कोई हम को दबा नहीं सकता, हम बहादुर शहीद वाले हैं...
हज़रत बहादुर शहीद के उर्स पर उमड़ा जनसैलाब
dil India live (Varanasi). मुश्किलों में सदा संभाले हैं शहरे काशी में ये निराले हैं, कोई हमको दबा नहीं सकता, हम बहादुर शहीद वाले हैं...।
यह कलाम जब मशहूर शायर अहमद आज़मी ने वाराणसी में छावनी स्थित सद्भावना पार्क में तशरीफ़ फ़रमा हजरत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह के उर्स में पेश किया तो मजमा मचल उठा, लोगों ने नारे तकबीर अल्लाह हो अकबर.. की सदाएं बुलंद कर उठें।
कौमी एकता की मिसाल, हज़रत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स मुबारक देर रात गुस्ल शरीफ के साथ शुरू हुआ। गुस्ल से पहले बाबा के सद्भावना पार्क में जश्ने ईद मिलाद-उन-नबी का जलसा हुआ जिसमें सभी मज़हब के लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। बरसात के बावजूद लोगों के हौसले बुलंद थे। इस दौरान अहमद आज़मी का एक और कलाम लोगों की जुबान पर राज करता दिखा।
क्या बयां करे कोई मर्तबा मदीने का, अर्श पे भी होता है तज़किरा मदीने का...। इसे लोग गुनगुनाते नज़र आएं। इस दौरान निज़ाम बनारसी ने भी कई उम्दा कलाम पेश किया।
उर्स में 1 सितंबर 2026, बरोज़ मंगलवार जश्न ईद मिलादुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और रात 2:30 बजे कुल शरीफ व सुबह लंगर का प्रोग्राम हुआ। गद्दीनशीन बड़े सगीरउल्लाह खान व समीउल्लाह खान की अगुवाई में जलसे में मौलाना शम्सुद्दीन साहब रज़वी और मौलाना अब्दुल कय्यूम आदि ने नूरानी तकरीर किया। नकीबुल हिंद कारी वसीम अकरम की निजामत और हफीज़ अहमद आजमी, निज़ाम बनारसी जैसे शायरों ने अपने कलाम से हज़रत बहादुर शहीद को खिराजे अकीदत पेश किया।
गुस्ल का पानी जायरीन में हुआ तकसीम
जलसे के साथ ही हज़रत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह का मध्यरात्रि गुस्ल हुआ। इस मौके पर गुस्ल का पानी सभी जायरीन में तकसीम किया गया। इसे लेने के लिए लोग दूर दराज़ से बाबा के दर पर जुटे हुए थे। माना जाता है कि गुस्ल के पानी से तमाम लोगों को अचूक फायदा होता है। इस मौके पर उलेमा ने औलिया कराम की ज़िंदगी और उनकी रहनुमाई की चर्चा की। उलेमा ने कहा कि नबी और सहाबा के मिशन को औलिया-ए-कराम ने आगे बढ़ाया। हज़रत बहादुर शहीद के रास्ते पर मौजूद लोगों से चलने की वकालत की।
उर्स के दूसरे रोज़ बुधवार की शाम चादर गागर का जुलूस बाबू भाई के दौलतखाने से निकला जो मगरिब की नमाज़ के बाद बाबा के दर पर पहुंचा, जहां बाबा की चादरपोशी की गई व देर रात महफिले समां का आयोजन हुआ।
अकीदत का मरकज़ हज़रत बहादुर शहीद का दर
हज़रत बहादुर शहीद का दर लोगों की बिगड़ी बनाने के लिए मशहूर है। जो परेशानहाल हैं या फिर भूत प्रेत ने जिन्हें घेर रखा है, या जिसे औलाद नहीं हो रही है ऐसे लोग बाबा के आस्ताने पर दस्तक देते हैं और यहां से सुकुन पाकर, अपनी झोली भर कर वापस लौटते हैं। गद्दीनशीं मो. सग़ीरुल्लाह खां दावा करते हैं कि यह आस्ताना मिल्लत का मरकज़ है। यहां सभी मज़हब के लोग बिना किसी भेदभाव के हाजिरी लगाने उमड़ते हैं। वो दिखाते हैं कि ये देखिये भूतों से छुटकारा पाने के लिए झूमती औरतें, पुरुष और बुजुर्ग दिन भर यहां आते हैं और बाबा के फैज़ से ठीक हो कर यहां से जाते हैं। यहां आने वालों का भरोसा बाबा में है जो उन्हें इस आधुनिक युग में भी जिसमें साइंस भूत-प्रेत जैसी बातों को नहीं मानता, फिर भी तमाम लोग हज़ारों की संख्या में यहां से फ़ैज़ उठाने आते हैं।
पूर्वांचल के साथ ही बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मुंबई तक से लोग यहां अपनी परेशानी दूर करने पहुंचते है। बाबा के उर्स में मेला लगा हुआ था। आम दिनों में भी यहां काफी भीड़ होती है। हर जुमेरात व नवचंदी जुमेरात को भूत, प्रेत से छुटकारे के लिए जायरीन आते हैं। लोगों का दावा है कि शैतान (भूत) कितना भी शक्तिशाली हो बाबा के गुस्ल का पानी पड़ते ही वो पनाह मांगता है। इस दर पर सभी का मज़हब एक है वो है मानवता।







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