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रविवार, 6 जुलाई 2025

10 Muharram 2025:UP k Varanasi main यौमे आशूरा पर कर्बला में दफन हुए ताज़िए

जंजीर और कमा का मातम देखकर कांप उठे लोग 

इमाम हुसैन समेत कर्बला के शहीदों व असीरो की याद में मस्जिदों में हुआ शहादतनामा, मोमीनीन ने रखा रोज़ा


मरकजी सीरत कमेटी के जलसे को खेताब करते आलिम 

 




सरफराज अहमद/मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live)। इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत के गम में शहर कि बल खाती गलियों-मुहल्लों से लेकर सूदूर ग्रामीण इलाकों से तकरीबन 1000 से अधिक ताजियों का जुलूस इतवार को निकला। बोल मोहम्मदी या हुसैन...की सदाओं संग कर्बला में ताजिया का जुलूस पहुंचा। जहां ताज़िए के फूल दफन किए गए, तो दूसरी ओर शहर भर की शिया अंजुमनों ने जंजीर और कमा का मातम किया, जिसे देखकर तमाम लोग कांप उठे। इस दौरान सुन्नी मस्जिदों में कर्बला के शहीदों की याद में शहादतनामा पेश किया गया, और मोमीनीन ने नफल रोज़ा रखा। शाम में अज़ान की सदाओं पर मोमिनीन ने रोज़ा खोला। इस दौरान जहां घरों में कुरानख्वानी और फातिहा हुई वहीं इमामबाड़ों, अजाखानों से नौहाख्वानी और मजलिसों की सदाएं गूंजी। 











इससे पहले शहर और ग्रामीण इलाकों से सुबह 11 बजे के बाद से ही नौवीं मुहर्रम पर इमाम चौक पर बैठाए गए ताजियों का जुलूस उठाया जाना शुरू हो गया जो अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुंचा। लल्लापुरा, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, दालमंडी, नई सड़क, रामापुरा, बजरडीहा आदि इलाकों के ताजिये दरगाहे फातमान ले जाकर ठंडे किए गए। उधर बड़ी बाजार, दोषीपुरा, कज्जाकपुरा, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीलीकोठी, पुरानापुल आदि इलाकों के ताजिये सदर इमामबाड़ा लाट सरैया व तेलियानाला घाट में ले जाकर ठंडे किए गए। कुछ ताजिये शिवाला घाट और भवनिया कब्रिस्तान में दफन हुए।शिवपुर, बीएचयू, लंका आदि इलाकों से भी ताजिये कर्बला पहुंचकर ठंडे हुए। दरगाहे फातमान मार्ग पर खासी भीड़ देर रात तक उमड़ी रही। ताजिये के साथ ढोल, ताशा बजाते और युवा लाठी, डंडे आदि के जरिये फन-ए-सिपाहगिरी का करतब दिखाते हुए चल रहे थे।








शामे गरीबां की मजलिस

शाम में जुलूस के बाद देर शिया समुदाय की ओर से शाम-ए-गरीबां की मजलिसें हुई। दरगाहे फातमान, दालमंडी, पितरकुंडा, काली महाल, गौरीगंज व शिवाला में मजलिस को उलेमा ने खेताब करते हुए शहीदान-ए-कर्बला का जिक्र किया। उधर नई सड़क स्थित खूजर वाली मस्जिद, रेवड़ी तालाब में मस्जिद नगीना, मस्जिद सुल्तानिया, पठानी टोला में मस्जिद जाहिद शहीद, मस्जिद कंकडीयाबीर कमच्छा, मस्जिद नूरी, गौरीगंज स्थित मस्जिद हबीबिया, मस्जिद नयी बस्ती में जिक्र शोहदा-ए-कर्बला कार्यक्रम हुआ जिसमें उलेमा ने कर्बला के वाक़यात पर रौशनी डाली। इम्तियाज अहमद ने बताया कि यहां तकरीबन चार दशक से यह आयोजन होता आ रहा है। जलसों के बाद मस्जिदों में खिचडे़ का लंगर भी चलाया गया। 



नफिल रोजा रखकर पेश की अकीदत-

सुन्नी समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में घरों में फातिहा और दुआख्वानी की। नफिल रोजा रखकर अकीदत पेश की। मगरिब की नमाज के बाद रोजा खोला गया।


जुलूस में जंजीर का मातम

शिया समुदाय ने मजलिस, मातम व जुलूस निकाल कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया। जगह-जगह से अंजुमनों ने अलम, ताबूत दुलदुल का जुलूस उठाया। अजादारों ने कमा, जंजीर से मातम किया। जोहर की नमाज के बाद शहर की सभी अंजुमनों के जुलूस उठने लगे। अंजुमन हैदरी नई सड़क, अंजुमन जौव्वादिया कच्चीसराय, अंजुमन मातमी जौव्वादिया पितरकुडा, अंजुमन गुलजारे अब्बासिया व अंजुमन कासिमिया अब्बासिया ने गौरीगंज व शिवाला से अलम, दुलदुल का जुलूस उठाया। इस दौरान बड़े संग बच्चे भी सीनाजनी, खंजर, कमा से मातम कर रहे थे। खूनी मातम देख जियारतमंदों की आंखें नम हो गईं।

