25 को रबीउल-अव्वल की पहली तारीख, ईद मिलाद-उन-नबी 5 सितंबर को
Sarfaraz/Rizwan
Lucknow (dil India live). लखनऊ समेत कई शहरों में 29 सफर को चांद का दीदार हो गया। चांद के दीदार संग नबी का पैदाइशी महीना रबीउल अव्वल का आगाज़ हो गया। 25 अगस्त को जहां रबीउल अव्वल की पहली तारीख होगी वहीं ईद मिलादुन्नबी 5 सितंबर को अकीदत के साथ मनाया जाएगा। हालांकि बनारस में चांद देखे जाने की पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी थी।
लखनऊ, इलाहाबाद, बैंगलोर, कर्नाटक, पटना शहर की शिया और सुन्नी चांद कमेटियों ने ऐलान किया है कि इतवार (24 अगस्त 2025), (29 सफर) को रबी-उल-अव्वल का चांद नजर आ गया है। ऐसे में अब रबी-उल-अव्वल की पहली तारीख सोमवार को होगी। चांद की पुष्टि होने के बाद बाजारों में रौनक बढ़ गई और मुस्लिम मुहल्लों में ईद-ए-मिलाद की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
शिया और सुन्नी कमेटियों के इस ऐलान के मुताबिक, इस्लाम धर्म के पवित्र और ऐतिहासिक अवसर मिलाद-उन-नबी (ईद-ए-मिलाद) की तारीख भी तय हो गई है। यह खास दिन अब 5 सितंबर 2025 (जुमा) को मनाया जाएगा। ईद मिलाद-उन-नबी का इस्लाम में खासकर भारत में खास महत्व है।
जानिए क्या है ईद मिलादुन्नबी
ईद मिलाद-उन-नबी, पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की पैदाइश (जन्मदिन) की खुशी का पर्व है। इस पर्व की बहुत अहमियत है। यह दिन मुस्लिम समुदाय के लिए आस्था, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। हर साल इस मौके पर मिलाद, जलसा, नातिया मुशायरा, जुलूस और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
दरअसल इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना रबीउल अव्वल चांद के दीदार संग शुरू हो चुका है। मुसलमानों के लिए यह महीना बेहद खास है, क्यों कि इस महीने में 12 रबीउल अव्वल को पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का अरब की सरजमीं पर जन्म हुआ था। इस महीने को दुनिया भर के मुसलमान अकीदत और मोहब्बत के साथ मनाते हैं। रबीउल अव्वल की 12 वीं तारीख को पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन की तैयारी महीनों पहले से ही शुरू हो गई है। कहां जलसा होगा? कहां अंजुमन का मुकाबला होगा? कौन कौन उलेमा आएंगे? कौन कौन अंजुमन कलाम पढ़ेगी। इसे पहले ही तय कर लिया जाता है। ईद-ए-मिलादुन्नबी या ईद-मिलाद पूरी दुनिया में मुसलमान मनाते हैं।
ईद-मिलाद के मौके पर मस्जिदों और घरों में सजावट की जाती है। जगह-जगह जुलूस निकाले जाते हैं और पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत (जीवन-चरित्र)
पर रौशनी डाली जाती है। इस दिन कुरआन की तिलावत की जाती है और दरूद-ओ-सलाम पेश किया जाता है।
मुसलमान इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। कई जगहों पर खाना खिलाने और मिठाइयाँ बांटने का भी खास इंतजाम किया जाता है। ईद-मिलाद का मकसद सिर्फ जश्न मनाना नहीं है, बल्कि पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीम, इंसाफ, मोहब्बत, रहमत और इंसानियत को याद करना और उस पर अमल करना है। नबी के आने के साथ ही अरब से बुराईयां खत्म होना शुरू हो गई थी। मानवता और इंसानियत की सत्ता कायम हुई थी।
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