बुधवार, 20 अगस्त 2025

VKM Varanasi Main मनाई गई प्रेमचन्द जयंती

भारत की संस्कृति और संवेदना को समझना हो तो प्रेमचंद के साहित्य को पढ़ें- प्रो. रचना श्रीवास्तव
स्त्री की समस्याओं का चित्रण ही नहीं नारियों को जागरूक भी करते हैं प्रेमचंद के साहित्य



Varanasi (dil India live). वसंत कन्या महाविद्यालय, वाराणसी में हिन्दी विभाग द्वारा प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन  डॉ. सपना भूषण के निर्देशन में किया गया। यह आयोजन महाविद्यालय के सभागार में मध्याह्न 12ः00 बजे आरम्भ हुआ, जिसका विषय था - “प्रेमचन्द की कहानियों में स्त्री”।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप-प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पण से हुआ। तत्पश्चात् संगीत विभाग की अध्यक्षा प्रो. सीमा वर्मा के निर्देशन में संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा सुमधुर कुलगीत का गायन किया गया । इसके उपरान्त महाविद्यालय की प्राचार्या, प्रबंधक और हिन्दी विभागाध्यक्ष ने मुख्य अतिथि वक्ता प्रो. आभा गुप्ता ठाकुर (आचार्य, हिन्दी विभाग, का.हि.वि.वि.) को उत्तरीय और पौधा देकर सम्मानित किया।


महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण देते हुए प्रेमचन्द को हिन्दी साहित्य का महान पुरोधा बताया। उन्होंने कहा कि प्रेमचन्द का साहित्य समाज के सबसे उपेक्षित वर्गों को स्वर प्रदान करता है। उनका साहित्य ग्रामीण भारत का दस्तावेज है। उनकी कहानियाँ मानवीय संवेदनाएँ, बाल मनोविज्ञान इत्यादि विविधता से भरे हुए हैं। अगर भारत की संस्कृति और संवेदना को समझना हो तो प्रेमचंद के साहित्य को अवश्य पढ़ना चाहिए।

विषय-प्रवर्तन करते हुए हिन्दी विभाग की अध्यक्षा प्रो. आशा यादव ने कहा कि प्रेमचन्द के साहित्य में व्यापक राष्ट्रवाद, नारी के स्थान एवं उसके परिवर्तित होते रूप तथा नारी जागरण का संदेश मिलता है। वे अपनी कहानियों में केवल हाशिये पर खड़ी स्त्री की समस्याओं का चित्रण नहीं करते अपितु नारियों को जागरूक भी करते हैं। आज की संगोष्ठी की मुख्य वक्ता प्रो० आभा गुप्ता ठाकुर ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य दो महत्वपूर्ण घटनाओं से प्रेरित रहा- प्रथम उन्नीसवीं सदी का सुधारवादी आंदोलन और दूसरा भारतीय नवजागरण। प्रेमचंद की कहानियों पर बात करते हुए आपने रवीन्द्रनाथ टैगोर और शरतचंद्र के स्त्री पात्रों का भी तुलनात्मक उल्लेख किया। इनकी कहानियों में स्त्री विविध रूपों में दिखाई देती है। कहीं वह त्यागमयी माँ और स्नेह की प्रतिमूर्ति है तो कहीं स्त्री आंतरिक संघर्ष और आत्म-सम्मान की खोज करती है, वह समाज की धारणाओं से जूझती है तथा श्रम एवं आत्म-निर्भरता का प्रतीक भी बनती है।


इसके पश्चात् डॉ. प्रीति विश्वकर्मा के निर्देशन में छात्राओं द्वारा प्रेमचन्द की प्रसिद्ध कहानी  “पत्नी से पति” का मंचन किया गया, जिसे दर्शकों ने सराहा। प्रेमचंद के साहित्य पर आधारित प्रश्नोत्तरी एवं चित्रांकन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार वितरण भी किया गया। महाविद्यालय की प्रबंधक उमा भट्टाचार्या ने छात्राओं की नाट्य प्रस्तुति और कार्यक्रम की सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में हिन्दी विभाग की सहअध्यापिका डा. सपना भूषण ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर हिन्दी विभाग की प्रो. आशा यादव, डॉ. सपना भूषण, डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव, डॉ० प्रीति विश्वकर्मा एवं सुश्री राजलक्ष्मी जायसवाल के साथ ही महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापकगण एवं छात्राओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

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