देश दुनिया से बरेली में जुटते हैं आला हजरत के दीवाने
तीन दिवसीय उर्स-ए-रज़वी 18 से, आरएसी ने की बैठक
Sarfaraz Ahmad
Bareilly (dil India live)। उर्स-ए-रज़वी 18 से 20 अगस्त तक बरेली के साथ ही देश दुनिया में मनाया जाएगा। हालांकि मुख्य आयोजन बरेली शरीफ़ में होगा जिसमें देश-विदेश से भी आला हजरत के चाहने वाले जुटते हैं। उर्स की तैयारियों के सिलसिले में पिछले दिनों आयोजित ऑल इंडिया रज़ा एक्शन कमेटी (आरएसी) के मुख्यालय 'बैतुर्रजा' पर एक बैठक की गई। इस बैठक की सदारत नबीरा-ए-आला हज़रत व आरएसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अदनान रजा कादरी ने की। बताया गया कि उर्स-ए-रज़वी 18 से 20 अगस्त तक मनाया जाएगा। इसकी तैयारियों के सिलसिले में आयोजित बैठक में नबीरा-ए-आला हजरत मौलाना अदनान रजा कादरी ने आरएसी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं को उर्स कि तैयारियों में जुटने के लिए कहा। उर्स के तीनों दिन के प्रोग्राम के लिए उलेमा, मशाइख, नातखां हज़रात से खुद नबीरा-ए-आला हज़रत बात करेंगे। जायरीन को बरेली जंक्शन और बस अड्डों से लेकर उर्स स्थल तथा दरगाह आला हज़रत तक पहुँचाने के लिए फी ऑटो सेवा व अकीदतमंदों के लिए हेल्पलाइन, ठहरने और लंगर से लेकर मेडिकल कैम्प लगाने तक का पिछली बार से बेहतर इंतजाम करने का निर्णय लिया गया।
इस मौके पर मुफ्ती उमर रजा, हाफिज इमरान रजा, मौलाना सलीम रज़ा, मौलाना सय्यद सफदर रजा, मौलाना कमरुज्जमा, मौलाना सय्यद तहसीन रजा, मौलाना रफी रजा, मौलाना इंदाज़ रजा, मौलाना लइक रज़ा, मौलाना आरिफ रजा, मौलाना लियाकत रज़ा, मौलाना ताज रज़ा, मौलाना अज़हर रज़ा, मौलाना गुलाम रहमानी, मौलाना तालिब रज़ा, मौलाना अब्दुल कादिर, मौलाना अज़हर रजा, अब्दुल लतीफ कुरैशी, राजू बाबा, हनीफ अजहरी, सय्यद मुशर्रफ हुसैन, सईद सिब्तेनी, मोहम्मद जुनैद, मुजफ्फर अली, चांद रज़ा, अमिक रजा, गुलहसन रजा, शाहबाज रज़ा, साजिद रजा, काशिफ रज़ा, उवैस खान, समीर बेग, सलमान रज़ा, मोहसिन रजा, साहिल रज़ा, यूसुफ रज़ा, अनवर हुसैन, इश्तियाक हुसैन, इशरत रज़ा, इस्लाम डायरेक्टर, अनीस रज़ा, रिज़वान रजा, अब्दुल मोइद रजा, काशिफ रजा, इब्ने हसन, फुरकान रज़ा, शोएब रज़ा, नूर मोहम्मद, अफजल रजा, गौस मोहम्मद, मोहम्मद अहमद, मोहम्मद रज़ा, मोहम्मद ताहिर, फुरकान हुसैन, मोहसिन रजा, शाहनवाज़ रज़ा, सहित बड़ी तादाद उलमा आर ए सी पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद थे।
बैठक के बाद नबीरा-ए-आला हज़रत की क़यादत में तमाम लोग दरगाह अमीन-ए- शरीअत पहुँचे और कुल की फातिहा में शिरकत की। गौरतलब हो कि आला हजरत से अकीदत रखने वाले देश दुनिया में करोड़ों मुस्लिम है। उर्स के दौरान किस देश से कहा से कौन आ जाएं यह कोई नहीं जानता। इसलिए उर्स में बड़े पैमाने पर तैयारियां की जाती है।
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