बहुत बड़ा है भारतीय ज्ञान परंपरा का कैनवास -प्रो. अनुराग कुमार
Varanasi (dil India live). वसंत कन्या महाविद्यालय में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर 28 से 30 अगस्त 2025 तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह तथा हिन्दी विभाग द्वारा तुलसीदास एवं नंददास जयंती के भी VKM में धूम रही। इस दौरान ‘रामचरित मानसः एक सांस्कृतिक धरोहर भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में एवं अष्टछाप में नंददासः एक अनूठी पहचान’ विषय पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी का शुभारम्भ दीप-प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पण से हुआ। तत्पश्चात् संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो० सीमा वर्मा के निर्देशन में संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा कुलगीत गाया गया। इसके उपरान्त महाविद्यालय की प्राचार्या और हिन्दी विभागाध्यक्ष ने मुख्य अतिथि वक्ता प्रो. अनुराग कुमार (संकायप्रमुख, कला संकाय, आचार्य, हिन्दी विभाग, महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ) एवं प्रो.गोरखनाथ पाण्डेय (अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, यूपी कॉलेज) को उत्तरीय और पौधा देकर सम्मानित किया।

महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि हिन्दी साहित्य इतना समृद्ध औैर सरस है कि प्रत्येक व्यक्ति इस साहित्य के प्रति आकर्षित होता है। इस आयोजन की सराहना करते हुए पुस्तक लेखिका प्रो. आशा यादव एवं डाॅ. शशिकला व राजलक्ष्मी को उनके पुस्तक लोकार्पण पर उन्हें बधाई देते हुए निरंतर इसी प्रकार प्रयत्नशील रहने के लिये प्रेरित किया। इस दौरान संगीत विभाग की अध्यक्ष प्रो. सीमा वर्मा के निर्देशन में संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा तुलसी दास प्रशस्ति गीत-बोल ‘बन राम रसायन की रसिका’ कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध द्वारा रचित तथा कवि नंद दास की रचना ‘कान्ह कुंवर के कर पल्लव पर’ पद का सुंदर गायन किया गया। नंददास का यह सुंदर पद संगीत और साहित्य का सुंदर अंतः संबंध प्रस्तुत करता है संगीत और साहित्य का इतना कर्णप्रिय, सुरम्य मिलन इससें पहले कभी सुनने को न मिला जिसका श्रेय प्रो.सीमा वर्मा को जाता है। जिसमें संगीत विभाग की वैष्णवी पाण्डेय, वैदेही नीमगांवकर, संजना गुप्ता, जयंतिका दे, अनुषा चक्रवर्ती, आस्था मौर्या व दृष्टि मुखर्जी आदि छात्राओं ने सहभागिता की। तबले पर संगत सौम्यकान्त मुखर्जी ने की।
इस अवसर पर हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो. आशा यादव द्वारा लिखित पुस्तक ‘रामचरितमानसः इतिहास संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परम्परा’ तथा डॉ.शशिकला और राजलक्ष्मी द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘हिन्दी कथा साहित्य में मध्यवर्गीय स्त्रियांँ दशा एवं दिशा’ का मुख्य अतिथि एवं प्राचार्या के कर कमलो से लोकार्पण किया गया। लेखकीय वक्तव्य देते हुए प्रो. आशा यादव ने कहा कि रामचरितमानस जो उत्कृष्ट आदर्श, नैतिक मूल्यो, सामाजिक संस्कृति को उद्घाटित करता है। प्रलोभनो का त्याग करते हुए कत्र्तव्यनिष्ठा और मानवीय मूल्यों को अपनाने का संदेश देती है। वर्तमान परिदृश्य में टूटते हुए जीवन मूल्यों को देखते हुए फिर से भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर लौटने की आवश्यकता है। इस पुस्तक के माध्यम से भक्ति के परिप्रेक्ष्य में यही प्रयास किया गया है।
आज की संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो०अनुराग कुमार ने नंददास पर अपने सारगर्भित वक्तव्य में कहा कि मनुष्यता के मूल्यो का निरंतर क्षरण हो रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा का कैनवास बहुत बड़ा है। संवाद और शास्त्रार्थ दो शैलियो में भारतीय ज्ञान परंपरा के कवि सबको अवसर प्रदान करते है। हवेली संगीत में नंददास और तुलसीदास के पदों को गाये जाने की परंपरा प्रारंभ से ही रही। अष्टछाप के कवियों की स्थिरता केवल भक्ति में लीन होना नही अपितु उसकी उपयोगिता को प्रचारित करना भी है। अष्टछाप के कवियों के पदों का संगीत साहित्य-सृजन का मार्ग प्रशस्त करता है। तदुपरांत मुख्य वक्ता प्रो.गोरखनाथ पाण्डेय ने तुलसीदास पर अपना महत्वपूर्ण वक्तव्य देते हुए कहा कि रामचरितमानस को हम भक्ति और आध्यात्म की आवरण में देखते है। जिसकी संस्कृति मानवीय चेतना को पुष्ठ करती है। हिन्दी प्रदेश में मीरा, सूर, तुलसीदास, नंददास, सुंदरदास आदि कवियों की भक्ति का स्वरूप राष्ट्रीय है जो पूरे हिन्दुस्तान की चेतना का मंथन करता है। रामचरितमानस भारतीय संस्कृति सभ्यता का एक ऐसा धरोहर है जिसे भारतीय समाज से पृथक नही किया जा सकता। दिनांक 28 अगस्त 2025 को डॉ. प्रीति विश्वकर्मा एवं राजलक्ष्मी के निर्देशन में आयोजित तुलसीदास एवं नंददास पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तीन विजेता समूह को पुरस्कार वितरित किया गया स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा तनु मिश्रा ने नंददास एवं परास्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा अनन्या सृष्टि ने तुलसीदास का अत्यंत संक्षिप्त एवं सुंदर जीवन परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सुंदर व सुगठित संचालन डॉ. प्रीति विश्वकर्मा के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजिका सहअध्यापिका डा.शशिकला ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर गाजीपुर गल्र्स पी.जी. काॅलेज से पूर्व प्राचार्या डाॅ0 सविता भारद्वाज, प्रो. मीनू पाठक, डाॅ0 नैरंजना श्रीवास्तव हिन्दी विभाग से सहअध्यापिका डॉ.सपना भूषण ,डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव एवं सुश्री राजलक्ष्मी सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण एवं छात्राओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

