सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

RSS के शताब्दी वर्ष पर DAV में 2 दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

वर्षगांठ नहीं, आत्मावलोकन करता है आरएसएस-जे. नंद कुमार




dil india live (Varanasi). राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ही एक ऐसा संगठन है जो अपनी वर्षगांठ नही मनाता बल्कि आत्मावलोकन करता है की जो लक्ष्य निर्धारित था, वह प्राप्त हुआ कि नहीं। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित पंच परिवर्तन एवं भविष्य का भारत विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन समारोह में सोमवार को प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय समन्वयक जे. नन्द कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। ICSSR नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित संगोष्ठी में नन्द कुमार ने कहा कि यह शताब्दी सिर्फ एक संगठन का सौ वर्ष नही है बल्कि यह भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। यह नवोत्थान का क्षण है, यह प्रतिमान परिवर्तन का क्षण है। 


हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नही

जे. नन्द कुमार ने यह भी कहा की भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नही है, यह पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है और आगे भी हिन्दू राष्ट्र ही रहेगा। 

           अध्यक्षता करते हुए साउथ एशिया विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रो.के.के. अग्रवाल ने कहा कि पंच परिवर्तन सिर्फ एक शब्द नही है बल्कि संघ के सिद्धांतों को समेकित करने का मूलमंत्र है। यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो संघ के विचारों को आत्मसात करना ही होगा। पंच परिवर्तन का सिद्धांत नया नही है, बस इसे ठीक ढंग से बताया नही गया। यह हमारी सोच को संकुचित नही बल्कि वैश्विक बनाता है। विशिष्ट वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय समिति के सदस्य रामाशीष जी ने कहा कि कुंठित मन, संकुचित हृदय और बंधा हुआ हाथ राष्ट्र का निर्माण नही कर सकते ।भारतीय युवा राम से प्रेरणा लेकर समभाव वाले बने। अतिथियों ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया। इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्रबंधक अजीत सिंह यादव ने स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्प गुच्छ प्रदान कर किया। स्वागत भाषण डॉ. पारुल जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यवाहक प्राचार्य प्रो.मिश्रीलाल ने दिया। संयोजन डॉ. शान्तनु सौरभ एवं सह संयोजन डॉ. सिद्धार्थ सिंह एवं संचालन डॉ. रमेन्द्र सिंह ने किया। उप प्राचार्य द्वय प्रो.संगीता जैन एवं प्रो. राहुल भी उपस्थित रहे।

24 से अधिक विद्वानों ने रखे विचार

संगोष्ठी में पहले दिन विभिन्न सत्रों में 24 से अधिक विद्वानों ने विचार रखें। इनमें पूर्व कुलपति प्रो.अजय कुमार सिंह, प्रो.एचके सिंह, प्रो.टीपी सिंह, पूर्व कुलपति प्रो.राजाराम यादव, प्रो. एसके दुबे, प्रो.पीएन सिंह, अजय कुमार, डॉ. अनिल सिंह, प्रो. जयशंकर पाण्डेय सहित अन्य वक्ता शामिल रहे। इसके अलावा पहले दिन 8 सत्रों में 100 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किये गए। देश के सभी राज्यो से शोधपत्र प्रस्तुत हुए।


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