मंगलवार, 19 अगस्त 2025

UP K Bareilly Main तीन दिनी Urs -e-Razvi का हुआ आगाज़

जारी किया गया मुस्लिम एजेंडा, बुराइयों के खिलाफ चलाएंगे आंदोलन

सियासी मैदान में भी कूदेंगे बरेलवी 



सरफराज अहमद 

Bareilly (dil India live)। बरेली शरीफ में आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का सालाना तीन दिनी उर्स का आगाज़ हो गया है। बरेली शरीफ में देश दुनिया के तमाम बरेलवी उलेमा, दानिश्वर व मुरीदों का जमावड़ा होना शुरू हो गया है। उर्स के पहले दिन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के तत्वावधान में बैठक हुई। बैठक में देशभर के उलमा शामिल हुए। इसमें ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुस्लिम एजेंडे का ऐलान किया। मौलाना ने कहा कि मुस्लिम समाज में बुराइयां बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं, इसके खिलाफ आंदोलन चलाया जाएगा। मुस्लिम समाज को इस वक्त कुछ ऐसी बुराइयों से बचने की जरूरत है जो सामाजिक, धार्मिक और नैतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि राजनीतिक मैदान में बरेलवी बहुत पीछे हैं। बरेलवी उलमा ने सियासत को सीधे तौर पर पसंद नहीं किया,नौजवानों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल सका।मौलाना ने कहा कि मगर अब देश के सियासी हालात में जरूरत पेश आई है कि बरेलवियों को भी राजनीति के मैदान में कदम रखना चाहिए।इसलिए अब हर जिले में बरेलवी लीडरशिप को उभारा जाएगा,राजनीतिक मैदान में दमखम के साथ नुमाइंदगी (प्रतिनिधित्व) किया जाएगा।


मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने शिक्षा हासिल करने पर जोर दिया है। कुरान शरीफ में खुदा ने सबसे पहली आयत पैगंबर ए इस्लाम पर नाजिल (उतारी) की वो भी शिक्षा पर आधारित है। मौलाना ने कहा कि मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी दूसरी कौमों से बहुत पीछे हैं। इसलिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों पर तकिया रखकर भरोसा करने की जरूरत नहीं है, बल्कि खुद मुसलमानों को अपनी नयी नस्ल की तालीम और तरबियत के लिए खड़ा होना होगा, वरना पीछे ढकेल दिए जाएं। 

शरीयत के खिलाफ है फिजुल खर्ची 

1. इस्लाम ने शादी को बहुत आसान और कम खर्च वाला कार्य बनाया है, मगर आजकल मुसलमानों ने शादी को बहुत महंगा कर दिया जो गैर शरई है।

2. निकाह में दूल्हा और दुल्हन की तैयारियां में जो तौर तरीका अपनाया जाता है, वो सब गैर शरई है।

3. शादियों में बरात का खाना, फिर वलीमे का खाना, फिर लड़की वालों की तरफ से खाना, हाल की बुकिंग के साथ ही और दीगर चींजों में फिजूलखर्ची की जाती है जो नाजायज है।

4. निकाह के दिन लड़की वाले हाल में दहेज की नुमाइश करते हैं, ये भी नाजायज है।

5. इस्लाम में दहेज के मांगने पर सख्त मनाही की है, मगर शादी की तारीख तय करते वक्त दूल्हे की तरफ से दहेज के लिए जिन जिन चीजों का मुतालबा किया जाता है, वो सभी नाजायज कार्य हैं।

6. लड़के वाले हो या लड़की वाले दोनों तरफ के खाने के इंतजाम मे खड़े होकर (बड़े सिस्टम) खाना खिलाने की व्यवस्था की जाती है, शरीयत की नजर में यह सख्त गुनाह का काम है। बैठकर खाना खिलाने कि व्यवस्था होनी चाहिए।

एजुकेशन पर दिया जोर 

1. दीनी और दुनियावी शिक्षा के लिए स्कूल, कॉलेज, और विश्वविद्यालय अमीर मुसलमान खोलें। मौजूदा समय में तकनीकी शिक्षा में पीछे रहना भी समाज के लिए नुकसानदेय है।

2. दुनियावी और धार्मिक शिक्षा में संतुलन और विज्ञान व तकनीक में जागरूकता लाना भी जरूरी है।

3. आईएएस, आईएएफ, आईपीएस, पीसीएस, पीसीएस जे आदि की परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटर खोले जाएं। आर्थिक तौर पर गरीब व कमजोर छात्रों को फ्री कोचिंग करायी जाए।

4. मौजूदा हालात के पेशे नज़र लड़कियों के लिए अलहेदा स्कूल व कॉलेज खोले जाए, ताकि लड़कियों की शिक्षा अच्छे में हो सके ताकि समाज के बीच वो भी तरक्की कर सकें। 

फिजूलखर्ची और नशा

1. आजकल कई नौजवान नशे के आदी हो चुके हैं, जिसकी वजह से वह परिवार में विवाद और मां-बाप के लिए एक मुसीबत का सबब बन जाते हैं।

2. मस्जिद के इमामों और बुद्धिजीवियों को इस पर काम करना होगा।

3. मुसलमान शादी विवाह और दीगर कार्यक्रमों के साथ ही साथ जलसा, जुलूस, लंगर और उर्स में बेपनाह फिजूलखर्ची करते हैं। इस फिजूलखर्ची से कोई शबाब नहीं हासिल होता, बचना जरूरी है।

4. मुसलमान पीरी मुरीदी को असल इस्लाम न समझे, बल्कि असल इस्लाम तोहिद,नमाज,रोज़ा,हज,जकात हैं। इनके करने से खुदा और रसूल खुश होंगे।

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