रमज़ान का पहला अशरा "रहमत" का मुकम्मल, मगफिरत का अशरा शुरू
dil india live (Varanasi). मुक़द्दस रमज़ान का पहला अशरा "रहमत" का शनिवार को मुकम्मल हो गया। रहमत का अशरा पूरा होते ही रमज़ान का दूसरा मगफिरत का अशरा शुरू हो गया। पहले अशरे में रब बंदों पर रहमतें नाजिल फ़रमाता है। तो दूसरे अशरे में अल्लाह अपने नेक बंदों की गुनाहों को माफ कर देता है। तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नम से आजादी का 21 रमज़ान से शुरू होगा। आखिरी अशरे में अल्लाह अपने नेक बंदों को जहन्नुम से आजाद कर देता है।
जो लोग रमज़ान के तीनों अशरे में कामयाबी से रोज़ा रखते हैं रब उन्हें जन्नत में आला मुकाम देता है। रोजेदारों के लिए जन्नत सजाया जाता है। जन्नत का एक खास दरवाजा बाबे रययान है उलेमा फ़रमाते हैं कि उस दरवाजे से केवल रोजेदारों को जन्नत में दाखिल किया जाएगा।
मुस्लिम रोजों के साथ ही साथ ईसाई रोज़ा जिसे चालीसा या यहां उपवास काल कहा जाता है अपने रफ्तार पर है। शनिवार को महा उपवास काल के भी दस रोज़े पूरे कर लिए गए। सेंट मैरीज महागिरजा, तेलियाबाग सीएनआई चर्च, लाल गिरजाघर, सेंट पॉल चर्च, सिगरा, सेंट थॉमस चर्च गौदोलिया, राम कटोरा चर्च, ईसीआई चर्च सुंदरपुर आदि से जुड़े मसीही समुदाय ने अपना दसवां उपवास पूरा किया। इस दौरान प्रार्थना सभा और मसीही गीत गाए गयें।



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