उधर, अर्दली बाजार इमामबाड़े से अंजुमन इमामिया के कमा व जंजीरी मातम देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान काफी भीड़ रही। अर्दली बाजार से दसवीं मोहर्रम पर अलम, ताबूत, दुलदुल का जुलूस यौम-ए अशूरा को उल्फत बीबी हाता स्थित मास्टर जहीर हुसैन के इमामबारगाह से उठा। जुलूस में अंजुमन इमामिया के नेतृत्व में लोग नौहाखानी, मातम और सीनाजनी करते हुए चल रहे थे। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ नदेसर, अंधरापुल, लोहा मंडी,पिशाचमोचन के रास्ते देर शाम फातमान पहुंच कर ठंडा हुआ़। जुलूस में इरशाद हुसैन "शद्दू ", जैन, दिलशाद, ज़ीशान,फिरोज़, जफर अब्बास, दिलकश. मिसम, अयान, शाद, अमान, अलमदार हुसैन, अद्दनान, अरशान आदि ने सहयोग किया। सैय्यद फरमान हैदर ने बताया कि 11 वीं मुहर्रम को लुटे हुए काफिले का जुलूस दालमंडी में हकीम काजिम के इमामबाड़े से सुबह 11 बजे से उठेगा।

दूल्हे का जुलूस हुआ ठंडा 

परवेज़ कादिर खां की अगुवाई में उठा दूल्हे का कदीमी जुलूस सकुशल संपन्न हो गया। इस दौरान जुलूस 60 ताजिया को सलामी और 72 अलाव पर दौड़ने के बाद शिवाला स्थित इमाम बाड़ा दूल्हा कासिम नाल पहुंच कर ठंडा हुआ। शाम में पुनः पानी वाला दूल्हा निकला जौ आसपास के इलाकों में होकर वापस शिवाला घाट पर पहुंच कर सम्पन्न हुआ। परवेज़ कादिर खां ने अवाम और पुलिस प्रशासन को शुक्रिया कहा।






मेडिकल कैम्प लगाकर खिदमत 

जिया क्लब द्वारा 10 मोहर्रम को पितरकुंडा में मोहर्रम पर एक मंच लगाया गया। उस मंच पर अल्पाहार की जहां व्यवस्था किया गया वहीं एक मेडिकल कैंप भी लगाया गया। कैंप में आए हुए सभी ताजियादारो के लिए व रोजा रखे हुए लोगों को रोजा खुलवाया गया। जुलूस में आए हुए लोगों का उपचार कराया गया मेडिकल द्वारा हमारे कैंप पर बनारस दुर्सेघटना सेआई हुई ताजिया जिसमें लगभग 250 से ऊपर ताजिया थी जिसमें बुराक पीतल रंगी की मोती की शीशम की ताजिया इस मंच पर प्रमुख रूप से फजलुर रहमान इरशाद अंसारी रब्बानी अंसारी शमीम अंसारी हाजी काजू जुलूस का संचालन समाजसेवी शकील अहमद जादूगर ने की।

Mahe Muharram 2025: ताज़िए की हुई जियारत निकला गश्ती अलम

खूबसूरत ताज़िए ने खींचा सभी का अपनी ओर ध्यान

 





सरफराज अहमद 

Varanasi (dil India live). हज़रत इमाम हसन, हज़रत इमाम हुसैन समेत कर्बला के 72 शहीदों कि याद में शनिवार को मलीदे, शरबत और शिरनी कि मुस्लिम घरों, इमाम चौकों व इमामबाड़ों में फातेहा करायी गई। फातेहा कराने के बाद जहां लोगों में तबर्रुक तकसीम किया गया वहीं इमाम चौक और इमामबाड़ों पर अदब और एहतराम के साथ ताजिये बैठा दिए गए। ताजिया बैठते ही उसकी जियारत करने दोनों वर्ग के लोगों का हुजुम देर रात तक उमड़ा हुआ था।


