आला हज़रत का मसलक नया नहीं, जो इमामे आज़म का मसलक वही आला हजरत का मसलक-मौलाना इलियास कादरी
बनारस में मस्जिदों-मदरसों में हुआ 2:38 पर आला हज़रत का कुल शरीफ
तकरीर और नातिया कलाम की सजी महफिलें, बांटा गया तबर्रुक
Varanasi (dil India live).आला हज़रत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का मसलक कोई नया मसलक नहीं है बल्कि जो इमामे आज़म का मसलक था, जो चारों इमाम का मसलक था वही आला हजरत का मसलक है, कोई ये न सोचें की आला हज़रत का पांचवां मसलक कहां से आ गया। आला हज़रत के urs पर आयोजित कुल शरीफ के मौके पर मस्जिद उल्फत बीबी अर्दली बाज़ार में मौलाना इलियास कादरी ने यह तकरीर की। उन्होंने कहा कि आला हज़रत को रब ने उस दौर में हिंद की सरजमीं पर भेजा जब नबी की शान में गुस्ताखियां बढ़ गई थी इस्लाम के खिलाफ तरह तरह के प्रोपगंडे हो रहे थे उस दौर में अपने इल्म से आला हज़रत ने इस्लाम को नयी रौशनी दी। उन्होंने एक हजार से ज्यादा किताबें लिखी। वो जो किताब एक बार पढ़ लेते वो हफ्तों उन्हें याद हो जाती थी। उनके करामात की लंबी फेहरिस्त है जिसे कुछ घंटों में बयां नहीं किया जा सकता। इस मौके पर मदरसा खानम जान के बच्चों ने कलाम पेश किया। मौलाना नईम, मौलाना सलाउद्दीन, मौलाना अजहरुल कादरी, मौलाना तैय्यब, हाफ़िज़ अली रज़ा, हाफ़िज़ मूसा, इम्तियाज अहमद आदि मौजूद थे। इस दौरान 2:38 बजे आला हज़रत का कुल शरीफ भी हुआ।
एक दिन पहले ही हो गया बरेली में उर्स
इस बार बरेली शरीफ़ में आला हज़रत का उर्स सावन को देखते हुए एक दिन पहले ही सम्पन्न हो गया मगर पूर्वांचल के जिलों खासकर बनारस में 09.08.2026. को इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का तीन रोजा उर्स-ए-रजवी इतवार को पूरी अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया। इस मौके पर मस्जिदों, मदरसों व घरों में आला हजरत का कुल शरीफ 2 बज कर 38 मिनट पर किया गया। उर्स में उलेमा की तकरीर, नात व मनकबत भी नातिया शायरों ने पेश किया।
अमन मिल्लत व मुल्क की तरक्की की दुआएं
आला हजरत के उर्स पर देश दुनिया से लाखों दीवाने बरेली शरीफ उर्स में शिरकत करने गए थे जो नहीं जा सकें वो जहां थे वहीं से उन्हें याद करते हैं। इस दौरान बनारस में सभी अकीदतमंदों ने जौहर की नमाज़ के बाद दोपहर में 2 बज कर 38 मिनट पर कुल शरीफ में हिस्सा लिया। कुल शरीफ के बाद देश दुनिया में अमन, मिल्लत और मुल्क की तरक्की के लिए लोगों ने दुआ में हाथ उठाया।


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