मातृभाषा डोगरी फिर भी मुझे उर्दू भाषा से बेहद प्रेम- प्रो. चमन लाल
उर्दू वालों ने मनाया उत्साहपूर्वक हिंदी दिवस
भाषा एवं साहित्य में उल्लेखनीय योगदान देने वालों का हुआ सम्मान
@dil india live
New Delhi (नई दिल्ली)। हिंदी दिवस के अवसर पर ग़ालिब इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली में देश के विभिन्न राज्यों में शैक्षणिक कार्य, भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों, प्रवक्ताओं एवं आचार्यों के सम्मान में राष्ट्रीय पुरस्कार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर जियाउर रहमान सिद्दीकी (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) ने सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के पुरस्कार शिक्षकों में अपने कार्य को और बेहतर ढंग से करने की प्रेरणा एवं शक्ति प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि भाषाएं हमें आपस में जोड़ना सिखाती हैं। भाषाएं नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत का संदेश देती हैं। इसलिए देश की तमाम भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। भारत की भाषाई विविधता हमारी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत है।
अवार्ड से नवाजे गए शिक्षाविद
समारोह में मुख्य अतिथि प्रोफेसर जियाउर रहमान सिद्दीकी व विशिष्ट अतिथि डॉ. शमा परवीन, (DIET हापुड़) को भाषाई एवं शैक्षणिक योगदान के लिए ‘नेशनल उर्दू अवॉर्ड’ प्रदान किया गया तो वहीं दूसरी ओर ‘नेशनल लैंग्वेज अवॉर्ड’ डॉ. अज़हर सईद, (प्रवक्ता, DIET चंदौली) को देकर सम्मानित किया गया। ऐसे ही प्रोफेसर जितेंद्र परवाज़ (पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला) तथा प्रोफेसर चमन लाल (जम्मू विश्वविद्यालय) को ‘नेशनल उर्दू रत्न अवॉर्ड’ से नवाजा गया। इसके अलावा देश भर के शिक्षकों को सम्मानित किया गया जिसमें डॉ. आयशा सिद्दिका (हैदराबाद), क़दीर बीबी ((आंध्र प्रदेश), हसन साहब (कर्नाटक), देवदास कोणदेव (महाराष्ट्र), शेख हमीद कुरैशी (छत्तीसगढ़), आफ़ताब ज़िया (मुंबई), मो. वसी-उल-हक अंसारी (बिहार), डॉ. शाह फैसल (जम्मू-कश्मीर) तथा डॉ. शाहिद खान (फतेहपुर) उत्तर प्रदेश सहित महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों के शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
आयोजन में विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर चमन लाल ने कहा कि उनकी मातृभाषा डोगरी है, लेकिन उन्हें उर्दू भाषा से बेहद प्रेम है। उन्होंने अब तक उर्दू भाषा में 18 पीएच.डी. और 16 एम.फिल. शोधार्थियों का शोध-निर्देशन किया है।
इस अवसर पर डॉ. अज़हर सईद ने कहा कि उर्दू भाषा से प्रेम करने वाले लोग अपनी सारी जिम्मेदारी केवल सरकारों पर डालकर चैन से नहीं बैठ सकते। उन्होंने कहा कि “सिर्फ इतना कह देने से कि उर्दू भाषा बहुत मीठी है, काम नहीं चलेगा, बल्कि उसकी मिठास को दूसरों तक पहुंचाना भी होगा।” आयोजन में प्रोफेसर जितेंद्र परवाज़ ने अपनी ग़ज़लों एवं रचनाओं की प्रस्तुति से समां बांध दिया।
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