9 वीं मोहर्रम को इमाम चौक पर सभी ताजिया फातेहा करके बैठा दी गईं। शहर भर में इनकी जियारत के लिए भारी भीड़ उमड़ी रही। जैतपुरा की बुर्राक की ताजिया, नईसडक की पीतल की ताजिया, लल्लापुरा की रांगे की ताजिया, गौरीगंज की शीशम की ताजिया, अर्दली बाजार की जरी के साथ ही चपरखट की ताजिया, मोतीवाली ताजिया, हिंदू लहरा की ताजिया, शीशे की ताजिया, मोटे शाबान की ताजिया, काशीराज की मन्नत की ताजिया व बड़ादेव मुहल्ले आदि प्रमुख ताजिया लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। इस दौरान बच्चे आकषर्ण ताजिये के साथ सेल्फी भी लेते दिखाई दिए।


गश्ती अलम का निकला जुलूस

दूल्हे का जुलूस निकलने के बाद गश्ती अलम का जुलूस विभिन्न शिया इमामबाडों से निकाला गया जो गश्त करते हुए एक जगह से दूसरे जगह एक इमामबाड़े से होकर दूसरे इमामबाड़े तक गश्त करता दिखाई दिया। काले पोशाक में शिया वर्ग के लोगों ने इस जुलूस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।


मंगलवार, 1 जुलाई 2025

5 Th Mahe Muharram 2025: Varanasi Main उस्ताद की याद हुई ताज़ा

मारा गया है तीर से बच्चा रवाब का...

छत्तातले से निकला पांचवीं मोहर्रम का कदीमी जुलूस


 

Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live). पांचवीं मोहर्रम बनारस के इतिहास में अपना अलग स्थान रखता है। पांच मोहर्रम को ही भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जिस जुलूस में चांदी वाली शहनाई से आंसुओं का नज़राना पेश किया करते थे। वो जुलूस वक़्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली व मेहंदी बेगम गोविंदपुरा छत्तातले से देर रात निकाला गया। जुलूस में पूरे रास्ते उस्ताद फतेह अली खां व उनके साथियों ने शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश किया तो दरगाहे फातमान में उस्ताद आफाक हैदर ने शहनाई पर मातमी धुन बजाया, मारा गया है तीर से बच्चा रवाब का...। इसे सुनकर तमाम लोगों की आंखें नम हो गई। यहां संचालन शकील अहमद जादूगर कर रहे थे।

जब नहर पर आदा ने अलमदार को मारा...

पांचवी मोहर्रम का जुलूस अपनी पुरानी परंपराओं के अनुसार मुतवल्ली  सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के ज़ेरे एहतमाम उठा। जुलूस उठने से पूर्व मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने कर्बला के शहीदों के शहादत पर रौशनी डाली। जुलूस उठने पर नजाकत अली खां व उनके साथियों ने सवारी शुरू की- जब नहर पर आदा ने अलमदार को मारा...। जुलूस गोविंदपूरा, राजा दरवाजा, नारियल बाजार, चौक होते हुए दालमंडी  स्थित हकीम जाफर के अज़ाख़ाने पर पहुँचा जहां से अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाख्वानी व मातम शुरू किया। इस दौरान दर्द भरे नौहे, जमाना देख ले क्या क्या मेरे हुसैन से है...जिसमें वफा बुतुराबी, शराफत हुसैन, लियाकत अली खां, साहब ज़ैदी, शफाअत हुसैन शोफी ने नौहाख्वानी की l इस पर तमाम लोगों ने जोरदार मातम पेश किया।


जुलूस दालमंडी, खजुर वाली  मस्जिद, नई सड़क, फाटक शेख सलीम, काली महल, पितरकुंड, मुस्लिम स्कूल होते हुए लल्लापुरा स्थित दरगाहे फ़ातमान पहुंच कर देर रात पहुंचा।  फ़ातमान से जुलूस पुनः वापस मुस्लिम स्कुल, लाहंगपूरा , रांगे की ताज़िया, औरंगाबाद, नई सड़क कपड़ा मंडी, दालमंडी नया चौक होते हुए इमामबाड़े में समाप्त हुआ l

महाराज बनारस की मन्नत का निकला जुलूस 

शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि रामनगर में दुलदुल का कदीमी जुलूस जो महाराज बनारस की मन्नत का है और गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल पेश करता है। इस जुलूस को अहले सुन्नत ने उठाया और लोगों ने इसकी जियारत की। वहीं अर्दली बाजार में हाजी अबुल हसन के इमामबाड़े से कर्बला के 6 महीने के शहीद अली असगर का झूला उठाया गया। अंजुमन इमामिया ने नोहा ख्वानी व मातम किया। यह जुलूस मास्टर जहीर हसन के इमामबाड़े पर समाप्त हुआ। बड़ा गांव बगिया में भी कदीमी जुलूस निकाला गया और कई अंजुमन ने नोहा मातम किया। इस अवसर पर फरमान हैदर ने बताया कि 5 मोहर्रम को बीबी जैनब के दो बेटे औन और मोहम्मद जो इमाम हुसैन के भांजे थे उनकी शहादत का तस्कीरा हर मजलिस में किया गया। 

