गुरुवार, 25 जून 2026

8 mahe muharram: ख्वाजा नब्बू के इमामबाड़े से निकला कदीमी आठवीं मोहर्रम का तुर्बत व अलम का जुलूस

नगीने व रांगे की ताजिया की जियारत को उमड़े जायरीन 

...अर्शे बरी हिल गया गिरने से अलम के

आंसुओं का नज़राना सुन उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की याद हुई ताज़ा


Mohd Rizwan 

dil India live (Varanasi). चाहमाहमा स्थित ख्वाजा नब्बू के इमामबाड़े से कदीमी आठवीं मोहर्रम का तुर्बत व अलम का जुलूस अपनी पुरानी परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम संयोजक सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के ज़ेरे एहतमाम उठाया गया। जुलूस उठने से पूर्व मजलिस को खिताब करते हुए अब्बास मूर्तज़ा शम्सी ने मौला अब्बास की शहादत बयान की।

जुलूस उठने पर लियाकत अली खां व उनके साथियों ने सवारी शुरू की- "जब हाथ कलम हो गए सक्काए हरम के, और अर्शे बरी हिल गया गिरने से अलम के" जुलूस चाहमामा होते हुए दालमंडी स्थित हकीम साहब के अज़ाख़ाने पर पहुंचा जहां से अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाख्वानी शुरू की "अब्बास क्या तराई में सोते हो चैन से" जिसमें शराफत हुसैन, लियाकत अली खां, साहब ज़ैदी, शफाअत हुसैन शोफी, मज़ाहिर हुसैन, राजा व शानू ने नौहाख्वानी की। जुलूस दालमंडी, खजुर वाली मस्जिद, नई सड़क, फाटक शेख सलीम, काली महल, पितरकुंड, मुस्लिम स्कुल होते हुए लल्लापूरा स्थित फ़ातमान के लिए देर रात रवाना हुआ।


पूरे रास्ते उस्ताद फतेह अली खां व उनके साथियों ने शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश किया। फ़ातमान से जुलूस पुनः वापस मुस्लिम स्कुल, लाहंगपूरा, रांगे की ताज़िया, औरंगाबाद, नई सड़क कपड़ा मार्केट, कोदई चौकी, सर्राफा बाजार, टेढ़ी नीम, बांस फाटक, कोतवालपूरा, कुंजीगरटोला, चौक, दालमंडी, चाहमामा होते हुए इमामबाड़े में समाप्त होगा।




ताज़िए की जियारत को उमड़े जायरीन  
पठानी टोला की फैमस हाजी उमर की नगीने की ताजिया व लल्लापुरा की रांगे की विश्व प्रसिद्ध ताजिया समेत दर्जन भर ताजिया आठवीं मोहर्रम को इमाम चौक पर बैठा दी गई। ताज़िए की जियारत को जायरीन उमड़े हुए थे।

अर्दली बाजार से निकला दुलदुल-अलम का जुलूस 

सैय्यद जियारत हुसैन के अंर्दली बाजार तार गली स्थित इमामबारगाह से 8 वीं मोहर्रम को दुलदुल अंलम, ताबूत का जुलूस बुधवार को निकला। संयोजक इरशाद हुसैन "शद्दू" के अनुसार जुलूस अपने कदीमी (पुराने) रास्ते से होकर उल्फत बीबी हाता स्थित स्व. मास्टर जहीर के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। जुलूस में अंजुमन इमामिया नौहा व मातम करती चल‌ रही थी। जुलूस में इरशाद हुसैन सद्दू, जफर अब्बास, दिलशाद, जीशान, फिरोज, अलमदार हुसैन, अयान, अमान, शाद, अर्सलान, दिलकश, मीसम आदि मौजूद थे।

आठवीं मोहर्रम को घर-घर हुई हाजिरी कि नज़र 

आठ मोहर्रम 1447 हिजरी को देश दुनिया के साथ शहर बनारस में भी हुसैनी लश्कर के अलमदार व सारी दुनिया में वफ़ा की पहचान हजरत अब्बास की याद में मजलिस का आयोजन हुआ। शहर में सैकड़ों मजलिस आयोजित की गई।काली महल और माताकुंड में मजलिस को खिताब करते हुए शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सलमान हैदर ने कहा इमाम हसन के भाई मौला अली के बेटे और लश्कर हुसैनी के अलमदार जिनकी वफा का जिक्र आज तक सारी दुनिया में होता है और उनके नाम के साथ जुड़ गया है अब्बास बा वफा उनकी याद में शहर भर में मजलिस हुई और घर-घर हाजिरी की नज़र भी दिलाई गई। लोगों ने, एक नारा खास है अब्बास है अब्बास है, और नौहा मातम के जरिए लोगों ने खिराज अकीदत पेश किया। 

शहर के अर्दली बाजार, पठानी टोला, रामनगर, शिवाला, गौरीगंज, दालमंडी आदि में कई सारे जुलूस उठाए गए। जिसमें शहर के 28 अंजुमन ने अपने-अपने तरीके से नौहा मातम किया व शहनाई पर भी इमाम हुसैन के गम के नौहे सुन कर खिराज अकीकत पेश की गई। कुछ जुलूस दरगाह फातमान और सदर इमामबाड़ा पहुंचे वहीं कुछ जुलूस हसन बाग टेंगरा मोड़। कुछ जुलूस कुमहार के इमामबाड़े और कुछ जुलूस शिवाले घाट जाकर ठंडे हुए। बताया कि कल शहर भर में इमाम चौक पर ताजिया रख दिया जाएगा कई जगह मजलिस होगी कई जगह गश्ती आलम उठाया जाएगा। देश दुनिया के साथ हमारे शहर बनारस में भी या हुसैन की सदा गूंजती रहेगी।

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