बुधवार, 26 अगस्त 2026

Eid miladunnabi news 26 August 2026: यहां जानिए क्यों सजा है सारा जहां, किसका मनाया जा रहा है जश्न

ये है पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह की यौमे पैदाइश ईद मिलाद-उन-नबी का जश्न
Eid miladunnabi 26 August 2026 को पैग़म्बरे इस्लाम Hazrat muhammad (स.) की यौमे पैदाइश


  • सरफराज अहमद/ मोहम्मद रिजवान 

dil india live (Varanasi).  देश दुनिया भर में आज फिर ईद है। ये रमज़ान के रोज़े रखने की खुशी में मनाई जाने वाली ईद नहीं बल्कि ये ईद उस शख्सियत की दुनिया में आमद की खुशी में है जिसने हमें इस्लाम का सिस्टम दिया, जिसने हमें रोज़ा रखना, नमाज़ पढ़ना ही नहीं जिंदगी जीने से लेकर दुनिया से रुखसत होने तक का सलीका बताया। ये ईद-मिलादुन्नबी का जश्न मनाया जा रहा है। इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) के जन्मदिन की खुशी की ईद है, इसे हम ईद मिलादुनन्बी या ईद-ए-मिलाद कहते है। 

दरअसल रबीउल अव्वल की 12 वीं तारीख को ही हजरत मोहम्मद (स.) की यौमे पैदाइश (जन्म) हुई थी इसीलिए मुस्लिम इस दिन को जश्न के रूप में मनाते हैं। इस खास मौके पर रात भर मस्जिदों मुहल्लों में इबादत होती हैं और जलसा (इस्लामिक सभा) का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजरत मोहम्मद (स.) की शान में नातिया कलाम व नज़्म अकीदतमंद पेश करते हैं। कई जगहों पर जुलुसे मोहम्मदी निकाले जाते है। इस दिन मस्जिदों व घरों में कुरान को खास तौर पर पढ़ा जाता है और गरीबों में जरूरत की चीजें खैरात व सदका की जाती हैं।



पैगंबर मोहम्मद (स.) की पैदाइश

पैगंबर मोहम्मद (स.) का जन्म अरब के शहर मक्का में 571 ईस्वी में 12 रबीउल अव्वल को सुबह सादिक के वक्त हुआ था। नबी की पैदाइश की सुबह अरब में हर तरफ नूर की बारिश हो रही थी। इस्लामी किताबों में आया है जैसी सुबह उस दिन थी वैसी ना तो कभी सुबह हुई न ही फिज़ा में कभी ऐसी ताजगी देखी गई।

पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) के जन्म से पहले ही उनके वालिद का इंतकाल (निधन) हो चुका था। जब वह 6 वर्ष के थे तो उनकी वालिदा जनाबे आमीना का भी इंतकाल हो गया। मां के इंतकाल के बाद पैगंबर मोहम्मद (स.) अपने चाचा अबू तालिब और दादा अबू  मुतालिब के साथ रहने लगे। इनके वालिद का नाम अब्दुल्लाह और मां का नाम बीबी आमिना था। अल्लाह ने सबसे पहले पैगंबर हजरत मोहम्मद को ही पवित्र कुरान अता की।  इसके बाद ही पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) ने पवित्र कुरान का पैगाम दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया।

नबी ने क ऐसा इस्लाम का सिस्टम बनाया कि आज पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी, समझी और याद की जाने वाली किताब कुरान मजीद है। हर मुसलमान नमाज़ में कुरान की आयतें पढ़ता है। इसलिए पूरी दुनिया में कुरान पढ़ी और याद की जाती है। संपूर्ण कुरान कंठस्थ करने वाले हाफ़िज़ कहलाते हैं जो अकेले बनारस में ही दस हजार से ज्यादा हैं, पूरे देश और दुनिया का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है। 

आज उसी शख्सियत पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह (स.) की यौमे पैदाइश ईद मिलाद-उन-नबी के तौर पर मनाया जा रहा है।





Eid miladunnabi 26 August 2026

सज गये मुस्लिम इलाक़े गूंज रही नात

इस्लाम धर्म के आखिरी पैगम्बर, हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.) की यौमे पैदाइश की खुशी में मंगलवार की शाम मुसालिम इलाके रौशनी और सजावट से इतराते नज़र आये। इस दौरान सारा जहां नबी की मोहब्बत और अकीदत लुटाता नज़र आया। हर तरफ नूर की बारिश और डायसो से नबी की शान में कलाम पेश करते शायरों का जज्बा और जुनून देखते ही बन रहा था। यह नज़ारा था अर्दली बाज़ार मुख्य रोड का। यहां देर रात तक शायरों ने जहां कलाम पेश किया वही उलेमा की तकरीर से भी अकीदतमंद फैज़याब हुए। मध्यरात्रि तक शायरों के कलाम फिजा में खुशबू बिखेरते नजर आए। नबी की शान में एक से एक उम्दा कलाम गूंज रहा था।

उधर मरकजी यौमुन्नबी कमेटी की ओर से ईद मिलादुन्नबी पर, आज किसकी आमद से हर तरफ उजाला है, आखिरी पैयंबर है और नूर वाला है... व, आमीना का लाल देखो जगमग जगमग करता है...। जैसे कलाम पेश करते हुए मंगलवार की रात जुलूस निकाला गया। जुलूस बेनियाबाग के पूर्वी छोर हड़हा मैदान से निकला। इसके बाद सराय हाड़हा, छत्तातले, नारियल बाजार, दालमंडी, नई सड़क, मस्जिद खुदा बख्श, कुरैशबाग मस्जिद, उस्ताद बिसमिल्लाह खान मार्ग होकर भीखा शाह गेट पर पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस में शकील अहमद बबलू, महमूद खां, रेयाज अहमद, इमरान अहमद, दिलशाद अहमद आदि व्यवस्था संभाले हुए थे।

जगमगा उठा मुस्लिम इलाका

Eid miladunnabi 2026 के जश्न के दौरान मुस्लिम इलाके रौशनी से नहां उठे। अर्दली बाजार, पक्की बाजार, मकबूल आलम रोड, नदेसर, लल्लापुरा, हबीबपुरा, नई सड़क, दालमंडी, सराय हड़हा, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, शक्कर तालाब, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीली कोठी, बड़ी बाजार आदि इलाकों में खूबसूरत विद्युतीय सजावट देखने को मिली। हर तरफ बरसात और बारिश के बावजूद खूबसूरत सजावट की गई थी।



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