 आज निकलेगा छठवीं मोहर्रम

विश्व प्रसिद्ध दुलदुल का जुलूस ६ मोहर्रम २ जुलाई को इमामबाड़ा शीताब राय कच्ची सराय से उठाया जाएगा । अंजुमन जव्वादिया के जेरे इंतजाम 40 घंटे तक शहर में भ्रमण करेगा और 8 वीं मोहर्रम कि सुबह समाप्त किया जाएगा।

सोमवार, 30 जून 2025

4TH Mahe Muharram2025: Varanasi main मजलिसों और जुलूस का दौर हुआ तेज़

सदर इमामबाड़े पहुंचा चौथी मोहर्रम का कदीमी जुलूस

जुलूस के रास्तों में हो रही है दुश्वारियां 

शिवाला के जुलूस में हुआ जोरदार मातम


सरफराज अहमद 

Varanasi (dil India live). ३० जून यानी चार मोहर्रम पर सोमवार को हर तरफ मजलिसों में इमाम हुसैन के दोस्त हबीब इब्ने मज़हिर की जिंदगी पर रौशनी डाली गई। कालीमहल में तकरीर करते हुए शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि इमाम हुसैन ने अपने 80 साल के अजीज दोस्त को खत लिखकर कूफे से बुलाया था। उनकी दोस्ती आज भी सारी दुनिया के लिए मील का पत्थर है। इस दौरान पहला जुलूस इम्तियाज हुसैन नकवी के चौहट्टालाल खान स्थित इमामबाड़े से निकला। जुलूस में अलम, ताबूत शामिल था जिसकी जियारत करने लोगों का हुजूम उमड़ा। जुलूस मस्जिद और इमामबाड़ा चौहट्टा लाल खान में जाकर समाप्त हुआ। अंजुमन आबिदिया ने जुलूस की अगवाई की। वहीं दूसरा जुलूस शिवाला के मोहल्ला क्रीमकुंड से सैयद आलिम हुसैन रिज़वी के संयोजन में उठाया गया। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ गौरीगंज में वरिष्ठ पत्रकार काजिम रिज़वी के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त हुआ। इस मौके पर अंजुमन गुलज़ारे अब्बासिया, समेत कई अंजुमनों ने नौहाखवानी व मातम का नज़राना पेश किया। वहीं अंतिम जुलूस चौहट्टा लाल खान मस्जिद से अलम दुलदुल व ताबूत का उठाया गया। जुलूस में अंजुमन आबिदिया, अंजुमन सज्जादिया तथा अंजुमन हाशिमिया ने नोहा ख्वानी व मातम के साथ शहीदाने कर्बला को खेराजे अकीदत पेश किया। मौलाना बाकर बलियावी, डा. शफीक हैदर, मंजर नकवी ने मजलिसों को खिताब किया। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर ने कहा कि जुलूस मार्ग में ढेरों दुश्वारियां हैं जिला प्रशासन मीटिंग में बड़ी बड़ी बातें करता है मगर हर बार जुलूस दुश्वारियों के बीच निकाला जाता है। इस अव्यवस्था से मुस्लिमों में रोष है।

पांचवीं मोहर्रम को निकलेगा अलम

इस सिलसिले से फरमान हैदर ने बताया कि पांचवीं मोहर्रम को छत्तातले से अलम का जुलूस अंजुमन हैदरी के जेरे इंतजाम उठाया जाएगा। स्वर्गीय wajjan खान के परिवार के सदस्य मर्सिया पढ़ेंगे। शहनाई पर आंसुओं का नजराना पेश होगा। वहीं अर्धाली बाजार में हाजी अबुल हसन के निवास से ६ महीने के शहीद अली असगर का झूला उठाया जाएगा। अंजुमन इमामिया नोहा मातम करेगी। पांच मोहर्रम को ही रामनगर से महाराज बनारस के द्वारा स्थापित किया गया मन्नत का जुलूस भी उठाया जाएगा। ये जुलूस अहले सुन्नत हजरत भी उठते हैं।

रविवार, 29 जून 2025

3 mahe Muharram 2025: नवाब की ड्योढ़ी से निकला कदीमी दुलदुल का जुलूस

 ...नाना मेरे रसूले ख़ुदा मैं हुसैन हूं

सरफराज अहमद 

Varanasi (dil india live). तीसरी मोहर्रम को अलम व दुलदुल का कदीमी जुलूस अकीदत के साथ औसानगंज में नवाब की ड्योढ़ी से उठाया गया। जुलूस में, नाना मेरे रसूले ख़ुदा मैं हुसैन हूं, गूंजी है कर्बला में सदा मैं हुसैन हूं...। जैसे दर्द भरे नौहे फिजा में बुलंद करते हुए मातमी दस्ता आगे बढ़ा। जुलूस विभिन्न रास्तों से होकर चौक होते हुए दालमंडी देर रात पहुंचा।जुलूस में अंजुमन जव्वादिया नौहाखवानी वह मातम करते हुए चल रही थी। जुलूस नयी सड़क, फाटक शेख सलीम, काली महाल, पितरकुंडा होते हुए दरगाहे फातमान पहुंचेगा। 


