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शनिवार, 12 सितंबर 2026

Kavita Kalam: Allama Iqbal की वैचारिक परंपरा के Shayar थे Suleman Aasif

शायरी में दिखती है दार्शनिक चिंतन, मानवीय भावनाएं व सामाजिक सांस्कृतिक चेतना 

cultural News Varanasi Uttar Pradesh 12 September 2026
मशहूर शायर मरहूम सुलेमान आसिफ 


  • @dil india live 

डॉ. बख्तियार नवाज़

(Varanasi). वाराणसी। विश्वप्रसिद्ध शायर और विद्वान सुलेमान आसिफ जैसी शख़्सियत पर क़लम उठाना इस ख़ाकसार के बस की बात नहीं। लेकिन मजबूरी यह है कि सुलेमान आसिफ अपने जीवनकाल में मुझ जैसे अदना शायर को हमेशा अपनी दुआओं, मोहब्बत और हौसला-अफ़ज़ाई के घेरे में रखते थे।

मदर हलीमा सेंटर स्कूल के ख़ूबसूरत और विशाल हॉल में जब भी साहित्यिक बैठकें या मुशायरे आयोजित हुआ करते थे, तो सुलेमान आसिफ न केवल इस ख़ाकसार को आमंत्रित करते थे, बल्कि फ़ोन के माध्यम से शामिल होने के लिए बाक़ायदा आदेश भी दिया करते थे। आसिफ साहब का यह प्यार, ख़ुलूस और मोहब्बत हमेशा मेरे दिल की यादों में सुरक्षित रहेगी।

उनके इस दुनिया से विदा होने के बाद उनके आज्ञाकारी पुत्र नुमान हसन ख़ाँ, इमरान हसन ख़ाँ और इरफ़ान हसन ख़ाँ ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए हर साहित्यिक कार्यक्रम में उन्हें याद करने की परंपरा को कायम रखा है।


साहित्यिक दृष्टिकोण और शायरी

सुलेमान आसिफ की शायरी उनकी उच्च विचारधारा, गहरी दृष्टि और व्यापक अध्ययन की दर्पण थी। उनके अशआर में केवल शब्दों की सुंदरता ही नहीं, बल्कि एक विशेष वैचारिक गहराई भी महसूस होती थी।

उनकी शायरी में दार्शनिक चिंतन, मानवीय भावनाएँ, सामाजिक समस्याएँ, सांस्कृतिक चेतना और जीवन के विभिन्न रंग स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उनकी रचनाओं में अल्लामा इक़बाल की वैचारिक परंपरा की झलक भी महसूस होती है। इसी संदर्भ में साहित्यिक हलकों में उन्हें ‘सानी-ए-इक़बालियात’ के रूप में भी याद किया जाता था।

व्यक्तित्व और गंगा-जमुनी तहज़ीब

सुलेमान आसिफ को गंगा-जमुनी तहज़ीब का सूत्रधार कहना अनुचित न होगा। उनकी सोच में भारत की साझा सांस्कृतिक परंपराएं, आपसी प्रेम, भाईचारा, सहिष्णुता और मानवता के तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देते थे। वे साहित्य को केवल मनोरंजन या अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं मानते थे, बल्कि उसे समाज को जोड़ने और इंसान को इंसान के करीब लाने का एक प्रभावी साधन समझते थे।


पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के साथ सुलेमान आसिफ 

मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना बातिन व मैत्री भवन के पूर्व निदेशक फादर चंद्रकांत के साथ सुलेमान आसिफ 


साहित्यिक विरासत

सुलेमान आसिफ साहब 14 पुस्तकों के रचनाकार हैं, जबकि कुछ और पुस्तकें प्रकाशन की तैयारी में थीं। उनका यह साहित्यिक भंडार आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण विरासत है। अंत में यही कहूंगा कि सुलेमान आसिफ एक नाम नहीं, एक युग थे; केवल एक शायर नहीं, बल्कि एक चिंतनशील व्यक्तित्व थे; और केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि प्रेम, साहित्य और सांस्कृतिक सहिष्णुता की एक ख़ूबसूरत परंपरा थे।


(मशहूर शायर मरहूम सुलेमान आसिफ की 22 सितंबर को यौमे पैदाइश है। यह लेख डॉ. बख्तियार नवाज द्वारा लिखित श्रद्धांजलि है, जिसे Mother Halima Center School परिवार की साहित्यिक परंपरा को समर्पित किया गया है।)