नन्हीं तुलिका से अभिव्यक्त कर काशी की ऐतिहासिक धरोहर Kidzee के नन्हें कलाकारों ने जीता दिल
dil india live (Varanasi) शिक्षा, धर्म और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी अपने आप में अनूठी है। यहां पग पग पर केवल मंदिर, मस्जिद ही नहीं कला और संस्कृति के रंग भी स्वत दिखाई देते हैं। कुछ ऐसी ही कला संस्कृति की मिसाल हमें देखने को मिली Kauri Exhibition Hall (कला दीर्घा) में। Kauri चौकाघाट में Kidzee Elementary School, Nadesar Branch के नन्हे मुन्ने बच्चों की पिछले दिनों प्रेरणादायक कला प्रदर्शनी और कल्चरल प्रोग्राम आयोजित किया गया था। प्ले ग्रुप से class 5 तक के इन बच्चों ने ज्यादातर पेंटिंग्स वारली और गौड़ आर्ट शैली में बनाई थीं, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर स्वत: खींचा। लोग चकित थे खासकर बच्चों के पैरेंट्स और टीचर्स भी, इतनी कम उम्र में बच्चों की कला समझ इतनी बड़ी और पारखी है ये किसी ने सोचा भी नहीं था।
dil india live (Varanasi) शिक्षा, धर्म और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी अपने आप में अनूठी है। यहां पग पग पर केवल मंदिर, मस्जिद ही नहीं कला और संस्कृति के रंग भी स्वत दिखाई देते हैं। कुछ ऐसी ही कला संस्कृति की मिसाल हमें देखने को मिली Kauri Exhibition Hall (कला दीर्घा) में। Kauri चौकाघाट में Kidzee Elementary School, Nadesar Branch के नन्हे मुन्ने बच्चों की पिछले दिनों प्रेरणादायक कला प्रदर्शनी और कल्चरल प्रोग्राम आयोजित किया गया था। प्ले ग्रुप से class 5 तक के इन बच्चों ने ज्यादातर पेंटिंग्स वारली और गौड़ आर्ट शैली में बनाई थीं, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर स्वत: खींचा। लोग चकित थे खासकर बच्चों के पैरेंट्स और टीचर्स भी, इतनी कम उम्र में बच्चों की कला समझ इतनी बड़ी और पारखी है ये किसी ने सोचा भी नहीं था।
क्या है वारली और गौड़ आर्ट?
बच्चों ने दो प्रसिद्ध जनजातीय कला को अपने अंदाज में पेश किया जिसमें वारली और गौड़ आर्ट शामिल है।
वारली आर्ट
महाराष्ट्र की वारली जनजाति की यह 400 साल पुरानी कला है। इसमें मिट्टी की दीवारों पर चावल के आटे से सफेद रंग से चित्र बनाए जाते हैं। तिकोने आकार के इंसान, गोले और रोजमर्रा की जिंदगी इसकी पहचान है।गौड़ / गोंड आर्ट
मध्य प्रदेश के गोंड जनजाति की यह कला प्रकृति को समर्पित है। इसमें बारीक बिंदुओं और लकीरों से जानवरों, पेड़ों और कहानियों को चटख प्राकृतिक रंगों से दिखाया जाता है।
नन्हें हाथों ने इसी Warli-Gond स्टाइल में काशी के घाट, मंदिर और गांव की तस्वीरें बनाईं। साथ ही नुक्कड़ नाटक, देशभक्ति गीत और कविताओं की प्रस्तुति ने आयोजन में चार चांद लगा दिया। अभिभावकों ने इस अनोखी पहल के लिए स्कूल संचालक, प्रिंसिपल रितिका सरीन और टीचर्स को सराहा तो kauri की इंचार्ज स्तुति ने आभार व्यक्त किया।











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