कुम्हार के इमामबाड़े पहुंचा जुलूस 

शिवाला स्थित सैयद आलीम हुसैन रिजवी के इमामबाड़े से एक अन्य जुलूस उठाया गया। यह जुलूस कर्बला के शहीदों और असीरो को खिराजे अकीदत पेश करते हुए अग्रवाल रेडियो, अवधगरवी आदि रास्तों से होते हुए हरिश्चंद्र घाट पहुंचा।


जुलूस हरिश्चन्द्र घाट स्थित कुम्हार के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त हो गया। रास्ते भर विभिन्न अंजुमनों ने नौहाखवानी वह मातम का नजराना पेश किया। तीन मोहर्रम को ही रामनगर में बारीगढ़ी स्थित सगीर के इमामबाड़े से भी अलम का जुलूस उठाया गया।

मस्जिदों में हुआ कर्बला का जिक्र 

शहर भर की मस्जिदों में इशा की नमाज के बाद कर्बला के शहीद-ए-आजम इमाम हुसैन और इमाम हसन समेत अहले बैत का जिक्र तीसरी मोहर्रम को भी जारी रहा। इस दौरान पठानी टोला, कोयला बाजार, बड़ी बाजार, लल्लापुरा, दालमंडी, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, गौरीगंज, बजरडीहा, अर्दली बाज़ार आदि इलाकों में जिक्रे शहीदाने कर्बला का दौर चला। आयोजन में उलेमा ने कहा कि इमाम हुसैन ने अपनी और अपने कुनबे की शहादत देकर इस्लाम को बचा लिया। आज यजीद का नामलेवा कोई नहीं है मगर इमाम हुसैन रहती दुनिया तक याद किए जाएंगे।


चार मोहर्रम को उठेगा ताजिया 

चार मोहर्रम को ताजिये का जुलूस शिवाला में सैयद आलीम हुसैन रिजवी के इमामबाड़े से निकलेगा। जुलूस गौरीगंज स्थित वरिष्ठ पत्रकार काजिम रिजवी के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होगा। चार मोहर्रम को ही चौहट्टा लाल खां में इम्तेयाज हुसैन के मकान से 2 बजे दिन में जुलूस उठकर इमामबाड़ा तक जायेगा। चौथी मुहर्रम को ही तीसरा जुलूस अलम व दुलदुल का चौहट्टा लाल खां इमामबाड़े से रात 8 बजे उठकर अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ सदर इमामबाड़ा पहुंच कर समाप्त होगा।

गुरुवार, 26 जून 2025

Mahe Muharram 2025: Chand के दीदार संग इस्लामी नये साल का आगाज़

मस्जिदों में शहादतनामा तो अजाखानों में शुरू हुई मजलिस-ए-इस्तेक़बालिया

शिया ख़्वातीन ने तोड़ी चूड़ियां, हटाया साजो श्रृंगार, पहना काला लिवास


सरफराज अहमद / मो. रिज़वान 
Varanasi (dil India live). 29 जिलहिज्जा को चांद का दीदार हो गया। चांद देखे जाने के साथ ही इस्लामी नये साल माहे मोहर्रम का आगाज़ हो गया। चांद देखे जाने की पुष्टि ‘काजी-ए-शहर’ समेत तमाम चांद कमेटी के ऐलान से हुई। अपने ऐलान में कहा गया कि आज (27 जून) को मोहर्रम का चांद दिखाई दिया है। इसलिए मुहर्रम की 01 तारीख 28 जून को होगी और यौमे आशूरा 6 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा। उधर चांद के दीदार संग शिया अजाखाने सजा दिए गए। मजलिसे इस्तेकबालिया बनारस, जौनपुर, लखनऊ, मऊ, आजमगढ, बलिया, गोरखपुर व गाजीपुर आदि शहरों में शुरू हो गई।





दरअसल मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक साल का पहला महीना है। इसी महीने के साथ इस्लामिक नए साल की शुरुआत होती है। वैसे तो ये एक महीना है लेकिन इस महीने में मुसलमान खास तौर पर शिया मुसलमान पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन समेत कर्बला में शहीद हुए 72 वीरों की शहादत का गम मनाते हैं। सन 61 हिजरी (680 ईस्वी) में इराक के कर्बला में पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन को उनके 72 साथियों के साथ यजीदी सेना ने शहीद कर दिया था। मुहर्रम में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत का शिया मुस्लिम गम मनाते हैं। मातम करते हैं।  

