जियारत को पहुंचेगी शहर भर की खवातीन, 43 वें साल भी होगी मजलिस
Mohd Rizwan
Varanasi (dil India live). वाराणसी में 11 अगस्त को डॉ नुजहत फातमा और नौशीन फातमा की अगुवाई में 8 वे इमाम अली रज़ा की शहादत पर ग़म मनाने के लिए मजलिस का आयोजन होगा और उसके बाद अंगूरों वाला ताबूत उठाया जाएगा। फरमान हैदर ने बताया कि इसे अंगूरों वाला ताबूत इसलिए कहते हैं कि इमाम रज़ा को जालिमों ने धोखे से अंगूर में ज़हर मिला कर खिलाया था जिसे १२४५ साल पहले उनकी शहादत हुई थी। इमाम का आलीशान रौजा ईरान के मशहद प्रांत में स्थित है। उनकी शहादत की याद में मजलिस का आगाज 1 बजे दिन में मोहतरमा माहे तलत और कनीज फातमा की तिलावत से होगा। इस मौके पर अनाया फातमा अल्लाह के नाम से मजलिस का आगाज़ करेंगी तो सोजख्वानी और मर्सिया तज़ीन फातमा और मेहरीन फातमा करेंगी। मजलिस को खिताब करने के लिए नौगांवां सादात अमरोहा से तंजीम आब्दी नौगांवां सादात (दिल्ली) रौनक अफरोज होंगी।
मजलिस के समापन पर हाय इमाम रज़ा की सदाओं के साथ अंगूरों वाला ताबूत उठाया जाएगा। भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खान की बड़ी बेटी जरीना फातमा जो पिछले ४२ सालों से लगातार नोहा पढ़ रही हैं अपने सहयोगियों के साथ नोहाख्वानी पेश करेंगी। नोहा पेश करने के लिए शिखा फातमा, गुड़िया फातमा, इमरोज़ फातमा भी मौजूद रहेंगी। दर्द भरे नौहो की बोल पर जोरदार मातमों का ख़्वातीन नज़राना पेश करेंगी।इस अवसर पर विशेष रूप से नोहख्वानी करने के लिए अंजुमन अंसारे हुसैनी अवामी बड़ी बाजार दोषीपुरा को आमंत्रित किया गया है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें