मजलिस में, या सकीना या अब्बास... की गूंजी सदाएं आंसुओं का पेश हुआ नजराना
Mohd Rizwan
Varanasi (dil India live). आज ५ अगस्त (१० सफ़र १४४७ हिजरी) को शहीदाने कर्बला इमाम हुसैन की ४ साल की बेटी जनाबे सकीना का ग़म मनाते हुए उनकी शहादत को याद किया। दरगाहे फातमान में मातमी अंजुमन जव्वादिया के जेरे इंतजाम सौ साल से भी पुराना ताबूत का जुलूस निकाला गया। ताबूत की जियारत करने के लिए मर्द व खवातीन का हुजूम उमड़ा हुआ था। या सकीना या अब्बास की सदाओं से फिज़ा गमगीन हो गई। नोहा और मातम के साथ लोगों ने खेराजे अकीदत पेश किया। ऐसी ही कदीमी ताबूत अर्दली बाजार में नाजिम अकबर रिज़वी के अज़ाखाने पर उठाया गया। अंजुमन हैदरी चौक ने दर्द भरा नोहा पेश किया। काली महाल रिज़वी हाउस में इमरोज़ फातमा के संयोजन में बीबी सकीना का ताबूत उठाने के लिए शहर भर की औरतें कालीमहल पहुंची। यहां ज़ाकिरा कनीज जेहरा रिज़वी मुंबई ने मजलिस को खिताब किया। इस मौके पर नम आंखों से लोगो ने ताबूत की जियारत की। शहर भर में सभी अंजुमनों के साथ खवातीन ने भी इमामबाड़ों में जनाबे सकीना का ग़म मनाते हुए नोहा ख्वानी व मातम किया।
औसानगंज नवाब की देवढी में मेंहदी बख्त के निवास पर भी खवातीन ने मजलिस का आयोजन किया। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि यजीदी जुल्म को सहते सहते 1400 साल पहले 10 सफर को जनाबे सकीना ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनकी शहादत से जो इंकलाब बरपा, उसको सारी दुनिया आज भी याद करती है। फरमान हैदर ने बताया कि बुधवार एक सफर से इमाम हुसैन के चालीसवे के सिलसिले से मजलिसों का आगाज हो जाएगा जो स्वतंत्रता दिवस तक जारी रहेगा। वहीं 11 अगस्त सोमवार को काली महल में खवातीन इमाम रज़ा का अंगूरों वाला ताबूत दोपहर एक बजे दिन में उठाएंगी।
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