इस दौरान सुन्नी मस्जिदों में एक से दस मुहर्रम तक सुन्नी मुसलमान शहादतनामा पढते हैं’ तकरीर होती है तो शिया मुसलमान इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र करते हैं। उनका गम मनाने के लिए मजलिसें करते हैं। मजलिसों में इमाम हुसैन की शहादत बयान की जाती है। मजलिस में तकरीर (स्पीच) करने के लिए ईरान से भी इंडिया में आलिम (धर्मगुरू) आते हैं और जिस इंसानियत के पैगाम के लिए इमाम हुसैन ने शहादत दी थी उसके बारे में लोगों को विस्तार से बताया जाता है। उधर लोगों ने एक दूसरे को इस्लामिक नये साल की मुबारकबाद दी। सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक और व्हाट्स एप पर इस्लामी हिजरी नये साल की मुबारकबाद लोग अपने अजीजों से शेयर कर रहे थे।

शहर भर में हुई इस्तकबाले की मजलिसे

आज मोहर्रम के चांद की तस्दीक होते ही हर तरफ फिजा गमगीन हो गई। या हुसैन या हुसैन...की सदाएं फिजा में गूंजने लगी। हर तरफ इस्तकबाले अज़ा की मजलिसे हुईं व इमामबाड़ों में शमा रोशन किया गया और शरबत पर कर्बला के शहीदों की नजर हुई। शहर भर की 28 अंजुमनों ने नोहा और मातम का आगाज़ किया।

शिया जमा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने तकरीर करते हुए कहा कि यह वह महीना है कि जिसमें इमाम हुसैन ने अपने 71 साथियों के साथ इंसानियत को बचाने के लिए कुर्बानी पेश की। बताया कि लाखों की तादाद में मुसलमान और गैर मुसलमान हजरात भी इमाम हुसैन का गम मानते हैं, शहर भर में पहली मोहर्रम से लेकर 13वीं मोहरम तक लगातार जुलूस उठते हैं और सैकड़ो की तादाद में मजलिसे होती हैं। जिसमें खवातीन भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। इस सिलसिले से पहला जुलूस कल शाम ठीक 4:00 बजे उठाया जाएगा जो कैंपस में नोहाख्वानी और मातम के साथ समाप्त होगा। हैदर ने बताया की बनारस शहर में कई जगह रास्तों की परेशानियां हैं और प्रशासन से अपील की जाती है कि वह रास्तों की दुश्वारियां को दूर कराएं और सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं। 

इंसानियत के लिए मिसाल है शहादत-ए-हुसैन

इस्लाम की तारीख में मुहर्रम बड़े ही अकीदत, एहतेराम के साथ मनाया जाता है। इंसानियत के लिए शहादत-ए-हुसैन एक मिसाल है। मुहर्रम का चांद दिखाई देने के बाद मर्सियाखान सैयद नबील हैदर ने इस्तेक़बाले अजा की मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि मुहर्रम पर 2 महीना 8 दिन ग़म मनाया जाता है। यही नहीं पूरे दो माह 8 दिन शिया समुदाय के लोग किसी भी खुशी में शरीक नहीं होते। चांद दिखाई देने से आज ही से इमाम बारगाह, अजाखानो, घरों में मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया। 

नबील ने कहा कि इमाम हुसैन ने जो इन्सानियत की राह दिखाई है ,वही हक पर चलने की नेक राह है। इमाम हुसैन ने जुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाने का पैगाम दिया, हुसैन ने जालिम खलीफा का साथ नहीं दिया । इसीलिए आपको अपने 72 साथियों के साथ इतनी बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी, लेकिन यही कुर्बानी दीन को बचा ले गई, और उसी कुर्बानी की वजह से इंसानियत दुनिया में अभी भी जिंदा है। इमाम हुसैन का बलिदान सत्य, न्याय, धार्मिकता महान प्रेरणा है। उनका बलिदान अन्याय के खिलाफ लड़ने और सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए एक शक्तिशाली संदेश है।


बुधवार, 25 जून 2025

Mahe Muharram 2025: Varanasi में क्यों खास होता है मोहर्रम यहां जानिए

यौमे आशूरा चेहल्लुम ही नहीं एक मोहर्रम से साठे तक जुलूस ही जुलूस 

कर्बला के शहीदों की याद दो माह आठ दिन रहेगा ग़म का अय्याम 

१३ दिन तक लगातार निकलेगा जुलूस मनाया जाएगा इमाम हुसैन का ग़म


सरफराज अहमद 

Varanasi (dil India live). बनारस का मोहर्रम कई मायनों में दूसरे शहरों से खास होता है। ज़्यादातर शहरों में मोहर्रम की खास तारीखों पर ही जुलूस निकाला जाता है और बड़े आयोजन होते हैं जिसमें यौमे मोहर्रम की दस तारीख यानी आशूरा, तीजा, चेहल्लुम ही खास होता है मगर मजहबी शहर बनारस में शहीदाने कर्बला की याद में यौमे आशूरा चेहल्लुम ही नहीं बल्कि एक मोहर्रम से साठे तक जुलूस ही जुलूस ही जुलूस निकाले जाते हैं। कर्बला के शहीदों की याद में दो माह आठ दिन ग़म का अय्याम रहता है। इस दौरान एक मोहर्रम से १३ दिन तक लगातार जुलूस निकाला जाता है। 

