फिजुल खर्ची पर दरगाह आला हजरत ने लगाई रोक
ना डीजे, ना जुलूस, बीमार लोगों पर खर्च करो पैसा
Mohd Rizwan
Bareilly (dil India live). अकीदत और खिदमते खल्क (समाज सेवा) जब एक साथ चले तो समाज को नई राह मिलती है। कुछ ऐसी ही पहल बरेली शरीफ की दरगाह आला हजरत से देखने को मिल रहा है। दरगाह के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने परंपरा में बदलाव कर डीजे, चादर और जुलूस पर खर्च होने वाले पैसे को बीमार और जरूरतमंद लोगों की दवा के लिए देने का ऐलान किया है। इस नई सोच का आगाज़ इस बार दरगाह आला हजरत ने करके सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हर साल आला हजरत के उर्स में बड़ी संख्या में लोग चादर और जुलूस के साथ आकर अकीदत पेश करते हैं।
इस बार दरगाह के सज्जादानशीन ने अपील जारी कर कहा है कि शोर नहीं, सुकून दो और दवा की जरूरत है, दिखावे की नहीं। उन्होंने समाज के हर वर्ग से इसका पालन करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि केवल उर्स ही नहीं बल्कि पैगंबरे इस्लाम के जुलूस ए मोहम्मदी व जश्न में भी इसे लागू किया जाए। सज्जादानशीन ने अंजुमन कमेटियों से कहा कि जुलूस में लगने वाला डीजे, बैनर और फूलों का खर्च उन लोगों की मदद में लगाया जाए जो बीमारी से जूझ रहे हैं और खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। इस फैसले को देश दुनिया के लोगों से समर्थन मिल रहा है।
सज्जादानशीन ने यह पहल की तो तमाम लोगों ने खुद आगे बढ़कर इलाज में मदद के लिए आर्थिक सहयोग करने का वादा किया है। कुछ लोगों ने अपने या अपने बच्चों के जन्मदिन पर चादर चढ़ाने की जगह, उस दिन किसी जरूरतमंद की मदद करने की बात कही।
दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि धार्मिक आस्था का सबसे सुंदर रूप इंसान की मदद है। अगर हर आयोजन में थोड़ा-थोड़ा हिस्सा भी जरूरतमंदों को समर्पित कर दिया जाए तो समाज से बहुत सारी तकलीफें खुद-ब-खुद कम हो जाएंगी। इस नेक पहल ने न सिर्फ धर्म को एक नई दिशा दी है बल्कि सेवा भावना को मजबूत किया है। बरेली की दरगाह ने एक मिसाल दी है जिस पर अमल की उम्मीद बाकी से भी है।
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