सोमवार, 4 अगस्त 2025

BHU: IMS निदेशक ने तथ्यों को छिपाते हुए ली नियुक्ति

IMS निदेशक शंखवार लोकायुक्त जांच के दायरे में

SN Singh

Varanasi (dil India live). इस समय बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी का चिकित्सा विज्ञान संस्थान और सर सुंदर लाल अस्पताल खासा चर्चा में है, यह चर्चा उसकी चिकित्सकीय या अकादमिक उपलब्धि के लिए नहीं हो रही है, बल्कि आपसी गुटबाजी और भ्रष्टाचार के कई बड़े मामलों को लेकर है। सिटी स्कैन और एमआरआई सेंटर की टेंडर प्रक्रिया में फर्जी जीएसटी नंबर के माध्यम टेंडर हासिल करने के चक्कर में आईएमएस बीएचयू व एसएसएल अस्पताल के बड़े अधिकारी न्यायालय के आदेश पर एफआईआर एवं  पुलिसिया जांच के दायरे में हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट का चक्कर लगाने के बाद भी गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगी है, पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का डर सता रहा है। बीएचयू प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति ने भी भ्रष्टाचार के आरोपों को सही पाया और कार्यवाही की संस्तुति की है।

परन्तु आईएमएस के निदेशक डॉ एस एन सँखवार इन मामलो कार्यवाही करने के बजाय दोषियों के मददगार बने हुए हैं, और उन्हें बचा रहे हैं, जिस मामले में निदेशक की भूमिका अंपायर की होनी चाहिए उसमें वे खुद पार्टी बनकर भ्रष्टाचारियों के पक्ष में बैटिंग करते हुए नजर आ रहे हैं। इससे इस मामले में शंखवार की भूमिका संदिग्ध  प्रतीत होती है।

भ्रष्टाचार और विवादों से पुराना नाता

बीएचयू अस्पताल में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर करने वाले शोध छात्र एस.एन. सिंह निदेशक सँखवार के खिलाफ सिलसिलेवार कई मामलों के साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहते हैं कि भ्रष्टाचार और एसएन सँखवार का चोली दामन का संबंध है। केजीएमयू में चिकित्सा अधीक्षक रहते हुए इन्होंने नियुक्तियों में भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है, जिसमें शासन द्वारा जांच में दोषी भी पाए गए हैं, उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त के यहां भी इनके ऊपर जांच लंबित है।लोकायुक्त की जांच लंबित होने के बाद भी इन्हें कैसे आईएमएस बीएचयू के पद पर नियुक्ति दी गई।

शोध छात्र शिवम सोनकर कहते हैं कि केजीएमयू में चिकित्सा अध्यक्ष रहने के दौरान जब एसएन शंखवार ने सुनियोजितभ्रष्टाचार को अंजाम दिया, भ्रष्टाचार के मामले लंबित होते हुए लोकायुक्त की जांच लंबित होते हुए इन्हें आईएमएस में नियुक्ति हेतु विजिलेंस की तरफ से अनापत्ति कैसे प्रदान की गई है। यह एक सवालिया निशान है।

छात्र नेता दिव्यांशु त्रिपाठी कहते हैं कि एसएन शंखवार इस समय भ्रष्टारियों के संरक्षक ही नहीं बल्कि खुद भ्रष्टाचार में शामिल हैं, और बीएचयू अस्पताल में अव्यवस्था के जनक भी हैं।

(लेखक शोध छात्र व स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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