कब है मोहर्रम, कैसे होगी शुरुआत 

इमाम हुसैन की याद में मनाएं जाने वाला माहे मोहर्रम यूं तो चांद के दीदार के साथ शुरू होता है। यह महीना इस्लामी हिजरी सन् का पहला महीना होता है। कल हिजरी माह की 29 तारीख है। अगर कल चांद का दीदार होता है तो मोहर्रम का आगाज़ हो जाएगा। चांद के दीदार के साथ ही अजाखाने सजा दिए जाएंगे ख़्वातीन अपनी चूड़ियां और साजो श्रृंगार हटाकर काला लिवास पहन लेंगी। मर्द भी काले पोशाक में हो जाएंगे। एक मोहर्रम से जुलूस का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा जो दो माह आठ दिन तक चलेगा। इस दौरान शादी ब्याह और खुशी के कोई भी आयोजन नहीं होंगे।

यह है मोहर्रम का शिड्यूल

शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी सैयद फरमान हैदर, मौलाना सूफियान नक्शबंदी, तथा मौलाना उस्मान ने संयुक्त रूप से आज पत्रकारों को खिताब करते हुए मोहर्रम का शिड्यूल जारी किया। इस अवसर पर हाजी फरमान हैदर ने बताया कि शहर की २८ शिया अंजुमने तथा लाखों की तादाद में मुसलमान इमाम चौक से ताजिया उठाकर इमाम हुसैन की शहादत पर खेराजे अकीदत पेश करेंगे। हैदर ने बताया कि पहला जुलूस पहली मोहर्रम को सदर इमामबाड़े में सायंकाल ४ बजे कैंपस में ही उठाया जाएगा। यहां अलम और दुलदुल के साथ अंजुमने नोहाख्वानी व मातम का नज़राना पेश करेंगी। कार्यक्रम मुतवल्ली सज्जाद अली गुज्जन की निगरानी में आयोजित होगा। 

दूसरी मोहर्रम शिवपुर में अंजुमने पंजतनी के तत्वाधान में अलम व दुलदुल का जुलूस रात 8.00 बजे उठाया जायेगा। बनारस के अलावा दूसरे शहरों की अंजुमनें भी शिरकत करेंगी। भारत रत्न उस्ता बिस्मिल्ला खां के मकान पर दिन में 2. 00 बजे कदीमी मजलिस का आयोजन होगा। 

तीसरी मोहर्रम तीसरी मोहर्रम को अलम व दुलदुल का कदीमी जुलूस औसानगंज नवाब की ड्योढ़ी से सायं काल 5.00 बजे उठाया जायेगा। अंजुमन जीवादिया जुलूस के साथ-साथ रहेगी। इसी दिन शिवाला में अलीम हुसैन रिजवी के निवास से अलम ताबूत का जुलूस उठाया जायेगा, जो हरिश्चन्द्र घाट के पास के कुम्हार के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। तीन मोहर्रम को ही रामनगर के बारीगढ़ी स्थित सगीर साहब के मकान से अलग का जुलूस उठाया जायेगा। 

चौथी मोहर्रम को ताजिये का जुलूस शिवाले में आलीम हुसैन रिजवी के निवास से गौरीगंज स्थित काजिम रिज़वी के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। चार मोहर्रम को ही चौहट्टा में इम्तेयाज हुसैन के मकान से 2.00 बजे दिन में जुलूस उठकर इमामबाड़े तक जायेगा। चौथी मुहर्रम को ही तीसरा जुलूस दुलदुल का चौहट्टा लाल खां इमामबाड़े से रात 8:00 बजे उठकर अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ सदर इमामबाड़ा लाट सरैया पर समाप्त होगा। 

