झूमें श्रोता: डा. जया शाही ने किया भोजपुरी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति
dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में 31.08.2026 को हिन्दी विभाग के पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी भाषा एवं साहित्य शोध अध्ययनपीठ और काशी कला कस्तूरी वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में पं. हरिराम द्विवेदी के गीतों पर एकाग्र गीतांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वसन्त महिला महाविद्यालय, राजघाट से मुख्य अतिथि कलाकार डाॅ. जया शाही द्वारा पं. हरिराम द्विवेदी के भोजपुरी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति की गयी।
कजरी ने किया रस माधुर्य का संचार
जया शाही के मधुर स्वरों में विदाई गीत, झूला गीत, सोहर एवं कजरी ने वातावरण में रस माधुर्य का संचार कर दिया। इस दौरान मौजूद श्रोता झूम उठें। आयोजन में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने पं. हरिराम द्विवेदी के वैविध्यपूर्ण सृजनात्मकता को याद करते हुए उनको नमन किया। महाविद्यालय की प्रबंधक उमा भट्टाचार्या द्वारा सभी के लिए शुभ मंगल कामना संदेश प्रेषित किया गया। कार्यक्रम में औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं अध्ययनपीठ की महासचिव प्रो. आशा यादव ने पण्डित जी के रचना संसार के सौन्दर्य को व्याख्यायित किया। उन्होंने कहा कि पं. हरिराम द्विवेदी का व्यक्तिगत करूणा, प्रेम इत्यादि भाव उनकी रचनाओं में समष्टिगत होकर आयी है। यही समष्टि भाव उनके रचनात्मक व्यक्तित्व को अमर बना देती है।
आयोजन में इनकी रही खास मौजूदगी
इस आयोजन में पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी भाषा एवं साहित्य शोध अध्ययनपीठ के अध्यक्ष अरूण कुमार द्विवेदी, उपाध्यक्ष, प्रो. सविता भारद्वाज एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. मीनू पाठक, काशी कला कस्तूरी की अध्यक्ष डाॅ. शबनम खातून के अलावा डाॅ. सरिता लखोटिया, डाॅ. कुसुम मिश्रा (पूर्व प्राचार्या, वसन्त कन्या महाविद्यालय), डाॅ. बीना सिंह, डाॅ. स्वरवन्दना शर्मा, पिलग्रिम्स के पूर्व प्रकाशक रामानन्द तिवारी, गृह विज्ञान विभाग से प्रो. संगीता देवड़िया, प्रो. गरिमा उपाध्याय, प्रो. अंशु शुक्ला, संगीत गायन विभाग से प्रो. सीमा वर्मा, डाॅ. पूनम वर्मा, सौम्यकान्ति मुखर्जी, मनोविज्ञान विभाग से डॉ. शशिप्रभा, हिन्दी विभाग से प्रो. सपना भूषण, डाॅ. शुभांगी, डाॅ. प्रीति, राजलक्ष्मी उपस्थित रहीं। तबले पर अमित, हारमोनियम पर हर्षित ने संगत की तो संचालन राजलक्ष्मी ने किया।




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