रविवार, 24 अगस्त 2025

Varanasi K Basant College Rajghat में मुशायरा व कवि सम्मेलन

...इसी मिट्टी से आए हैं इसी मिट्टी में जाना है-जम जम रामनगरी

Varanasi (dil India live)। जश्ने आजादी 2025 की श्रृंखला को बरकरार रखते हुए बसंत कॉलेज फॉर वूमंस राजघाट बनारस में बसंत कॉलेज फॉर वूमंस और साहित्यिक व सामाजिक संस्था काशी कला कस्तूरी के संयुक्त तत्वाधान में कॉलेज के भव्य ऑडिटोरियम में जश्ने आजादी मुशायरा वह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। अध्यक्षता प्रोफेसर रिफअत जमाल (पूर्व विभागाध्यक्ष उर्दू महिला महाविद्यालय, बीएचयू और मुख्य अतिथि की हैसियत से प्रोफेसर यूं,पी शाही (पूर्व विभागाध्यक्ष रेडियो थेरेपी बीएचयू ) थे। काशी कला कस्तूरी की संस्थापक अध्यक्ष डॉक्टर शबनम खातून ने निजामत किया। 


मुशायरे का उद्घाटन से पहले अपने संबोधन में बसंत कॉलेज के उर्दू विभाग के प्रमुख डॉक्टर लईक अहमद ने आए हुए मेहमानों के साथ-साथ छात्राओं को शायरी का फन और मुशायरों की तहजीब से जुड़ी बातों को बड़े ही रचनात्मकता के साथ समझाया, तत्पश्चात कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर अलका सिंह ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि आज का दिन मेरे लिए इसलिए भी हर्षो उल्लास का दिन है कि इस कॉलेज में जहां एक तरफ शोबा ए उर्दू है तो दूसरी ओर हिंदी विभाग अपनी सेवाएं भाषा के दृष्टिकोण से अंजाम दे रहा है। किंतु आज पहली बार मेरी छात्राएं शेरो शायरी और हिंदी पद्य साहित्य को शायरों और कवियों की जबान से सुनकर आनंदित होंगी, और उसके लिखने के हुनर को आत्मसात करने का अवसर प्राप्त करेंगी। इस खूबसूरत आयोजन के लिए काशी कला कस्तूरी शोअराए कराम और कवियों के साथ-साथ उर्दू विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर तमन्ना शाहीन और डॉक्टर लईक अहमद को दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करती हूं। और उम्मीद करती हूं कि इस तरह के कार्यक्रम भविष्य में भी बसंत कॉलेज में आयोजित होते रहें।


अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रोफेसर रिफअत जमाल ने कहा कि मुशायरा उर्दू शायरी की सबसे अहम परंपरा है जिसमें शोअरा अपने जज्बातो, एहसासात को बहुत ही अच्छे अंदाज में पेश करते हैं। चुंकि यह जश्ने यौमे आजादी का मुशायरा है, इसलिए यह कहना गलत ना होगा कि हिंदुस्तान की आजादी में हमारे शोअरा और अदबा ने अपने कलम के जरिया उतनी ही कुर्बानी दी है जितना के हमारे मुजाहिदीन आजादी  अग्रणी  भूमिका में थे। मैं उम्मीद करती हूं कि आज का यह मुशायरा वतन परस्ती देशभक्ति से ओत-प्रोत हो और हमारे शोअरा और कवि अपने कलाम के जरिया श्रोताओं को परचमे हिंद के तीनों रंगों में रंग कर सराबोर कर देंगे।

जश्न आजादी के इस मुशायरे को आयोजित करने में जिन लोगों ने अपनी महती भूमिका निभाई उसमें सर्वप्रथम कॉलेज की प्रचार्या प्रोफेसर अलका सिंह, डॉक्टर शबनम, प्रोफेसर विभा जोशी, डॉक्टर मीनू अवस्थी, डॉक्टर तमन्ना शाहीन, डॉक्टर लइक अहमद के नाम प्रमुख है।

शायरों और कवियों द्वारा पढ़ी गई रचनाएं 


 जमजम रामनगरी

यही मिट्टी हमारे पूर्वजों का एक खजाना है 

इसी मिट्टी से आए हैं इसी मिट्टी में जाना है

 कला का केंद्र है काशी यहीं बनती है वो साड़ी

 मुसलमां जिसका ताना और हिंदू जिसका बाना है

 


सुहेल उस्मानी

डूब कर हम नदी से निकलेंगे 

हम भी मुश्किल घड़ी से निकलेंगे 

 डॉक्टर प्रशांत सिंह

गणित वणित के सूत्र सब बिल्कुल है बेकार

 प्रेम में कब होता भला दो-दो मिलकर चार 

 डॉक्टर मंजरी पांडेय

चाह पूरी हो मेरी दुआ ये करो 

जीना मरना वतन पर दुआ ये करो

जीने का चाहे सामां जुटा ना सकें

 कफन तिरंगे का होगा दुआ यह करो 

 अहमद आज़मी

अपने लहू का हर कतरा कुर्बान करें 

अपना जीवन खाके वतन को दान करें

 डॉक्टर शाद मशरिकि

 आईए मुल्क में वह दौर चलाया जाए 

रंजो गम दूर हो नफरत को मिटाया जाए 

 डॉक्टर सुरेश कुमार अकेला

सबके दिल में वतन की मोहब्बत रहे 

सबसे आगे हमारा यह भारत रहे 

 रोशन अहमद रोशन

ए खुदा मेरा भारत सलामत रहे

 गंगा जमुनी मोहब्बत सलामत रहे 

 दानिश इकबाल

देखना भर दूंगा मैं बेकैफ़ वीरानों में रंग 

मुझमें पिन्हां शौक को फनकार देकर छोड़ दो 


मुशायरा एवं कवि सम्मेलन के अंतिम कवि प्रोफेसर यूं पी शाही ने अपनी उत्कृष्ट कविताओं के साथ इस कार्यक्रम का समापन किया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य लोगों की उपस्थिति थी जिसमें समाजसेवी डॉ मुहम्मद आरिफ, मदर हलीमा सेंट्रल स्कूल के निदेशक नोमान हसन खां, समाजसेवी डॉ एहतेशामुल हक, शमीम रियाज़ इत्यादि सहित कॉलेज के टीचर्स सहित सैकड़ों की संख्या में छात्राएं शामिल थीं।

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