सोमवार, 17 अगस्त 2026

Eid miladunnabi August 2026 Varanasi Uttar Pradesh : जश्ने ईद मिलादुन्नबी की तैयारियां तेज, निकलेगा जुलूस होगी सजावट

नबी की नात से गुलजार होगी शब, यहां जानिए क्या है ईद मिलादुन्नबी, कब मनेगा जश्न
Eid miladunnabi August 2026 Varanasi Uttar Pradesh


dil india live (Varanasi). ईद मिलाद-उन-नबी (Eid miladunnabi 17 August 2026)  Uttar Pradesh के Varanasi में जश्ने ईद मिलादुन्नबी की तैयारियां तेज हो चली हैं। जुलूसे मोहम्मदी को सफलतापूर्वक निकलने को लेकर जगह जगह बैठकें हो रही है। ईद मिलाद-उन-नबी रबीउल अव्वल महीने की 11, 12 तारीख को मनाया जाता है। आज रबीउल अव्वल महीने की तीन तारीख हो गई है। सदर काजी ए शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने फाटक शेख सलीम में हुई बैठक के बाद बताया कि जुलूस कैसे निकलेगा, सजावट कैसे और कहां कहां होगी इस पर अलग अलग अंजुमनों की बैठकों का दौर जारी है। कोशिश की जा रही है सभी एक प्लेटफार्म पर आकर जुलूस-ए मोहम्मदी अमन और मिल्लत के साथ निकालें।

कब मनेगा ईद मिलादुन्नबी का जश्न 

11 रबीउल अव्वल की रात जहां नबी की नात से गुलजार होगी वहीं 12 रबीउल अव्वल को जुलूसे मोहम्मदी निकलेगा। इस बार नबी की पैदाइश का जश्न 26 अगस्त को है। आयोजन का आगाज़ पूर्व संध्या 25 अगस्त से ही हो जाएगा। 25 अगस्त को मरकजी यौमुन्नबी कमेटी हड़हासराय से जुलूस निकालती है और पूरे इलाके में अंजुमन नातिया कलाम पेश करती है।

Eid miladunnabi August 2026 Varanasi Uttar Pradesh

क्या है ईद मिलाद-उन-नबी

पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैदाइश (जन्मदिन) की खुशी का पर्व है। इस पर्व की बहुत अहमियत है। यह दिन मुस्लिम समुदाय के लिए आस्था, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। हर साल इस मौके पर मिलाद, जलसा, नातिया मुशायरा, जुलूस और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। शहर की मस्जिदों में एक से 12 रबीउल अव्वल तक ज़िक्रे नबी का दौर चलता है जो शुरू हो चुका है।

दरअसल इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना रबीउल अव्वल चांद के दीदार संग शनिवार से ही शुरू हो चुका है। मुसलमानों के लिए यह महीना बेहद खास है, क्यों कि इस महीने में 12 रबीउल अव्वल को पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अरब की सरजमीं पर जन्म हुआ था। इस महीने को दुनिया भर के मुसलमान अकीदत और मोहब्बत के साथ मनाते हैं। रबीउल अव्वल की 12 वीं तारीख को पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन की तैयारी महीनों पहले से ही शुरू हो जाती है। कहां जलसा होगा? कहां अंजुमन का मुकाबला होगा? कौन कौन उलेमा आएंगे? कौन कौन अंजुमन कलाम पढ़ेगी। इसे पहले ही तय कर लिया जाता है। ईद-ए-मिलादुन्नबी या ईद-मिलाद पूरी दुनिया में मुसलमान मनाते हैं। ईद-मिलाद के मौके पर मस्जिदों और घरों में सजावट की जाती है। जगह-जगह जुलूस निकाले जाते हैं और पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत (जीवन-चरित्र) पर रौशनी डाली जाती है। इस दिन कुरआन की तिलावत की जाती है और दरूद-ओ-सलाम पेश किया जाता है।

गरीबों और जरूरतमंदों की करते हैं मदद 

मुसलमान इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। कई जगहों पर खाना खिलाने और मिठाइयां बांटने का भी खास इंतजाम किया जाता है। ईद-मिलाद का मकसद सिर्फ जश्न मनाना नहीं है, बल्कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीम, इंसाफ, मोहब्बत, रहमत और इंसानियत को याद करना और उस पर अमल करना है। नबी के आने के साथ ही अरब से बुराईयां खत्म होना शुरू हो गई थी। मानवता और इंसानियत की सत्ता कायम हुई थी। 

ये हैं बनारस की प्रमुख अंजुमन 
अंजुमन तबलीग़ अहले सुन्नत व दावतें नमाज, अंजुमन मरकजी दावते इस्लामी, अंजुमन दावते इस्लामी, अंजुमन मरकजी यौमुन्नबी कमेटी, सेंट्रल यौमुन्नबी कमेटी, अंजुमन अलविया, अंजुमन फलाहे दीन, अंजुमन गुलामाने वारिस, अंजुमन फलाहे मिल्लत, अंजुमन तकरीबाते इस्लाम, अंजुमन मुहिब्बाने अहले बैत, अंजुमन इलाहिया, अंजुमन मोहिबबाने रसूल, अंजुमन शाहीन-ए-इस्लाम, अंजुमन चरागे इस्लाम, अंजुमन बज़्मे अनवारे सूफिया, अंजुमन फारूकिया, अंजुमन गुलशने रसूल, अंजुमन कारवाने हरम, अंजुमन मुजाहीदीने-ए-इस्लाम, अंजुमन अस्हाबा-ए-मोहम्मद, अंजुमन इरफानिया, अंजुमन इस्लातुल इस्लाम, अंजुमन फारूकिया, अंजुमन गुलामाने सहाबा, अंजुमन रजा-ए-मुस्तफा, अंजुमन शाहे मदीना, अंजुमन सुन्नते रसूल, अंजुमन पंजतन पाक,  आदि शहर बनारस की प्रमुख अंजुमन है जो नबी के जश्न की तैयारियों में जुटी हुई है।

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