके पर अंत में मोमिनो का शुक्रिया अंजुमन इमामिया के जनरल सेक्रेटरी ज़फ़र अब्बास रिजवी ने किया।

उधर हजरत इमाम हुसैन की याद में 400 साल से ज्यादा कदीमी काली तुरबत का अलम उठाया गया। चेहल्लुम का जुलूस इमामबाड़ा कच्चीसराय दालमंडी से मुतवल्ली सैयद इकबाल हुसैन, लाडले हसन की देखरेख में इमामबाड़े से नौहाखवानी व मातम करते हुए उठाया गया। अंजुमन जावादिया की अगुवाई में जुलूस दालमंडी, नई सड़क, फटाक शेख सलीम, काली महाल, पितरकुंडा होते हुए दरगाहे फातमान जाकर सम्पन्न हुआ। अंजुमन के नौहाखां अफाक हैदर, साजिद हुसैन, कविश बनारसी का लिखा नौहा गूंजी है कर्बला में सदा मैं हुसैन हूं, नाना मेरे रसूले खुदा मैं हुसैन हूं... पेश किया तो तमाम लोगों ने मातम का नज़राना पेश किया। ऐसे ही कई नौहे फिज़ा में बुलंद हो रहे थे। दालमंडी में खंदक रास्तों से होकर जुलूस निकाला गया।

जुलूस में मुख्य रूप से जरगम हैदर, शकील हुसैन जैदी, हैदर मौलाई, शाहीन हुसैन, शारिक हुसैन, शरीफ जीशान, बादशाह अली, सकलैन हैदर, मसकन हैदर, रेहान हुसैन, शाह आलम, इमरान हुसैन आदि मौजूद थे। जुलूस का संचालन शकील अहमद जादूगर ने किया।

उधर वक़्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली व मेहंदी बेगम गोविंदपूरा छत्तातले से ताजिया व अलम का चेहलुम का कदीमी जुलूस अपनी परंपराओं के अनुसार मुतवल्ली सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के ज़ेरे एहतमाम उठा।जुलूस उठने के पूर्व मौलाना ने मजलिस पढ़ते हुए कर्बला में इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत का जिक्र किया I जुलूस उठने पर सवारी पढी गई - "जब गोरे गरीबा से वतन में हरम आए" । जुलूस नया चौक, गुदड़ी बाजार होते हुए दालमंडी स्थित हकीम काजिम के इमामबाड़ा पहुंचा जहां से दुलदुल शामिल हुआ और अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाखवानी व मातम किया।

जुलूस दालमंडी, खजूर वाली मस्जिद, नई सड़क, शेख सलीम फाटक, तुलसी कुआं, काली महल, पितरकुंडा होते हुए लल्लापुरा स्थित फ़ातमान पहुंच कर समाप्त हुआ। ऐसे ही गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, चौहट्टा लाल खां, दोषीपुरा, रामनगर आदि इलाकों में भी फातेहा, मजलिसे हुई और इमाम हुसैन का चेहल्लुम मनाया गया। समाचार लिखे जाने तक शिया इमामबाड़ों और घरों से दर्द भरे नौहों की सदाएं बुलंद हो रही थी।

तस्वीरों में बनारस का चेहल्लुम