खेल बौद्धिक विकास में सहायक
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने छात्राओं को खेलकूद गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल शारीरिक तंदुरुस्ती ही नहीं बल्कि बौद्धिक विकास में भी सहायक होते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नियमित रूप से खेलों में भागीदारी आत्म-अनुशासन को विकसित करती है और विद्यार्थियों को तनाव तथा चिंता से मुक्त करती है। कार्यक्रम के पहले दिन (28 अगस्त) पोस्टर मेकिंग, क्विज और निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिनका मुख्य विषय मेजर ध्यानचंद रहा।

छात्राओं ने उत्साहपूर्वक बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया और अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। दूसरे दिन (29 अगस्त) महाविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार विभिन्न शारीरिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत खेल शपथ से हुई। इसके अंतर्गत 50 मीटर दौड़, रस्साकशी, स्किपिंग रोप और नींबू दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। 100 से अधिक छात्राओं ने इन खेलों में भाग लेकर उत्साह और खेल भावना का परिचय दिया, जिससे पूरा आयोजन जीवंत और ऊर्जा से भरपूर रहा। यह राष्ट्रीय खेल दिवस डॉ. विजय कुमार (इंचार्ज, खेल समिति) के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। साथ ही खेल समिति के अन्य सदस्य डॉ. आशीष, डॉ. मनोज, डॉ. अखिलेश, डॉ आर पी सोनकर, डॉ. शशिकेश, डॉ. पूर्णिमा, डॉ. सुप्रिया, डॉ. दीक्षा तथा डॉ. सिमरन सेठ ने भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।