रहमत का दस रोज़ा पूरा होते ही शुरू होगा मगफिरत का अशरा
dil india live (Varanasi)। मुकद्दस रमज़ान केवल कोई पर्व या त्योहार का महज नाम ही नहीं है बल्कि रमज़ान नाम है उस इस्लामिक सिस्टम और सिद्धांत का जिस पर अमल करके एक रोजेदार अपनी जिंदगी संवारता है। यही वजह है कि रमज़ान को दस दस दिन के तीन हिस्सों में बांटा गया है। जिसे अशरा कहते हैं।
पहला अशरा रहमत का, दूसरा आशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है। "अशरा" दस दिन को कहते हैं। कहा जाता है कि रहमत के पहले दस दिन रोज़ादारों पर रब अपनी रहमत बरसाता है। फिर दस दिन मगफिरत का होता है जिसमें अल्लाह रोज़ेदारों की गुनाह माफ कर देता है यानी मगफिरत फरमाता है। इसके बाद रमज़ान के आखिरी अशरे में अल्लाह रोज़ेदारों को जहन्नुम से आज़ाद कर देता है।जो रमजान का पूरा रोजा रखेगा, तीसो दिन रोजा रखने में कामयाब रहेगा। उसे जहन्नम की आग नहीं खा पाएगी और उसे जन्नत में दाखिल किया जाएगा। रोजेदारों के लिए जन्नत में एक खास दरवाजा बाबे रययान होगा, जिसमें से केवल रोजेदार ही जन्नत में दाखिल होंगे। रमजान के तीन अशरो को जिसने भी कामयाबी से पूरा किया, जैसा कि रब चाहता है तो वो रोज़ेदार जन्नत का हकदार होगा। रब उसे जहन्नुम से आजाद कर देगा।
कल शुरू होगा मगफिरत का अशरा
मुक़द्दस रमज़ान का नौ रोज़ा आज मुकम्मल हो गया। कल रमज़ान की रहमत का अशरा पूरा हो जाएगा। रमजान का रहमत का सफर पूरा होने के साथ ही इस माहे मुबारक का दूसरा अशरा मगफिरत शनिवार को शुरू हो जाएगा।
एस.एम खुर्शीद
(सदर इस्लामिक फाउंडेशन आफ इंडिया)



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