सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

Ramzan की आहट से ही बदलने लगी मोमिनों के चेहरे की रंगत

चेहरों पर रमज़ान की खुशी मस्जिदों-घरों में तैयारियां हुई तेज 

18 को दिखा चांद तो 19 को पहला रोज़ा





सरफराज अहमद 

dil india live (Varanasi). Ramzan की आहट से ही Allah के नेक बंदों के चेहरे की रंगत बदलने लगी है। उन्हें इंतजार है तरावीह, सहरी का, रोजा रखने की उनमें बेताबी है और उन्हें इफ्तार का इंतजार है। यही वजह है कि मस्जिदों-घरों में रमज़ान की तैयारियां तेज हो चली है।

दरअसल रमज़ान को अब गिनती के दिन रह गए हैं। मौलाना हसीन अहमद हबीबी बताते हैं कि 18 फरवरी 29 शाबान है। अगर 29 वीं का चांद दिख जाता है तो मस्जिदों में नमाजे तरावीह शुरू हो जाएगी अल्लाह के नेक बंदे सहरी करके 19 को पहला रोज़ा रखेंगे। अगर चांद का दीदार नहीं हुआ तो 19 फरवरी को शाबान की 30 वीं का चांद देखकर तरावीह शुरू होगी और 20 रमज़ान को मोमिन पहला रोज़ा रखेंगे।

मदरसा हाफ़िज़ जुम्मन साहब के प्रिंसिपल हाफ़िज़ नसीम अहमद बशीरी बताते हैं कि तरावीह की नमाज सबसे पहले तीन दिन में मुकम्मल होती है। जबकि हर रोजेदारों को चांद देखकर तरावीह शुरू और ईद का चांद देखकर तरावीह खत्म करने का हुक्म है। इसलिए अगर किसी ने तीन दिन, पांच दिन या जितने भी दिन की तरावीह पढ़ी है उसे पूरे रमज़ान तरावीह के मुकम्मल होने के बाद सुरे तरावीह पढ़ना सुन्नत है। मौलाना अजहरुल कादरी कहते हैं जो तीन दिन में तरावीह मुकम्मल करते हैं वो यह न सोचें की बरी हो गये बल्कि उसे सुरे तरावीह पूरे रमज़ान पढ़ना है। उधर मस्जिदों में तरावीह की जहां तैयारियां चल रही है वहीं दूसरी ओर रमज़ान का टाइम टेबल बांटा जा रहा है। लोग दुकानों पर इफ्तार व सहरी के सामान की खरीदारी में जुटे हुए हैं।

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