पाँचवी मोहर्रम को छत्तातले गोविन्दपुरा इमामबाड़े से अलम का जुलूस अंजुमन हैदरी के संयोजन में उठाया जायेगा। जुलूस में लोग मरसिया पढ़ेंगे। शहनाई पर मातमी धुन भारत रत्न उस्ताद विस्मिल्लाह खां के परिवार के लोग पेश करेंगे। जिसमें जामीन हुसैन, फतेह अली, अली अब्बास आदि शामिल रहेंगे। पांच मोहर्रम को अर्दली बाजार में हाजी अबुल हसन के निवास से इमाम हुसैन के छः महीने के बच्चे शहीद अली असगत की याद में झूले का जुलूस उठेगा। जो मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होगा। पांच मोहर्रम को ही रामनगर में महाराज बनारस की मन्नत का जुलूस उठाया जायेगा। जिसमें अलम व दुलदुल शामिल रहेगा। ये जुलूस अहले सुन्नत हजरात उठाते हैं।

छठी मोहर्रम :- ये तारीख बनारस के मोहर्रम के लिए ऐतिहासिक है। इसमें दुलदुल का जुलूस सायं 5.00 बजे अंजुमन जव्वादिया के जेरे इम्तियाज कच्चीसराय इमामबाड़े से उठाया जाता है। ये जुलूस तकरीबन 40 घंटे तक पूरे शहर में भ्रमण करता है। सभी धर्मों के लोग इसमें शिरकत करते हैं। तकरीबन 9 थाना क्षेत्रों से होकर यह जुलूस गुजरता है और 8 मोहर्रम की सुबह समाप्त होता है। 

सातवीं मोहर्रम को चौहट्टा लाल खां में इमाम हुसैन के भतीजे (इमाम हसन के पुत्र) 13 साल के जनाबे कासिम की याद में मेहदी का जुलूस में उठाया जाता हैं। यहां मेहंदी का दो जुलूस उठाया जाता है। एक जुलूस देर रात अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ सदर इमामबाड़े लाट सरैया पर समाप्त होता है। ये जुलूस अंजुमन आबिदया के जेरे इन्तजाम उठाया जाता है। दोषीपुरा में अंजुमन कारवाने कर्बला द्वारा मेहदी का जूलूस उठाया जाता है। हर घर में जनाबे कासिम की याद में रात 12.00 बजे मेंहदी रोशन की जाती है। और फातिहा होती है। सात मोहर्रम को कर्बला में इमाम हुसैन व उनके साथियों का पानी बन्द कर दिया गया था। 

आठवीं मोहर्रम का दिन इमाम हुसैन के छोटे भाई से सम्बन्धित है। इस दिन जनाबे अब्बास के नाम पर हाजिरी की फातिहा करायी जाती है। जनाबे अब्बास इमाम हुसैन के (अलमबरदार) भी थे। इस मौके पर रात 8 बजे खाजा नब्बू के चाहमामा स्थित निवास से ताबूत का जुलूस अजुमन हैदरी के तत्वाधान में उठाया जायेगा। लियाकत अली कर्बलायी मर्सिया पेश करेंगे। इसी जुलूस में शहनाई पर मातमी धुनों के साथ आंसुओं का नजराना पेश करेंगे। ये जुलूस फातमान से पलटकर भोर में छत्तातले पर समाप्त होगा। शिवाले में डिप्टी जाफर बख्त की मस्जिद से अलग व ताबूत का जुलूस उठाया जायेगा। शिवाले में ही बराती बेगम के इमामबाड़े से दुलदुल का जुलूस उठकर कुम्हार का इमामबाड़ा हरिश्चन्द घाट पर समाप्त होगा। आठ मुहर्रम को ही चौहट्टा लाल खा में मिरजा मेंहदी के निवास से अलम व ताबूत का जूलस उठकर मिरपूरा इमामबाड़े जाकर समाप्त होगा। चौहट्टा लाल खां में ही एक और जुलूस आलीम हुसैन के मकान से ताबूत व अलम का जुलूस उठाया जायेगा। इस जुलूस की विशेषता यह है कि पूरे रास्ते में अधेरा का दिया जाता है। रास्तों की लाईट बुझा दी जाती है। यह जुलूस भी मीरपुरा इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होता है। आठ मोहर्रम को ही अर्दली बाजार में जियारत दुसैन के निवास से शब्बीर शद्दू के संयोजन में अलम व दुलदुल का उठाया जायेगा।

ऐसे ही मोहर्रम की नव तारीख को शहर के सभी इमामबाड़ों से गशती अलम का जुलूस निकाला जाता है साथ ही शिवाला से दूल्हे का जुलूस निकाला जाता है। ऐसे ही दसवीं मोहर्रम को इमाम हुसैन समेत कर्बला के वीरों की शहादत मनाई जाती है। शहर भर में जुलूस उठाया जाता है। ऐसे ही ग़म का यह अययाम दो माह आठ दिन तक चलेगा। 

11 मोहर्रम को दालमंडी से लुटा हुआ काफिला।

12 मोहर्रम को कर्बला के शहीदों का शहर भर में चीजें का जुलूस।

13 मोहर्रम को सदर इमामबाड़े में दुलदुल का जुलूस उठेगा।