सोमवार, 4 अगस्त 2025

UP: Varanasi Main Bijli कर्मियों ने निजीकरण का किया विरोध

बिजली कर्मचारियों की मांग बिना संसाधन काम न कराया जाएं व उत्पीड़न की कार्रवाई रुके

Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live)। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सोमवार को बिजली के निजीकरण का विरोध किया। वहीं बिना संसाधन उपलब्ध कराये फेसिअल अटेंडेंस को बाध्यकारी बनाकर वेतन रोकने के विरोध में प्रबन्ध निदेशक कार्यालय भिखारीपुर पर सभा कर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साएं विद्युत कर्मचारियों ने कहा कि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों के वापस होने तक बिजलीकर्मियों का संघर्ष जारी रहेगा।

सभा में वक्ताओं ने बताया कि बनारस के समस्त मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता एवं अधिशासी अभियंता कार्यालय पर बिजलीकर्मी शाम पांच बजे एक साथ बिजली के निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने बताया कि प्रबन्ध निदेशक को भ्रम है कि बिजलीकर्मी फेसिअल अटेंडेंस का विरोध कर रहे हैं। क्योंकि बिजलीकर्मी अपने कार्यालयों में समय से जा ही रहे हैंं। उसका विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि उसके संचालन के लिए संसाधन जैसे फेसियल अटेंडेंस लगाने हेतु मोबाईल या कैमरायुक्त कम्प्यूटर कार्यालयों में लगाने की मांग कर रहे हैं, क्या संसाधन की व्यवस्था करना प्रबन्धन की जिम्मेदारी नही है? साथ ही प्रबन्धन से पूछ रहे हैं कि क्या फील्ड में कार्यरत बिजलीकर्मी सुबह-दस बजे से पांच बजे तक का फेसिअल अटेंडेंस लगा दें तो शाम पांच बजे के बाद बन्द होने वाली लाइन का अनुरक्षण कौन करेगा।

वक्ताओं ने बताया कि 20 जून को प्रबन्ध निदेशक पुर्वांचल से संघर्ष समिति वाराणासी के पदाधिकारियों की वार्ता में यह तय हुआ था कि जब तक विद्युत कार्यालयों और उपकेंद्रों पर संसाधन उपलब्ध नही कराया जाता तब तक फेसियल अटेंडेंस को बाध्यकारी नहीं बनाया जाएगा फिर भी वेतन रोकना कतई उचित नही हैं।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शीर्ष प्रबन्धन की निजी घरानों के साथ मिलीभगत है और आठ माह से निजीकरण न कर पाने के कारण हताश प्रबंधन बिजली कर्मियों का लगातार उत्पीड़न कर रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पीड़न का उद्देश्य बिजली कर्मियों का मनोबल तोड़ना है किंतु बिजली कर्मी किसी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे।

उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त कराने के लिए संघर्ष समिति की मांग है कि मार्च 2023 की हड़ताल के बाद ऊर्जा मंत्री द्वारा समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस लिये जाने के निर्देश के अनुपालन में समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं। निजीकरण के नाम पर 55 साल की उम्र और डाउन साइजिंग के नाम पर हटाये गये सभी संविदा कर्मी बहाल किया जाय। उत्पीड़न की दृष्टि से बिजली कर्मियों के किये गये सभी ट्रांसफर निरस्त किये जाय।

फेसियल अटेंडेंस के नाम पर जून और जुलाई माह का रोका गया वेतन तत्काल बिजली कर्मियों को दिया जाय। उत्पीड़न के नाम पर स्टेट विजिलेंस की जांच कराकर शीर्ष पदाधिकारियों के विरुद्ध की गई फर्जी एफ आई आर वापस ली जाए। रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने की दृष्टि से धमकी देकर जोर जबरदस्ती से स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही तत्काल बन्द की जाय।

सभा की अध्यक्षता ईआरबी यादव ने एवं संचालन अंकुर पाण्डेय ने किया। सभा को राजेन्द्र सिंह,  एसके सिंह, पंकज जायसवाल, वेदप्रकाश राय, रविन्द्र यादव, रामकुमार झा, राजेश सिंह, हेमंत श्रीवास्तव, संदीप सिंह, प्रदीप कुमार, पंकज जायसवाल, दीपक गुप्ता, मनोज यादव, मनोज जायसवाल, अनिल कुमार, प्रमोद कुमार, उमेश यादव, पंकज, उदयभान दुबे आदि ने संबोधित किया।

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